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बेस्ट सेलर वाली हिन्दी का उत्सव 

मनोज कुमार

सितम्बर के आने की आहट के साथ ही हम हिन्दीमय हो जाते हैं. चारों तरफ हिन्दी दिवस, पखवाड़ा और महीना मनाये जाने का अनवरत सिलसिला जारी हो जाता है. सितम्बर माह बीतते ही हम वापस अपने ढर्रे पर आ जाते हैं जहां हिन्दी केवल औपचारिक रूप से हमारे साथ होती है. हिन्दी की अनिवार्यता का महीना सितम्बर का होता है. इसका अर्थ यह हुआ कि संविधान में 14 सितम्बर के दिन को मान्यता नहीं मिलती तो हिन्दी आज भी नेपथ्य में विचरण करता रहता और हम अंग्रेजी के मोहमाया में लिपटे होते. साल 1975 में नागपुर में विश्व हिन्दी सम्मेलन का आयोजन किया था और इसके बाद हर चार बरस के अंतराल में यह आयोजन विश्व मंच पर होता आ रहा है लेकिन ऐसी क्या मजबूरी है कि संयुक्त र



बिन हिंदी सब सून

संगीता पांडेय

जिस देश में यह कहावत प्रचलित हो कि चार कोस पर पानी बदले आठ कोस पर बानी ऐसे बहुभाषी देश को एकता के सूत्र में पिरोने का सामर्थ्य अगर किसी भाषा में है तो केवल हिंदी में ही है. हिंदी भाषा के सहारे पूरा राष्ट्र  एकजुट हो गया था, फिर वो चाहे  स्वतंत्रता आंदोलन हो या आजाद भारत. मगर ये अफसोसजनक तथ्य है कि स्वतंत्रता प्राप्त होने के बाद हमारे ही लोगों ने हिंदी को  लेकर राजनीति करनी शुरू कर दी.14 सितंबर 1949 को हिंदी को राजभाषा बनाया गया . तब पंडित नेहरू ने कहा था कि  हमने अंग्रेजी इस कारण स्वीकार की कि वह विजेता की भाषा थी. अंग्रेजी कितनी ही अच्छी हो किंतु इसे हम सहन नहीं कर सकते . सभा में राजभाषा का प्रस्ताव एनज



क्या संशोधित मोटर व्हीकल एक्ट से भ्रष्टाचार बढ़ेगा?

प्रदीप द्विवेदी

एक सितंबर से देश भर में संशोधित मोटर व्हीकल एक्ट लागू हो गया है, जिसमें भारी जुर्माने का प्रावधान किया गया है. पहले के मुकाबले, इसमें कई गुना ज्यादा जुर्माने का प्रावधान है. 
ऐसा कहा जा रहा है कि इससे दुर्धटनाओं पर रोक लगेगी, लेकिन राजस्थान सरकार के परिवहन मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास का मानना है कि ज्यादा जुर्माने से दुर्घटनाओं का कोई संबंध नहीं है, जुर्माना राशि बढ़ने से तो भ्रष्टाचार बढ़ेगा.. 
राजस्थान में संशोधित मोटर व्हीकल एक्ट को लागू तो कर दिया गया है, लेकिन जुर्माना राशि में बदलाव होगा. 
प्रताप सिंह खाचरियावास इस एक्ट को आम आदमी की आर्थिक क्षमता से जोड़ कर देखते हैं और उनका मानना है कि देश म



संस्कृति के भाल पर बदनुमा दाग है आत्महत्या

ललित गर्ग

हर रोज अखबारों की सुर्खियां बनती आत्महत्याओं की खबरें तथाकथित समाज विकास की विडम्बनापूर्ण एवं त्रासद तस्वीर को बयां करती है. आत्महत्या शब्द जीवन से पलायन का डरावना सत्य है जो दिल को दहलाता है, डराता है, खौफ पैदा करता है, दर्द देता है. इसका दंश वे झेलते हैं जिनका कोई अपना आत्महत्या कर चला जाता है, उनके प्रियजन, रिश्तेदार एवं मित्र तो दुःखी होते ही हैं, सम्पूर्ण मानवता भी आहत एवं शर्मसार होती है. इन डरावनी स्थितियों को कम करने के लिये एवं आत्महत्या की बढ़ती घटनाओं पर नियंत्रण पाने के लिये विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस प्रतिवर्ष 10 सितंबर को मनाया जाता है, जिसे विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के सहयोग से अंतर्रा



कहीं आने वाली मंदी का कारण हम तो नहीं बनने वाले ?

