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टीआरपी की ख़बरों का मीडिया

मनोज कुमार

जब समाज की तरफ से आवाज आती है कि मीडिया से विश्वास कम हो रहा है या कि मीडिया अविश्वसनीय हो चली है तो सच मानिए ऐसा लगता कि किसी ने नश्चत चुभो दिया है. एक प्रतिबद्ध पत्रकार के नाते मीडिया की विश्वसनीयता पर ऐसे सवाल मुझ जैसे हजारों लोगों को परेशान करते होंगे, हो रहे होंगे. लेकिन सच तो यह है कि वाकई में स्थिति वही है जो आवाज हमारे कानों में गर्म शीशे की तरह उडेली जा रही है. हम खुद होकर अपने आपको अविश्वसनीय बनाने के लिए तैयार कर रहे हैं. हमारी पत्रकारिता का चाल, चेहरा और चरित्र टीआरपी पर आ कर रूक गया है. हम सिर्फ और सिर्फ अधिकाधिक राजस्व पर नजरें गड़ाये बैठे हैं. शायद हम सरोकार की पत्रकारिता से पीछा छुड़ाकर सस्ती लोकप्रि



शौक की सेल्फी का जानलेवा होना

ललित गर्ग

विश्व की उभरती हुई गंभीर समस्याओं में प्रमुख है मोबाइल कैमरे के जरिए सेल्फी लेना. इन दिनों मोबाइल कैमरे के जरिए सेल्फी यानी अपनी तस्वीर खुद उतारने के शौक के जानलेवा साबित होने की खबरें आए दिन सुनने को मिल रही हैं. नई पीढ़ी इस जाल में बुरी तरह कैद हो गयी है. आज हर कोई रोमांचक, हैरानी में डालने वाली एवं विस्मयकारी सेल्फी लेने के चक्कर में अपनी जान की भी परवाह नहीं कर रहे हैं. कोई जल में छलांग लगाते हुए तो कोई सांप के साथ, कोई शेर, बाघ, चीता के साथ तो कोई हवा में झुलते हुए, कोई आग से खेलते हुए तो कोई मोटरसाईकिल पर करतब दिखाते हुए सेल्फी लेने के लिये अपनी जान गंवा चुके हैं. लेकिन इसी मंगलवार को ओड़िशा के रायगढ़ जिले में सेल्



संतुष्टि सबका,तुष्टिकरण किसी का नहीं!

कुमार राकेश

पहले तीन तलाक से आज़ादी का मसला,मदरसों का आधुनिकीकरण,अब मक्का जाने के लिए हज सब्सिडी खत्म. क्या सचमुच देश बदल रहा है? पर बोलेगा कोई कुछ भी नहीं. मोदी सरकार अपने आक्रामक शैली से लवरेज है तो प्रमुख विपक्ष कांग्रेस की बोलती बंद है.फर्क तुष्टिकरण और संतुष्टीकरण का  है.कौन मुसलमान समाज को संतुष्ट कर रहा है ,कौन तुष्टिकरण कर रहा था.सब कुछ साफ़ दिख रहा है.
भाजपा की मोदी सरकार अपने सुर में अपना राग अलापते जा रही है.जिसको उनका धुन सुनना है,सुने ,नहीं सुनना हो तो अपने कान बंद कर ले.पर सरकार अपने सुर,लय और ताल के साथ अपना काम करती रहेगी.रही बात क्रेडिट लेने का,वो तो भाजपा सरकार ही लेगी.क्योकि वह दबंग है.वैसे भी जो सत्ता में हो



आखिर कब थमेंगी असुरक्षित मासूम बचपन की चीख़ें

रेखा पंकज

पूरा पाकिस्तान एक जनाजे के बोझ के नीचे दबा है, कोई भी अकेली बच्ची इस देश में महफूज नही...मानवता के खिलाफ उठी इस वीडियो को भारत के हर चैनल ने प्रमुखता से कवर किया तो हर सोशल साइट में खूब शेयर भी हुई. पाकिस्तान न्यूज चैनल की एक एंकर ने, लाइव शो में अपनी बेटी को गोद में बिठाकर, लड़कियों की सुरक्षा के मुद्दे पर जो चिंता जताई, उसने एक बार फिर चाइल्ड अब्यूज का मामला गरमा दिया. 

पाकिस्तान के कसूर जिले में आठ साल की जैनब की लाश उनके घर से दो किलोमीटर दूर कूड़े के ढेर में मिली है. पुलिस का कहना है कि बच्ची का रेप करने के उसका बाद कत्ल किया गया. इस खौफनाक वारदात से पाकिस्तान में ही नहीं भारत में भी लोगों में बेहद नारा



न्यायपालिका कटघरे में क्यों ?

कुमार राकेश

भारत की न्यायपालिका आज खुद कटघरे में है.कौन लाया है? क्यों हुआ ऐसा? उद्देश्य क्या? क्या एक सुनियोजित राजनीतिक मसला है या वास्तव में इन 4 न्यायाधीशों का स्वयं का दर्द है? यदि स्वयं स्वार्थ का दर्द है- (जिसकी सम्भावना सबसे ज्यादा दिख रही है) फिर विश्व का सबसे जानदार लोकतंत्र खतरे में कैसे? ऐसे कई सवाल है ,जिसका जवाब देश को चाहिए.देश की जनता जानने को इच्छुक है.जरा सोचिये ,जब देश की न्यायपालिका खुद कटघरे में आ जाये तो आम जनता का क्या होगा? ये सबसे बड़ा सवाल है.
देश की आज़ादी के 70 वर्षों के बाद  सम्भवतः पहली बार 2018 में उच्चतम न्यायालय के चार न्यायाधीशों ने अपने मुख्य न्यायाधीश की कार्यशैली पर सवाल उठाया है .वो भी मीडिया म



