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गठबंधन,गांठबंधन या राष्ट्रवंदन ?

कुमार राकेश

घर हो या राजनीति-बिना गठबंधन के कुछ भी सम्भव नहीं दिखता.जहाँ देखे,वही गठबंधन.गठबंधन भारत में हो या विश्व के कई देशों में,वैश्विक तौर पर ये फार्मूला सफल राजनीति का एक नया नुस्खा बन गया है.क्या अब गठबंधन राष्ट्र वंदन हो गया है? यह चिंता और चिन्तन का मसला है.कभी देश में एक दल की सरकार होती थी,परन्तु देश की दशा और दिशा में जिस प्रकार तेजी से बदलाव हुआ,उसका प्रभाव राजनीति पर भी पड़ा.
भारत में गठबंधन को लेकर सभी राजनीतिक दलों का चरित्र एक जैसा हो गया है.उन सभी द्लो में एक गज़ब का उत्साह देखा जा रहा है.उनमे उमंग है ,तरंग है,चुस्ती है और मुस्तैदी भी.क्योकि सभी दलों को आम जनता के नाम पर सत्ता और सिंहासन की चाह है. जनता बेचारी औ




डाँ नीलम महेंद्र

आज़ाद भारत के इतिहास में शायद पहली बार चुनावी हिंसा के कारण देश के एक राज्य में चुनाव प्रचार को 20 घंटे पहले ही समाप्त करने का आदेश चुनाव आयोग ने लिया है. बंगाल में चुनावों के दौरान होने वाली हिंसा के इतिहास को ध्यान में रखते हुए ही शायद चुनाव आयोग ने बंगाल में सात चरणों में चुनाव करवाने का निर्णय लिया था लेकिन यह वाकई में खेद का विषय है कि अब तक जो छः चरणों में चुनाव हुए हैं उनमें से एक भी बिना रक्तपात के नहीं हो पाया. यह चुनावी हिंसा बंगाल में कानून व्यवस्था और लोकतंत्र की स्थिति बताने के लिए काफी है. लेकिन आश्चर्य इस बात का है कि ममता अपने राज्य में होने वाले उपद्रव के लिए अपने प्रशासन को नहीं मोदी को जिम्मेदार ठह



शांत मतदाता,बैचेन राजनेता  

कुमार राकेश

देश में कुल सात चरणों के चुनाव ने छह चरणों के चुनाव सम्पन्न हो चुके हैं. भारत में चुनावी रंग, मौसम के अनुसार कई प्रकार के रंग बिरंगे संकेत देने की कोशिश कर रहा है .देश में 17 वीं लोक सभा चुनाव के लिए सात चरणों मे होने वाले चुनाव का 19 मई अंतिम पड़ाव होगा. 23 मई को चुनाव परिणाम के बाद देश को एक बार फिर से एक तरोताजा नेतृत्व मिलेगा.इस बार के चुनाव में मतदातागण अपेक्षाकृत शांत दिखाई दे रहे हैं ,जबकि कई राजनेताओ के चेहरे पर हवाईयां उडी हुयी है .
मौजूदा तमाम समीकरणों के मद्देनजर ऐसा लगता है कि मौजूदा प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी एक बार फिर से प्रधान मंत्री बन सकते हैं.लेकिन वो डगर 2014 की तरह नहीं दिख रही है.फिर भी प्रधान मंत्र



पत्रकारिता के आचार्य 

संगीता पांडेय

साहित्य और पत्रकारिता में बहुत करीबी रिश्ता रहा है.  दोनों आपस में इतने गूंथे हुए हैं कि कहना मुश्किल हो जाता है कि कौन साहित्यकार है और कौन पत्रकार.  वैसे भी एक साहित्यकार को पत्रकारिता से वाबस्ता होना पड़ता है.  किन्तु ये जरूरी नहीं कि एक पत्रकार साहित्यकार भी हो. बस  एक इसी अंतर् ने साहित्य और पत्रकारिता में विभेद रखा. यहां यह कहना अनुचित नहीं कि एक साहित्यकार को पत्रकार होना उसकी विधा में अत्यधिक पारंगत होना होता है. यही वजह भी है कि साहित्य की दुनिया में अधिकतर साहित्यकार पत्रकारिता से न केवल जुड़े रहे बल्कि कई पत्र-पत्रिकाओं के सम्पादन में श्रेष्ठता हासिल  करते रहे. यदि हम हिंदी साहित्य की बात करे



विकास के लिये पर्यावरण की उपेक्षा कब तक?

