अभिमत
कंट्रोल महानुभाव! कंट्रोल!...2022 की ख़ातिर ही सही

रेखा पंकज

निसार उन के जाएँ जो सच जाने उस को
फसाना हमारा, जबानी तुम्हारी
यह शेर नसीम देहलवी जी ने कहा है और यहां इस का जिक्र कुछ भी बोल देने की आदत से लाचार उन महानुभावों के लिए है जो बयानबाजी करते वक्त भूल जाते है कि फ़सानों के पांव नहीं होते वे हवा की माफिक फिजां में तैरते है. किसी वायरस की माफ़िक लोगों के जे़हन में धर कर जाते है. कहना तो आप कुछ चाहते है और कह कुछ जाते है. यानी जनमा के मनोभावों को अपनी आवाज देने के फेर में विवाद का मौजूं खड़ा कर देते है. अब कभी-कभी तो ये आपके हित में हो जाता है लेकिन अक्सर आपका अहित कर जाता है. जैसे हाल में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव का वैक्सीन को लेकर दिये गये बयान को ही ले लें.
केरोना टीके पर सि



खुलने लगे स्कूल, हो न जाये भूल

प्रियंका सौरभ

1 जनवरी से केरल, कर्नाटक और असम के स्‍कूलों को दोबारा से खोला गया है. बिहार सरकार के आदेशानुसार 4 जनवरी 2021 से राज्य भर के सभी सरकारी स्कूलों और कोचिंग सेंटरों को खोल दिया जाएगा. महाराष्ट्र में 9वीं से 12 वीं कक्षा के छात्रों के लिए 4 जनवरी से स्‍कूलों को खोला जाएगा. इनमें कोविड-19 दिशानिर्देशों का सख्‍ती से पालन होगा. इससे पहले उत्तर प्रदेश, पंजाब, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, झारखंड और सिक्किम में पहले से ही स्कूल आंशिक रूप से खुल चुके हैं. हालाँकि कुछ राज्यों ने अभी स्कूल नहीं खोलने का फैसला लिया है, राष्‍ट्रीय राजधानी दिल्ली की सरकार का कहना है कि जब तक कोविड-19 वैक्‍सीन नहीं आ जाता तब तक स्कूल खोलना सही नहीं है. मुंबई म



बंगाल चुनाव देश की राजनीति की दिशा तय करेगा

डाँ नीलम महेंद्र

बंगाल एक बार फिर चर्चा में है. गुरुदेव रबिन्द्रनाथ टैगोर, स्वामी विवेकानंद, सुभाष चंद्र बोस, औरोबिंदो घोष, बंकिमचन्द्र चैटर्जी जैसी महान विभूतियों के जीवन चरित्र की विरासत को अपनी भूमि में समेटे यह धरती आज अपनी सांस्कृतिक धरोहर नहीं बल्कि अपनी हिंसक राजनीति के कारण चर्चा में है.

वैसे तो ममता बनर्जी के बंगाल की मुख्यमंत्री के रूप में दोनों ही कार्यकाल देश भर में चर्चा का विषय रहे हैं. चाहे वो 2011 का उनका कार्यकाल हो जब उन्होंने लगभग 34 साल तक बंगाल में शासन करने वाली कम्युनिस्ट पार्टी को भारी बहुमत के साथ सत्ता से बेदखल करके राज्य की पहली महिला मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली हो. या फिर वो 2016 हो जब वो 294 सीटों में



खेत छोड़ सड़कों पर क्यों उतरें है देश भर के किसान?

प्रियंका सौरभ

जयपुर और आगरा के लिए दिल्ली के राजमार्गों की नाकाबंदी के लिए किसान संगठनों के आह्वान के बाद पूरे भारत में तनाव बढ़ गया है. तीन विवादास्पद फार्म विधेयकों के सवाल पर नरेंद्र मोदी सरकार और आंदोलनकारी किसानों के बीच समझौता मायावी प्रतीत होता है. राष्ट्रीय राजधानी के पड़ोसी राज्यों के किसानों की एक बड़ी संख्या आस-पास के स्थानों पर डेरा डाले हुए है.

कई दौर की बातचीत के बाद, केंद्र ने अब लिखित आश्वासन दिया है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य पर सरकारी खरीद जारी रहेगी, साथ ही राज्य द्वारा संचालित और निजी मंडियों, व्यापारियों के पंजीकरण के बीच किसानों की चिंताओं से निपटने के लिए कानूनों में संशोधन के प्रस्ताव भी शामिल हो



