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अपने मौलिक नाम से जाने जाना गौरव का विषय है,विवाद का नहीं

डाँ नीलम महेंद्र

बरसों पहले अंग्रेजी के मशहूर लेखक शेक्सपियर ने कहा था,  व्हाट इस इन द नेम? यानी नाम में क्या रखा है? अगर गुलाब का नाम गुलाब न होकर कुछ और होता,  तो क्या उसकी खूबसूरती और सुगंध कुछ और होती? आज एक बार फिर यह प्रश्न प्रासंगिक हो गया है कि क्या नाम महत्वपूर्ण होते हैं? लेकिन इस पूरे प्रकरण में खास बात यह है कि नाम बदलने पर विरोध के स्वर उस ओर से ही उठ रहे हैं जो भारतीय के बजाए विदेशी लेखकों,  उनके विचारों और उनकी संस्कृति से अधिक प्रभावित नजर आते हैं.

खैर मुद्दा यह है कि उत्तर प्रदेश सरकार के ताजा फैसले के अनुसार, इलाहबाद अब अपने पुराने नाम प्रयागराज से जाना जाएगा. योगी सरकार का यह कदम अप्रत्याशित नहीं है और ना



भारतीय बौद्धिक संपदा को छीनने की कोशिश रावण के अंत की मुख्य वज़ह थी? 

गिरीश बिल्लोरे “मुकुल”

एक था रावण बहुत बड़ा प्रतापी यशस्वी राज़ा, भारत को ही नहीं संपूर्ण विश्व तक विस्तारित करना उसका लक्ष्य था. उसका साम्राज्य वयं-रक्षाम का उदघोष करता.यह तथ्य किशोरावस्था में मैंने  आचार्य चतुरसेन शास्त्री के ज़रिये  जाना था. रावण के पराक्रम उसकी साम्राज्य व्यवस्था को. 
ये अलग बात है कि उन दिनों मुझमें उतनी सियासी व्यवस्था की समझ न थी. पर एक सवाल सदा खुद  पूछता रहा- क्या वज़ह थी कि राम ने रावण को मारा ? 
राम  को हम भारतीय जो  आध्यात्मिक धार्मिक भाव से देखते हैं  राम को मैने कभी भी एक राजा के रूप में आम भारतीय की तरह मन में नहीं बसाया. मुझे उनका करुणानिधान स्वरूप ही पसंद है. किंतु जो अधिसंख्यक आबादी के लिये जो करुण



दशहरा है,शक्ति की साधना का पर्व 

ललित गर्ग

दशहरा-विजयदशमी हिन्दुओं का एक प्रमुख त्योहार है.आश्विन शुक्ल दशमी को यह त्योहार बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है.यह त्योहार भारतीय संस्कृति में वीरता का पूजक, शौर्य का उपासक प्रतीक पर्व है.व्यक्ति और समाज के रक्त में वीरता प्रकट हो, इसलिए दशहरे का उत्सव रखा गया है.भगवान राम ने इसी दिन रावण का वध किया था.इसे असत्य पर सत्य की विजय के रूप में मनाया जाता है.इसीलिए इस दशमी को विजयादशमी के नाम से जाना जाता है.यह केवल भौतिक आकर्षण का ही नहीं है बल्कि प्रेरणा से जुड़ा पर्व है.भारत के लगभग सभी भागों में इस पर्व को एक महान् उत्सव के रूप में मनाया जाता है.


दशहरा बुराइयों से संघर्ष का प्रतीक है, आज भी अंधेरों से संघर्ष करने



स्वामी सानंद का गंगा स्वप्न,सरकार और समाज

अरुण तिवारी

20 जुलाई, 1932 को जन्मे प्रो. गुरुदास अग्रवाल जी ने 11 अक्तूबर, 2018 को अपनी देहयात्रा पूरी की. वह पश्चिमी उत्तर प्रदेश के ज़िला मुजफ्फरनगर के कांधला में जन्मे. उत्तराखण्ड के ज़िला ऋषिकेश के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान  में उन्होने अंतिम सांस ली. 

उनकी एक पहचान जी डी के रूप में है और एक स्वामी श्री ज्ञानस्वरूप सानंद के रूप में. गंगा की अविरलता के अपने संघर्ष को धार देने के लिए उन्होने शारदापीठ एवम् ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य श्री स्वरूपानंद सरस्वती जी के शिष्य प्रतिनिधि स्वामी श्री अविमुक्तेश्वरानंद जी से दी़क्षा ली और एक सन्यासी के रूप में उनका नया नामकरण हुआ - स्वामी श्री ज्ञानस्वरूप सानंद. 



