Palpal India Hindi online Internet Newspaper
Loading...
RSS
अटल-अटल थे, अमर रहेंगे

कुमार राकेश

सच में मौत से ठन गयी थी अटल जी की .विगत 13 वर्षों से अवचेतन अवस्था में जीना,वो भी क्या जीना था.मगर वे जिए,खूब जिए .मौत से लड़े.खूब लड़े.जमकर लड़े .निश्चिन्त भाव से लड़े,अपनी साँस की अंतिम कड़ी तक लड़ते रहे.लड़ते रहे और फिर चल पड़े चिरंतन यात्रा की ओर. अपने अटल जी , आपके अटल जी.हमारे अटल जी .देश के अटल जी.विदेशो के अटल जी .भारत के अटल जी और घोर दुश्मन पाकिस्तान के भी अटल जी .आखिर क्या जादू था.हम सबके अटल जी में.सच में वे एक युगपुरुष थे.सडक से संसद तक लोकप्रिय एक आम जन नेता अटल जी.

सदैव रहेंगे हम सबके दिल में मेरे भगवन.जी हम दोनों एक दुसरे को इसी शब्द से पुकारते थे और अभिवादन किया करते थे.जब भी मिलते.आमना सामना होता.सचमुच ख़ुशी की ऊर्जा



समय से आगे का चिंतक महात्मा अटल 

गिरीश बिल्लोरे “मुकुल”

आज स्तब्ध हो जाना लाज़िमी है जिसकी अवधारणा थी कि डेमोक्रेटिक सिस्टम में हिंसा और वैमनस्यता का कोई स्थान न नहीं. एक कवि के अतिरिक्त शायद ही कोई इतना नरम रुख रखता हो एक सियासी होने के बावज़ूद. 
हिंसा के विरुद्ध एक समरस वातावरण निर्माण की कोशिश को ये देश याद रखेगा. 
अटल बिहारी वाजपेयी जी के जबलपुर आगमन पर हम युवा पीढ़ी के लोग अक्सर उस सभा में ज़रूर जाते थे. मैं तो उनकी मानवीय संवेदनाओं पर आधारित जीवन क्रम का प्रभाव देखना चाहता था. उनके वक्तव्यों में समकालीन परिस्थितियों के लिए सामाजिक सहिष्णुता के लिए जो भी कंटेंट्स होते थे सृजन के विद्यार्थी के रूप में मेरे अनंत तक उतरती थी. वक्तता के रूप में अपनी ओर सम्मोहि



मृत्यु नहीं परकाया प्रवेश है यह...

प्रकाश भटनागर

मौत की कोई सूरत नहीं होती. जिस्म नहीं होता. फिर भी उसका वजूद होता है. जो अंतत: जीवन के अस्तित्व को अपने अदृश्य आंचल तले ढंककर साथ ले जाता है. मृत्यु का यही क्रूर कारोबार है. पूरे हक से वह जीवन छीन लेने का जिसे प्रदान करने में उसका रत्ती भर भी योगदान नहीं होता. लेकिन आज एक पल को तो मृत्यु भी कांपी होगी. अस्पताल में अटल बिहारी वाजपेयी के बेजान होते जिस्म को पूर्णत: निर्जीव करते समय उसे भी अपनी हार का अहसास हुआ होगा.

हार इस बात की कि उसने वाजपेयी के प्राण हरे लेकिन उन्हें मृत घोषित  नहीं करवा पाई. वाजपेयी हमेशा जीवित रहेंगे. सच्चे इंसान के तौर पर मिसालों में. अच्छे राजनीतिज्ञों के जिक्र में सर्वकालिक उदाहरण बन कर. उ



भारतीय राजनीति के महामना

मनोज कुमार

अटलजी देह से गये हैं लेकिन अपने पीछे इतना कुछ दे गए हैं जिसकी व्याख्या करना सम्भव नहीं है. एक राजनेता के रूप में सम्मान, समन्वय और सत्ता के लिए समझौते के खिलाफ रहने की सीख देते हैं तो इससे आगे बढ़कर मनुष्य के दुख को खुद में समेट कर मनुष्य होने का परिचय देते हैं. संवेदनशील मन का यह महामना अपनी कविता में हर बार एक नई दुनिया की रचना करते दिखते थे. राजनीति और राजनैतिक दोनों ही मार्ग पर वे हमेशा सामयिक बने रहेंगे क्योकि नीति और नैतिकता के शीर्ष पर एक नाम अटलजी का होगा. अटलजी का स्मरण औपचारिक ना होकर बल्कि उनके बताए रास्ते पर चलने का प्रण आम और खास, सत्ता और समाज ले तभी उनकी सार्थकता होगी. वे हमारे बीच थे, हैं और हमेशा रहें




स्वतंत्रता का अर्थ स्वछंदता नहीं, अनुशासन है...