समस्या का समाधान हां या ना में नहीं संवाद में

डाँ नीलम महेंद्र

देश में लगभग एक पखवाड़े से जारी किसान आंदोलन भारत के सशक्त लोकतंत्र का बेहतरीन और विपक्ष की ओछी राजनीति का ताज़ा उदाहरण है. क्योंकि आंदोलन के पहले दिन से ही किसानों की मांगों का जिस प्रकार केंद्र में बहुमत वाली सरकार सम्मान कर रही है, उनकी आशंकाओं का समाधान करने का हर सम्भव प्रयास कर रही है वो सराहनीय है. यह बात सही है कि मौजूदा सरकार कांग्रेस समेत समूचे विपक्ष के पिछले चार पांच सालों के इतिहास को देखते हुए इन कृषि सुधार कानूनों को लाने से पहले ही किसान नेताओं या फिर राज्य सरकारों को विश्वास में ले लेती तो आज पूरा देश इस अराजक स्थिति और अनावश्यक विरोध की राजनीति से बच जाता लेकिन या तो सरकार ने इस मामले में दूर की



आंदोलन के नाम पर अराजकता फैलाने से बचें किसान  

अजय कुमार

नया कृषि कानून खारिज करने की जिद पर अड़े आंदोलकारी  किसान अब अपने बुने जाल में फंसते जा रहे हैं. यही वजह है कि मुट्ठी भर मोदी विरोधी विपक्ष को छोड़कर जो लोग कल तक किसानों के साथ खड़े नजर आ रहे थे, वह अब इस बात से आश्चर्यचकित हैं कि जब मोदी सरकार ने किसानों की तमाम मांगे मांगने के साथ कई मुद्दों पर स्पष्टीकरण दे दिया है तो फिर कृषि कानून वापस लिए जाने की बात क्यों उठाई जा रही है. आंदोलनकारी किसानों को यह नहीं भूलना चाहिए कि वह न तो देश के 80-90 करोड़ किसानो का प्रतिनिधित्व करते हैं, न ही वह सड़क, चक्का या रेल मार्ग जाम करके आम जनता के लिए मुसीबत खड़ी करने का हक रखते हंै. आंदोलनकारी किसान यदि किसानों की समस्याओं और उनके हक की ही



बोल्सेनारो और जॉनसन से भिन्न है मोदी का करिश्मा

जयप्रकाश पाराशर

में जैसे ही डोनाल्ड ट्रंप के जाने और डेमोक्रेट जो बाइडन के राष्ट्रपति निर्वाचित होने का फैसला हुआ, भारत में वामपंथी रुझान रखने वाले विश्लेषकों ने कहना शुरु कर दिया था कि अब दुनियाभर की राजनीति में बड़ा परिवर्तन आएगा. उनका ख्याल था कि ब्राजील में बोल्सेनारो, इस्राइल में नेतन्याहू और ब्रिटेन में बोरिस जॉनसन की विदाई होने वाली है.
भारत के बारे में उनका गणित था कि नरेंद्र मोदी सरकार का तख्तापलट तो नहीं हो सकता लेकिन वह अगले चार साल आसानी से शासन नहीं चला पाएंगे. भारत में सरकार के विरोध में कई आंदोलन अचानक उठ खड़े होंगे, अगर सरकार इन्हें दबाएगी तो बाइडन प्रशासन उसकी आलोचना करेगा. किसान आंदोलन के मामले में हमन



ज़हर मीठा हो तो पीने में मजा आता है!

रेखा पंकज

नए कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे किसान आंदोलन में 8 तारीख को हुए भारत बंद के असर पर मीडिया के संपादकीय भी अपने हितों से परे देखने को नहीं मिले. देखा जाए तो ये कोई हैरान कर देने वाली बात भी नहीं है. लेकिन मैं इन सबसे अलग अपनी मुखतलिफ सी बात रखना चाहूंगी.

अगर आप गौर करें तो नई किसान नीति हुक्मरानों के द्व़ारा उस तबके को खुश करने की ताबीर है जिनके सहारे पार्टियां इफ़रात में चुनावी दंगल के मैदान पर खर्च करती है. सो ऐसे में हित उनका साधा जाता है जिनसे फायदे पहुचांने के वायदे पहले किये जा चुके है और अब वक्त है उन्हें पूरा करने का. इसमें किसान हित को जहां तक और जितना बेहतर दिखाया जाना है, दिखाया जा रहा. यूं भी अक्सर हंगामा



दिग्‍भ्रमित होने का खामियाजा भुगत रहे हैं वामपंथी 

मुकेश कुमार सिंह

आजादी के बाद भारत के बुद्धिजीवियों और साहित्यकारों की कई पीढ़ियां वामपंथ और कांग्रेस की भेंट चढ़ गई. जो बिक सकते थे वह कांग्रेसी हो गए और बाकी बचे वामपंथी. कुछ तो इस भ्रम में भी कांग्रेसी हो गए कि यही वह पार्टी है जिसने देश को आजाद करवाया है और वामपंथी इस भ्रम में हो गए कि वामपंथ ही गरीबों के उत्थान का, दलितों और पीड़ितों के अभ्युदय का एकमात्र रास्ता है; जबकि हकीकत यह नहीं थी. हां अपवाद सब जगह होते हैं तो इनमें भी थे. ऐसे लोग भी थे जो जो इन दोनों ही विचारधाराओं से परे थे और सचमुच देश और देश की गरीब जनता का हित चाहते थे ,लेकिन उनकी गिनती नगण्य थी. 