भूख एक लाइलाज बीमारी

हेमेन्द्र क्षीरसागर

 विचारणीय: कोई खां-खां के मरता है तो भूख रहकर यह दंतकथा प्रचलित होने के साथ फलीभूत भी है. ये दोनों ही हालात में भूख को लाइलाज बीमारी बनाने में कोई कोर कसर नहीं छोड रहे है. लिहाजा, भूख और कुपोषण एक सिक्के के दो पहलु हैं जहां तक कुपोषण की बात करे तो कुपोषण एक बुरा पोषण होता हैं. इसका संबंध आवश्यकता से अधिक हो या कम किवां अनुचित प्रकार का भोजन, जिसका शरीर पर कुप्रभाव पडता हैं. वहीं बच्चों में कुपोषण के बहुत सारे लक्षण होते है, जिनमें से अधिकांश गरीबी, भूखमरी और कमजोर पोषण से संबंधित हैं. ऐसे बच्चे अपनी पढाई निरंतर जारी नहीं रख पाते और गरीबी के दोषपूर्ण चक्र में फंस जाते हेैं. कुपोषण का प्रभाव प्रौढावस्था तक अपनी जड



मी टू की आवाज को सुनें

ललित गर्ग

इनदिनों देश में नारी शक्ति की प्रतीक समझी जाने वाली देवी मां दुर्गा की उपासना हो रही है और इसी समय नारी का एक तबका यौन शोषण के मामले पर एकजुट हो रहा है. इन्हीं यौन शोषण के मामलों को उजागर करने के लिए अमेरिका में मी टू नाम से शुरू हुआ अभियान दुनिया के अन्य देशों में होता हुआ भारत में भी हलचल पैदा कर रहा है. एक फिल्म अभिनेत्री के बयान से शुरू हुआ यह किस्सा भारत में इनदिनों सुर्खियां बना हुआ. विभिन्न क्षेत्रों से जुड़ी स्त्रियां अपने साथ हुए यौन अत्याचार के ब्योरे दे रही हैं और कुछेक मामलों में दोषी को समाज से बहिष्कृत करने या उसे सजा देने की मांग भी कर रही हैं. इस तरह फिल्म, टीवी, मॉडलिंग, पत्रकारिता और साहित्य से लेक



दिल नहीं दिमाग से करें मतदान

हेमेन्द्र क्षीरसागर

भारत दुनिया का सबसे बडा लोकतांत्रिक देश है, देश की लोकतांत्रिक प्रणाली को विश्व में बडे सम्मान, स्वंछच्दता के साथ देखा जाता हैं. इस महान लोकतांत्रिक पंरपरा के महायज्ञ का आगाज चुनाव आयोग ने कर दिया. दौर में पांच राज्यों में सम्पन्न होना हैं, जिसमें सभी मतदाताओं को अपनी मतदान रूपी आहुती देना है. पुण्य स्वरूप हमारा लोकतंत्र और अधिक मजबूत, सर्वस्पर्शी बनेगा. मतदान से ही अपने जनप्रतिनिधी को चुनेगें, वह जनप्रतिनिधी प्रदेशों की नई सरकारों का गठन करेगें. नई सरकारों से हमारी बहुत सारी आशाऐं, अपेक्षाऐं, जरूरतें जुडी हुई हैं. यह सरकारें प्रदेश के विकास, जनकल्याण और देश की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण हैं. आखिर यह सब संभव



गठबंधन की राह में रोड़ा बनते छोटे दल

सुरेश हिन्दुस्तानी

देश में 2019 में होने वाले लोकसभा चुनावों के लिए बनने वाले विपक्षी गठबंधन के प्रयासों में हर बार कोई न कोई राजनीतिक दल दरार पैदा कर रहा है. विशेषकर छोटे राजनीतिक दलों की महत्वाकांक्षाओं ने प्रस्तावित गठबंधन की राह में बहुत बड़ा पेच खड़ा कर दिया है. एक प्रकार से देखा जाए तो इस राजनीतिक गठबंधन की दिशा में कांग्रेस पर कोई भी दल विश्वास नहीं कर रहा. जब क्षेत्रीय दल कांग्रेस को अविश्वसनीयता की श्रेणी में रखकर व्यवहार कर रहे हैं, तब कांग्रेस को भी अपनी राजनीतिक हैसियत का अंदाजा लगा लेना चाहिए. कांग्रेस के बारे में इस प्रकार की राजनीतिक धारणा बनती जा रही है कि कांग्रेस को अपनी स्थिति सुधारने के लिए छोटे दलों का मुंह ताक



अलग मन मिजाज वाली मीडिया की उम्मीद ही क्यों कर रहे हैं आप ?

सुरेंद्र किशोर

आज न सिर्फ एक नेता दूसरे को चोर,कुत्ता और नीच 
कह रहा है,बल्कि एक टी.वी.एंकर दूसरे एंकर को गुंडा भी कह रहा है.
साठ के दशक से राजनीति व मीडिया को देख-समझ रहा हूं.राजनीति की शब्दावली में भले पहले  इतनी नीचता  न थी,पर मीडिया को तो हर दम बंटा हुआ ही देखा.
बिहार के जेपी आंदोलन के दौरान मीडिया बंटा हुआ था.
बोफर्स प्रकरण के दौरान भी वही हाल था.आपातकाल तो अपवाद था.उस समय तो सब धान साढ़े बाइस पसेरी था.
याद कीजिए साठ -सत्तर के दशक को और बंबई के ब्लिट्ज और करंट के तेवर को.दोनों साप्ताहिक टैबलाॅइड.
  एक घोर वामपंथी तो दूसरा घनघोर दक्षिणपंथी.
वह भी शीत युद्ध के जमाने में.
एक चिग्घाड़ता था तो दूसरा फु



