सालों बाद खुला गढ़ा थाने का चेहरा, त्रिपुरी चौक से हटी मटकों की दुकानें और कब्जों की विरासत

सालों बाद खुला गढ़ा थाने का चेहरा, त्रिपुरी चौक से हटी मटकों की दुकानें और कब्जों की विरासत

प्रेषित समय :21:43:49 PM / Tue, Nov 4th, 2025
Reporter : पलपल रिपोर्टर

जबलपुर. शहर में लंबे समय से सड़क किनारे जमे अतिक्रमणों के खिलाफ जिला प्रशासन, पुलिस और नगर निगम की संयुक्त टीम ने मंगलवार को बड़ी कार्रवाई की. त्रिपुरी चौक से लेकर गढ़ा थाना क्षेत्र तक फैले अवैध कब्जों को हटाकर सड़क को फिर से खुला और व्यवस्थित बनाया गया. इस अभियान के तहत गढ़ा थाने की बाउंड्रीवाल से सटी मटकों की पुरानी दुकानें, जो वर्षों से स्थायी रूप से कब्जा जमाए हुए थीं, हटाई गईं. इस कार्रवाई से गढ़ा थाना स्टाफ और क्षेत्र के नागरिकों में राहत और संतोष का माहौल है.

कलेक्टर राघवेन्द्र सिंह और निगमायुक्त रामप्रकाश अहिरवार के निर्देश पर चलाए जा रहे इस “अतिक्रमण हटाओ अभियान” के तहत मंगलवार को निगम की अतिक्रमण टीम ने छोटी लाइन फाटक से लेकर गढ़ा और त्रिपुरी चौक तक सड़क किनारे के अवैध निर्माणों पर बुलडोज़र चलाया. इस कार्रवाई का नेतृत्व अपर आयुक्त अरविंद शाह और अतिक्रमण अधिकारी मनीष तड़से ने किया. टीम ने बताया कि गढ़ा थाने की बाउंड्रीवाल से सटी मटकों की दुकानें सालों से यहां कब्जा किए हुए थीं, जिससे न केवल थाने का मुख्य प्रवेश क्षेत्र ढक गया था बल्कि सड़क पर यातायात व्यवस्था भी गंभीर रूप से बाधित हो रही थी.

अभियान के दौरान यह नजारा देखने लायक था जब वर्षों बाद गढ़ा थाने का भवन मुख्य सड़क से साफ़-साफ़ दिखाई दिया. पुलिसकर्मियों ने बताया कि पहले थाने की दीवार तक पहुंचना भी मुश्किल था क्योंकि बाउंड्रीवाल से सटी कतार में मटका बेचने वालों की दर्जनों दुकानें बनी हुई थीं. कई दुकानदारों ने अस्थायी छप्पर और शेड बनाकर सड़क के एक हिस्से पर स्थायी कब्जा कर लिया था.

एक स्थानीय निवासी राजेश मिश्रा ने बताया, “यहां रोज़ाना जाम लगता था. थाने के सामने मटकों की दुकानें होने से लोग सड़क के बीच में रुकते थे, जिससे आने-जाने में परेशानी होती थी. अब रास्ता साफ हो गया है और आवाजाही आसान हो गई है.”

पुलिसकर्मियों ने भी इस बदलाव पर खुशी जताई. गढ़ा थाना स्टाफ के एक सदस्य ने कहा, “सालों बाद पहली बार थाने का बोर्ड और दीवार सड़क से दिखाई दे रही है. पहले तो ऐसा लगता था मानो थाने के सामने कोई बाजार ही बस गया हो.”

नगर निगम के अधिकारियों के अनुसार, यह क्षेत्र ‘हाई-ट्रैफिक जोन’ में आता है, जहां अक्सर भीड़ और जाम की समस्या बनी रहती थी. प्रशासन को नागरिकों की ओर से लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि सड़क पर लगे अवैध ढांचे सुरक्षा के लिहाज से भी खतरा पैदा कर रहे हैं. इसी को ध्यान में रखते हुए यह कार्रवाई की गई.