डाँ नीलम महेंद्र

इस समय भारत ही नहीं पूरे विश्व में आर्थिक मंदी की आहट की चर्चा है. भारत के विषय में अगर बात करें तो हाल ही में जारी कुछ आंकड़ों के हवाले से यह कहा जा रहा है कि भारत की अर्थव्यवस्था बेहद बुरे दौर से गुज़र रही है. केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय के अनुसार अप्रैल- जून तिमाही की आर्थिक विकास दर 5% रह गई है जो कि पिछले 6 सालों में सबसे निचले स्तर पर है. एक अर्थशास्त्री के लिए ये आंकड़े मायने रखते होंगे लेकिन एक आम आदमी तो साधरण मनोविज्ञान के नियमों पर चलता है. सरकार  कह रही है कि आने वाली वैश्विक मंदी का भारत में कोई खास असर नहीं होने वाला है अपितु इसके साथ ही इस वैश्विक मंदी का असर भारत पर नहीं हो इस के लिए अनेक उपाय भी कर रही है.,



न थकने वाले ऐसे करामाती

प्रकाश भटनागर

कमाल है यार! हम तो करामातों पर लिख-लिखकर थकते जा रहे हैं, मगर करामातिये हैं कि थकान की परछाई तक उनके आस-पास फटक नहीं पा रही है। लगता तो ऐसा है कि रिले रेस चल रही हो। एक रुका तो दूसरा शुरू हो गया। उमंग सिंघार की उमंग पर ब्रेक लगे तो ज्योतिरादित्य सिंधिया उनकी जगह सियासी ट्रैक पर दौड़ने लगे। अगली बार दो अन्य कांग्रेस विधायकों, की थी। अब भाई तुलसी सिलावट भी गंभीर आरोप से घिर गये हैं। कहा जा रहा है कि उनके सुपुत्र रिश्वत लेकर तबादले करवा रहे हैं। मध्यप्रदेश सरकार और सत्ता में यदि कहीं शांति है तो वह केवल और केवल शोभा ओझा के खोखले बयानों में ही दिखती है। बाकी तो हर ओर कोहराम मचा हुआ है। शोर इतना ज्यादा कि उनके बीच मुख्यम



अर्थव्यवस्था के संकट से उबरने की तैयारी

ललित गर्ग

भारत आर्थिक मंदी की मार से त्रस्त होता दिख रहा है, आर्थिक अंधेरा चहुं ओर परिव्याप्त हुआ है. अर्थव्यवस्था इस समय बहुत नाजुक दौर से गुजर रही है. बेरोजगारी बढ़ रही है, व्यापार ठप्प है, बाजार सूने हंै, बड़ी कम्पनियां अपने कर्मियों की छंटनी कर रही है, ऐसे कई आंकड़ें एशिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के चरमराने के संकेत दे रहे हैं. सरकारी आंकड़ों के अनुसार बेरोजगारी दर पिछले 45 सालों में सबसे नीचे के स्तर पर पहुंच चुकी है और ऑटोमोबाइल सेक्टर के साथ-साथ उत्पाद काफी समय से मंदी की ओर अग्रसर है. सरकार को अर्थव्यवस्था का संकट गहराने से पहले जल्द कदम उठाने होंगे और नाजूक होती स्थिति को देखते हुए यदि सरकार जागी है तो यह शुभ सं



ऐसी बीमारी का इलाज जरूरी

प्रकाश भटनागर

गजब ही कर दिया साध्वी प्रज्ञा ठाकुर ने. भाजपा नेताओं की सिलसिलेवार मृत्यु को टोना-तंत्र से जोड़ना उनकी सोच के निम्नतम स्तर को एक बार फिर उभार कर सामने ले आया है. क्या साध्वी मूलत: ऐसी ही हैं, या फिर उन्होंने खुद को ऐसे स्वरूप में ढाल दिया है. अपने अल्पज्ञान को हिंदुत्व की दुशाला में छिपाने के लिए. तथ्यों तथा साक्ष्यों के लिए अपनी न्यूनतम अक्ल को हिंदुवाद के आवरण में छिपाने के लिए. या फिर ऐसा है कि यह महिला हिंदुत्व के नाम इस तथ्य के संवाहक भाजपा एवं राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ को ही नुकसान पहुंचाने का प्रण लेकर सत्ता के मैदान में उतरी है. शर्म तो भाजपा के चयन तथा निर्णय, दोनो पर आ रही है

सांसद के चुनाव हेतु साध्वी क



दक्षिण में हिन्दी का विरोध क्यों?