विवादित बयानों की राजनीति बन्द हो

ललित गर्ग

दिल्ली के मुख्यमंत्री का गाय को लेकर दिया गया विवादित बयान अत्यन्त निराशाजनक, अमर्यादित एवं भड़काऊ है. दो दिन पूर्व उनकी ओर से लखनऊ में शुक्रवार को देर रात हुए विवेक तिवारी हत्याकांड को मजहबी रंग देने वाले बयान को भी उचित नहीं माना जा सकता, इस बयान में पुलिसकर्मियों की गोली के शिकार हुए एप्पल के एरिया मैंनेजर को हिन्दू बताते हुए उन्होंने धार्मिक बयानबाजी कर उसे राजनीतिक रंग देने की कोशिश की है. इस तरह आक्रामक भाषा का प्रयोग उनके लिये कोई नई बात नहीं हैं. लेकिन ऐसे भड़काऊ एवं अशिष्ट बयानों से देश में अराजकता का माहौल निर्मित होता है. धार्मिक भावनाएं भड़काकर किसी धर्म विशेष के लोगों को अपने पक्ष में करने की कोशि



क्यों मुद्दा गौण हो जाता है और राजनीति बड़ी? 

डाँ नीलम महेंद्र

देर आयद दुरुस्त आयद !

सुप्रीम कोर्ट के हाल के फैसलों से-देश का-आम आदमी कुछ बातें सोचने के लिए मजबूर हो गया-है. आईये समझते-हैं कैसे ? इसे समझने के लिए कोर्ट के कुछ ताज़ा फैसलों पर एक नज़र डालते हैं ,

1. सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की पीठ ने 4:1 के बहुमत से सबरीमाला मन्दिर में हर उम्र की स्त्री को प्रवेश का अधिकार देकर सालों पुरानी धार्मिक प्रथा का अंत कर दिया है. लेकिन बेंच में शामिल एकमात्र महिला जज जस्टिस इंदु मल्होत्रा ने पाबंदी का समर्थन करते हुए कहा कि धार्मिक रीति रिवाजों में कोर्ट को दखल नहीं देना चाहिए.

2. इससे दो दिन पहले राम मंदिर मुकदमे पर सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय पीठ ने 2:1 के बहुमत से अपना ताजा फैसल



पीएम नरेन्द्र मोदी की टीम ने राहुल गांधी को बनाया प्रमुख राष्ट्रीय नेता?

प्रदीप द्विवेदी

कांग्रेस और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को पीएम नरेन्द्र मोदी की टीम का आभारी होना चाहिए, जिसने वर्ष 2014 में कांग्रेस की नाकामयाबी के बावजूद कभी कांग्रेस और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को पॉलिटिकल फोकस से बाहर होने नहीं दिया? सोचो, वर्ष 2014 के आम चुनाव में पीएम मोदी की टीम ने जो वादे किए थे, वो पूरे कर देते? जो सपने दिखाए थे वो साकार कर देते? तो, राहुल गांधी की बोलती बंद हो जाती.

राहुल गांधी को जितनी घेरने की कोशिश की गई? जितना अज्ञानी साबित करने का प्रयास हुआ? जितना अपरिपक्व घोषित किया गया? उसका नतीजा यह रहा कि जनता ने राहुल गांधी पर की गई नकारात्मक टिप्पणियों पर ध्यान देना बंद कर दिया.
राहुल गांधी के सियासी



वर्जनाओं के विरुद्ध खड़े : सोच और शरीर

गिरीश बिल्लोरे “मुकुल”

लाइफ़-स्टाइल में बदलाव से ज़िंदगियों में सबसे पहले आधार-भूत परिवर्तन की आहट के साथ कुछ ऐसे बदलावों की आहट सुनाई दे रही है जिससे सामाजिक व्यवस्था में आमूल-चूल परिवर्तन अवश्यंभावी है. कभी लगता था मुझे भी  कि सामाजिक-तानेबाने के परम्परागत स्वरूप को आसानी से बदल न सकेगा . किंतु पिछले दस बरसों में जिस तेजी से सामाजिक सोच में बदलाव आ रहे हैं उससे तो लग रहा कि बदलाव बेहद निकट हैं शायद अगले पांच बरस में... कदाचित उससे भी पहले .कारण यह कि अब जीवन को कैसे जियें ? सवाल नहीं हैं अब तो सवाल यह है कि जीवन का प्रबंधन कैसे किया जाए. कैसे जियें के सवाल का हल सामाजिक-वर्जनाओं को ध्यान रखते हुए खोजा जाता है जबकि जीवन के प्रबंधन



महिलाओं को भी बदलना होगा अपना दृष्टिकोण 

डाँ नीलम महेंद्र

अभी हाल ही में सोशल मीडिया पर एक वीडियो जिसका शीर्षक था, रन लाइक अ गर्ल  अर्थात एक लड़की की तरह दौड़ो, काफी सराहा गया जिसमें 16- 28 साल तक की लड़कियों या फिर इसी उम्र के लड़कों से जब लड़कियों की तरह  दौड़ने के लिए कहा गया तो लड़के तो छोड़िए लड़कियाँ भी अपने हाथों और पैरों से अजीब अजीब तरह के ऐक्शन करते हुए दौड़ने लगीं. कुल मिलाकर यह बात सामने आई कि उनके अनुसार लड़कियों की तरह दौड़ने का मतलब कुछ अजीब तरीके से  दौड़ना होता है. लेकिन जब एक पाँच साल की बच्ची से पूछा गया कि अगर तुमसे कहा जाए कि लड़कियों की तरह दौड़ कर दिखाओ तो तुम कैसे दौड़ोगी? तो उसका बहुत ही सुन्दर जवाब था, अपनी पूरी ताकत और जोश के साथ  .
मतलब साफ़ है कि एक पांच साल की



सौदे की तथ्यात्मक सच्चाई ही बचा सकती है मोदी पर भरोसा...

