योगी अयोध्या से चुनाव लड़कर देंगे हिन्दुत्व को धार

योगी अयोध्या से चुनाव लड़कर देंगे हिन्दुत्व को धार

प्रेषित समय :20:52:16 PM / Sun, Jul 25th, 2021

विशेष प्रतिनिधि, नई दिल्ली. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अयोध्या विधानसभा सीट से चुनाव लड़ सकते हैं. भाजपा और संघ की रणनित हैं कि वाराणसी से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और अयोध्या से मुख्यमंत्री के नेतृत्व करने से उप्र में अच्छा संदेश जाएगा.

योगी आदित्यनाथ का गोरखपुर क्षेत्र में अच्छा दबदबा है. वहां की करीब 28 सीटों की जीत- हार योगी तय करते हैं. मुख्यमंत्री बनने के बाद योगी द्वारा उप्र में जिस तरह हिन्दुत्व का एजेंडा चलाया गया, उससे उनकी लोकप्रियता काफी बढ़ी है. राज्य की मुस्लिम तुष्टीकरण की राजनीति को बदलने वाले योगी 2022 के विधानसभा चुनाव में धार्मिक एजेंडे को शीर्ष में रखना चाहता हैं. सूत्र बताते हैं कि संघ के साथ पिछले दिनों जो बैठक हुई, उसमें मुख्यमंत्री योगी को अयोध्या से चुनाव लड़ने का प्रस्ताव दिया गया है.

संघ की तरफ से सुझाया गया है कि अयोध्या से योगी के मैदान में होने से चुनावी समीकरण बदलेगा. दरअसल, संघ योगी के हिन्दुत्ववादी चेहरे को और चमकाना चाहता है. क्योंकि योगी इस समय संघ के पास धार्मिक एजेंडे को विस्तार देने वाले अकेला चेहरा हैं. संघ के एजेंडे में वैसे भी अयोध्या, काशी, मथुरा है. अयोध्या में रामजन्म भूमि का मसला सुलझ गया है. काशी का नेतृत्व खुद प्रधानमंत्री मोदी कर रहे हैं. मथुरा को अभी प्रतीक्षा सूची में रखा गया है. अयोध्या में मंदिर निर्माण के साथ विकास के काम जिस तरह से हो रहे हैं, उससे अयोध्या आने वाले समय में विश्व पटल पर उभरने वाला है. लिहाजा, अयोध्या से उप्र की जीत को आसान बनाने के लिए योगी को वहां से चुनावी मैदान में उतारने के संकेत हैं.

सूत्र बताते हैं कि इस बार मुख्यमंत्री के साथ दोनों उपमुख्यमंत्रियों को भी चुनाव लड़ाया जाएगा. यद्यपि उपमुख्यमंत्री दिनेश शर्मा लखनऊ से महापौर रहे हैं. इसलिए लखनऊ पश्चिम से उन्हें उतारा जा सकता है. उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य भी विधानसभा और लोकसभा का चुनाव लड़कर जीत चुके हैं, लिहाजा उन्हें भी मैदान में उतारने की तैयारी है. मौर्य को  कौशंबी के सिराथू सीट से प्रत्याशी बनाया जा सकता है. कौशंबी क्षेत्र में मौर्य की अच्छी पकड़ है. यह क्षेत्र प्रयागराज से लगा हुआ है. कौशंबी क्षेत्र भी पौराणिक महत्व का क्षेत्र है. मौर्य विश्व हिन्दू परिषद से जुड़े व्यक्ति हैं. इसलिए हिन्दुत्व वाले चेहरों को इस बार धार्मिक स्थलों से चुनाव लड़ाने की रणनीति है.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

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