शुरुआत के वामपंथी देश विरोधी नहीं थे, केवल भ्रमित थे. 'सर



क्या गूगल से यह पंगा डिजीटल आत्मनिर्भरता का द्वार खोलेगा? 

अजय बोकिल

देश में ‍किसान  आंदोलन के समांतर एक लड़ाई डिजीटल जगत में भी चल रही है. ये लड़ाई भारतीय डिजीटल स्टार्ट अप्स बनाम महाकाय बहुराष्ट्रीय टैक्नोलाॅजी कंपनी गूगल है. चूंकि ये लड़ाई सड़कों पर नहीं लड़ी जा रही है, इसलिए नेट और एप यूजर्स को इसका बहुत ज्यादा पता नहीं है. गूगल ने ऐसा पहला झटका करीब दो माह पहले पेटीएम को अपने गूगल प्ले स्टोर से बाहर कर के दिया था. हालांकि बाद में उसे फिर बहाल कर ‍िदया गया. झगड़े की वजह गूगल कंपनी द्वारा प्ले स्टोर नियमों में ‍किए गए बदलाव हैं. इसका नतीजा यह है कि भारत में अब प्ले स्टोर मामले में भी ‘आत्मनिर्भरता’ की बात हो रही है. यानी गूगल को झटका देने के लिए वैकल्पिक प्ले स्टोर विकस



ग्रामीण विकास से होगा देश का आर्थिक विकास

प्रियंका सौरभ

इन्फ्रास्ट्रक्चर किसी भी देश के आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. वर्तमान में भारत की 65% आबादी अपने ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करती है. अगर हम देश में ग्रामीण बुनियादी ढांचे के बारे में बात करते हैं, तो यह कृषि, कृषि-उद्योगों और ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबी उन्मूलन के लिए महत्वपूर्ण है. मूल रूप से, ग्रामीण बुनियादी ढांचे में लोगों को बुनियादी सुविधाएं प्रदान करने की क्षमता है जो उनके जीवन की गुणवत्ता में सुधार कर सकते हैं. एक उदाहरण देने के लिए, ग्रामीण अवसंरचना के विकास से ग्रामीण उत्पादकों के लिए बाजार केंद्रों तक बेहतर पहुंच, कम कीमतों पर इनपुट और कच्चे माल की बेहतर उपलब्धता और गतिशीलता में



बहुसंख्यकों के हितों की सुरक्षा पर सियासत नहीं चिंतन हो

अजय कुमार

उत्तरप्रदेश  में गैर भाजपाई दलों  कांग्रेस -सपा-बसपा को लव जेहाद के खिलाफ योगी सरकार द्वारा बनाया गया धर्मांतरण सबंधी कानून रास नहीं आ रहा है.  कांग्रेस  ने अधिकृृत रूप से कोई बयान नहीं दिया है, लेकिन पार्टी के तमाम नेता अलग-अलग बयानबाजी करके लव जेहाद के खिलाफ योगी सरकार के कानून को गलत ठहराने में लगे हैं. उधर, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव भी कह रहे हैं कि धर्मांतरण कानून विधेयक विधानसभा में आयेगा तो सपा पूरी तरह विरोध करेगी, क्योंकि सपा ऐसे किसी कानून के पक्ष में नहीं है. वहीं बहुजन समाज पार्टी ने योगी सरकार से इस अध्यादेश पर पुनर्विचार करने की मांग की है. मायावती ने ट्वी



न से नमक

अनूप शुक्ल

कुछ दिन पहले कई जगह नमक ’ब्लैक’ में बिका.  नमक को लगा होगा कि जब धन काला हो सकता है तो नमक क्यों नहीं. लोकतंत्र में  काला होने का सबको बराबर हक है. फ़िर क्या , नमक भी ब्लैक होने के लिये मचल गया. नोट के लिये लाइनों में लगे लोग नमक की लाइनों में लग गये. लोकतंत्र बचाये रखने के लिये लाइन जरूरी है. लाइन चाहे वोट देने के लिये हो या फ़िर नोट बदलने के लिये.  नौकरी के लिये हो या फ़िर नमक के लिये. हो किसी की लाइन लेकिन लाइन लगनी चाहिये. लाइन है तो लोकतंत्र है. लाइन टूटी, लोकतंत्र दरका.  लाइन लोकतंत्र की ’लाइफ़ लाइन’ हैं. 
नमक तो देश में इफ़रात है. फ़िर भी इसकी कमी की अफ़वाह फ़ैल गयी. 20 रुपये का नमक 400 रुपये तक बिक गया. ’नमक ब्लैक&rsq



केरल में वो विवादित अध्यादेश लाया ही क्यों गया था?  