प्रकाश भटनागर

अब इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि यूपीए सरकार के दौरान रफाएल को लेकर भारत और फ्रांस के बीच गोपनीयता को लेकर कोई समझौता हुआ था.अगर फ्रांस के पूर्व राष्टपति फ्रांस्वा ओलांद ने कहा है कि करोड़ों डालर के रफाएल सौदे में अनिल अंबानी को भारत सरकार ने आफसेट पार्टनर के तौर पर फ्रांस पर थोपा था.तो भारत के वर्तमान प्रधानमंत्री को इस सौदे की सारी सचाई देश के सामने रखने में कहां से कोई अड़चन आ सकती है? हां, अगर भूतपूर्व होकर ही उन्हें भी अपने दामन पर लगे दागों की सफाई करनी है तो बात अलग है.हालांकि ओलांदे के बयान के बाद फ्रांस और भारत सरकार की इस मामले पर सफाई भी आ गई है.खुद ओलांदे को भी कहना पड़ा कि मीडिया ने उन्हें गलत तरीके से प



संघ की दस्तक सुनें

ललित गर्ग

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का तीन का भविष्य का भारत  विषयक विचार अनुष्ठान अनेक दृष्टियों से उपयोगी एवं प्रासंगिक बना. दिल्ली के विज्ञान भवन में देश के प्रमुख बुद्धिजीवियों और लगभग सभी दलों के प्रमुख नेताओं को आमंत्रित कर उन्हें न केवल संघ के दृष्टिकोण से अवगत कराया गया बल्कि एक सशक्त भारत के निर्माण में संघ की सकारात्मक भूमिका को भी प्रभावी ढ़ंग से प्रस्तुत किया. यह एक दस्तक है, एक आह्वान है जिससे न केवल सशक्त भारत का निर्माण होगा, बल्कि इस अनूठे काम में लगे संघ को लेकर बनी भ्रांतियां एवं गलतफहमियों के निराकरण का वातावरण भी बनेगा. प्रश्न है कि संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत को आखिर क्या जरूरत आ पड़ी कि उन्



माना कि सत्तर प्रतिशत देश भगवा है, लेकिन कलर अभी कच्चा है?

अभिमनोज

तीन प्रमुख राज्यों- एमपी, राजस्थान और छत्तीसगढ़ के विधानसभा चुनाव और आम चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में पीएम नरेन्द्र मोदी और पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने पार्टी नेताओं को भरोसा दिलाया कि चुनाव में उनकी जीत पक्की है? और जनता मौकापरस्त महागठबंधन को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है! 

खबर है कि... कार्यकारिणी में राजनीतिक प्रस्ताव के तहत- विजन 2022, रखा गया. प्रस्ताव में कहा गया है कि 2022 तक देश से जातिवाद, संप्रदायवाद, आतंकवाद और नक्सलवाद खत्म होगा, लेकिन राजनीतिक प्रस्ताव में राम मंदिर का जिक्र नहीं है? इस मौके पर अमित शाह ने चुनावी जीत के मंत्र दिए, उन्होंने कहा कि- 22 करोड़



मोदी मैजिक खत्म, बाबा और प्रादेशिक सरकारें उलझी जादू के जंजाल में?

प्रदीप द्विवेदी

मोदी मैजिक खत्म हो गया है, लेकिन इस जादू के जंजाल में बाबा रामदेव और एमपी, राजस्थान जैसी भाजपा सरकारें उलझ गई हैं?
बाबा, आम चुनाव- 2014 से पहले पीएम नरेन्द्रभाई मोदी की केन्द्र में सरकार बनवाने के लिए 35 रुपए लीटर पेट्रोल और 400 रुपए में गैस सिलेंडर का सपना दिखा रहे थे तो करोड़ों रुपयों का कालाधन देश में लाने का भरोसा भी दिला रहे थे? अब वही, आप की अदालत जैसे बाबा रामदेव के वीडियो सोशल मीडिया पर परेशानी का सबब बन रहे हैं, बाबा बेवजह सियासी शीर्षासन की मुद्रा में आ गए हैं! अब बाबा ठहरे योगी, पेट की गैस का समाधान तो कर सकते हैं, केन्द्र सरकार में पीएम तो हैं नहीं जो गैस सिलेंडर की समस्या सुलझा दें? वे किससे जाकर कहें कि वे भी



न ठाकुर रह गई, न दलित रह गई कांग्रेस 

प्रकाश भटनागर

इस कहानी के दोनों पात्रों में विरोधाभास के बावजूद समानता है.दोनों को मध्यप्रदेश की कांग्रेस माना जा सकता है.तो कहानी ये है कि एक ठाकुर साहब थे.उनके घर के सामने से एक दलित पगड़ी पहन कर गुजर रहा था.ठाकुर साहब को भला कहां बर्दाश्त होता.उन्होंने दलित को टोका, पगड़ी पहन कर तो तू मेरे सामने से गुजर नहीं सकता। दलित ने दलील दी, ठाकुर साहब, जमाना बदल गया है अब आजकल ऐसा नहीं होता है। ठाकुर ने तलवार निकाल ली.कहा, तेरी तो पगड़ी भी गर्दन के साथ मेरे कदमों में होगी.दलित ने कहा, यह तो अन्याय है, मौका मुझे भी मिलना चाहिए.मैं भी घर से तलवार लेकर आता हूं। ठाकुर राजी हो गया.उधर दलित तलवार लेने घर गया और इधर ठाकुर चिंता में.कहीं इसने मुझे हर