उप्र में न्याय पंचायतों का खात्मा:एक अनुचित निर्णय

अरुण तिवारी

स्वयं को भारतीय संस्कृति और परम्पराओं का पोषक दल बताने वाले भारतीय जनता पार्टी के विचारकों के लिए यह आइना देखने की बात है कि उत्तर प्रदेश की योगी केबिनेट ने समाज और संविधान की मान्यता प्राप्त न्याय पंचायत सरीखे एक परम्परागत संस्थान को खत्म करने का निर्णय लिया. उत्तर प्रदेश के पंचायत प्रतिनिधियों तथा ग्रामसभाओं के लिए यह प्रतिक्रिया व्यक्त की बात है कि यह निर्णय इस तर्क के साथ लिया गया है कि न्याय पंचायतों के सरपंच व सदस्य न्याय करने में सक्षम नहीं हैं. सामाजिक कार्यकर्ताओं के लिए यह विश्लेषण करने की बात है कि न्याय पंचायती व्यवस्था को खत्म करने का निर्णय कितना उचित है, कितना अनुचित ? आइये, करें.

अपन



नरेन्द्रनाथ से स्वामी विवेकानंद हो जाना 

मनोज कुमार

दुनियाभर की युवा शक्ति को दिशा देने वाले स्वामी विवेकानंद का सानिध्य अविभाजित मध्यप्रदेश को प्राप्त हुआ था. यह वह कालखंड था जब स्वामी विवेकानंद, स्वामी विवेकानंद ना होकर नरेन्द्रनाथ दत्त थे. इतिहास के पन्ने पर दर्ज कई तथ्य और स्मरण इस बात को पुख्ता करते हैं कि किशोरवय के नरेन्द्रनाथ दत्त से स्वामी विवेकानंद बन जाने का जो सफर शुरू हुआ था, उसमें अविभाजित मध्यप्रदेश की आबोहवा का पूरा पूरा प्रभाव था. स्वामी विवेकानंद जी के शिकागो में दिए गए विश्व प्रसिद्ध भाषण के सवा सौ साल पूरे हो चुके हैं. इन सवा सालों में लगातार उनको सुना जा रहा है, गुना जा रहा है. अद्वितीय, अप्रतिम भाषण की बुनियाद में कहीं न कहीं उस अविभाजित



वर्ष 2018 में वर्ष 2019 के सवाल

प्रदीप द्विवेदी

वर्ष 2018 आ गया है, लेकिन 2019 के कई सवाल लेकर... सबसे बड़ा सवाल- कौन बनेगा प्रधानमंत्री?
अगर यह सवाल वर्ष 2017 के पूर्वार्ध में होता तो बहुत सरल सा जवाब था- नरेन्द्रभाई मोदी. लेकिन... 2017 में गुजरात चुनाव के दौरान राजनीति ने करवट ली, आमजन ने अपना नया नजरिया पेश किया और इस सवाल को दिलचस्प बना दिया?
केन्द्र की भाजपा सरकार अपनी सैद्धान्तिक सफाई में... नीतिगत निर्णयों में, इस कदर खो गई कि आमजन के लिए प्रायोगिक परिणाम परेशानी का सबब बन गए. 
बहरीन दौरे पर गए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने ऐसे ही कई सवाल खड़े किए हैं, भाजपा इन पर चुप्पी साध सकती है लेकिन... सवाल तो तब भी कायम रहेंगे?
1. खबर है कि... आगामी कर्नाटक विधानसभा चुनाव और 201



अगले चुनावों में आर्थिक आधार पर आरक्षण रहेगा बड़ा मुद्दा

अभिमनोज

आॅल इण्डिया ब्राह्मण फेडरेशन की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक एवं प्रतिनिधियों का राष्ट्रीय सम्मेलन हैदराबाद में अध्यक्ष भंवरलाल शर्मा की अध्यक्षता, संत वी गणेश के सानिध्य, तेलगांना ब्राह्मण वेलफेयर बोर्ड के अध्यक्ष, वरिष्ठ आईएएस व तेलगांना सरकार के सलाहकार डाॅ. के वी रम्मनाचार्य के मुख्य अतिथ्य, आन्ध्रप्रदेश ब्राह्मण वेलफेयर बोर्ड के अध्यक्ष व आन्ध्रप्रदेश सरकार के सलाहकार डाॅ एस वेणुगोपाल चैरी, फेडरेशन के मुख्य सलाहकार कोटाशंकर शर्मा, महामंत्री डा. प्रदीप ज्योति, कोषाध्यक्ष चन्द्रशेखर शर्मा के विशिष्ठ अतिथ्य में किया गया.
इस समारोह में मुख्यरूप से आर्थिक आधार पर आरक्षण पर बातचीत हुई और इस स



चुनावी चंदे के लिए सराहनीय पहल

सुरेश हिन्दुस्तानी

देश में होने वाले चुनावों के दौरान किस प्रकार किया जाता है, यह किसी से छिपा नहीं हैं, लेकिन पारदर्शिता के अभाव में खुला भी नहीं है. हम जानते हैं कि देश में भ्रष्टाचार और अनैतिक तरीके से कराए जाने वाले कार्यों के पीछे चुनाव को भी एक माध्यम बनाया जाने लगा है. चुनाव अनीति पूर्वक कमाए गए धन को खपाने का बेहतर माध्यम बनता जा रहा था. इस सबके कारण देश में यह बुराई पनपने के कारण लोग गलत काम की ओर भी प्रवृत होते जा रहे थे.

लोगों में बढ़ रहे लालचीपन के कारण देश को तो नुकसान हो ही रहा है, साथ ही जनता को भी इसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है. अनैतिक कमाई करने वालों से प्रतिस्पर्धा करने के कारण आम जनता ऋण के जाल में फंसती जा रही थी, यह



राज्यसभा की प्रासंगिकता पर सवाल क्यों?