अजय बोकिल

देश में संविधान दिवस के ठीक पहले मीडिया और अभिव्यक्ति की आजादी से जुड़ी दो अहम खबरें आईं. दोनो का मकसद ‍िकसी न किसी रूप में मीडिया पर अंकुश ही था. पहले मामले में बोलने की आजादी पर ताले डालने वाला कठोर अध्यादेश था, तो दूसरे में डिजीटल मीडिया को विदेशी कब्जे से बचाने के लिए एफडीआई सीमा तय करना है. पहले प्रकरण में केरल की विजयन सरकार द्वारा लाए गए केरल पुलिस अधिनियम संशोधन अध्यादेश का खुद वामदलों में और मानवाधिकारवादियों द्वारा कड़ा विरोध किया जा रहा था. बीजेपी ने इसे 'राजनीतिक विरोधियो' का मुंह बंद करने की कोशिश बताया तो राज्य में ‍विपक्षी कांग्रेस ने भी इस अध्यादेश की कड़ी आलोचना की थी. 
अमूमन बीजेपी स



क्या भारत में काम करने के अधिकार को गरिमापूर्ण बनाया जा सकता है?

प्रियंका सौरभ

दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाएं  महामारी की दोहरी मार से उबरने के लिए संघर्ष  कर रही है, लॉकडाउन से बेरोजगारी बढ़ रही है. मगर बुनियादी आवश्यकताओं की पूर्ति को सक्षम करने के लिए और बुनियादी आवश्यकताओं के लिए काम चाहिए. 'काम करने का अधिकार' जीवन को जीने में सक्षम होने के लिए सबसे आवश्यक तत्व है. 'काम करने का अधिकार' शब्द अक्सर बेरोजगारी या काम की उपलब्धता की कमी के संदर्भ में उपयोग किया जाता है. भारत में, महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम, नौकरियों का वादा और बेरोजगारी की राजनीति का एक लंबा इतिहास रहा है.

द्वितीय विश्व युद्ध के बाद काम का अधिकार चर्चा का एक बड़ा विषय था, और मानव अधिका



न्‍यू नॉर्मल भारत में अपनाने होंगे नए तरीके

रवि प्रकाश

न्‍यू नॉर्मल भारत में सब कुछ पुराने तरीके से चलेगा तो नया क्‍या होगा. सरकार योजनाएं बनाएगी, अधिकारी उस पर पेपरवेट रखकर बैठ जाएंगे तो काम कैसे चलेगा. लाभार्थी को सरकार की योजनाओं का लाभ मिले, इसकी जिम्‍मेदारी किसी न किसी को उठानी होगी. उठानी भी चाहिए क्‍योंकि सारा काम सरकार करे, यह संभव भी नहीं है. ऐसी स्थिति में उपाय क्‍या है. यह विवाद का विषय भले ही हो मगर सच्‍चाई यह है कि जब तक सरकार और सामाजिक संगठन एक साथ मिलकर काम करना शुरू नहीं करेंगे तब तक न तो देश का और न ही देशवासियों का भला होगा. सुनने में यह बात अटपटी लगती है, मगर हकीकत यही है. जिस दिन सरकार और सामाजिक संगठन मिलकर कदम बढ़ाना शुरू कर देंगे, उस दिन से देश क



गुपकार पर भाजपा का यह स्टैंड

प्रकाश भटनागर

अमित शाह केंद्रीय गृह मंत्री हैं. कश्मीर में आठ कट्टर भाजपा- विरोधी दलों के संगठन 'गुपकार' को लेकर वे काफी आक्रामक हैं. मामला राष्ट्रीय स्तर का है. कश्मीर में होने जा रहे पंचायत चुनावों से जुड़ा हुआ है. इसलिए शाह की यह आक्रमकता कारणों सहित समझ आ जाती है. लेकिन यदि इसी मुद्दे को लेकर उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ और मध्यप्रदेश में शिवराज सिंह चौहान भी शाह की तरह ही आक्रामक रवैया दिखाएं तो कारण खोजना तो बनता है. गुपकार का देश के बाकी राज्यों से कोई लेना-देना नहीं है. फिर भी चौबीस घंटे से कम के अंतराल में पहले योगी और फिर शिवराज जमकर गरजे. 'गुपकार' वाले दलों को उन्होंने पाकिस्तान का एजेंट बताया. साथ ही इस मसले क



दिवाली पर गोल गप्पा चिंतन और पानी पूरी एटीएम...