सुरेश हिन्दुस्तानी

अंग्रेजों की गुलामी से मुक्ति का दिवस है, 15 अगस्त. इस दिन से भारत ने खुली हवा में सांस लेना प्रारंभ किया. उस समय चारों तरफ प्रसन्नता दिखाई दी, लेकिन वर्तमान वातावरण को देखकर ऐसा लग रहा है कि हम स्वतंत्रता के वास्तविक मायनों को विस्मृत कर चुके हैं, आजादी का मतलब हमने मनमानी स्वच्छंदता मान लिया है. सच तो यह है कि आजादी के बाद हमारी स्वच्छंदता देशानुरुप होना चाहिए, लेकिन क्या आज के परिवेश को देखकर कोई यह कह सकता है कि स्वतंत्रता मिलने के बाद हमारा व्यवहार देशानुरुप रहा, कदाचित नहीं.

हम जानते हैं कि भारत सदैव से ही सांस्कृतिक संहिता का परिपालन करने वाला राष्ट्र रहा है. विश्व के देशों की भले ही राष्ट्रीय संहिताए



आजादी के साहित्यकार बाँकुरे 

संगीता पांडेय

आजादी के 71  वे वर्ष में हम पहुँच गए हैं. इन वर्षों में भारत ने कई सारे उतार चढ़ाव देखे किन्तु सबकी जमीन तो तैयार की आजादी के रणबांकुरों ने. इन बांकुरो में साहित्यकारों की भी अपनी  विशेष भूमिका थी जिन्होंने अंग्रेजों की चूले हिला दी थी.  ये अफसोसजनक कहा जा सकता है कि आज ऐसे साहित्यकारों को बहुत कम याद किया जाता है जिन्होंने अपनी कलम से क्रान्ति का बिगुल फूँका. आजादी के लिए  कुर्बानी में राजनेताओं और शहीदों के साथ-साथ साहित्यकार और पत्रकार भी शामिल  हुए थे जिन्होंने अपनी कलम की ताकत से पूरी ब्रिटिश साम्राज्य की नींव हिला कर रख दी थी. इन साहित्यकारों और पत्रकारों में कई ऐसे नाम हैं जिन्होंने देश के लिए कुर्



सोमनाथ चटर्जी:एक वामपंथी अध्याय का अंत

सुरेश हिन्दुस्तानी

विरले ही ऐसे राजनेता होते हैं जो अपने जीवनकाल में राजनीति के स्वर्णिम अध्याय के रुप में स्थापित हो जाते हैं. ऐसे ही राजनेता के रुप में हम सोमनाथ चटर्जी को स्मरण करें तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी. सोमनाथ चटर्जी वास्तव में वामपंथी राजनीति के स्वर्णिम अध्याय ही थे. उनका अवसान वामपंथी राजनीति के उच्चतम अध्याय का अंत ही माना जाना चाहिए. वामपंथी धारा के होने के कारण वे भले ही आलोचनाओं की परिधि में आते रहे होंगे, लेकिन उनका व्यक्तिगत जीवन इन आलोचनाओं की परिधि से बहुत दूर था. सोमनाथ चटर्जी का पूरा जीवन राजनीतिक सिद्धांतों के अनुरुप ही था, वे किसी से मतभेद तो रख सकते थे, लेकिन मन में किसी भी प्रकार का भेद नहीं पालते थे.&n



विदेशों में ही क्यों बढ़ रही है हिन्दी की ताकत

ललित गर्ग

भारत एक है, संविधान एक है.लोकसभा एक है.सेना एक है.मुद्रा एक है.राष्ट्रीय ध्वज एक है.लेकिन इन सबके अतिरिक्त बहुत कुछ और है जो भी एक होना चाहिए.बात चाहे राष्ट्र भाषा हो या राष्ट्र गान या राष्ट्र गीत- इन सबको भी समूचे राष्ट्र में सम्मान एवं स्वीकार्यता मिलनी चाहिए.राष्ट्र भाषा हिन्दी को आजादी के 72वर्ष बीत जाने पर भी अपने ही देश में घोर उपेक्षा का सामना करना पड़ रहा है, जो राष्ट्रीय शर्म का विषय है, जबकि विश्व में हिन्दी की ताकत बढ़ रही है, जिसका ताजा प्रमाण है कि संयुक्त राष्ट्र संघ (यूएनओ) द्वारा हिन्दी में ट्वीटर सेवा शुरु करना.देश के सम्मान में उस समय और अधिक इजाफा हुआ जब संयुक्त राष्ट्र संघ ने ट्विटर पर हिंदी में अप



न धरना, न प्रदर्शन? अहिंसक अभियान है-सवर्ण सत्याग्रह!

पलपलइंडिया

न बंद, न धरना और न ही कोई प्रदर्शन? अहिंसक अभियान है- सवर्ण सत्याग्रह! आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग के लोगों के उत्थान के लिए वैचारिक आंदोलन है- सवर्ण सत्याग्रह? और, इसके लिए चाहिए देश के सभी वर्गों, देश के सभी समाजों का समर्थन... सहयोग!

आजादी के बाद जातिगत आरक्षण को आगे बढ़ाने में, जारी रखने में सामान्य वर्ग के नेताओं का अमूल्य योगदान रहा है... यह जारी रहना चाहिए, लेकिन इन सत्तर वर्षों में सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर लोग पिछड़ते चले गए? आज उन लोगों को संरक्षण की जरूरत है, और यह संभव है सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को आर्थिक आधार पर आरक्षण से!