ललित गर्ग

गत दिनों बंगलूरू के गणेशबाग में एक जैन आचार्य के चातुर्मास के लिए लगाए गए हिंदी बैनर कोे कथित तौर पर फाड देने एवं तोड़फोड़ करने की हिंसक घटना न केवल विडम्बनापूर्ण बल्कि एक राष्ट्र-विरोधी त्रासदी है. इनदिनों दक्षिण भारत में हिन्दी भाषा का विरोध करते हुए संघर्ष एवं आन्दोलन की स्थितियां देखने को मिल रही है. इस आन्दोलन के उग्र होने का कारण हाल ही में प्रस्तुत राष्ट्रीय शिक्षा नीति के मसौदे में दक्षिण के गैर-हिंदी भाषी राज्यों पर हिंदी थोपने का आरोप है. हालांकि इससे पहले की यह मुद्दा 1960 के दशक की भांति हिंदी विरोधी आंदोलन की तरह राजनीतिक आंदोलन का रूप लेता, केंद्र सरकार ने विवादित प्रावधान को खत्म कर दिया और आश्वा



निर्दोष कानूनी प्रक्रिया से साबित होते हैं प्रेस कांफ्रेंस से नहीं 

डाँ नीलम महेंद्र

गैरों में कहाँ दम था हमें तो अपनों ने लूटा, हमारी कशती वहाँ डूबी जहाँ पानी कम था.
 आज कांग्रेस के दिग्गज नेता और देश के पूर्व वित्तमंत्री चिदंबरम सीबीआई की हिरासत में कुछ ऐसा ही सोच रहे होंगे. क्योंकि 2007 के एक मामले में जब वे 2019 में गिरफ्तार होते हैं तो उसी के बयान के आधार पर जिसकी मदद करने का उनपर आरोप है. जी हाँ वो  इंद्राणी मुखर्जी  जो आज अपनी ही बेटी की हत्या के आरोप में जेल में हैं अगर इंद्राणी मुखर्जी आज जेल में नहीं होतीं तो भी क्या वो सरकारी गवाह बनतीं? जवाब हम सभी जानते हैं और शायद यह खेल जो खुल तो 2007 में ही गया था बोफ़ोर्स घोटाले, 2जी घोटाले, यूटीआइ घोटाले, ताज कॉरिडोर घोटाले, यूरिया घोटाले एयरबस घोटाले, स



अरुण कभी अस्त नहीं होता...

कुमार राकेश

66 वर्ष कोई उम्र नहीं होती.पर क्या करें अरुण जेटली की यही उम्र थी.वो हैं या नहीं है.इस पर मै भ्रमित हूँ  और शोकाकुल भी .अरुण जी क साथ ऐसा क्यों हुआ? कैसे हो गया.क्या जरुरी था ईश्वर के लिए.पर पता नहीं क्यों,लगता है कि ईश्वर की नगरी में भी अच्छे और अतिसंवेदनशील इंसानों की कमी हो गयी है?तभी हम देखते हैं अच्छे इंसानों को ईश्वर जल्दी अपने पास बुला लेता है. 
पर कहते हैं समय और प्रकृति पर किसी का नियंत्रण नहीं होता.हो भी नहीं सकता.पर क्या जिंदगी को आजतक किसी ने परिभाषित किया है? न तो किया है और न ही कर सकते हैं.पर हाँ ज़िन्दगी के दरम्यान किये कर्मो से ही उस जिंदगी को परिभाषित किया जा सकता है.जिंदगी और फ़िक्र का एक  अद्भुत रि