ललित गर्ग

आम आदमी पार्टी के राज्यसभा उम्मीदवारों को लेकर विवाद होना और सवाल उठना स्वाभाविक है. इस मसले ने एक बार फिर राज्यसभा की उपयोगिता एवं प्रासंगिकता पर भी सवाल खड़े कर दिये हैं. भारत में लोकतांत्रिक प्रणाली के तहत जिस तरह की शर्मनाक घटनाएं घट रही हैं, इसमें आम आदमी पार्टी के द्वारा राज्यसभा सदस्य बनाने की स्थितियों ने एक दाग और जड़ दिया है. इस तरह की शर्मनाक स्थितियों की वजह से लोगों की आस्था संसदीय लोकतंत्र के प्रति कमजोर होना स्वाभाविक है.

लोकतंत्र के मूल्यों के साथ हो रहे खिलवाड़ की वजह से भविष्य का चित्र संशय से भरपूर नजर आता है. मूल्यहीनता की चरम सीमा पर पहुंचकर राजनीतिक पार्टियां अलग-अलग विचारधारा एवं नाम



2017, 2018 और 2019? कल, आज और कल

प्रदीप द्विवेदी

जहां 2017 के पूर्वार्द्ध में जब यूपी में विधानसभा चुनाव हुए तब भाजपा का विजय रथ सभी राजनीतिक दलों से बहुत आगे था... उस वक्त जीतना तो दूर, यह कल्पना भी नहीं की जा सकती थी कि- अब भाजपा से मुकाबला भी किया जा सकता है? लेकिन... वर्ष 2017 के उत्तरार्ध में गुजरात विधानसभा चुनाव के दौरान राजनीतिक तस्वीर एकदम बदली और गैरभाजपाइयों ने जीत भले ही हांसिल नहीं की हो किन्तु यह भरोसा जीत लिया कि- भाजपा से मुकाबला किया जा सकता है.
बावजूद इसके... अभी भी गैरभाजपाइयों की राह आसान नहीं हुई है, क्योंकि... भाजपा के पास अभी भी बाजी पलटने का समय बचा है. अब यह भाजपा नेतृत्व पर निर्भर है कि वह नए राजनीतिक हालातों में जनमत को अपनी ओर कैसे फिर से आकर्षि



सांझ सकारे सूर्योदय

अरुण तिवारी

राजनाथ शर्मा, वैसे तो काफी गंभीर आदमी थे. लेकिन जब से पचपन के हुए, उन पर अचानक जैसे बचपन का भूत सवार हो गया. जब देखो, तब बचपन की बातें और यादें. रास्ते चलते बच्चों को अक्सर छेड़ देते. रोता हो, तो हंसा देते. हंसता हो, तो चिढ़ा देते. हैलो दोस्त कहकर किसी भी बच्चे के आगे अपना हाथ बढ़ा देते. उनकी जेबें टाॅफी, लाॅलीपाॅप, खट्टी-मिट्ठी गोलियों जैसी बच्चों को प्रिय चीजों से भरी रहतीं. कभी पतंग, तो कभी गुब्बारे खरीद लेते और बच्चों में बांट देते. तुतलाकर बोलते. कभी किसी के कान में अचानक से हू से कर देते. बच्चों जैसी हरकते करने में उन्हे मज़ा आने लगा. अब वह जेब में एक सीटी भी रखने लगे थे. उसे बजाकर बच्चों को अपनी ओर आकर्षित करते. यहां तक कि



राजनीति में एमजीआर की सफलता को लेकर रजनीकांत की तरह ही जताई गयी थीं आशंकाएं!

सुरेंद्र किशोर

मशहूर फिल्म अभिनेता एम.जी.रामचंद्रन .जब पहली बार 1977 में तमिलनाडु के मुख्य मंत्री बने थे तो भी कुछ राजनीतिक पंडितों ने कहा था कि ‘वह अनर्थकारी साबित होंगे.’यह भी कहा गया कि आम चुनाव में उनकी जीत एक सामान्य योग्यता वाले व्यक्ति यानी एक मीडियोकर की जीत है.

पर गद्दी पर बैठने के  बाद एम.जी.आर.ने स्कूली छात्र-छात्राओं के लिए महत्वाकांक्षी व बेहतर मध्यान्ह भोजन कार्यक्रम सहित   राज्य में कई नए काम किए. बीच में कुछ महीनों को छोड़ कर वे 1977 से 1987 तक मुख्य मंत्री रहे.कुल मिलाकर वे एक सफल मुख्य मंत्री साबित हुए थे.उन्हें भारत रत्न से भी सम्मानित किया गया था.1917 में जन्मे एम.जी.आर.का 1987 में निधन हो गया.

 अब जबकि तमि



डूबते सूरज की बिदाई नववर्ष का स्वागत कैसे!  

डाँ नीलम महेंद्र


पेड़ अपनी जड़ों को खुद नहीं काटता,
पतंग अपनी डोर को खुद नहीं काटती,

लेकिन मनुष्य आज आधुनिकता की दौड़ में अपनी जड़ें और अपनी डोर दोनों काटता जा रहा है.
काश वो समझ पाता कि पेड़ तभी तक आज़ादी से मिट्टी में खड़ा है जबतक वो अपनी जड़ों से जुड़ा है और  पतंग भी तभी तक आसमान में उड़ने के लिए आजाद है जबतक वो अपनी डोर से बंधी है.
आज पाश्चात्य सभ्यता का अनुसरण करते हुए जाने अनजाने हम अपनी संस्कृति की जड़ों और परम्पराओं की डोर को काट कर किस दिशा में जा रहे हैं?
ये प्रश्न आज कितना प्रासंगिक लग रहा है जब हमारे समाज में महज तारीख़ बदलने की एक प्रक्रिया को नववर्ष के रूप में मनाने की होड़ लगी हो.
जब हमारे संस्कृति में हर शुभ



लालू दोषी : जेल गए

सुरेश हिन्दुस्तानी

बिहार के बहुचर्चित चारा घोटाले में राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री लालूप्रसाद यादव को सीबीआई न्यायालय द्वारा दोषी करार दिया जा चुका है. इससे यह प्रमाणित हो चुका है कि लालू प्रसाद यादव देश के बहुत बड़े अपराधी हैं, लेकिन सवाल यह आता है कि उनको अपराध बोध कतई नहीं हो रहा है. वर्तमान राष्ट्रीय जनता दल के अघोषित मुखिया के रुप में अपनी राजनीति करने लालू प्रसाद यादव इस पूरे घटनाक्रम को भाजपा की राजनीति करार दे रहे हैं, जबकि वास्तविकता यह है कि यह पूरा मामला न्यायालय में चला और न्यायालय से ही उनको दोषी करार दिया गया है, इसमें भारतीय जनता पार्टी की बिलकुल भूमिका नहीं है.