ललित गर्ग

आज समग्र मनुष्य जाति पर्यावरण के बढ़ते असंतुलन से संत्रस्त है. इधर तेज रफ्तार से बढ़ती दुनिया की आबादी तो दूसरी तरफ तीव्र गति से घट रहे प्राकृतिक ऊर्जा स्रोत. समूचे प्राणि जगत के सामने अस्तित्व की सुरक्षा का महान संकट है. पिछले लम्बे समय से ऐसा महसूस किया जा रहा है कि वैश्विक स्तर पर वर्तमान में सबसे बड़ी समस्या पर्यावरण से जुडी हुई है. इसके संतुलन एवं संरक्षण के सन्दर्भ में पूरा विश्व चिन्तित है. आज पृथ्वी विनाशकारी हासिए पर खड़ी है. सचमुच आदमी को जागना होगा. जागकर फिर एक बार अपने भीतर उस खोए हुए आदमी को ढूंढना है जो सच में खोया नहीं है अपने लक्ष्य से सिर्फ भटक गया है. यह भटकाव पर्यावरण के लिये गंभीर खतरे का कारण



सियासी सागर में धक्के मार-मार कर मोदी ने राहुल को सफल राजनीतिक तैराक बना दिया?

प्रदीप द्विवेदी

यदि इस बार कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी कामयाब हो जाते हैं तो इसका सबसे ज्यादा श्रेय पीएम मोदी को जाएगा? सियासी सागर में धक्के मार-मार कर पीएम मोदी ने राहुल गांधी को सफल राजनीतिक तैराक बना दिया है!
वर्ष 2014, जब पीएम मोदी अपने सर्वोच्च पर थे, तब राहुल गांधी जीरो पर थे, बल्कि कहना चाहिए कि सोशल सेना ने उन्हें जीरो से भी नीचे पहुंचा दिया था.
तब, पन्द्रह साल तक दिल्ली की सीएम रही वरिष्ठ कांग्रेस नेता शीला दीक्षित ने भी राहुल गांधी की सियासी समझदारी को लेकर टिप्पणी की थी, लेकिन पीएम मोदी टीम की बदौलत राहुल गांधी राजनीति के रंग पहचानते गए और धीरे-धीरे आगे बढ़ते हुए पीएम मोदी की टक्कर में आ कर खड़े हो गए?
यही वजह है कि



प्रेस की स्वतंत्रता एक मौलिक जरूरत है!

ललित गर्ग

प्रेस किसी भी समाज का आइना होता है. 1991 में यूनेस्को की जनरल असेंबली के 26वें सत्र में अपनाई गई सिफारिश के बाद, संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) ने दिसंबर 1993 में विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस की घोषणा की थी. प्रेस की आजादी से यह बात साबित होती है कि किसी भी देश में अभिव्यक्ति की कितनी स्वतंत्रता है. भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में प्रेस की स्वतंत्रता एक मौलिक जरूरत है. आज हम एक ऐसी दुनिया में जी रहे हैं, जहाँ अपनी दुनिया से बाहर निकल कर आसपास घटित होने वाली घटनाओं के बारे में जानने का अधिक वक्त हमारे पास नहीं होता. ऐसे में प्रेस और मीडिया हमारे लिए एक खबर वाहक का काम करती हैं, जो हर सवेरे हमारी टेबल पर गरमा गर्म खबरें परोस



अब कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल बोले- अबकी बार, गठबंधन सरकार!