वोटों की राजनीति के चलते भाजपा, कांग्रेस सहि



युवा भारत, समृद्ध और खुशहाल भारत

हेमेन्द्र क्षीरसागर

भारतीय युवाओं का इतिहास यह दर्शाता है कि मानव संसाधन का बहुत ही महत्वपूर्ण और सक्रिय अंग होने के नाते युवा वर्ग ने हमेशा ही स्वतंत्रता एवं शांति के रक्षक के रूप में समाज की प्रगति में अग्रणी भूमिका निभायी हैं. स्वतंत्रता संग्राम के दौरान इसने महान बलिदान दिये और उसके उपरांत सदैव देश के विकास के लिए आगे आए. लिहाजा, पूर्व राष्ट्रपति श्री अब्दुल कलाम ने ठीक ही कहा था-  स्वतन्त्रता से पूर्व के दिनों में स्वतन्त्र भारत हमारा सपना था. परन्तु आज विकसित भारत हमारा सपना है, केवल युवा वर्ग ही ऐसा वर्ग है जो राष्ट्र को बेरोजगारी और भूख से मुक्ति, अज्ञान और निरक्षता से मुक्ति, सामाजिक अन्याय और असमानता से मुक्ति, बीमार



अब कब आएगा ऐसा गुरूवार ?

प्रकाश भटनागर

गजब का गुरूवार! जबरदस्त जुम्मेरात! हर ओर औरत. सर्वोच्च न्यायालय की चिंता में. घुसपैठियों के रोम-रोम में. कांग्रेसी महाराजा द्वारा किए गए अपमान को बिसराने में और भोपाल के मंत्री निवास में भाई के खिलाफ मां के दर्द भरे तारों को छेड़ती वीणा में. 

देश की सबसे बड़ी अदालत का दीपक एक बार फिर निराशा के अंधेरे को चीरता दिख रहा है. यह शर्म का ही द्योतक है कि इक्कीसवीं सदी में किसी संविधान पीठ को यह कहना पड़े कि महिला पति की बपौती नहीं है. हालांकि इस दिशा में मनोरमा,मुक्ता, गृह शोभा और मेरी सहेली दशकों से सक्रिय हैं. स्त्री के चीत्कार को चीखकर सुनाती रहीं. लेकिन मामला महज मैग्जीन का था, सो कागजी ही साबित हुआ. यह तब ही सुलझता द



समय यात्रा असंभव है!

गिरीश बिल्लोरे “मुकुल”

आज जिस बिंदु पर चर्चा करना चाहता हूँ वो सनातन शब्द –नेति नेति या  नयाति नयाति ... अर्थात ये भी नहीं अरे भाई ये न ये भी नहीं ! कई  दिनों से एक बात कहनी थी परन्तु सोचता था कि – संभव है कि आगे आने वाले और बीते समय की यात्रा की जा सकती है. परन्तु वास्तव में यह एक असत्य थ्योरी ही है. जिसे मानवीय मनोरंजन के लिए गढ़ा गया है . 
ये अलहदा तथ्य है कि  असीमित संभावनाओं से इंकार नहीं किया जा सकता  पराशक्तियाँ भी हैं जो ऐसा कुछ करा सकतीं हैं. अगर परा शक्तियां कुछ कर या सकतीं सकतीं हैं तो केवल इतना कि आपको बीता समय हूबहू स्मरण करा दे अथवा भविष्य की झलक स्वप्न  के रूप में दिखा दे पर भविष्य का स्वप्न केवल आभासी होगा . किशोर



देश देख रहा है!

डाँ नीलम महेंद्र

आज राजनीति केवल राज करने अथवा सत्ता हासिल करने मात्र की नीति बन कर रह गई है उसका राज्य या फिर उसके नागरिकों के उत्थान से कोई लेना देना नहीं है. यही कारण है कि आज राजनीति का एकमात्र उद्देश्य अपनी सत्ता और वोट बैंक की सुरक्षा सुनिश्चित करना रह गया है न कि राज्य और उसके नागरिकों की सुरक्षा.
कम से कम असम में एनआरसी ड्राफ्ट जारी होने के बाद कांग्रेस समेत सभी विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया तो इसी बात को सिद्ध कर रही है. चाहे तृणमूल कांग्रेस हो या सपा, जद-एस, तेलुगु देसम या फिर आम आदमी पार्टी.
विनाश काले विपरीत बुद्धि:  शायद इसी कारण यह सभी विपक्षी दल इस  बात को भी नहीं समझ पा रहे कि देश की सुरक्षा से जुड़े ऐसे गंभ



साल की पहली बरसात

अनूप शुक्ल

आखिर पानी यहां भी बरसा. पूरे महीने तरसाने के बाद झमाझम हुई. किसी दफ्तर में होता बादल तो आते ही दौड़ा लिया जाता. कोई कड़क अफसर होता तो बिना अनुमति अवकाश लेने पर निलंबित कर देता भले ही फिर ऊपर से दबाब आने पर कुछ ले देकर बहाल कर देता.