लालू प्रसाद यादव के वक्तव्य से यह आशय निकाला जा सक



नववर्ष की राह: शांति की चाह

ललित गर्ग

नया वर्ष है क्या? मुड़कर एक बार अतीत को देख लेने का स्वर्णिम अवसर. क्या खोया, क्या पाया, इस गणित के सवाल का सही जवाब. आने वाले कल की रचनात्मक तस्वीर के रेखांकन का प्रेरक क्षण. क्या बनना, क्या मिटाना, इस अन्वेषणा में संकल्पों की सुरक्षा पंक्तियों का निर्माण. ‘आज’, ‘अभी’, ‘इसी क्षण’ को पूर्णता के साथ जी लेने का जागृत अभ्यास. नयेवर्ष की शुरूआत हर बार एक नया सन्देश, नया संबोध, नया सवाल लेकर आती है. एक सार्थक प्रश्न यह भी है कि व्यक्ति ऊर्जावान ही जन्म लेता है या उसे समाज ऊर्जावान बनाता है? तब मस्तिष्क की सुन्दरता का क्या अर्थ रह जाता है. मनुष्य जीवन की उपलब्धि है चेतना, अपने अस्तित्व की पहचान. इसी आधार पर वस्तुपरक



भारत रत्न का अटल दर्शन

हेमेन्द्र क्षीरसागर

भारत के गौरवाशाली इतिहास में वर्षो बाद भी अटल दर्शन  की शाश्वतता को कोई नकार नहीं पाएगा यह सही मायनों में भारत रत्न की अटल और अटूट दधिचि भी है. जिस दर्शन  में सामंजस्य रूपी अमृतरस, संस्कृति रक्षा रूपी तत्वबोध और राष्ट्रधर्म से लेकर राजधर्म तक का गूढार्थ ज्ञान एवं हर आय व आयु वर्ग का कालजयी प्रतिनिधित्व करने की कला समाहित हो, वही सही मायने में अटल दर्शन  हैं. इस दर्शन  को अवसरवादिता के झटके से तोडा नहीं जा सकता. पदलिप्सा से उठे तूफान से मोडा नहीं जा सकता. यह क्षण-भंगुर नहीं, जिसके अस्तित्व को समाप्त किया जा सके. उस अटल दर्शन  को यदि सार्वजनिक जीवन में कदम रखने वाले युवाओं एवं भावी पीढी को एकसूत्र में पिरोक



क्या यह प्रधानमंत्री पद की गरिमा का अपमान नहीं है!

डाँ नीलम महेंद्र

वर्तमान में चल रहे संसद के शीतकालीन सत्र में भारतीय लोकतंत्र की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस चुनावों के दौरान प्रधानमंत्री मोदी द्वारा माफी की मांग पर सदन की कार्यवाही में लगातार बाधा डालने का काम कर रही है. वैसे ऐसा पहली बार नहीं है कि कांग्रेस के द्वारा संसद की कार्यवाही ऐसे मुद्दों के लिए बाधित की जा रही हो जिनका देश से कोई लेना देना नहीं हो.
इससे पहले भी वह कई देशहित से परे स्वार्थ की राजनीति से प्रेरित मुद्दे उठाकर संसद सत्र को ठप्प करने का काम कर चुकी है. चाहे नैशनल हेराल्ड का मामला हो, या फिर सुषमा स्वराज द्वारा ललित मोदी की कथित मदद का मुद्दा हो, अथवा मोदी द्वारा पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर उन



ढोंगी का कोई धर्म नहीं होता, भिखारी की कोई जाति नहीं होती!

प्रदीप द्विवेदी

सदियों से ढोंगियों के शिकार होते रहे हैं भोलेभाले लोग... वर्षों से बीमार मानसिकता से बढ़ रहे हैं भिखारी, किन्तु... ढोंगी का कोई धर्म नहीं होता, भिखारी की कोई जाति नहीं होती.
तो फिर... हर बहस में ढोंगियों के अत्याचार लिए हिन्दू संत समाज से सवाल क्यों? किसी भिखारी की जाति पर बेशर्म बयान क्यों? क्या किसी और धर्म में ढोंगी नहीं हैं? क्या और किसी जाति में भिखारी नहीं हैं?
दरअसल... अत्याचारी, ढोंगी, भिखारी आदि बीमार मानसिकता के शिकार होते हैं और इस बीमार मानसिकता का संबंध, किसी धर्म... किसी समाज... किसी जाति से नहीं होता है, इसलिए... उदाहरण के आधार पर, किसी धर्म... किसी समाज... किसी जाति पर आरोप लगाना बेशर्म मुर्खता है.
कई भिखा



टनों पिघले मोम पर जमा सवाल : दोषी कौन ?