अजय बोकिल

इस दिवाली एक खबर यह भी पढ़ने मिली कि लोग पानी-पूरी खाने फिर निकल पड़े हैं. कोरोना लाॅक डाउन में पानी पूरी वालों का धंधा भी बैठ गया था. अमूमन रोज ही पानी पूरी सूतने वालों के मुंह भी बेस्वाद हुए जा रहे थे. लोग सोचे बैठे थे कि कब कोविड 19 की दहशत कम हो और कब सड़क किनारे खड़े किसी ठेले पर दबाकर पानी पूरी खाएं. यूं पानी पूरी बरसों से अपने चटपटेपन की वजह से चटोरों की हिट लिस्ट में है. लेकिन इधर कोरोना काल में सोशल डिस्टेसिंग के चलते पानी पूरी में भी कुछ नवाचार ‍देखने को ‍िमल रहा है. पंजाब के अमृतसर में एक चाट वाले ने गोल गप्पे (पानी पूरी) के साथ मनपसंद पानी के लिए मशीन तैयार की है, जिसमें हर नल से अलग स्वाद का पानी निकलता है. आप



बिडेन, मोदी और भारत-अमेरिका संबंधों के बदलते आयाम

डॉ. सत्यवान सौरभ

जो बिडेन संयुक्त राज्य अमेरिका के अगले राष्ट्रपति बन गए हैं. उन्होंने रिपब्लिकन उम्मीदवार और पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को हराया है. वर्तमान दुनिया में अमेरिका सबसे प्रभावशाली देश है, इसलिए अमेरिका में सत्ता परिवर्तन का दुनिया के अधिकांश देशों पर प्रभाव पड़ेगा. भारत कुछ समय के लिए अमेरिका के महत्वपूर्ण सहयोगी के रूप में सामने आ रहा था. अमेरिका में हाउडी मोदी और भारत में नमस्ते ट्रम्प दोनों देशों के नेताओं के बीच घनिष्ठ अंतरंगता का परिणाम थे. इस स्थिति में, अमेरिका में सत्ता परिवर्तन से भारत और अमेरिका के संबंधों के आयाम भी बदल जाएंगे.

अपने विजय भाषण में, उन्होंने एकता के एक संदेश पर जोर दिया और क



कठिन है डगर पनघट की 

रवि प्रकाश

बिहार विधान सभा के चुनाव ने यह भी साबित किया है कि भाजपा की रणनीति के सामने विरोधी दलों को और विरोधी दलों का हिरावल दस्ता, लगभग 135 वर्षों के अनुभव और विरासत का दम भरने वाली भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (इन्दिरा) को अभी बहुत कुछ सीखना बाकी है. ह्त्या और बलात्कार जैसे मामलों पर कांग्रेस के राहुल और प्रियंका की दोरंगी नीति, दोहरी चाल, एकांगी सोच को लोगों ने समझा.  राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जैसे विराट संगठन के समर्थन की ताकत का अंदाज लगाने में चूक गया विपक्ष. विपक्ष “नितीश भगाओ, बिहार बचाओ” का शोर मचाता रहा और ‘संघ’ चुपचाप अपना काम करता रहा. इस परिप्रेक्ष्य में जो होना चाहिए था वही हुआ है इस चुनाव परिणाम में. कुछ-न



कानून के साथ लिंग संवेदीकरण महिलाओं के लिए अच्छा साबित हो सकता

प्रियंका सौरभ

लैंगिक असमानता हमारे समाज में एक दीर्घकालिक समस्या है आज भी महिलाओं के साथ कई तरह से भेदभाव किया जाता है. भारत के सामाजिक संदर्भ में कानूनी रूप से महिलाओं को समान अधिकार प्राप्त है मगर लैंगिक मुद्दों पर समाज को संवेदनशील बनाने की बहुत आवश्यकता है ताकि कोई समस्या न हो. महिलाओं को हिंसा, उत्पीड़न और भेदभाव से मुक्त होने का अधिकार है. असुरक्षित वातावरण की बाधाओं को दूर करने से महिलाओं को व्यक्तियों और कार्य, समुदायों और अर्थव्यवस्थाओं के योगदानकर्ताओं के रूप में अपनी क्षमता को पूरा करने में मदद मिल सकती है.  

यह सुनिश्चित करने के लिए लिंग संवेदनशीलता एक लंबा रास्ता तय कर सकती है. लिंग संवेदीकरण व्यवहार क



अरुण शौरीः श्रीमती गांधी में कई खासियत थी जैसे उनमें शर्म थी, लेकिन मौजूदा सरकार में वह भी नहीं है?

प्रदीप द्विवेदी

श्रीमती इंदिरा गांधी में कई खासियत थी जैसे उनमें शर्म थी, लेकिन मौजूदा सरकार में वह भी नहीं है!
अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में मंत्री रहे अरुण शौरी पीएम नरेन्द्र मोदी की सरकार के कामकाज और सियासी तौर-तरीकों पर प्रश्नचिन्ह लगाते रहे हैं.
इंडियन एक्सप्रेस बातचीत में उनका कहना था कि- मुझे लगता है कई बड़े पेड़ कुल्हाड़ी से काटे जाने के बजाए धीरे-धीरे दीमक की वजह से ही गिर जाएंगे?
ऐसे में हम नागरिकों को समय रहते जागना पड़ेगा. न्यायपालिका के मामले में हमें जवाबदेही तय करनी होगी और यह लगातार फैसलों के विश्लेषण करने से होगी!
अरुण शौरी का कहना था कि- अटल बिहारी वाजपेयी भी आरएसएस के साथ जुड़े हुए थे, लेकिन मुझे नही