बादल की देरी से खफा लोगों ने उसके आते ही मुस्कराकर खुश होकर स्वागत किया. बादलों ने आते ही अनगिनत झोपड़ियां उजाड़ दीं. तमाम खुले घरों को और खोल दिया. तबाह हुए लोगों को और तबाह कर दिया. यह सब देखकर कोई ऊंचा लेखक होता तो शायद फूहड़ रूपक बांधता -.... लोगों ने देर से आए आये आवारगी करते , उत्पाती बादलों का उसी तरह स्वागत किया जिस तरह माननीय लोग दंगाइयों का स्वागत करते हैं.

लेकिन हम इन सब चोंचलों में



घुसपैठ के विरोध में सरकार का कडा कदम

सुरेश हिन्दुस्तानी

असम में बांग्लादेशी घुसपैठियों की पहचान करने के लिए चलाए जा रहे अभियान के अंतर्गत राष्ट्रीय नागरिक पंजी का अंतिम प्रारुप जारी कर दिया है. इसके अंतर्गत उन बांग्लादेशी नागरिकों को भारत से बाहर करने की योजना है, जो भारत में अवैध रुप से घुसपैठ करके आए हैं. उल्लेखनीय है कि असम में लगभग 50 हजार घुसपैठिए मुस्लिम अवैध रुप से निवास कर रहे हैं. जो भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बहुत बड़ी चुनौती है. राष्ट्रीय नागरिक पंजी यानी एनआरसी के इस प्रारुप में असम में रह रहे 40 लाख लोगों की नागरिकता को अवैध घोषित किया है. हालांकि असम में यह बात लम्बे समय से उठती रही है कि असम में बांग्लादेशी घुसपैठ के चलते आर्थिक और सामाजिक समस्याए



पाठक की रूचि के अनुरूप अखबारों को बदलना जरूरी

अभिमनोज

बाजार का नियम है कि उपभोक्ता को जो पसंद है, उसी के अनुरूप बाजार में उत्पाद की बिक्री की जाए. फिर वह खाद्य पदार्थ हो या साज-सजावट के सामान. बदलते समय में अखबार के पाठक भी उपभोक्ता में तब्दील हो चुके हैं और उनकी रूचि तथा पसंद के अनुरूप अखबारों में बदलाव अपरिहार्य हो गया है. खासतौर पर हिन्दी में प्रकाशित होने वाले अखबारों के लिए यह और भी जरूरी है. अंग्रेजी प्रकाशनों के पाठकों की जरूरतें और हिन्दी प्रकाशनों के पाठकों की जरूरतें अलग-अलग हैं. हिन्दी के पाठक अखबारों में छपने वाली खबरों से लेकर विज्ञापन तक को आधार बनाकर अपनी जिंदगी में बदलाव लाने की कोशिश करते हैं वहीं अंग्रेजी के पाठक अमूनन स्वविवेक से उपयोग करते हैं



मॉब लिंचिंग की अराजकता का त्रासद होना

ललित गर्ग

उन्मादी भीड़ के द्वारा जान लेने की एक घटना शांत नहीं होती कि कोई दूसरी हत्या की खबर सामने आ जाती है. लगातार हो रही मॉब लिंचिंग की ये घटनाएँ अब न केवल चिन्ता का विषय है बल्कि असहनीय एवं शर्मनाक है. सुप्रीम कोर्ट की फटकार और अलवर में एक और घटना के बाद ही सही, भीड़ द्वारा किसी को पीट-पीट कर मार डालने की घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार सक्रिय हुई है तो निश्चित ही उसके सकारात्मक संदेश निकलने चाहिए. 
किसान आन्दोलन हो या गौरक्षा का मसला या आम जनजीवन की सामान्य-सी बातें-हिंसा एवं अशांति की ऐसी घटनाएं देशभर में लगातार हो रही हैं. महावीर, बुद्ध, गांधी के अहिंसक देश में हिंसा का बढ़ना न केवल चिन्ता का विषय है बल्कि ग



चकनाचूर होता विपक्षी एकता का सपना

सुरेश हिन्दुस्तानी

लोकतंत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष की अपनी-अपनी जिम्मेदारियां होती हैं. लेकिन जब विपक्ष के पास संख्या बल का अभाव होता है तो वह घायल शेर की तरह से दिखाने का प्रयास करता है. इसी दिखावे के प्रयास में कई बार ऐसी चूक हो जाती है कि उसकी भरपाई नहीं की जा सकती. संसद में विपक्षी दल तेलगुदेशम पार्टी की ओर से लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर विपक्ष की जिस प्रकार से किरकिरी हुई, उसकी कसक विपक्षी राजनीतिक दलों को लम्बे समय तक रहेगी. लोकसभा में पर्याप्त संख्याबल न होने के बाबजूद अविश्वास प्रस्ताव को लाना किसी भी प्रकार से न्याय संगत नहीं कहा जा सकता.