गिरीश बिल्लोरे “मुकुल”

डा राम मनोहर लोहिया जी ने कहा था- ज़िंदा कौमें पांच साल इंतज़ार नहीं करतीं... अगर लोहिया ने सही कहा है तो हमें अपने ज़िंदा होने पर संदेह है. निर्भया यानी ज्योति सिंह के जीने मरने से किसी को क्या फर्क पडेगा. पड़े भी क्यों भारत में जो जब ज़रूरी तौर पर होना चाहिए वो तब हो ही कैसे सकता है . जब सब जानते हैं कि निर्भया यानी ज्योति के बलिदान के बाद टनों से मोमबत्तियां पिघला तो दीं आम जनता ने... सुनो निर्भया की माँ....! और हाँ  पिता तुम भी सुन लो...!!  हमने भी अगुआई की थी ... उस दिन मोमबत्ती जला कर ये अलग बात है उसी पिघले और फिर जमे मोम पर सवाल सजा रहे हो ..!
कोर्ट चिंतित है सदन रो रहा है आप और हम सब दुःखी हैं ज़वाब किसी के पास नहीं . 
समय ब



पंजाब के निकाय चुनावों का हिंसक होना?

ललित गर्ग

पंजाब के नगर निकाय चुनावों में कांग्रेस को विधानसभा चुनावों की ही तरह ऐतिहासिक जीत हासिल हुई है. पूरे देश में भाजपा का परचम फहरा रहा है, हाल ही में गुजरात एवं हिमाचल प्रदेश में भाजपा ने जीत हासिल करके कांग्रेसमुक्त भारत की दिशा में एक और कदम बढ़ाया है लेकिन पंजाब के निकाय चुनावों ने कांग्रेस की टूटती सांसों में नये प्राण का संचार किया है. लेकिन इन चुनावों ने लोकतंत्र को एक बार फिर लहूलुहान किया है, जो बेहद शर्मनाक एवं चिन्ता का विषय है. पंजाब मंे मतपेटी पर खून के धब्बे लगे, जो लोकतंत्र के नाम पर कालिख है. इतनी बड़ी चुनावी हिंसा एवं ज़ोर-ज़बरदस्ती मतदान केन्द्रों पर कब्जों ने लोकतंत्र का गला घोंट कर रख दिया. मूल्यों



भाजपा को चेतावनी, कांग्रेस को सबक

सुरेश हिन्दुस्तानी

गुजरात के चुनाव परिणामों ने जहां भारतीय जनता पार्टी के कान खड़े कर दिए हैं, वहीं बर्फीले प्रदेश हिमाचल में कांग्रेस को बहुत बड़ा सबक दिया है. इन दोनों चुनावों के परिणामों के नेपथ्य से कुल मिलाकर यह संदेश तो प्रवाहित हो रहा है कि कांग्रेस धीरे-धीरे ही सही, परंतु सत्ता मुक्त पार्टी की ओर कदम बढ़ा रही है. वर्तमान में कांग्रेस के पास देश के चार ही राज्य ऐसे हैं, जहां उसकी सरकार है. इतना बड़ा देश और केवल चार राज्य. यह कांग्रेस के लिए आत्म मंथन का विषय हो सकता है. वैसे कांग्रेस गुजरात में अपनी बढ़ती हुई ताकत को देखकर आत्म मुग्ध हो रही है. वह अपनी हार को भी जीत मानने की भूल कर रही है. हालांकि यह सत्य है कि जो हारकर भी जीत जाए, उसे



बदजुबान नेताओं पर लगाम लगाने का कोई है उपाय ?

सुरेंद्र किशोर

सत्तर के दशक की बात है।एक चर्चित व दबंग समाजवादी नेता तत्कालीन प्रधान मंत्री इंदिरा गांधी के खिलाफ कड़ी -कड़ी बातें अक्सर बोलते रहते थे।
एक बार किसी ने उनसे कहा कि इंदिरा जी औरत हैं,आपको उनके खिलाफ इतनी कड़ी बातें नहीं बोलनी चाहिए।
इस पर नेता जी शुरू हो गए, ‘क्या कहा ? इंदिरा जी औरत हैं ? अरे भई , पूतना भी तो औरत थी।सूपनखा भी तो औरत ही थी।’
और न जाने क्या -क्या कह दिया उस नेता जी ने !
बेचारा कहने वाला चुप रह गया।
  इंदिरा जी एकाधिकारवादी जरूर थीं, पर उनकी तुलना पूतना से करना ज्यादती थी।
  पर, इसके साथ ही लोगों ने देखा की किस तरह इस देश की राजनीति से गांधी युग की  शालीनता समय के साथ धीरे -धीरे समाप्त



...तो यह था पीएम मोदी की चिट्ठी का असर?

अभिमनोज

पीएम मोदी को पहले ही पता चल गया था कि इस बार गुजरात चुनाव आसान नहीं है क्योंकि मुद्दों के मोर्चे पर भाजपा कमजोर है और इसीलिए उन्होंने चुनाव प्रचार में शुरूआत से ही इमोश्नल इंपेक्ट पर ध्यान दिया... सबसे पहले उन्होंने गुजरात के लिए भावनात्मक चिट्ठी लिखी, जिसका असर चुनाव नतीजों पर नजर आ रहा है.

पीएम मोदी की चुनावी रैलियों के शुरुआती दौर में कम ही भीड़ आ रही थी, लेकिन... जैसे-जैसे चुनावी रंग चढऩे लगा भीड़ बढऩे लगी.

पीएम मोदी ने भी लोगों को दल के बजाय दिल से जोड़ा. नतीजा... इमोश्नल इंपेक्ट बढऩे लगा और इसी बीच बची कसर कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर ने पूरी कर दी... पीएम मोदी ने मणिशंकर अय्यर के बयान को ऐसा पकड़ा कि पूरे



सबसे पहले पलपल इंडिया ने कहा था-राहुल के भी अच्छे दिन आ रहे हैं, लेकिन...

प्रदीप द्विवेदी

वर्ष 2016 में जब कांग्रेसियों को भी यकीन नहीं था कि राहुल गांधी और कांग्रेस के भी कभी अच्छे दिन आएंगे, तब पलपल इंडिया ने कहा था... राहुल के भी अच्छे दिन आ रहे हैं! (26 दिसंबर 2016) लेकिन... राहुल गांधी को कोई चमत्कार ही नरेन्द्र मोदी से आगे ले जा सकता है!