राहुल के लिए चिंतन का समय

प्रकाश भटनागर

तो अब, बारी प्रधानमंत्री के घोर विरोधी पी चिदंबरम की है. पी चिदंबरम भी नरेंद्र मोदी की प्रशंसा में सामने आ गये हैं. कश्मीर न सही, जनसंख्या नियंत्रण पर ही सही. स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री के भाषण की तीन बातों, छोटा परिवार, वेल्थ क्रिएटर्स का सम्मान तथा प्लास्टिक पर रोक, की उन्होंने खुलकर तारीफ की है. कई बार सोचता हूं कि इस कॉलम में फिल्मों का जिक्र शायद ठीक नहीं लगता होगा, लेकिन अक्सर होता यह भी है कि इसके माध्यम से उदाहरण पेश करने में सरलता हो जाती है. उस फिल्म का नाम था, एक रुका हुआ फैसला. ज्यूरी के सदस्य एक हत्या के मामले में निर्णय के लिए बैठते हैं. आरोपी को आरम्भ में केवल एक किरदार निर्दोष मानता है
बाकी सा



जम्मू-कश्मीर के अभ्युदय की नयी दिशाएं

ललित गर्ग

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जम्मू-कश्मीर को लेकर किए गए ऐतिहासिक, साहसिक एवं निर्णायक बदलावों पर राष्ट्र के नाम संबोधित करके आम-जनता की अनेक शंकाओं एवं दुश्चिताओं का निवारण करते हुए जम्मू-कश्मीर और साथ ही लद्दाख में एक नई शुरुआत होने की बात कही. निश्चित ही अनुच्छेद 370 और 35-ए हटाने का केन्द्र सरकार का निर्णय एक नये एवं परिपूर्ण भारत के निर्माण की दिशा में एक सार्थक पहल है. असल में देश को एक नयी आजादी का स्वाद मिला है. भारत के मस्तक एवं धरती के स्वर्ग को अशांत, आतंकग्रस्त एवं अविकसित रखने की कोशिश न केवल पाकिस्तान के द्वारा बल्कि हमारे अपने स्वार्थी राजनीतिज्ञों के द्वारा होती रही है. इस अशांति एवं धुंधलके को



कश्मीर: देश की चाहत, मोदी ने दी राहत 

कुमार राकेश

कहते हैं, जहाँ चाह वहां राह होती हैं.प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उस कहावत को चरितार्थ किया और महिमा मंडित भी.जो पिछले 66 वर्षों में नहीं हो सका वो महज़ 66 घंटों में हो गया.देश का अभिशाप धारा 370 और उपधारा 35A अब हमारे नहीं रहे.दिवंगत हो गए.इससे देश में एक अजीबोगरीब ख़ुशी,ताजगी और उत्साह का माहौल है.
देश का सरताज जम्मू-कश्मीर 5 अगस्त 2019 को वास्तव में आज़ाद हो गया.उन दरिंदों के चंगुल से.उन स्वार्थी भेड़ियों और भेदियों के चंगुल से.उन परिवारवाद के पोषक ठेकेदारों से.हर वक़्त दोस्ती की बातें कर नए नए दुश्मनी के दाँव खेलने वाला पाकिस्तान के शुभचिंतकों से.जी हाँ,हमारा जम्मू-कश्मीर आज़ाद हो गया.करीब 70 सालों की तथाकथित-जबरदस्ती



मध्यप्रदेश मनाएगा विश्व आदिवासी दिवस

मनोज कुमार

पूरी दुनिया के साथ ही मध्यप्रदेश भी विश्व आदिवासी दिवस मना रहा है.यह पहली बार हो रहा है कि जब मध्यप्रदेश के एक बड़े जनजातीय समाज को यह लग रहा है कि मुख्यधारा के समाज के साथ उनकी चिंता करने वाला भी कोई है.मध्यप्रदेश देश के एक बड़े आदिवासी प्रदेश के रूप में चिंहित है.आदिवासियों के विकास के लिए अनेक योजनाओं को क्रियान्वित किए जाने की बात की जाती रही है किन्तु वास्तविक लाभ पाने से ये लोग कोसों दूर रहे हैं.आदिवासियों को हक दिलाने की जो पहल मध्यप्रदेश में देखने को मिल रही है, उस कड़ी में विश्व आदिवासी दिवस को देख सकते हैं.इस दिन मध्यप्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों के साथ विकासखंड स्तर पर आयोजन की व्यापक पैमाने पर तैयारी



कश्मीर अभी इम्तिहान आगे और भी है!