इस प्रस्ताव को भले ही तेलगुदेशम पार्टी की ओर से लाया गया, लेकिन इसके केन्द्र म



सियासत: जीता नेता, हारा कार्यकर्त्ता

हेमेन्द्र क्षीरसागर

सियासत का खेल भी अजीब निराला है, परिश्रमी कार्यकर्त्ता आसन में और नेता सिंहासन में बैठते है. वह भी भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में जहां तंत्र के पहरेदार लोकनीति के दुहाई देते नहीं थकते. वहां उन्हीं के सिपहसालार दुखडा रोते दिखाई देते है कि अब हमारी पूछ-परक कम हो गई और हमारे काम नहीं होते. उस पर जनता की तो पूछों ही मत इनका भगवान ही मालिक है. यह हाल बना रखा है हमारे लोकतंत्र के करता धरताओं ने. बजाए ग्लानि के शान से मैं जन सेवक और दल का छोटा सा कार्यकर्त्ता हूँ का बिगुल बजाने हरदम आगे रहते है.  इतने पर भी दिल नहीं भरता तो सिहासी मैदान के दंगल चुनाव में मीठा-मीठा खां, खां और कडवा-कडवा थूं’थूं की भांति जीता तो मैं और हारा



राहुल गांधी जो न करे वही कम

निरंजन परिहार

कांग्रेसी साथियों से अपना एक सवाल है.सवाल राहुल गांधी को लेकर है.बुरा मत लगाइयेगा.सवाल यह कि लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव पर बहस के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सीट पर जाकर राहुल गांधी मोदी से गले मिले थे या उनके गले पड़े थे ? ये राहुल गांधी ही हैं, जिन्होंने विदेशी राष्ट्राध्यक्षों से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गले लगकर मिलने को गले पड़ना बताया था.लेकिन पूरे देश ने ही नहीं बल्कि दुनिया भर ने देखा कि लोकसभा में राहुल गांधी अपनी सीट से उठे और प्रधानमंत्री की सीट के पास जाकर उनके गले लगे.मगर मोदी अपनी जगह से हिले तक नहीं.इसे क्या कहा जाए.अपना निष्कर्ष सिर्फ यही है कि राहुल गांधी ने गलबहियां करने ने की



धरती को ठंडा रखने के कुछ सुझाव

अनूप शुक्ल

धरती लगातार गर्म हो रही है.कुछ लोग ठंडे में बैठे धरती की गरमाहट कम करने के उपाय सोच रहे हैं. सोचने से मन भटकता है तो विचार करने लगते हैं. विचार से थके तो फ़िर सोचने लगे. सोच और विचार की एकरसता से बचने के लिये बीच-बीच में बहस भी करते जा रहे हैं. आप भी देखिये सोच, विचार और बहस के कुछ सीन.

अगर ऐसे ही चलता रहा तो आगे आने वाले कुछ सालों में समुद्र के किनारे के शहर पानी में पानी में डूब जायेगे. पानी के लिये त्राहि-त्राहि मच जायेगी. हमें कुछ करना होगा, कुछ सोचना होगा.

धरती का तापमान लगातार बढ़ता जा रहा है. अगर हम चेते नहीं तो आने वाली पीढियां हमें कभी माफ़ नहीं करेंगे.

अगला विश्वयुद्द पानी के लिये होगा.

हमें अपनी आवश्



गुड एप्रोच, बेटर नाॅलेज, बेस्ट परफोर्मेंस!

अनिता

आमतौर पर जब भी नाॅलेज लेने की बात आती है तो हम अक्सर अपने काम से रिलेटेड नाॅलेज तो बड़े इंट्रेस्ट के साथ ले लेते हैं लेकिन हमारे काम से जुड़े दूसरे नाॅलेज लेने में बड़ी बोरियत महसूस करते हैं.जबकि सच्चाई यही है कि यदि नाॅलेज को लेकर हमारी एप्रोच सही है कि हम अपने फिल्ड के साथ-साथ रिलेटेड फिल्ड का भी बेहतर नाॅलेज लेने की कोशिश करेंगे तो हमारी परफोर्मेंस बेस्ट होगी.
उदाहरण के लिए, ब्यूटीशियंस के पास मेकओवर के लिए लोग आते हैं.ब्यूटीशियंस के पास मेकओवर का तो बहुत अच्छा नाॅलेज होता है लेकिन यदि इंसान की सुंदरता से जुड़ी हैल्थ, फिटनेस, योगा आदि की  जानकारी का अभाव है तो वह अपनी परफोर्मेंस बेस्ट नहीं दे पाएगा.जैसे फेस



भारत में और कितने पाकिस्तान!

सुरेश हिन्दुस्तानी

प्राय: देश में इस प्रकार की आवाजें मुखरित होती रही हैं कि देश में कई क्षेत्र इस प्रकार के दिखाई देते हैं, जैसे यह पाकिस्तान के हिस्से हों, यानी पूरी तरह से इस्लामिक. वहां भारत की सांस्कृतिक गतिविधियों पर पूरी तरह से प्रतिबंध सा दिखाई देता है. यहां यह बात करना उल्लेखनीय ही होगा कि आज भारत का जो दृश्य दिखाई देता है, वह वास्तव में भारत की मूल संस्कृति का हिस्सा न होकर एक नवीन संस्कृति को उदित करने का षड्यंत्री प्रयास है. भारत की मूल संस्कृति हजारों वर्ष पुरानी है. यह बात सही है कि संस्कृति का निर्माण कोई दो चार सौ वर्षों में नहीं होता, हजारों, लाखों वर्षों के बाद ही संस्कृति का निर्माण होता है. हम एक हजार वर्ष पूर्व क