अभिमनोज
ज्यों-ज्यों मतदान के विभिन्न चरण संपन्न होते जा रहे हैं, त्यों-त्यों नेताओं के नजरिए भी सामने आ रहे हैं? इसमें एक बात साफ है कि यदि कोई चमत्कार नहीं होता है तो किसी एक दल को 272 सीटें नहीं मिलेंगी, बीजेपी को भी नहीं. इसकी एक वजह है- न तो बीजेपी पूरी तरह हार रही है और न ही कांग्रेस पूरी तरह से जीत रही है? मतलब- अबकी बार, गठबंधन सरकार. लोकसभा की चुनाव दौड़ के बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल का कहना है कि- मौजूदा लोकसभा चुनाव 2019 में कांग्रेस के अपने दम पर बहुमत हासिल करने की उम्मीद नहीं है, हालांकि उन्होंने दृढ़ता के साथ यह जरूर कहा कि कांग्रेस की अगुवाई वाला संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन एकजुट है


सवाल पूछने से पहले पीएम को जवाब देने लायक तो समझिए जनाब

विवेक कुमार पाठक

 वे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को नकारना चाहते हैं मगर सबसे ज्यादा मोदी उनके दिलों दिमाग पर चढ़े हुए हैं. उनके न्यूज शो आए दिन मोदी से शुरु होकर मोदी पर खत्म होते हैं. सिर्फ न्यूज शो ही नहीं वे सामाजिक व मीडिया मंचों पर अपनी पूरी बात मोदीमय करते हैं. मोदी को नकारते नकारते वे सबसे ज्यादा मोदी को टीआरपी देते हैं. 

जी हां हम बात कर रहे हैं वर्तमान दौर के कथित रुप से जाबांज मीडिया पत्रकार रवीश कुमार की. वे पत्रकार के फ्रेम को तोड़कर इन दिनों कई रुपों में हैं. अगर केवल सवाल पूछना ही पत्रकारिता है तो बेशक वे जाबांज पत्रकार हैं मगर सरकार और व्यक्ति विशेष को पूरी तरह से नकारा घाषित करते हुए फिर उन्हीं से सवाल पूछने



जो पलपल इंडिया ने सबसे पहले बताया था, उस पर सुब्रमण्यम स्वामी ने सियासी मुहर लगा दी?

प्रदीप द्विवेदी

पलपल इंडिया ने सबसे पहले बताया था कि यदि लोकसभा चुनाव में बीजेपी 272 सीटें जीत कर एकल बहुमत हांसिल नहीं कर पाती है, तो नरेन्द्र मोदी का प्रधानमंत्री बनना मुश्किल है?
कुछ ऐसी ही सियासी संभावना वरिष्ठ भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने व्यक्त की है, उनका कहना है कि- अगर भाजपा 220 से 230 सीटों तक सिमट गई तो संभवतः नरेंद्र मोदी दोबारा प्रधानमंत्री नहीं बन सकेंगे! खबर है कि... उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा कि मुझे लगता है कि भाजपा का आंकड़ा 230 के आसपास पहुंचेगा. एनडीए में दूसरे सहयोगी दल करीब 30 सीटें जीतेंगे, मतलब... एनडीए की 250 सीटें आनी तय हैं. सरकार बनाने के लिए 30-40 सीटों की जरूरत और पड़ेगी. ऐसे में ये नए सहयोगी दलों पर निर्भर करेग



अभिव्यक्ति का सवाल और एक दिन मीडिया का 

मनोज कुमार

एक बार फिर पूरी दुनिया कहेगी कि बोल कि तेरे लब आजाद हैं लेकिन हकीकत इसके खिलाफ है. औपचारिकता के लिए दुनिया ने 3 मई की तारीख तय कर मुनादी कर दी है कि यह दिन विश्व पे्रस की स्वतंत्रता का दिन होगा. यह बात सच है कि जब यह कोशिश हुई थी तब प्रेस और पत्रकारिता के लब आजाद थे लेकिन आज की तारीख में दुनिया का कोई देश दावे के साथ नहीं कह सकता कि प्रेस के लब आज भी आजाद हैं. तिस पर तुर्रा यह कि मीडिया की विश्वसनीयता पर सवालिया निशान लगा दो. ठोक दो कि मीडिया अब दिल से नहीं, दलों से चल रही है. यह कहना आसान है लेकिन यह सच पूरा नहीं है. इसके आगे और पीछे की भी कहानी है जो डराती नहीं, धमकाती है और कहती है कि तेरे लब आजाद नहीं हैं. सनद रहे कि तीन मई क



कमलनाथ ने तो कांग्रेस का सच स्वीकारा है, लेकिन बीजेपी अभी भी भ्रम में है?