पलपल इंडिया ने ही पहली बार यह भी बताया था कि... धूलंड़ी पॉलटिक्स के शिकार हुए हैं राहुल गांधी! (29 दिसंबर 2016)

पल-पल इंडिया के एस्ट्रो पॉलटिकल एनालिसिस में बताया गया था कि... राहुल गांधी का बेहतर समय आ रहा है! (13 सितंबर 2017) इसमें कहा गया था कि... सितारों की समीकरणों पर भरोसा करें तो नवंबर 2017 से पहले राहुल गांधी तकरीबन तीन साल से चल रही संघर्ष की स्थिति से बाहर आनेवाले हैं... पीएम नरेन



विकास कभी पागल नहीं होता!

कुमार राकेश

देश में अब विकास का सिक्का ही चलेगा न कि जातिवाद,वंशवाद और आरक्षण का.गुजरात और हिमाचल प्रदेश में भाजपा की जीत ने देश के समग्रता के मद्देनजर एक नयी रेखा खींच दी है .अब सभी राजनीतिक दलों को विकास के मार्ग पर चलने को मजबूर होना पड़ेगा.विकास कभी पागल नहीं होता ,बल्कि विकास से वे लोग पागल होते हैं.जो विकास को पागल बोलते हैं. ये तय हो गया है की अब जातिवाद और आरक्षण देश के लिए जरुरी नहीं बल्कि समग्र विकास जरुरी है.विकास ही सर्वोपरि है .विकास ही अब विजयी होगा.न की अब वंशवाद,तुष्टिकरण या कोई अन्य क्षणिक मुद्दा.
विकास के इस महादौर में भाजपा नेता और प्रधानमंत्री नरेन्द्र भाई मोदी एक महानायक बन गए है.विश्व के महानायक.विरोधी



प्यार पर पहरा कब तक?

ललित गर्ग

नया भारत, विकसित भारत एवं नयी सोच के भारत को निर्मित करने में जो सबसे बड़ी बाधाएं देखने में आ रही है, हमारी संकीर्ण सोच एवं विकृत मानसिकता प्रमुख हैं. संचार क्रांति हो या अंतरिक्ष में बढ़ती पहुंच-ये अद्भुत एवं विलक्षण घटनाएं तब बेमानी लगती है या बौनी हो जाती है जब हमारे समाज की सोच में प्यार के लिये संकीर्णता एवं जड़ता की दीवारें देखने को मिलती है. फिर मन को झकझोरने वाला प्रश्न खड़ा होता है क्या वाकई जमाना बहुत आगे निकल आया है या अब भी अंधेरे की संकीर्ण एवं बदबूदार गलियों में ठहरा हुआ है? तंग मानसिकता एवं संकीर्णता से पैदा होने वाली क्रूरता की खबरें रोज आती रहती हैं.

कभी किसी पारिवारिक मर्यादा के रूप में, सांप्र



सर्वेक्षणों में फिर खिला कमल

सुरेश हिन्दुस्तानी

गुजरात और हिमाचल प्रदेश में विधानसभा चुनाव के बाद हुए सर्वेक्षणों के आधार पर अब यह पूरी तरह से सुनिश्चित लगने लगा है कि दोनों राज्यों में भाजपा की सरकार बनने जा रही है. सीटों की संख्या क्या होगी, इस बारे में अभी कह पाना फिलहाल जल्दबाजी ही होगी, लेकिन वातावरण जिस प्रकार की हवा को प्रवाहित करता हुआ दिखाई दे रहा है, उससे तो यही लगता है कि गुजरात और हिमाचल में जनता ने एक बार फिर से मोदी के नाम पर मुहर लगा दी है. गुजरात और हिमाचल में कांगे्रस को जिस प्रदर्शन की उम्मीद थी, वैसा होता हुआ दिखाई नहीं दे रहा. जहां तक गुजरात के चुनाव की बात है तो सर्वेक्षण यही दिखा रहे हैं कि देश में नरेन्द्र मोदी का कोई मुकाबला ही नहीं है. इस च



योगी ने गुजरात में जहां किया प्रचार वहां मिली 25 से ज्यादा सीटें

गुजरात की कुछ सीटों पर रही कांटे की टक्कर,सिर्फ 200 वोटों से हुई जीत-हार

पूनावाला के समर्थकों ने प्रदर्शन कर कहा राहुल की वजह से हारे

गुजरात चुनाव में शस्त्र की तरह चले ये जुमले

सूरत में कांग्रेस को बहुत भरी पड़ा गब्बर, 12 की 12 सीट्स पर भाजपा

गुजरात चुनाव परिणाम: फिर छाया 'भगवा', बीजेपी ने अब तक 88 सीटों पर दर्ज की जीत

ट्विटर पर भी जारी है जंग

गुजरात चुनाव : विजेताओं की सूचि

चुनाव में इस बार छाये रहे औरंगजेब और ब्लूटूथ

चुनाव नतीजों का असरः शेयर बाजार में उछाल,धारक मालामाल

गिरिराज सिंह ने राहुल पर साधा निशाना- जेएनयू-केरल में बीफ पार्टी और गुजरात में जनेऊ-तिलक नहीं चलेगा

मतगणना से पहले सज रहा बीजेपी दफ्तर, जिग्नेश-अल्पेश कह रहे कमल की होगी हार

निरंजन परिहार: गुजरात से निखरी राहुल गांधी की तस्वीर और गहलोत निकले चाणक्य

गुजरात चुनाव में कौन जीतेगा पर कुत्ते ने की ये भविष्यवाणी, वायरल हुआ वीडियो

प्रदीप द्विवेदी: अब 18 दिसंबर 2017 को ही खुलेगी एग्जेट पोलपट्टी!