राष्ट्रभाषा को तरसती हिंदी  

संगीता पांडेय

हिंदुस्तान हिंदी से है , हिन्द से है और जब हिन्द में ही हिंदी की दुर्दशा हो तो लगता है जैसे किसी देश की आत्मा ही नहीं है. देश को एकसूत्र में जोड़कर रखने वाली एक भाषा होती है जो देश का हरेक व्यक्ति जानता समझता है और संवाद के माध्यम से वो अपने देश में होने का अहसास पाता  है. हिंदी भारतीय भाषाओं में सबसे ज्यादा बोली-समझी जाने वाली भाषा है और ये कोई आज से नहीं है बल्कि संस्कृतनिष्ठ भारत के समय से इसका विकास निर्बाध गति से हुआ है. भारतीय इतिहास में देवनागरी लिपि को करीब दस हजार साल पहले का बताया गया है , इस लिपि के अनुसार भारत में ही कई भाषाओं का विकास हुआ जिसमें हिंदी सबसे बड़ी भाषा के रूप में रही.  देवनागरी लिपि को ही एक



केवल भारत बंद समाधान नहीं है!

ललित गर्ग

पेट्रोल और डीजल के बढ़ते मूल्यों को लेकर आम जनता परेशान है, उसका दम-खम सांसें भरने लगा है, जीवन दुश्वार हो गया है और इन स्थितियों को लेकर राजनीतिक दलों यानी विपक्षी दलों का सक्रिय होना स्वाभाविक ही है. जब पेट्रोल और डीजल के लगातार बढ़ते दामों के बावजूद केंद्र सरकार कोई कदम उठाती नहीं दिख रही हो तो विपक्ष का हमलावर होना भी समझ आता है, लेकिन इस हमले का स्वरूप भारत बंद की शक्ल में ही क्यों हो? विपक्षी दल और खासकर कांग्रेस यह स्पष्ट करे कि इस तरह भारत बंद करने से उसे या फिर आम जनता को क्या हासिल होने वाला है?  केवल  भारत बंद  से जनता की सहानुभूति पाने का रास्ता अनेक प्रश्नों को खड़ा कर रहा है. बंद और हड़ताल जैसे तरीक



पैरेरल यूनिवर्स हो सकते हैं ?

गिरीश बिल्लोरे “मुकुल”

पैरेलल यूनिवर्स की परिकल्पना और उस यूनिवर्स में पहुंचने के तौर-तरीके के संबंध में जो बात विजुअल मीडिया पर मौजूद है उस पर चर्चा करना चाहता हूं पैरेलल यूनिवर्स के संबंध में साफ कर देना चाहता हूं कि पैरेलल यूनिवर्स किसी भी स्थिति में मौजूद तो है असंख्य पैरेलल यूनिवर्स मौजूद है न की हमारे सौरमंडल से जुड़ा हुआ कोई एक मात्र सौरमंडल लेकिन एक सौरमंडल से दूसरे सौरमंडल में प्रवेश के कोई शॉर्टकट रास्ता है यह समझने के लिए ब्लैक होल थ्योरी को बेहद महत्वपूर्ण माना गया है .
मेरे हिसाब से पैरेलल यूनिवर्स में प्रवेश का तरीका केवल यांत्रिक होगा किंतु प्रोफ़ेसर हॉकिंस को अनदेखा करना भी गलत ही है इसका कारण है कि जो चुंबकी



विपदा का सामना ही समाधान है... 

हेमेन्द्र क्षीरसागर

आपदाएं सामान्य जीवन के साथ-साथ विकास की प्रक्रिया के लिए गंभीर खतरा पैदा करती हैं और अचानक ही हमें ऐसी हिंसा का मुंह देखना पडता हैं. जो न केवल जिंदगियां और ढांचा को तबाह कर देता हैं बल्कि परिवारों को एक-दूसरे से अलग-अलग-थलग कर देती हैं. जनसंख्या के बढते दबाव, शहरी औद्योगिक विकास, वनों के कटाव तथा सीमांत भूमि पर खेती के साथ-साथ मानव अभिप्रेरित जोखिमों में भी वृद्धि हुई हैं. आपदाओं का प्रभाव बहु-विषयक है जो कि घरेलु, सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय आदि. आपदा विभिन्न प्रकार के संकटों जैसे: भंूकप, बाढ या तूफान, आग, कृत्रिम त्रासदी, संक्रामक रोगों का परिणाम होती हैं, जिसमें ऐसी नाजुक स्थिति उत्पन्न हो जाती है जो समुदायी,