अर्णब की गिरफ्तारी गलत पर वैसी पत्रकारिता पर सवाल भी

अजय बोकिल

रिपब्लिक टीवी के संपादक और देश में आक्रामक व किसी हद तक एकालापी पत्रकारिता के पुरोधा अर्णब गोस्वामी की महाराष्ट्र पुलिस ने जिस तरीके से गिरफ्‍तारी की है, वह अत्यंत निंदनीय है. पत्रकारों के साथ महाराष्ट्र की शिवसेनानीत  महाआघाडी सरकार का रवैया यूं भी अच्छा नहीं रहा है और जिस तरह अर्णब ने पत्रकारिता के आवरण में राजनीतिक टकराव को परवान चढ़ाने की कोशिश की, उसे देखते हुए, जो हुआ वह अप्रत्याशित भी नहीं है. अर्णब की गिरफ्तारी की सर्वाधिक निंदा भाजपा नेताअों ने ही की है. उन्होने इसे ‘सत्ता का दुरूपयोग’ बताते हुए मुंबई पुलिस की कार्रवाई की कड़ी निंदा की है, जबकि अर्णब की हमबिरादरी पत्रकारों की संस्थाअों ने इ



इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले से रूकेगा लव-जेहाद

अजय कुमार

शादी-विवाह एक पवित्र बंधन होता है, जिसमें धर्मानुसार दो आत्माओं का मिलन होता है. जब यह रिश्ता जोड़ा जाता है तो यही उम्मीद रहती है कि पति-पत्नी हर सुख-दुख में उम्र भर एक-दूसरे का साथ निभाएंगे.ऐसे पवित्र बंधन को समाज भी मान्यता देता है,लेकिन समस्या तब आड़े आती है जब धर्म की आड़ लेकर शादी-विवाह के नाम पर अधर्म किया जाता है. शादी करने के लिए धर्म परिवर्तन तक कर लिया जाता है.यहां तक की हिन्दू धर्म की लड़की को मुसलमान बना दिया जाता है तो कुछ मामलों में शादी करने के लिए मुस्लिम लडकियां भी अपना धर्म बदलते दिख जाती हैं,लेकिन ऐसे मामले न के बराबर होते हैं. पिछले कुछ वर्षो से हिन्दू लड़कियों का जर्बदस्ती या फिर बहला-फुसला कर धर्म प



उदारता की बजाय पड़ोस में सजगता की जरूरत

प्रियंका सौरभ

पड़ोस में शांति हो, तो इन्सान चैन की नींद सोता है, लेकिन यह शांति तभी बनी रह सकती है, जब पड़ोसी के साथ-साथ हम भी शांति के पक्षधर हों और ये समझ आ जाये कि क्या पडोसी शांति के लायक है?  वर्चस्व की जंग हमेशा शांति को मारने का काम करती है. फिजूल के झगड़ों को दरकिनार कर  ‘गुट निरपेक्ष’ रहना शांति का पहला कदम है.  मगर जब पानी नाक से गुजर जाए तो हम तटस्थ भी नहीं रह सकते. सही समय पर सिखाया गया सबक लम्बे समय तक शांति का नया रास्ता भी खोल सकता है. आजादी से लेकर आज तक भारत की विदेश नीति में कई उतार-चढ़ाव देखने को मिले हैं. आइये जानने का प्रयास करें कि वास्तव में भारत कैसा पड़ोसी है ?

खासकर चीन और नेपाल के साथ "क्षेत्रीय विवाद&quo



चीन से मुकाबला - हौसला और हकीकत

रवि प्रकाश

घर-परिवार में अक्सर होता है कि पड़ोसी के घर कुछ आया तो अपने घर में प्रसंगहीन होने के बावजूद उसकी चर्चा हो ही जाती है. विशेषकर पड़ोसी अगर घर के ठीक अगर-बगल में हो तब तो क्या आया, क्या गया पर नजरें और भी तेज हो जाती हैं. पड़ोसी का एक और पहलू होता है कि वह अगर अच्छा है तो आपका जीवन भी आनंद से भर देता है. और अगर वह शठ प्रवृत्ति का हुआ तो आपको अक्सर परेशान करता रहेगा. परेशान करने वाला पड़ोसी बेमतलब भी कुछ ऐसा कर बैठेगा कि आप यति प्रवृत्ति के व्यक्ति हों, तो भी प्रभावित हुए बिना नहीं रह सकते. इसलिए ज़रूरी हो जाता है कि पड़ोसी से ऊपर नहीं तो कम-से-कम बाराबरी में हुआ जाए. यह बराबरी सर्वतोमुखी और सर्वांगीण होती है. कुछ-कुछ शठे-शाठ्यम समा