अतिक्रमण अधिकारी ने बताया कि अभियान के दौरान थाने के आसपास फैले सभी अस्थायी ढांचे हटाए गए हैं. टीम ने वहां मौजूद दुकानदारों को पहले नोटिस दिया था और फिर मौके पर जाकर समझाइश दी कि यह सरकारी भूमि है जिस पर कब्जा अवैध है. इसके बाद नगर निगम की टीम ने बुलडोज़र लगाकर सभी संरचनाएं ध्वस्त कीं.

उन्होंने यह भी बताया कि इस क्षेत्र में मटकों के अलावा कुछ छोटे फुटपाथ विक्रेता भी सामान बेचने के लिए बैठते थे. उन्हें चेतावनी दी गई है कि दोबारा सड़क किनारे दुकान न लगाएं. मुनादी कराकर लोगों को यह समझाया गया कि सड़क पर अवैध कब्जा न सिर्फ प्रशासनिक अपराध है बल्कि नागरिकों की सुरक्षा और यातायात व्यवस्था में बाधा भी है.

अभियान सिर्फ त्रिपुरी चौक तक सीमित नहीं रहा. संभाग क्रमांक 5 के अंतर्गत कस्तूरबा गांधी वार्ड में भी नालों के ऊपर बने अवैध अतिक्रमणों को हटाने की कार्रवाई की गई. कई स्थानों पर लोगों ने नालों के ऊपर शेड डालकर अस्थायी दुकानें बना ली थीं, जिन्हें तोड़ दिया गया.

इसके अलावा भंवरताल गार्डन के आसपास के इलाकों में भी नगर निगम की टीम ने कार्रवाई की और सड़कों से अवैध ठेले और रेहड़ियां हटाईं. अधिकारियों ने बताया कि इन क्षेत्रों में अतिक्रमण के कारण पैदल यात्रियों को दिक्कत हो रही थी और सड़क पर जाम लगना आम बात थी. कार्रवाई के बाद यातायात व्यवस्था अब सुचारू दिखाई दे रही है.

निगमायुक्तअहिरवार ने कहा कि यह अभियान “शहरहित और सार्वजनिक सुविधा” को ध्यान में रखकर चलाया जा रहा है. उन्होंने बताया कि आने वाले दिनों में शहर के अन्य हिस्सों में भी ऐसे ही अभियान जारी रहेंगे ताकि सड़कें खुली, स्वच्छ और सुरक्षित रह सकें.

अपर आयुक्त शाह ने कहा, “नगर निगम का लक्ष्य सिर्फ अतिक्रमण हटाना नहीं है, बल्कि नागरिकों में यह जागरूकता पैदा करना भी है कि सार्वजनिक भूमि सबकी है, इसे निजी संपत्ति की तरह इस्तेमाल नहीं किया जा सकता. अगर लोग खुद आगे आएंगे, तो शहर ज्यादा व्यवस्थित बनेगा.”

अभियान के दौरान पुलिस बल भी मौजूद रहा ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थिति उत्पन्न न हो. मौके पर भारी संख्या में निगम कर्मचारी, जेसीबी मशीनें, और पुलिसकर्मी तैनात किए गए थे.

जबलपुर में यह कार्रवाई इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि गढ़ा थाना क्षेत्र शहर के सबसे पुराने और व्यस्त इलाकों में से एक है. वर्षों से यह इलाका अतिक्रमण का केंद्र बना हुआ था. प्रशासन के इस कदम को “साहसिक और आवश्यक कार्रवाई” माना जा रहा है जिसने सड़क को फिर से नागरिकों के लिए खोल दिया है.

स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर प्रशासन ऐसे अभियानों को नियमित रखे, तो शहर की तस्वीर बदल सकती है. त्रिपुरी चौक से गढ़ा थाना तक हटे कब्जों ने यह साबित कर दिया है कि जब इच्छाशक्ति और समन्वय हो, तो वर्षों पुरानी समस्याएं भी खत्म की जा सकती हैं.

आज गढ़ा थाने का मुख्य द्वार और परिसर, जो वर्षों से मटकों और दुकानों की कतारों में छिप गया था, फिर से शहर के बीचोंबीच दिखाई दे रहा है — यह न सिर्फ प्रशासनिक कार्रवाई की सफलता की तस्वीर है, बल्कि जबलपुर की बदलती शहरी सोच का प्रतीक भी है.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-