अर्थव्यवस्था की सुनहरी होती तस्वीर

ललित गर्ग

भारत की अर्थव्यवस्था दुनिया में तेजी से आगे बढ़ती अर्थव्यवस्था है, जिसकी विकास गति ने चीन को पीछे छोड़ दिया है। कृषि क्षेत्र में अच्छे प्रदर्शन एवं विनिर्माण के कारण चालु वित्त वर्ष की प्रथम तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद ( जीडीपी ) की वृद्धि दर 8.2 प्रतिशत रही है जबकि इसी तिमाही में चीन की वृद्धि दर 6.7 प्रतिशत रही है। अब हमारा देश सबसे तेज गति से आगे बढ़ने वाला देश हो गया है। भारत अब इंग्लैण्ड को पीछे छोड़ कर बहुत जल्दी ही दुनिया की पांचवीं बड़ी अर्थव्यवस्था बनने जा रहा है। यह वर्तमान नरेन्द्र मोदी सरकार के लिये शुभ एवं श्रेयस्कर होने के साथ-साथ एक अच्छी खबर है। 

अर्थव्यवस्था को ऊपर उठाने के हमारे आजाद भारत के संक



 पेट्रोल कहां महंगा है, भाई? तब भी एक डालर प्रति लीटर ही तो था!

प्रदीप द्विवेदी

नासमझ लोग बेवजह गैस-पेट्रोल के रेट को लेकर हंगामा मचा रहे हैं? व्हाट्सेपिए, वाद-विवाद कर रहे हैं... फेसबुकिए, फेस बिगाड़ रहे हैं. अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था की समझ तो है नहीं, बस... जो मन में आया ताना मार दिया? अरे, विश्व अर्थव्यवस्था की समझ होगी तभी मन की बात में वजन आएगा.
कांग्रेस के जमाने में एक डालर पचपन रुपए का था तो एक लीटर पेट्रोल का दाम हुआ एक डालर, आज एक डालर सत्तर रुपए का है तो एक लीटर पेट्रोल का दाम आज भी है- एक डालर. कहां महंगा हुआ?
कांग्रेस के जमाने में भी गैस सिलेंडर करीब दस डालर का मिलता था, आज भी तकरीबन उतने में ही मिल रहा है? कहां गैस सिलेंडर महंगा हुआ?
सोशल मीडिया पर पीएम मोदी का सीएम मोदी के जमाने क



क्या गूगल पर लगाम लगा पाएंगे ट्रम्प?

डाँ नीलम महेंद्र

क्या यह संभव है कि दुनिया की नजर में विश्व का सबसे शक्तिशाली व्यक्ति भी कभी बेबस और लाचार हो सकता है?
क्या हम कभी अपनी कल्पना में भी ऐसा सोच सकते हैं कि एक व्यक्ति जो विश्व के सबसे शक्तिशाली देश के सर्वोच्च पद पर आसीन है, उसके साथ उस देश का सम्पूर्ण सरकारी तंत्र है और विश्व की आधुनिकतम तकनीक से युक्त फौज है, उस व्यक्ति के खिलाफ भी कभी कुछ गलत प्रचारित किया जा सकता है?
शायद नहीं? या फिर शायद हाँ?
आज जब अमेरिका के राष्ट्रपति गूगल फेसबुक और ट्विटर पर अपने अपने प्लैटफोर्म से जनता के सामने अपने खिलाफ लगातार और बार बार फेक न्यूज़ परोसने का इल्जाम लगाते हैं,
आज जब डोनाल्ड ट्रंप जैसी शख़सियत कहती  है कि गूगल पर &n



पीएम मोदी ने अपने ही वोट बैंक को नाराज कर दिया है?

अभिमनोज

जो सियासी हालात बन रहे हैं उनको देखते हुए लगता है कि केन्द्रीय भाजपा से पीएम मोदी का एकाधिकार कमजोर पड़ता जा रहा है, ऐसी स्थिति में पीएम मोदी और अमित शाह अपनो के ही सवालों के घेरे में नजर आएंगे? इन तकरीबन साढ़े चार साल में भाजपा में केवल और केवल इन दोनों के निर्णय ही लागू होते रहे हैं. शुरूआत के तकरीबन साढ़े तीन वर्ष तक केन्द्रीय भाजपा की कामयाबी ने पार्टी के भीतर एक तरफा अनुशासन कायम कर दिया था, लेकिन गुजरात विधानसभा चुनाव के बाद यह एक तरफा अनुशासन कमजोर पड़ता गया और अब तो पीएम मोदी का जादू पार्टी के अंदर भी बेअसर होने लगा है? यही वजह है कि भाजपा को अब पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी के सहारे की ज



कांग्रेस : दामन पर सिख दंगों का दाग

सुरेश हिन्दुस्तानी

देश के वीभत्स हत्याकांड के नाम से पहचान बनाने वाला सिख नरसंहार मामला एक बार फिर से सुर्खियों में है. यह सुर्खियां वर्तमान कांग्रेस मुखिया राहुल गांधी के उस बयान के कारण पैदा हुई हैं, जिसमें उन्होंने कहा है कि सिख हत्याकांड में कांग्रेस का किसी भी प्रकार का हाथ नहीं है. केवल इस प्रकार के बयान देने भर से किसी का हाथ नहीं हो, ऐसा कह पाना संभव नहीं माना जा सकता. यह सही है कि सिखों का नरसंहार केवल इंदिरा गांधी की हत्या के बाद उत्पन्न हालातों का परिणाम था, यह प्रतिक्रिया किसने की, यह एक अलग सवाल है, लेकिन बिना किसी संलिप्तता के इतना बड़ा हादसा हो ही नहीं सकता. इसलिए भारतीय जनता इस मामले में कांग्रेस को सदैव कठघरे में खड़ा