डाँ नीलम महेंद्र

कश्मीर में कुछ बड़ा होने वाला है के सस्पेंस से आखिर पर्दा उठ ही गया. राष्ट्रपति के एक हस्ताक्षर ने उस ऐतिहासिक भूल को सुधार दिया जिसके बहाने पाक सालों से वहां आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देने में सफल होता रहा  लेकिन यह समझ से परे है कि कश्मीर के राजनैतिक दलों के महबूबा मुफ्ती फ़ारूख़ अब्दुल्ला सरीखे नेता और कांग्रेस समेत समूचा विपक्ष जो कल तक यह कहता था कि कश्मीर समस्या का हल सैन्य कार्यवाही नहीं है बल्कि राजनैतिक है, वो मोदी सरकार के इस राजनीतक हल को क्यों पचा पा रहे हैं. शायद इसलिए कि मोदी सरकार के इस कदम से कश्मीर में अब इनकी राजनीति की कोई गुंजाइश नहीं बची है. लेकिन क्या यह सब इतना आसान था ? घरेलू मोर्चे पर भ



अब जम्मू-कश्मीर की तकदीर और तस्वीर बदलेगी

ललित गर्ग

अपने अनूठे एवं विस्मयकारी फैसलों से सबको चैंकाने वाली नरेंद्र मोदी सरकार ने जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 को हटाने का फैसला लेकर एक बार फिर चैका दिया है. जिस साहस एवं दृढ़ता से उसने चुनाव जीतने के बाद 100 दिन के भीतर यह निर्णय लेने की बात कहीं, वैसा ही करके उसने जनता से किये वायदे को निभाया है. कश्मीर में पिछले कुछ दिनों से जारी हलचल से यह तो अन्दाज लगाया जा रहा था कि कुछ अद्भुत होने वाला है, लेकिन इतना बड़ा और ऐतिहासिक होने वाला है, इसका किसी को भान तक नहीं था. लेकिन गृह मंत्री अमित शाह ने एकसाथ चार प्रस्ताव लाकर सबको हैरान कर दिया. सभी राजनीतिक दलों को अपने स्वार्थों एवं राजनीतिक भेदों से ऊपर उठकर इस पहल का स्वागत और समर



आदमखोरों वाले जंगल में सफल मोदी

प्रकाश भटनागर

डिस्कवरी चैनल का एक रोचक कार्यक्रम है. पश्चिम बंगाल के सुदूर इलाके पर आधारित. जहां रहने वालों की आजीविका काफी हद तक शहद पर निर्भर है. भारी जोखिम भरा काम. उस सुंदरबन में जाने की अनिवार्यता, जहां बाघ का निवाला बन जाने का पूरा डर रहता है. अगला मुकाबला जानलेवा असंख्य मधुमक्खियों से. धुआं करते हुए उनके छत्ते खाली कराने होते हैं. ऐसा करने तथा छत्ते को तोडऩे से पहले आप गुस्से से भरी करोड़ों मधुमक्खियों के बीच घिरे रहते हैं. इस सबसे बचने के बाद कहीं जाकर शहद मिल पाता है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ऐसा ही कुछ; कर दिखाया है. तीन तलाक पर नये कानून को लागू करना आदमखोरों के जंगल में घुसकर खतरनाक मधुमक्खियों के बीच से शहद



उन्नाव की त्रासदी की उपजे सवाल

ललित गर्ग

उत्तर प्रदेश के उन्नाव में बलात्कार पीड़ित युवती और उसके परिवार के साथ जिस तरह की त्रासद एवं खौफनाक घटनाएं घटी हैं, वे न केवल देश के राजनीतिक चरित्र पर बदनुमा दाग है बल्कि एक कालिख पोत दी है कानून और व्यवस्था के कर्णधारों के मुंह पर. इससे बड़ी विडंबना और क्या हो सकती है कि एक तरफ बलात्कार के बाद युवती हर स्तर पर न्याय की गुहार लगा रही थी और दूसरी तरफ परिवार सहित उसे बेहद त्रासद हालात का सामना करना पड़ रहा था. आरोपी विधायक की ओर से लगातार इस पीडित युवती एवं उसके गरीब परिवार को तरह-तरह से धमकाया जा रहा था. मिलने वाली धमकियों के बावजूद थक कर युवती ने सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखा, लेकिन वहां भी इतनी अराज



ट्रिपल तलाक आस्था नही, अधिकारों की लड़ाई है...