गुजरात चुनाव: दूसरे चरण में दोपहर डेढ़ बजे तक 44.3 फीसदी मतदान

राहुल को आयोग के नोटिस पर भड़की कांग्रेस, कहा- सबसे पहले मोदी पर दर्ज हो FIR

अभिमनोज: जीते तो लोकप्रियता हमारी! हारे तो ईवीएम की जिम्मेदारी?

प्रदीप द्विवेदी: पीएम नरेन्द्र मोदी गुजराती मतदाताओं को पहचानते हैं!

मोदी जी, गुजरात में आपको प्यार से बिना गुस्से के हराने जा रहे है: राहुल

गुजरात चुनाव: पहले चरण का मतदान जारी, 12 बजे तक 31 फीसदी वोटिंग

मणिशंकर ने पाकिस्तान जाकर मुझे रास्ते से हटाने की बात कही थी, इसका क्या मतलब था?:मोदी

प्रदीप द्विवेदी: इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन को छोड़ो, महागठबंधन की सोचो!

गुजरात में बीजेपी से छिन सकती है सत्ता, कांग्रेस से कांटे का मुकाबला: सर्वे

ललित गर्ग: गुजरात चुनाव में आदिवासियों की उपेक्षा क्यों?

गुजरात चुनावः कांग्रेस का घोषणा पत्र जारी, पाटीदारों को आरक्षण, कर्ज माफी का किया वादा

मणिशंकर अय्यर के बयान को ट्विस्ट देकर कांग्रेस को लपेट गए पीएम मोदी?

प्रदीप द्विवेदी: गुजरात चुनाव के दौरान चार अस्त ग्रह क्या चमत्कार दिखाएंगे?

मुश्किल में हार्दिक पटेलः कथित सेक्स सीडी में दिखी महिला से मिलेगी NCW टीम

प्रदीप द्विवेदी: लेकिन गुजरात, यूपी नहीं है? असली अग्रिपरीक्षा गुजराती मतदाताओं की है!

योगी का राहुल पर निशाना, गुजरात की बात करने वाले अमेठी भी नहीं बचा पाए

भाजपा के गढ़ में कांग्रेस ने उतारी ये ग्लैमरस कैंडिडेट, लंदन में की है पढ़ाई

सोमनाथ मंदिर में राहुल गांधी के गैर हिन्दू रजिस्टर पर साइन से चढ़ा सियासी पारा

गुजरात चुनाव में राहुल गांधी की रणनीति, पीएम मोदी से रोज पूछेंगे सवाल

युवाओं को वोटर लिस्ट में जोड़ने के लिए चुनाव आयोग ने फेसबुक के साथ किया गठबंधन

मैंने चाय बेची, देश नहीं: मोदी

गुजरात चुनाव विकास के विश्वास और वंशवाद के खिलाफ: पीएम मोदी

गुजरात चुनाव: काग्रेस की तीसरी लिस्ट के बाद कार्यकताओं में पड़ी फूट, किया बवाल

गुजरात चुनाव: चुनावी मैदान में आज से उतरेंगे पीएम मोदी, करेंगे धुआंधार रैलियां

गुजरात में फर्जी सूची के बाद अब सामने आया, कांग्रेस प्रेसिडेंट का 'फर्जी' इस्तीफा !

बिना अनुमति सभा करने पर फंसे हार्दिक पटेल, मामला दर्ज

सुशील मोदी को घर में घुसकर मारेंगे और बेटे की शादी में करेंगे तोड़फोड़: तेज प्रताप

टिकट बंटवारे से नाराज पूर्व सांसद और उनके बेटे ने दिया बीजेपी से इस्तीफा

गुजरात व हिमाचल चुनाव के नतीजों से पहले राहुल गांधी होंगे कांग्रेस अध्यक्ष

गुजरात चुनाव: BJP ने जारी की तीसरी सूची, 15 विधायकों के टिकट काटे

गुजरात चुनाव : कांग्रेस की पहली सूची आते ही भड़के पाटीदार नेता, तोडफ़ोड़

गुजरात चुनाव: हार्दिक पटेल को नहीं मिली जनसभा की इजाजत, भाजपा पर भड़के

गुजरात चुनाव: अब कोई नहीं बोलेगा पप्पू, बीजेपी ने 'युवराज' को बनाया नया हथियार

अभिमनोज: हर उप चुनाव नतीजा कुछ कहता है!

प्रदीप द्विवेदी: गुजरात में कल के सपनों पर भारी पड़ते आज के सवाल,संशय की स्थिति

हिमाचल प्रदेश में हुआ 74% मतदान, 337 की किस्मत ईवीएम में कैद

प्रदीप द्विवेदी: गुजरात के चुनावी नतीजों पर निर्भर महाराष्ट्र के मध्यावधि चुनाव!

बोलेगा फेसबुक, वोट जरूर डालिए

प्रदीप द्विवेदी: अब चुनावों का सबसे प्रभावी अस्त्र- डिजिटलास्त्र!

गुजरात चुनावों से पहले कांग्रेस को मिला जिग्नेश का साथ, 90 फीसदी मांगों पर बनी बात

प्रदीप द्विवेदी: गुजरात में नजर आ रही है कॉलेज इलैक्शन जैसी जोड़तोड़!

कांगड़ा रैली में PM मोदी बोले- देवभूमि को तबाह करने वाले राक्षस नहीं तो क्‍या हैं

आई बी की खुफिया रिपोर्ट पर धूमल बने भाजपा के सीएम उम्मीदवार

हिमाचल प्रदेश: कांग्रेस ने जारी किया चुनावी घोषणा पत्र, किए हैं बड़े-बड़े वादे

हार्दिक और कांग्रेस में धीरे-धीरे बन रही सहमति,अल्टीमेटम के बाद नरम पड़े

ललित गर्ग: गुजरात के भाल पर चुनावी महासंग्राम!