प्राकृतिक संसाधन जीवन का बहुमूल्य साधन 

हेमेन्द्र क्षीरसागर

हम जिस पर्यावरण में रहते हैं वह अनेक घटकों से मिलकर बना हैं. इसका प्रत्येक घटक हमें किसी न किसी रूप में लाभ पहुंचाता हैं. हमारी आवश्कताएं चाहे मौलिक हो, भौतिक हो, सामाजिक हो, अर्थिक हो, अथवा सांस्कृतिक हो इनकी पूर्ति प्रकृति से ही संभव होती हैं. प्रकृति ने हमें भूमि, जल, वायु, खनिज, ईधन, सूर्य का प्रकाश और वन आदि ऐसे संसाधन विरासत में दिया हैं, जो हमारे जीवन का बहुमूल्य साधन हैं. यह तो हम सभी जानते हैं कि संसाधन सम्पूर्ण पृथ्वी पर असमान रूप से वितरित हैं तथा इनका उपयोग मनुष्य के क्रियाकलापों पर निर्भर करता हैं. यदि इन संसाधनों का उचित प्रयोग करें तो मानव जाति का कल्याण और यदि दुरूपयोग हो तो विनाश निश्चित हैं. अलबत्त



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J&K में 2 आतंकियों के मारे जाने के बाद एहतियातन शैक्षणिक संस्थान बंद

जम्मू केंद्रीय विश्वविद्यालय में अपना केंद्र स्थापित करेगा इसरो

AMU से आतंकवादी मन्नान वानी के समर्थक 3 कश्मीरी छात्र निष्कासित

J&K: AMU छात्र से आतंकी बने मन्नान वानी को सेना ने किया ढ़ेर

कुपवाड़ा में सेना और आतंकियों के बीच मुठभेड़,3 आतंकी घिरे,एसपीओ घायल

जम्मू-कश्मीर में भाजपा उम्मीदवार का दिल का दौरा पड़ने से निधन

नवरात्र पर देश-विदेश के फूलों से महक उठा वैष्णो देवी का दरबार

आतंक प्रभावित कश्मीर में निकाय चुनाव: वोटिंग की रफ़्तार धीमी,अब तक 2 प्रतिशत मतदान