डाँ नीलम महेंद्र

ट्रिपल तलाक पर रोक लगाने का बिल लोकसभा से तीसरी बार पारित होने के बाद  एक बार फिर चर्चा में है. हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने 2017 में ही इसे असंवैधानिक करार दे दिया था लेकिन इसे एक कानून का रूप लेने के लिए अभी और कितना इंतज़ार करना होगा यह तो समय ही बताएगा. क्योंकि बीजेपी सरकार भले ही अकेले अपने दम पर  इस बिल को लोकसभा में  82 के मुकाबले 303 वोटों से पास कराने में आसानी से सफल हो गई हो लेकिन इस बिल के प्रति विपक्षी दलों के रवैये को देखते हुए इसे राज्यसभा से  पास कराना ही उसके लिए असली चुनौती है. यह वाकई में समझ से परे है कि कांग्रेस समेत समूचा विपक्ष अपनी गलतियों से कुछ भी सीखने को तैयार क्यों नहीं है. अपनी वोटबैंक की राजन



सवाल दो विधायकों का नहीं है, सवाल सियासी जोड़तोड़ के खतरे का है?

अभिमनोज

एमपी में विधानसभा बजट सत्र के आखिरी दिन, भाजपा छोड़ कांग्रेस का साथ देने वाले दो विधायकों के राजनीतिक निर्णय से बीजेपी का केन्द्रीय नेतृत्व परेशान है? 
खबरें हैं कि.... बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह से फोन पर बातचीत कर अपनी नाराजगी व्यक्त की है!
हालांकि, इसके बाद मध्यप्रदेश बीजेपी के दफ्तर में शिवराज सिंह चौहान, राकेश सिंह, नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव आदि ने बैठक की और दोनों बागी विधायकों से बातचीत की कोशिश भी की, लेकिन कुछ खास नतीजा नहीं निकला.
इन विधायकों के सियासी व्यवहार को लेकर



भ्रष्टाचार का गरल: निजात नहीं सरल

ललित गर्ग

बहुजन समाज पार्टी के उपाध्यक्ष आनंद कुमार के पास गैर कानूनी तरीके से बनाई गई अकूत संपत्ति का जो खुलासा हो रहा है, वह इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि सत्ता की मदद से कैसे कोई व्यक्ति धनकुबेर बन सकता है, भ्रष्टाचार को पंख लगाकर आसमां छूते हुए नैतिकता की धज्जियां उड़ा सकता है. यह भारत के भ्रष्ट तंत्र की जीती जागती मिसाल है. चाणक्य ने कहा था कि जिस तरह अपनी जिह्ना पर रखे शहद या हलाहल को न चखना असंभव है, उसी प्रकार सत्ताधारी या उसके परिवार का भ्रष्टमुक्त होना भी असंभव है. जिस प्रकार पानी के अन्दर मछली पानी पी रही है या नहीं, जानना कठिन है, उसी प्रकार शासकों या उनके परिवारजनों के पैसा लेने या न लेने के बारे में जानना भी असंभ



देवालय जाना हो तो आजाद का देवालय जाइए

मनोज कुमार

तारीखों के पन्ने में जुलाई 23 तारीख भी दर्ज है लेकिन यह तारीख पूरे भारत वर्ष के लिए गौरव की तारीख है. इस दिन धरा में एक ऐसे बच्चे की किलकारी गूंजी थी जिसने भारत वर्ष को अंग्रेजों के चंगुल से मुक्त करा दिया. स्वयं शहीद होकर इतिहास के पन्ने पर स्वयं का नाम आजाद लिख गए. यह बच्चा कोई और नहीं बल्कि जिन्हें कभी कोई चंद्रशेखर तिवारी के नाम से जानते रहे होंगे, आज वे चंद्रशेखर आजाद हैं और इस दुनिया में जब तक सूरज-चांद रहेगा, वे आजाद ही बने रहेंगे. हैं. चूंकि वे नाम से आजाद थे, इसलिए किसी राज्य की सीमा से वे बंधे हुए नहीं थे. अंग्रेज शासित भारत में पले बढ़े आजाद की रगों में शुरू से ही अंग्रेजों के प्रति नफरत भरी हुई थी. मध्यप्रदे