गोल्डन गर्ल की गोल्डन जीत से महका भारत 

ललित गर्ग

देश का एक भी व्यक्ति अगर दृढ़ संकल्प से आगे बढ़ने की ठान ले तो वह शिखर पर पहुंच सकता है. विश्व को बौना बना सकता है. पूरे देश के निवासियों का सिर ऊंचा कर सकता है. भारत की नई ‘उड़नपरी’ 18 वर्षीय असमिया एथलीट हिमा दास ने ऐसा ही करके दिखाया है, उसने अपनी शानदार उपलब्धि से भारतीय ऐथलेटिक्स में एक नए अध्याय की शुरुआत कर दी है. जब इस गोल्डन गर्ल की अनूठी एवं विलक्षण गोल्डन जीत की खबर अखबारों में शीर्ष में छपी तो सबको लगा कि शब्द उन पृष्ठों से बाहर निकलकर नाच रहे हैं. फिनलैंड के टैम्पेयर शहर में आयोजित आईएएएफ वल्र्ड अंडर-20 ऐथलेटिक्स चैंपियनशिप की 400 मीटर दौड़ में उन्होंने गोल्ड मेडल जीता है.
देश की अस्मिता पर नित-नये लगने वा



यह लड़ाई है, अच्छाई और बुराई की

डाँ नीलम महेंद्र

उच्चतम न्यायालय ने 9 जुलाई 2018 के अपने ताजा फैसले में 16 दिसंबर 2012 के निर्भया कांड के दोषियों की फाँसी की सजा को बरकरार रखते हुए उसे उम्र कैद में बदलने की उनकी अपील ठुकरा दी है.
दिल्ली का निर्भया कांड देश का वो कांड था जिसने पूरे देश को हिला कर रख दिया था. देश के हर कोने से निर्भया के लिए न्याय और आरोपियों के लिए फाँसी की आवाज उठ रही थी. मकसद सिर्फ यही था कि इस प्रकार के अपराध करने से पहले अपराधी सौ बार सोचे. लेकिन आज छह साल बाद भी इस प्रकार के अपराध और उसमें की जाने वाली क्रूरता  लगातार बढ़ती जा रही है. नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के अनुसार साल 2015 में बलात्कार के 34651, 2015 मे 38947 मामले दर्ज हुए थे. 2013 में यह संख्या 25923 थी. कल तक



आरक्षण वर्गीकरण का अनावश्यक विरोध

सुरेंद्र किशोर

संसद के मौनसून सत्र में सरकार अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा देने वाले विधेयक को नए सिरे से लाने की तैयारी में है.
देखना है कि इस बार विपक्ष इस विधेयक पर क्या रवैया अपनाता है ?
यह सवाल इसलिए क्योंकि कांग्रेस ने ओ.बी.सी.के 27 प्रतिशत आरक्षण के वर्गीकरण के विरोध में खड़े होने का संकेत दिया है.
ऐसा करके वह एक राजनीतिक जुआ ही खेल रही है.
इससे पहले 1990 में राजीव गांधी ने ओबीसी आरक्षण के वी.पी.सिंह सरकार के निर्णय का लोक सभा में विरोध करके कांग्रेस को पिछड़ों से दूर करने का काम किया था.
तब कांग्रेस ने गैर आरक्षित वर्ग के हितों का ध्यान रखा और आज वह पिछड़ों के बीच के संपन्न हिस्से के हितों का ध्यान रख र



आओ एक नयी दुनिया बसाएं

ललित गर्ग

आज का मनुष्य भूलभूलैया में फंसा हुआ है. यदि देखा जाये तो संसार का विस्तार यानी सुविधावादी और भौतिकवादी जीवनशैली एक प्रकार की भूलभूलैया ही है. भोग के रास्ते चारों ओर खुले हुए हैं. धन, सत्ता, यश और भोग - इन सबका जाल बिछा है और यह जान इतना मजबूत है कि एक बार आदमी उसमें फंसा कि निकल नहीं पाता. जिस प्रकार दलदल में फंसा मनुष्य उसमें से निकलने के लिये जितना प्रयत्न करता है, उतना ही और फंसता जाता है, यही स्थिति वर्तमान युग में मनुष्य के साथ है. भोग-विलास, सांसारिक माया-जाल आदि की रचना मनुष्य स्वयं करता है और स्वयं ही उसमें फंसता जाता है. उसकी अपनी बनाई हथकड़ी-बेड़ी उसी के हाथ-पैरों में पड़ जाता है. जब विवेक नष्ट हो जाता है तो ऐसा ह



धरती पुत्रों को बंपर सौगात

सुरेश हिन्दुस्तानी

भारत कृषि प्रधान देश है, इसका आशय यह भी है कि भारत में कृषि के विकास के लिए जितने सकारात्मक प्रयास होंगे, भारत उतनी ही तीव्र गति से विकास के पथ पर अग्रसर होगा. यह बात सही है कि कृषि प्रधान देश होने के बाद भी कृषि विकास के लिए स्वतंत्रता के पश्चात उतने प्रयास नहीं किए गए, जितने होने चाहिए. इस कारण किसान खेती से दूर भागने का प्रयास करने लगा. कृषि के क्षेत्र में वर्तमान सरकार की यह महानतम उपलब्धि कही जा सकती है कि उसने कृषि उत्पादन के क्षेत्र में आशातीत सफलता प्राप्त की है, लेकिन किसानों को अपनी फसल का उचित मूल्य नहीं मिल पर रहा था, जिसके कारण किसान बहुत परेशान था. अब मोदी सरकार ने किसानों की फसल के लिए न्यूनतम समर्थन