J&K इंटेलिजेंस की रिपोर्ट पर जालंधर से हथियार सहित तीन कश्मीरी छात्र गिरफ्तार

J&K: पहले चरण में हुये मतदान को लेकर बौखलाए अलगाववादियों ने किया बंद का आहवान

हिमपात के कारण श्रीनगर-लेह राजमार्ग बंद, जम्मू-श्रीनगर मार्ग भी प्रभावित

पठानकोट हमले का आरोपी मसूद अजह‍र गंभीर बीमारी की गिरफ्त में,भाई चला रहे संगठन

जम्मू कश्मीर निकाय चुनाव का पहला चरण खत्म, घाटी में महज 8.3 प्रतिशत मतदान

J&K में स्थिति उलट, कड़ी सुरक्षा के बीच निकाय चुनाव में वोटर्स की भारी भीड़

J&K में निकाय चुनाव:पहले चरण की वोटिंग शुरू,आतंकियों की धमकी बेअसर

चुनाव या राजनीतिक नियुक्ति? कश्मीर घाटी में बिना वोटिंग के ही जीत जाएगी बीजेपी

जम्मू-कश्मीर में अलगाववादियों ने दी वोटिंग के बहिष्कार की धमकी, कई नेता नजऱबंद

कश्मीर में मादक पदार्थों की तस्करी,10 लोग गिरफ्तार

J&K में रिक्‍टर स्केल पर 4.6 तीव्रता का भूकंप

J&K:शोपियां में कई आतंकियों के छुपे होने की खबर, सर्च ऑपरेशन शुरू

जम्मू-कश्मीर के रामबन में मेटाडोर खाई में गिरी, 20 की मौत

जम्मू एवं कश्मीर में समस्याएं मुख्यरूप से पाकिस्तान के कारण: राजनाथ सिंह

कठुआ केस:SC ने कहा-घटना की सीबीआई जांच नहीं की जाएगी,याचिका खारिज

J&K: करफिल में आतंकियों ने की नेशनल कांफ्रेंस के दो कार्यकर्ताओं की हत्या

श्रीनगर निकाय चुनाव: उम्मीदवारों को पीछे हटने के लिए आतंकियों ने दिया अल्टीमेटम

वैष्णो देवी तीर्थस्थल सर्वाधिक स्वच्छ धार्मिक स्थल घोषित

PAK ने ब्रेक किया सीजफायर, सेना की जवाबी कार्रवाई मेंं पाकिस्तानी रेंजर ढेर

J&K: सुरक्षा बलों ने सोपोर से एक आतंकवादी को किया गिरफ्तार

कश्मीर में अज्ञात बंदूकधारियों ने किया कारोबारी अपहरण

खुलासा:आतंकियों ने बदली शैली बुर्का पहन कर रहे हमले

PoK से वापस लौटे तीन साल से लापता व्यक्ति गिरफ्तार

J&K में टेरर फंडिंग: NIA ने अलगाववादी समर्थक के घर की छापेमारी

ISI की साजिश:160 आतंकियों ने पाक बॉर्डर पर डाला डेरा, खाली करवाये गए गांव

पाकिस्तानी हेलीकॉप्टर ने किया भारत की हवाई सीमा का उल्लंघन,सेना ने की फायरिंग

पाक ने तंगधार सेक्टर में किया संघर्ष विराम का उल्लंघन, घुसपैठ का प्रयास विफल

बदला: BSF DG का दावा, भारतीय सेना ने ढेर किए पाक के 11 सैनिक

शोपियां में आतंकियों ने पुलिस स्टेशन पर किया हमला,1 जवान शहीद

सर्जिकल स्ट्राइक की दूसरी वर्षगांठ: रक्षा मंत्री बोली- सीमा पर कार्रवाई जारी रहेगी

कश्मीर निकाय चुनाव: घाटी में पहली बार बीजेपी के 5 उम्मीदवार जीते

कश्मीर में निकाय चुनाव लडऩे की तैयारी कर रहे लोगों को धमका दे रहे आतंकी

J&K: कुपवाड़ा में संदिग्धों की उपस्थिति के संदेह पर सेना का सर्च ऑपरेशन 

3 दिवसीय पराक्रम पर्व:तैयार किया गया सर्जिकल स्ट्राइक का ऐंथम सांग

जम्मू-कश्मीर: मुठभेड़ में तीन आतंकवादी मारे गए, एक जवान शहीद

रक्षा मंत्रालय ने जारी किया सर्जिकल स्ट्राइक का नया वीडियो

वैष्णो देवी और स्वर्ण मंदिर को बम से उड़ाने की धमकी, खुफिया एजेंसियां अलर्ट

पश्चिम हिमालय क्षेत्र में सितम्बर की भारी बर्फबारी से हजारों जिंदगियां खतरे में

J&K:सेना और आतंकियों में मुठभेड़, एक जवान शहीद, दो आतंकी ढेर

दूसरे सर्जिकल स्ट्राइक की हुंकार, डरे पाक ने बॉर्डर एरिया से ग्रामीणों को हटाया

सोपोर में सुरक्षाबलों ने 2 आतंकियों को किया ढेर

J&K: चुनाव डयूटी करने वाले कर्मचारियों को मिलेगा 1 माह का अतिरिक्त वेतन

3 आतंकियों को मार शहीद हुए सर्जिकल स्‍ट्राइक में शामिल रहे कमांडो संदीप सिंह

J&K:सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच मुठभेड़,स्कूल-कॉलेज,इंटरनेट बंद

कश्मीर की घाटी में खिला कमल, दक्षिण कश्मीर के चार जिलों में बीजेपी की जीत

कुलगाम:सेना ने मारे 3 आतंकी,मुठभेड़ के बाद हुआ ब्लास्ट,5 स्थानीय नागरिकों की मौत

कुलगाम घटना के विरोध में अलगाववादियों की हड़ताल,सुरक्षा कारणों से ट्रेन सेवा स्थगित



कश्यपमर कश्मीर और वराहमूला है बारामूला


पहले सीमा पर फायरिंग, फिर पहुंचा सुरक्षा परिषद के सदस्यों के पास पाकिस्तान


कश्मीर में बकरीद के लिए खरीदारी चरम पर


एमपी विजेंद्र सिंगल ने मां के चरणों में लगाई हाजरी


डोडा मे फटा बादल


भारत, पाकिस्तान के बीच दोस्ती का पुल बने कश्मीर : महबूबा


श्रीनगर: अदालत के बाहर आतंकी हमला


सरकार की कथित आपराधिक लापरवाही के खिलाफ पी.डी.पी. उतरी सडक़ों पर


दशर्नो के लिए हर रोज तीस हजार से भी अधिक श्रद्वालु धर्मनगरी मे


मुठभेड़ में एक आतंकवादी मारा गया


रक्त दान से किसी की जान बचाई जा सकती है


मोसम खराव रहने के वाद शनिवार को धर्मनगरी सहित भवन मार्ग पर मोसम वडा सुहावना


पैंथल मे मंकर संक्रति के दिन 114वा विशाल दंगल


रघुनाथ मंदिर केे परिस्पर मे कटडा वासियो की वैठक मुल्खराज पुरोहित की अध्यष्ता


महिला मोर्च द्वारा एक कार्यक्रम आयोजित किया गया


ग्रेनेड ब्लास्ट में एक बच्चे की मौत, दो घायल


के.जी.एच.ई.पी. के आसपास नागरिकों की आवाजाही पर प्रतिबंध


सीवल डिफैंस की वैठक का आयोजन


अमित कुमार ने एस.एस.पी. श्रीनगर का कार्यभार संभाला


जनता लोकतांत्रिक प्रतिद्वंद्दिता का महत्व समझने लगी है: महबूबा, सीमांत क्षेत्रों के हित पीडीपी के अति महत्वपूर्ण


मतदाताओं को करें जागरूक


मां वैष्णो देवी जी के भवन पर श्रद्धालु घायल


राहत काजमी की फिल्म आइडेंटिटी कार्ड की पूरी शूटिंग कश्मीर में हुई


कश्मीर में कड़ाके की ठंडए लेह में पारा 11 डिग्री


जम्मू कश्मीर रणजी को 20 लाख पुरस्कार