वजह नरेंद्र मोदी के गुस्से की

प्रकाश भटनागर

नरेंद्र मोदी दूसरी बार प्रधानमंत्री बनने के बाद से रह-रहकर गुस्से में आ रहे हैं.गुस्सा कारगर हो या नहीं, यह अलग बात है.लेकिन उनके इस भाव की विवेचना करना तो बनता है.ताजा मामला यह के प्रधानमंत्री ने संसद में पार्टी के जन प्रतिनिधियों की अनुपस्थिति पर नाराजगी जताई.उनकी सूची मांगी.खबरों के अनुसार उन्होंने यह तक कहा कि जो लोग संसद में नहीं आ रहे, उन्हें ‘ठीक कर दिया जाएगा.’ यकीनन मामला संसद की बैठकों से विरत रहने की प्रवृत्ति के बढ़ने का ही होगा. अब इस लोकसभा चुनाव के नतीजों की ईमानदारी से समीक्षा करें.
आप पाएंगे कि बहुत बड़ी संख्या ऐसे भाजपा सांसदों की है, जो सिर्फ और सिर्फ मोदी लहर के चलते संसद तक पहुंच गये.यानी



लोकसभा की शुरुआत सही दिशा में 

ललित गर्ग

हर राष्ट्र का सर्वाेच्च मंच उस राष्ट्र की पार्लियामेंट होती है, जो पूरे राष्ट्र के लोगों द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों द्वारा संचालित होती है, राष्ट्र-संचालन की रीति-नीति और नियम तय करती है, उनकी आवाज बनती है व उनके ही हित में कार्य करती है.राष्ट्र के व्यापक हितों की सुरक्षा करती है.भारत का लोकतंत्र न केवल सशक्त है बल्कि अनूठा एवं प्रेरक है, उसका सर्वोच्च मंच लोकसभा है.इनदिनों लोकसभा के सत्र की कार्यवाही नियोजित एवं सुचारू ढंग से चल रही है उसके लिए नये लोकसभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला को श्रेय दिया जा सकता है.उनके अनुभव एवं क्षमताएं सदन को नई दृष्टि देने के लिए तत्पर है.उनके सदन संचालन की दक्षता एवं कौशल की ताजी ह



गुरुकुल से स्मार्ट क्लास तक

मनोज कुमार

अनादिकाल से चली आ रहे गुरु पूर्णिमा मनाने की परम्परा को हमने जीवित रखा है लेकिन गुरु पूर्णिमा के महात्म को हम भूल चुके हैं. गुरु शिष्य परम्परा क्षरित होने के कगार पर है. इसका कारण समाज में नैतिक पतन है. शिक्षा जहां से अज्ञान का अंधेरा विलोपित होता है, उस शिक्षा ने व्यवसाय का रूप धर लिया है. शिक्षा अब ज्ञान और प्रकाशवान बनने के लिए नहीं है बल्कि शिक्षा अब रोजगार पाने का एक माध्यम है. जितनी ऊंची शिक्षा, उतने रोजगार के अवसर. शिक्षा के इस व्यवसायीकरण ने ही शिक्षा से संस्कार और भाषा को विलोपित करने में कोई कसर नहीं छोड़ा है. संस्कार के तिरोहित होते ही नैतिक बल स्वयं ही हाशिये पर चला गया है. अब हमारे साथ कोई वेदव्यास नह



स्वर्णिम भविष्य के स्वप्न दिखाती नयी शिक्षा नीति 

डाँ नीलम महेंद्र

बच्चे देश का भविष्य ही नहीं नींव भी होते हैं और नींव जितनी मजबूत होगी इमारत उतनी ही बुलंद होगी. इसी सोच के आधार पर नई शिक्षा नीति की रूप रेखा तैयार की गई है. अपनी इस नई शिक्षा नीति को लेकर मोदी सरकार एक बार फिर चर्चा में है. चूंकि भारत एक लोकतांत्रिक देश है और लोकतंत्र में सबको अपनी बात रखने का अधिकार है जाहिर है इसके विरोध में स्वर उठना भी स्वाभाविक था, तो अपेक्षा के अनुरूप स्वर उठे भी. लेकिन मोदी सरकार इस शिक्षा नीति को लागू करने के लिए कितनी दृढ़ संकल्प है यह उसने अपनी कथनी ही नहीं करनी से भी स्प्ष्ट कर दिया है. दरअसल उसने इन विरोध के स्वरों को विवाद बनने से पहले ही हिन्दी को लेकर अपने विरोधियों की संकीर्ण सोच को अ