अभिमनोज

एमपी के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने त्रिशंकू लोकसभा का अनुमान व्यक्त करते हुए कहा है कि- लोकसभा चुनाव में कांग्रेस बहुत बहुत अच्छा करेगी, परन्तु बहुमत मिलने की संभावना नहीं है, इसलिए केन्द्र में नई सरकार बनाने के लिए चुनाव बाद गठबंधन करना होगा!

वैसे तो चुनाव के नतीजों को लेकर कोई भी भविष्यवाणी नहीं की जा सकती है, परन्तु इस वक्त जो सियासी तस्वीर है, उसके मद्देनजर कमलनाथ का कहना उन तमाम सर्वे के करीब है जो त्रिशंकू लोकसभा के संकेत दे रहे हैं.

हालांकि, कमलनाथ ने तो यह सच्चाई स्वीकार कर ली, परन्तु बीजेपी अब भी भ्रमजाल से बाहर नहीं आ पा रही है. भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं एमपी के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान क



क्या है सुन्दरता का मापदण्ड?

डाँ नीलम महेंद्र

हाल ही में आइआइटी में पढने वाली एक लड़की के आत्महत्या करने की खबर आई कारण कि वो मोटी थी उसे अपने मोटा होना इतना शर्मिंदा करता था की वो अवसाद में चली गयी उसका अपनी परीक्षाओं में अव्वल आना भी उसे इस दुःख से बहार नहीं कर पाया यानी उसकी बौधिक क्षमता शारीरक आकर्षण से हार गयी दरअसल. आज हम जिस युग में जी रहे हैं वो एक ऐसा वैज्ञानिक और औद्योगिक युग है जहाँ भौतिकवाद अपने चरम पर है. इस युग में हर चीज का कृत्रिम उत्पादन हो रहा है. ये वो दौर है जिसमें ईश्वर की बनाई दुनिया से इतर मनुष्य ने एक नई दुनिया का ही अविष्कार कर लिया है यानी कि वर्चुअल वर्ल्ड. इतना ही नहीं बल्कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी आर्टिफिशल इनटेलीजेंस ने भी इस युग



नरेन्द्र मोदी को सियासी धोखा दिया जा रहा है या सर्वे के नाम पर चुनाव प्रचार चल रहा है?

प्रदीप द्विवेदी

आम चुनाव हैं, तो खास सर्वे तो होंगे ही, इस बार भी हो रहे हैं, लेकिन इन सर्वे पर नजर डालें तो यह बात साफ है कि- या तो नरेन्द्र मोदी को सियासी धोखा दिया जा रहा है, या फिर सर्वे के नाम पर अप्रत्यक्ष चुनाव प्रचार चल रहा है?
विभिन्न सर्वे बता रहे हैं कि लोस सीटें जीतने के मामले में एनडीए बहुत आगे और बहुमत के करीब है, मतलब... केन्द्र में अगली सरकार भी नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में बनेगी, लेकिन कैसे? क्या बीजेपी को राजस्थान में 25 में से 25 सीटें मिल जाएंगी, गुजरात में 26 में से 26, एमपी में 29 में से 27, यूपी में 80 में से 71, झारखंड में 14 में से 13, छत्तीसगढ़ 13 में से 9 सीटें मिल जाएंगी? यदि नहीं, तो यह तो साफ है कि 2014 की तरह बीजेपी अकेले दम पर तो बहु



बीजेपी-जेडीयू गठबंधन से फायदा होगा या नुकसान? पता नहीं!

अभिमनोज

बीजेपी ने बिहार में अपनी सियासी जमीन बचाने के लिए जेडीयू से गठबंधन किया है और इसमें पिछली बार की जीती पांच सीटें भी गंवाई है, लेकिन सवाल यह है कि लोकसभा चुनाव में इससे बीजेपी और जेडीयू को फायदा होगा या नुकसान? राजनीतिक जानकारों का जवाब है- पता नहीं!
वजह? बीजेपी-जेडीयू ने गठबंधन तो कर लिया है, किन्तु अपने-अपने समर्थकों को एक-दूजे दल के समर्थन में प्रचार और मतदान करवाना आसान काम नहीं है.
कई ऐसी सीटें है जहां बीजेपी जीतती रही है, लेकिन इस बार जेडीयू को दे दी गई हैं. इन सीटों पर चुनाव लड़ने की तमन्ना रखने वाले बीजेपी नेताओं को तो निराशा हुई ही है, बीजेपी समर्थक भी परेशान हैं.
जाहिर है, जहां बीजेपी नेताओं का आक्राम