तुष्टिकरण की राजनीति से मुक्ति की और असम

डाँ नीलम महेंद्र

असम सरकार ने हाल ही में घोषणा की है कि अगले माह यानी नवंबर में वो राज्य में राज्य संचालित सभी मदरसों और संस्कृत टोल्स या संस्कृत केंद्रों को बंद करने संबंधी एक अधिसूचना लाने जा रही है.इस फैसले के अंतर्गत असम सरकार द्वारा संचालित या फिर यूँ कहा जाए, सरकार द्वारा फंडेड मदरसों और टोल्स को अगले पाँच महीनों के भीतर नियमित स्कूलों के रूप में पुनर्गठित किया जाएगा. यह फैसला सरकार द्वारा लिए जाने का कारण स्पष्ट करते हुए असम के शिक्षा मंत्री ने कहा कि, "एक धर्मनिरपेक्ष सरकार का काम धार्मिक शिक्षा प्रदान करना नहीं है. हम धार्मिक शिक्षा के लिए सरकारी फण्ड खर्च नहीं कर सकते." इसके अलावा उन्होंने कहा कि अब वो आधुनिक शिक



कैसे नवाज ने कुछ दिनों में ही बदल डाली अपनी छवि

जयप्रकाश पाराशर

पाकिस्तान की सियासत में मैं देख रहा हूं कि नवाज शरीफ एक धारदार और पुरअसर पोलिटिकल लीडर के रूप में तेजी से उभर रहे हैं.. यह अब तक की उनकी एक व्यापारी की तरह सियासत करने वाले नेता की छवि से एकदम जुदा है.. वह एकतरफा राजनीति में मूमेंटम लाने में कामयाब रहे हैं.. पाकिस्तान में जितनी की जा सकती है, वह उससे भी ज्यादा डिसरप्शन की पोलिटिक्स कर रहे हैं.. यह करो या मरो की तरह दिखती तो है, लेकिन आक्रामक स्पीच के पीछे उनकी सूझबूझ और रणनीति भी है.. नवाज शरीफ ने ठान लिया है कि वह हर उस वर्जित विषय पर बात करेंगे, जिसे छेड़ने से फौजी कियादत को तकलीफ होती है..

नवाज शरीफ ने सीधे आर्मी चीफ कमर बाजवा और डीजी आईएसआई फैज हामिद पर हमले किए



मैला ढोने वालों की दुर्दशा

प्रियंका सौरभ

इतने सालों बाद भी  हम देश भर में आए रोज सफाई के लिए सेप्टिक टैंक और नालियों में मानव प्रवेश के कारण हुई मौत की ख़बरें सुनते है.  ऐसी दुखद घटनाओं को समाप्त करने के उद्देश्य से आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय ने  गैर-सरकारी संगठनों से इसके उपयुक्त समाधान की तलाश के लिए एक  प्रौद्योगिकी चुनौती शुरू की है. जिस से  देश में सीवरों और सेप्टिक टैंकों की सफाई में मानव हस्तक्षेप की जगह नवीनतम तकनीकों को बढ़ावा दिया जा सके. सेप्टिक टैंकों और नालियों की सफाई करने वालों के अलावा मैला प्रथा (मैनुअल स्कैवेंजिंग) भी इस काम में लगे लोगों के लिए अभिशाप बन गई है. मैनुअल स्कैवेंजिंग का तात्पर्य किसी भी तरीके से मैन्युअल रूप