गुजरात: वोटरों को पैसे बांटते हुए कैमरे में कैद हुए भाजपा-कांग्रेस के पार्षद

नोटबंदी और जीएसटी देश के लिए 2 बड़े झटके, अर्थव्यवस्था को तबाह कर दिया : राहुल

सुरेश हिन्दुस्थानी: गुजरात में कांग्रेस के सामने चुनौतियों का पहाड़

गुजरात में विजय रुपाणी की फिसली जुबान, राहुल गांधी को बताया चमगादड़ों का नेता

राजनीतिक विज्ञापनों का खुलासा करेगी फेसबुक, जानकारियां प्राप्त करने की अनुमति देगा

उत्तरप्रदेश निकाय चुनाव: 22 से 29 नवंबर के बीच होगा चुनाव, 1 दिसंबर को रिजल्ट

हिमाचल चुनाव: शिमला में तस्वीर साफ, 7 उम्मीदवारों ने लिए नाम वापस

टाइम्स नाउ-VMR सर्वे का अनुमान-गुजरात में फिर बनेगी भाजपा की सरकार

प्रदीप द्विवेदी: गुजरात में मुद्दों पर नहीं, मोदी के दम पर ही जीत पाएगी भाजपा!

गुजरात विधानसभा चुनाव: 9 और 14 दिसंबर को दो चरणों में चुनाव, 18 दिसंबर को नतीजे

गुजरात चुनावः आज तारीखों का ऐलान करेगा चुनाव आयोग, दो चरण में चुनाव संभव

हिमाचल चुनावः संन्यास के बाद वापसी करने वाली विद्या स्टोक्स का नॉमिनेशन रद्द

ओपिनयन पोल : जीएसटी से 51 प्रतिशत लोग नाखुश

संजय राय: भाजपा के लिए क्या भस्मासूर साबित होगा गुजरात चुनाव?

राहुल की मौजूदगी में कांग्रेस में शामिल होंगे ओबीसी नेता अल्पेश ठाकोर

सुरेश हिन्दुस्थानी: कांग्रेस को गुजरात चुनाव के लिए गठबंधन की तलाश.....

मोदी के मिशन को गुजरात में झटका,पाटीदार नेता निखिल ने बीजेपी से दिया इस्तीफा

हिमाचल में भाजपा स्टार प्रचारकों की सूची में मोदी और शाह सहित 40 नाम

आप ने गुजरात विधानसभा चुनाव के लिए खोले पत्ते, पहली सूची जारी

गुजरात चुनाव: हार्दिक के करीबी पाटीदार नेता रेशमा और वरुण पटेल बीजेपी में शामिल

गुजरात में कांग्रेस को मिली संजीवनी, युवा 'त्रिमूर्ति' आई साथ

चिदंबरम का तंज, मोदी करेंगे गुजरात चुनाव की घोषणा, आयोग ने दी है जिम्मेदारी

अभिमनोज: उपचुनाव, भाजपा की परीक्षा? कांग्रेस के लिए अवसर!

हिमाचल विधानसभा चुनाव: धूमल का निर्वाचन क्षेत्र बदलने से समर्थकों में खलबली

हिमाचल चुनाव: बीजेपी ने जारी की उम्मीदवारों की लिस्ट, अनिल शर्मा को टिकट

महाराष्ट्र: ग्राम पंचायत चुनावों में भाजपा की धमाकेदार जीत

जिस गांव को सीएम फडणवीस ने लिया था गोद, वहां बीजेपी की हार

अब यूपी व राजस्थान के लोकसभा उप चुनावों में भी भाजपा की प्रतिष्ठा दांव पर!

हिमाचल हाईकोर्ट: चुनाव के दौरान सार्वजनिक संपत्ति को न पहुंचाएं नुकसान

मोदी के अपनों ने बढ़ाई सलमान खान की बहन के ससुर की मुश्किलें

हिमाचल प्रदेश चुनावः राहुल और वीरभद्र की बैठक शुरू, बड़ी घोषणा का इंतजार

हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस को झटका, दिग्गज मंत्री परिवार समेत बीजेपी में शामिल

चुनाव नतीजों पर पहली बार बोले राहुल, कहा - रिजल्ट हमारे लिए अच्छा, बीजेपी को लगा झटका

प्रदीप द्विवेदी: यदि दिसंबर 2017 में शनि अस्त नहीं होते तो चुनावी नतीजे कुछ और होते!

उपचुनाव में भाजपा ने तीन सीटों पर लहराया परचम, प्रधानमंत्री खुश

"नहीं करूंगा मतदान"





बंपर वोटिंग जारी, अब तक पश्चिम बंगाल में 48 और यूपी में 36 फीसदी मतदान


योग शिविरों को न बनाएं राजनीतिक मंच: चुनाव आयोग


सबको पेंशन, दवा और घर देगी काँग्रेस, घोषणापत्र जारी


राजस्थान में खिलेगा कमल, मुरझाएगा पंजा, चुनावी सर्वे का दावा


प्राकृतिक आपदा में राहत देने से नहीं रोकती चुनाव आचार संहिता, भोपाल में बोले मुख्य चुनाव आयुक्त


चुनावी सर्वे में शिवराज ने लगाई हैटट्रिक


अब इलेक्शन नॉमिनेशन फॉर्म में बताना होगा सोशल मीडिया एकाउंट


हरियाणावासी नहीं, कैदी बनाएंगे चौटाला को सीएम : बीरेंद्र सिंह


सोशल मीडिया पर चुनाव प्रचार का खर्च भी उम्मीदवार के खर्च में जुड़ेगा


अफवाहों में बट रहा टिकट, उम्मीदवारों ने पार्टी मुख्यालय में डाला डेरा


बढी भाजपा-कांग्रेस की मुश्किलें


छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनावों के पहले चरण का नामांकन शुक्रवार से


सरताज सहित तीन मंत्रियों के नाम रोके


भाजपा लगी मोदी की छवि सुधारने में, 50 देशों के दूतावास को भेजा न्यौता


चुनाव के लिए तैयार रहे कांग्रेस