मोदी के खिलाफ विवादित बयानों की आंधी

ललित गर्ग

आम चुनाव के प्रचार में इनदिनों विवादित बयानों की बाढ़ आयी है, सभी राजनीतिक दल एक-दूसरे पर कीचड़ उछाल रहे हैं, गाली-गलौच, अपशब्दों एवं अमर्यादित भाषा का उपयोग कर रहे हैं, जो लोकतंत्र के इस महापर्व में लोकतांत्रिक मूल्यों पर कुठाराघात है. विशेषतः प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की लोकप्रियता और उनकी जन-कल्याण की योजनाओं से भड़के कांग्रेस एवं महागठबंधन के नेता अपनी जुबान संभाल नहीं पा रहे. जैसे-जैसे लोकसभा चुनाव का उग्र प्रचार होता जा रहा है वैसे-वैसे प्रधानमंत्री मोदी के प्रति विभिन्न राजनीतिक दलाओं के नेताओं की बौखलाहट बढ़ती जा रही है. नरेन्द्र मोदी के दर्शन, उनके विकासमूलक कार्यक्रमों, उनके व्यक्तित्व, उनकी बढ़ती



जनता की अदालत में फैसला अभी बाकी है!

डाँ नीलम महेंद्र

कुछ समय पहले अमेरिका के एक शिखर के बेस बॉल खिलाड़ी जो कि वहाँ के लोगों के दिल में सितारा हैसियत रखते थे उन पर अपनी पत्नी की हत्या का आरोप लगा. लेकिन परिस्थिति जन्य साक्ष्य के आभाव में वो अदालत से बरी कर दिए गए जबकि जज पूरी तरह आश्वस्त थे कि कत्ल उसने ही किया है क्योंकि फैसला कानून के दायरे में ही किया जाता है. अदालत या फिर कोई संवैधानिक संस्था चाहे कहीं की भी हो विश्व में उनके द्वारा इस प्रकार के फैसले दिए जाना कोई नई या अनोखी बात नहीं है. लेकिन अदालत के इस फैसले के बाद जो अमेरिका में हुआ वो जरूर अनूठा था. क्योंकि कोर्ट से बाइज़्ज़त बरी होकर ये सितारा खिलाड़ी जब अपने महलनुमा घर पहुंचे तो उनके चौकीदार ने उन्हें घर की चाब



चुनाव के बाद भी परेशानी पैदा कर सकती है पीएम नरेंद्र मोदी फिल्म?

प्रदीप द्विवेदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जीवन पर बनी- पीएम नरेंद्र मोदी फिल्म पांच अप्रैल को रिलीज किया जाना प्रस्तावित था, लेकिन इसे टाल दिया गया है! 

खबर है कि... फिल्म की रिलीज अगले हफ्ते तक के लिए टाल दी गई है? परन्तु, नई रिलीज डेट नहीं आई है! 

अदालत ने इसे रिलीज करने को लेकर स्वीकृति दे दी थी, बावजूद इसके इस फिल्म के रिलीज को रोकने पीछे कारण क्या है, यह अभी साफ नहीं हो पाया है?

पलपल इंडिया की रिपोर्ट- अखबार में पेड न्यूज पर तो हजार सवाल, इस फिल्म के बारे में क्या कहना है? में जो मुद्दे उठाए गए थे, यदि उन पर चुनाव आयोग कार्रवाई करता है या चुनाव के बाद कोई अदालत में याचिका दायर करता है तो पीएम मोदी का चुनाव सवालों के घेर