HD+ डिस्प्ले, 5000mAh की दमदार बैटरी के साथ लॉन्च हुआ Vivo Y12s

8 हज़ार रुपये सस्ते में मिल रहा है Xiaomi का ये प्रीमियम स्मार्टफोन

Vivo ने में भारत में लांच किया नया स्मार्टफोन

Motorola ने लॉन्च किए अपने 4 नए दमदार स्मार्टफोन्स

Lava ने एक साथ भारत में लॉन्च किए चार स्मार्टफोन्स

Redmi Note 9T 5G लॉन्च, इसमें है मीडियाटेक डाइमेंसिटी 800U प्रोसेसर

108 मेगापिक्सल के साथ भारत में लॉन्च हुआ Xiaomi Mi 10i

30 हजार रुपये तक की रेंज में आने वाले धांसू 5G स्मार्टफोन

Lava कल लॉन्च करेगा वॉटरड्रॉप नॉच डिस्प्ले वाला नया स्मार्टफोन

सिर्फ 2,899 रुपये में मिल रहा है Realme 5 Pro स्मार्टफोन

Samsung Galaxy S21 सीरीज 14 जनवरी को होगी लॉन्च

Samsung अगले हफ्ते ला रहा है 2021 का पहला बजट फोन Galaxy M02s

Vivo ने ट्रिपल रियर कैमरा सैटअप के साथ लॉन्च किया Y20A स्मार्टफोन

Huawei Enjoy 20 SE हुआ लॉन्च, 6X Zoom के साथ मिलेगा दमदार कैमरा

लावा ने महिलाओं के लिए लॉन्च किया स्मार्टफोन, कीमत 7,000 से भी कम

50MP कैमरे के साथ OPPO Reno 5 Pro+ 5G हुआ लॉन्च

पहले से और भी सस्ता हुआ रेडमी का ये पॉपुलर स्मार्टफोन

सिर्फ 8,699 रुपये में लॉन्च हुआ डुअल कैमरे वाला ये शानदार स्मार्टफोन

Oppo Reno 5 सीरीज का नया स्मार्टफोन, 65W फास्ट चार्जिंग को करेगा सपोर्ट

Realme ने लांच किया नया स्मार्टफोन X7 Pro 5G

सस्ता मिल रहा है Realme का 6000mAh की दमदार बैटरी बजट स्मार्टफोन

6GB रैम के साथ Oppo A53 5G स्मार्टफोन हुआ लॉन्च

48MP प्राइमरी रियर कैमरे के साथ लॉन्च हुआ Nokia 5.4 स्मार्टफोन

6 हज़ार से भी कम कीमत में आज लॉन्च होगा Infinix HD Smart 2021 स्मार्टफोन

धांसू डिस्काउंट के साथ खरीदें पोको के स्मार्टफोन, जानें डीटेल

एप्पल की राह पर सैमसंग, इस स्मार्टफोन के साथ नहीं मिलेगा चार्जर

ऐमजॉन इंडिया पर होगी Redmi 9 Power की सेल, 17 दिसंबर को होगा लॉन्च

आईटेल ने लॉन्च किया बुखार मापने वाला फोन, कीमत सिर्फ 1049 रुपये


8GB रैम व 128GB इंटर्नल स्टोरेज के साथ भारत में लॉन्च हुआ Vivo Y51


  • 20500

वीवो ने लांच किया नया 5जी मिडरेंज स्मार्टफोन


  • 20409

नए अवतार में लॉन्च हुआ Realme C15, मिलेगी 6000mAh की बैटरी


  • 20328

सस्ता हुआ नोकिया का ये बजट स्मार्टफोन, कीमत सिर्फ 6,999 रुपये


  • 20238

6000mAh बैटरी, के साथ भारत में लॉन्च हुआ ये धांसू फोन, कीमत 10 हज़ार से कम


  • 20152

लॉन्च हुए 2 दमदार फोन Redmi 9 Pro 5G और Redmi Note 9 5G


  • 20059

Infinix Zero 8i आज होगा लॉन्च, मिलेगा दो सेल्फी कैमरा और दमदार बैटरी


  • 19952

64MP वाला Vivo V20 Pro 5G स्मार्टफोन हुआ लॉन्च


  • 19884

मोटोरोला ने भारत में लांच किया सबसे सस्ता 5जी स्मार्टफोन


  • 19716

भारत में लॉन्च हुआ Vivo Y1s स्मार्टफोन, कीमत 8 हजार रुपये से भी कम


  • 19504

भारत में लॉन्च हुआ Vivo Y1s स्मार्टफोन, कीमत 8 हजार रुपये से भी कम


  • 19504

नोकिया ने भारत में लांच किया नया किफायती स्मार्टफोन


  • 19414

Samsung ने लॉन्च किया ट्रिपल कैमरा स्मार्टफोन Galaxy A02s


  • 19335

6000mAh की बैटरी के साथ लॉन्च हुआ Poco M3 स्मार्टफोन


  • 19244

Micromax कई ऑफर्स के साथ उपलब्ध करेगी अपना मेड इन इंडिया स्मार्टफोन


  • 19144

अगले साल जनवरी में लांच हो सकता है सैमसंग गैलेक्सी एस 21 स्मार्टफोन


  • 19055

Oppo लाई दुनिया का पहला रोलेबल डिस्प्ले वाला सबसे अनोखा फोन


  • 18954

Realme ने अपना नया स्मार्टफोन Realme 7 5G किया लॉन्च


  • 18854

लॉन्च से पहले लीक हुई OnePlus 9 की तस्वीर


  • 18762

5G तकनीक को सपोर्ट कर रहे हैं भारत में धांसू ये स्मार्टफोन


  • 18578

5000mAh की बैटरी के साथ लॉन्च हुआ Vivo Y12s स्मार्टफोन


  • 18486

रियलमी 19 नवंबर को लांच करेगी अपना नया 5जी स्मार्टफोन रियलमी 7


  • 18394

28 नवंबर तक BSNL का ऑफर, फ्री में मिलेगा सिम कार्ड


  • 18381

Nokia ने लॉन्च किए दो नए 4G फीचर फोन्स


  • 18300

Samsung Galaxy S20+ BTS Edition की कीमत में 10 हजार की कटौती


  • 18221

10 नवंबर से शुरू होगी Micromax के इन दो सस्ते स्मार्टफोन्स की प्री-बुकिंग


  • 18117

नए अवतार में आया Vivo का ये 3 कैमरे वाला दमदार स्मार्टफोन


  • 18020

लेनोवो के नए फोन में साइड में मिलेगा पॉप-अप कैमरा, जल्द होगा लांच


  • 17932

एलजी के नये स्मार्टफोन की फ्लिपकार्ट में बुकिंग शुरू, कंपनी दे रही कई ऑफर्स


  • 17848