हुरिर्यत कान्फ्रेंस के वयोवृद्ध नेता गिलानी की तबियत खराब, अस्पताल में भर्ती

पाक ने कारनाह सेक्टर में ब्रेक किया सिज़ फायर

भारतीय सैनिकों ने तंगधार में मारे दो पाक रेंजर्स

श्रीनगर में 15 अगस्त की पूर्व संध्या पर तिरंगा फहराने की कोशिश, एक शख्स गिरफ्तार

खुलासा: भारत में हमले तेज करने की तैयारी में 2 बड़े आतंकी संगठन

AFSPA कानून पर जल्द होगी सुनवाई, 300 जवानों ने खटखटाया था SC का दरवाजा

हरकतों से बाज नहीं आ रहा चीन, अतिक्रमण कर लद्दाख में लगाए पांच टेंट

सिपाही की शहादत का भारतीय सेना ने लिया बदला, मार गिराये दो पाकिस्‍तानी रेंजर्स

श्रीनगर और पीओके के बीच चलने वाली कारवां-ए-अमन बस सेवा बहाल

लैंडस्लाइडिंग के कारण 300 किलोमीटर लंबा जम्मू श्रीनगर हाईवे बंद

आतंकियों ने घर में घुसकर नागरिक को अगवा कर हत्या की, शव बरामद

जम्मू-कश्मीर में युवती से गैंगरेप, नदी में कूदकर दी जान

राजनाथ ने सेना को दी खुली छूट, बोले- जहां तक जाना है जाए हाथ नहीं बांधेगी सरकार

26 अगस्त तक चलेगी अमरनाथ यात्रा, अब तक 2.78 लाख श्रद्धालुओं ने किये दर्शन

AK 47 की गोली भी नहीं भेद पाएगी इस बुलेटप्रूफ जैकेट को

राम माधव:कश्मीर में जब कभी सरकार बनेगी तो बीजेपी उसका हिस्सा होगी

श्रीनगर में आतंकियों ने की स्वचालित हथियारों से गोलीबारी, एक जवान शहीद

गीता मित्तल ने ली जम्मू कश्मीर की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ

जम्मू-कश्मीर के सिनेमा घरों में बाहर से लोग नहीं ले जा पाएंगे खाना, SC ने पलटा फैसला

मसूद अजहर का भतीजा घुसा भारत में, सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर

आतंकियों ने किया सेना के गश्ती दल पर हमला, जवाबी हमले में 2 आतंकी ढेर

पाक ने फिर किया युद्धविराम का उलंघन, नॉर्थ कश्मीर के बांदीपोरा में की गोलीबारी

जम्मू एवं कश्मीर : डोडा के स्कूल में फटा बम, प्रिंसिपल तथा एक अन्य स्टाफ घायल

वूमेन एप के जरिये एक बटन दबाने पर मौके पर मिलेगी मदद

आर्टिकल 35ए पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई टली

सुप्रीम कोर्ट में अनुच्छेद 35ए पर सुनवाई आज, कश्मीर में बंद जारी

जम्मू से दिल्ली जा रहा एक आतंकी 8 हैंड ग्रेनेड के साथ गिरफ्तार

मौसम खराब होने से कैलाश मानसरोवर यात्रा में गतिरोध, फंसे 200 तीर्थयात्री

35-A: अलगाववादियों के आह्वान पर कश्मीर में पूर्ण बंद, जनजीवन प्रभावित

कश्मीर घाटी में सुरक्षा कारणों से रेल सेवाएं स्थगित

दिल्ली में अटैक करने की फिराक में जैश, 600 आतंकियों को दी गई ट्रेनिंग

जस्टिस गीता मित्तल जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट की पहली महिला जज बनीं

पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला के घर घुसा घुसपैठिया

शोपियां में सुरक्षाबलों ने चार आतंकियों को मार गिराया, सर्च ऑपरेशन जारी

अनंतनाग में बैंक लूटने पहुंचे आतंकी, सीआरपीएफ पर किया ग्रेनेड हमला

सऊदी से लौटे युवक, मकसद आतंकियों से औरंगजेब की हत्या का बदला लेना

बारामूला में मुठभेड़: छात्र से आतंकी बने खुर्शीद सहित 2 आतंकी ढेर

जैश-ए-मोहम्मद कर रहा बड़ी प्लानिंग, स्लीपिंग सैल के माध्यम करवाई रैकी

कुपवाड़ा में सर्च ऑप्रेशन कर रही सेना पर फायरिंग, 2 आतंकी ढेर

रिकॉर्ड संख्या में वैष्णो देवी पहुंचे भक्त, 7 माह में 50 लाख लोगों ने किए दर्शन

श्रीनगर में व्यवसायियों ने निकाला शांतिपूर्ण मार्च

J&K: आतंकियों की धमकी, नौकरी छोड़ दो, वरना कर देंगे हत्‍या

अब तक 2.62 लाख श्रद्धालुओं ने किए पवित्र शिवलिंग के दर्शन

सेना के बंकर पर आतंकियों ने किया ग्रेनेड हमला, तीन जवान घायल

जम्मू से 724 यात्रियों का जत्था अमरनाथ गुफा के लिए रवाना

घाटी में हथियार उठाने वाले युवाओं की संख्या में लगातार हो रही वृद्धि

एक सप्ताह से लापता एमबीए का छात्र लश्कर-ए-तैयबा में शामिल, तस्वीर वायरल

फारूक अब्दुल्ला ने जम्मू-कश्मीर में चुनावों का आधार तैयार करने पर दिया बल

भारतीय सेना ने किया स्पष्ट, डोकलाम में है पूरी तरह से शांति

मां की मार्मिक अपील पर पिघले आतंकी, अपहृत एसपीओ को किया रिहा

महबूबा बोलीं- पिता का अनादर ना हो इसलिए किया था बीजेपी के साथ गठबंधन

अबतक 2.56 लाख भक्तों पहुंचे बफार्नी बाबा के दरबार

लवामा के त्राल में आतंकियों ने पुलिसकर्मी को अगवा किया

देश से कट सकता है जम्मू का संपर्क, निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा

जवानों को मिलेगी 20 हजार नई बुलेट प्रूफ जैकेट, नहीं भेद पाएगी हार्ड स्टील कोर बुलेट

कुपवाड़ा में मारा गया एक आतंकी, अनंतनाग में सीआरपीएफ कैंप पर ग्रेनेड हमला

ऊधमपुर में भारी बारिश, बाढ़ में बहे दो लोगों में से एक की मौत

फ्लाइट में यात्री चिल्लाया प्लेन हाईजैक हो गया है, एअरपोर्ट पर हुआ गिरफ्तार

अनंतनाग के शहरी इलाके में मुठभेड़- दो आतंकी ढेर, सर्च ऑपरेशन जारी

श्रीनगर में सीआरपीएफ दल पर आतंकी हमला, जवान शहीद

हिज्बुल के पत्र को छापने पर हुई एफआईआर, नाराज पत्रकारों ने किया प्रदर्शन

लगातार हो रही बारिश, बालटाल मार्ग से रोकी गई अमरनाथ यात्रा

हुर्रियत के वरिष्ठ नेता मीरवाइज उमर फारुक नजरबंद

राज्यपाल वाेहरा ने आतंकवादियों के खिलाफ चलाये जा रहे अभियानों का जायजा लिया

जम्मू एवं कश्मीर में संघर्ष में दो दर्जन प्रदर्शनकारी घायल

एके-47 राइफल और यूबीजीएल लांचर सहित कुपवाड़ा से लश्कर का आतंकी गिरफ्तार



कश्यपमर कश्मीर और वराहमूला है बारामूला


पहले सीमा पर फायरिंग, फिर पहुंचा सुरक्षा परिषद के सदस्यों के पास पाकिस्तान


कश्मीर में बकरीद के लिए खरीदारी चरम पर


एमपी विजेंद्र सिंगल ने मां के चरणों में लगाई हाजरी


डोडा मे फटा बादल


भारत, पाकिस्तान के बीच दोस्ती का पुल बने कश्मीर : महबूबा


श्रीनगर: अदालत के बाहर आतंकी हमला


सरकार की कथित आपराधिक लापरवाही के खिलाफ पी.डी.पी. उतरी सडक़ों पर


दशर्नो के लिए हर रोज तीस हजार से भी अधिक श्रद्वालु धर्मनगरी मे


मुठभेड़ में एक आतंकवादी मारा गया


रक्त दान से किसी की जान बचाई जा सकती है


मोसम खराव रहने के वाद शनिवार को धर्मनगरी सहित भवन मार्ग पर मोसम वडा सुहावना


पैंथल मे मंकर संक्रति के दिन 114वा विशाल दंगल


रघुनाथ मंदिर केे परिस्पर मे कटडा वासियो की वैठक मुल्खराज पुरोहित की अध्यष्ता


महिला मोर्च द्वारा एक कार्यक्रम आयोजित किया गया


ग्रेनेड ब्लास्ट में एक बच्चे की मौत, दो घायल


के.जी.एच.ई.पी. के आसपास नागरिकों की आवाजाही पर प्रतिबंध


सीवल डिफैंस की वैठक का आयोजन


अमित कुमार ने एस.एस.पी. श्रीनगर का कार्यभार संभाला


जनता लोकतांत्रिक प्रतिद्वंद्दिता का महत्व समझने लगी है: महबूबा, सीमांत क्षेत्रों के हित पीडीपी के अति महत्वपूर्ण


मतदाताओं को करें जागरूक


मां वैष्णो देवी जी के भवन पर श्रद्धालु घायल


राहत काजमी की फिल्म आइडेंटिटी कार्ड की पूरी शूटिंग कश्मीर में हुई


कश्मीर में कड़ाके की ठंडए लेह में पारा 11 डिग्री


जम्मू कश्मीर रणजी को 20 लाख पुरस्कार