बिहार: एक ऐसा इंजीनियर जो 30 सालों से तीन जगह करता रहा सरकारी नौकरी, अब हुआ खुलासा, फरार

मामूली विवाद में भाई को पाटी व लोहे की खंती से पीट-पीटकर मार डाला

बिहार शिक्षा विभाग की वेबसाइट हैक, तुर्की के हैकर ने लिखा- We Love You Pakistan

पटना में अनुच्छेद 370 पर भिड़ंत, पुलिस ने भांजी लाठी, सिर फटा

लालू के करीबी अली अशरफ ने छोड़ा राजद का साथ, जदयू में हुए शामिल

चारा घोटाला में नया खुलासा- भैंसों के सींग की मालिश पर खर्च किए गए 16 लाख रुपये

टिकटॉक पर वीडियो बनाना पड़ा महंगा, बिहार बाढ़ में बहा शख्स

एल्केम ग्रुप ऑफ कंपनी के मालिक एवं देश के सबसे बुजुर्ग अरबपति संप्रदा सिंह का निधन

स्पाइसजेट की फ्लाइट में 6 महीने की बच्ची मौत

विधानसभा में उठा सहारा इंडिया का मामला, पैसे वापस नहीं करने पर पर दर्ज होगा केस



कॉलेज ऑफ कॉमर्स का स्ट्राइड 2014


ग्लैमर के पीछे की दर्दनाक दास्तान


भाजपा के भीष्मपितामह कैलाशपति मिश्र


अंग्रेजों के समय से चल रही लालकिला और जनता एक्सप्रेस जुलाई से नहीं चलेगी


हिन्‍दी के विद्यार्थियों की रिपोर्ट जाएगी यूजीसी


महात्मा गांधी सेतु का मरम्मत करायेगा केन्द्र


युवा कथाकारों की 27 कहानियों के संकलन का विमोचन


दानापुर न्यायालय हुआ कम्प्युटरीकृत, अब नहीं लगाना पड़ेगा पेशकार का चक्कर


धूम-धाम से मनाया गया आर्ट आॅफ लिविंग के प्रणेता परम पूज्य श्री श्री रविशंकर जी का 58वां जन्मोत्सव


आकाशवाणी पटना के उर्दू बुलेटिन के रजत जयंती पर मीडिया में उर्दू रेडियो बुलेटिन की भूमिका पर चर्चा


अपने बयान से पलटे सीपी कहा, बयान को तोड़मरोड़ कर पेश किया गया


सांप्रदायिकता और जातिवाद बर्बाद कर दिया देश को


कॉलेज ऑफ कॉमर्स का स्ट्राइड 2014


ग्लैमर के पीछे की दर्दनाक दास्तान


भाजपा के भीष्मपितामह कैलाशपति मिश्र


अंग्रेजों के समय से चल रही लालकिला और जनता एक्सप्रेस जुलाई से नहीं चलेगी


हिन्‍दी के विद्यार्थियों की रिपोर्ट जाएगी यूजीसी


महात्मा गांधी सेतु का मरम्मत करायेगा केन्द्र


युवा कथाकारों की 27 कहानियों के संकलन का विमोचन


दानापुर न्यायालय हुआ कम्प्युटरीकृत, अब नहीं लगाना पड़ेगा पेशकार का चक्कर


धूम-धाम से मनाया गया आर्ट आॅफ लिविंग के प्रणेता परम पूज्य श्री श्री रविशंकर जी का 58वां जन्मोत्सव


आकाशवाणी पटना के उर्दू बुलेटिन के रजत जयंती पर मीडिया में उर्दू रेडियो बुलेटिन की भूमिका पर चर्चा


अपने बयान से पलटे सीपी कहा, बयान को तोड़मरोड़ कर पेश किया गया


सांप्रदायिकता और जातिवाद बर्बाद कर दिया देश को