जीवन व्यस्त हो, अस्तव्यस्त नहीं

ललित गर्ग

असन्तुलन एवं अस्तव्यस्तता ने जीवन को जटिल बना दिया है. बढ़ती प्रतियोगिता, आगे बढ़ने की होड़ और अधिक से अधिक धन कमाने की इच्छा ने इंसान के जीवन से सुख, चैन व शांति को दूर कर दिया है. सब कुछ पा लेने की इस दौड़ में इंसान सबसे ज्यादा अनदेखा खुद को कर रहा है. बेहतर कल के सपनों को पूरा करने के चक्कर में अपने आज को नजरअंदाज कर रहा है. वह भूल रहा है कि बीता हुआ समय लौटकर नहीं आता, इसलिए कुछ समय अपने लिए, अपने शरीर, अपने शौकों और उन कामों के लिए, जो आपको खुशियां देते हैं, रखना भी बहुत जरूरी है. 
समय ही नहीं मिलता! कितनी ही बार ये शब्द आप दूसरों को बोलते हैं तो कितनी ही बार दूसरे आपको. क्या वाकई समय नहीं मिलता? सच ये भी तो है कि जिनसे हम



वंशवाद तो विज्ञान सम्मत है, वंशवाद को लेकर पीएम मोदी काहे नाराज हैं?

प्रदीप द्विवेदी

वंशवाद को लेकर गांधी परिवार पर हमला करने का कोई भी मौका पीएम नरेन्द्र मोदी छोड़ते नहीं हैं, लेकिन उनका वंशवाद विरोध कितना विचित्र है, इसका अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि- एक ओर तो वे राहुल गांधी का विरोध करते हैं और दूसरी तरफ वरुण गांधी और मेनका गांधी को मनमर्जी की सीट से टिकट देते हैं. आखिर दोनों के वंश में फर्क क्या है? यही कि- राहुल गांधी, मोदी के खिलाफ हैं और वरुण गांधी, मोदी के साथ!
खबर थी कि विस चुनाव के दौरान एमपी के एक बड़े नेता पर पीएम मोदी इसलिए नाराज हो गए थे कि वे अपने बेटे के टिकट के लिए प्रयास कर रहे थे, परन्तु राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के बेटे दुष्यंत सिंह का टिकट काटने की हिम्मत न तो



चुनावी लोकतंत्र : बस, पांच कदम चलना होगा..

अरुण तिवारी

पार्टिंयां चुनावों की तैयारी करती हैं. पार्टियां ही उम्मीदवार तय करती हैं. पांच साल वे क्या करेंगी; इसका घोषणापत्र भी पार्टियां ही बनाती हैं. चुनाव किन मुद्दों पर लड़ा जायेगा; मीडिया के साथ मिलकर ये भी पार्टियां ही तय कर रही हैं. मतदान की मशीन पर चुनने के लिए छपे हुए निशान भी  पार्टियों के ही होते हैं. मतदाता भी अपना मत, उम्मीदवार से ज्यादा, पार्टियों को ध्यान में रखकर ही देता है. यह लोकसभा के लिए लोक-प्रतिनिधि चुनने का चुनाव है कि पार्टिंयां चुनने का ? 

लोगों  को अपना प्रतिनिधि चुनना है. क्या चुनाव से पूर्व कभी लोगों से पूछा जाता है, हां भई, आप बताइए कि किस-किस को उम्मीदवार बनाया जाए ? 

सोचिए. स्वयं से प



गुना और छिंदवाड़ा ने नहीं बनने दिया एमपी को गुजरात-राजस्थान!

अभिमनोज

वर्ष 2014 में मोदी मैजिक के चलते गुजरात में 26 में से 26 सीटें, तो राजस्थान में 25 में से 25 सीटें बीजेपी ने जीत लीं, लेकिन गुना और छिंदवाड़ा के कारण एमपी में 29 में से 27 सीटें ही भाजपा को मिलीं, अब सवाल यह है कि- क्या एमपी में ये 27 सीटें भी बचा पाएगी बीजेपी? 
एमपी में भोपाल, जबलपुर, इंदौर, विदिशा, सागर, खजुराहो, सतना जैसी एक दर्जन से ज्यादा ऐसी सीटें हैं, जहां करीब डेढ़ दशक से कांग्रेस को जीत का इंतजार है? लेकिन, अब कांग्रेस इन सीटों पर भी फोकस है और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को भोपाल से चुनाव लड़वाने का मकसद भी यही है कि इन सीटों से हार का ठप्पा हटाया जाए.
गुना सीट पर कांग्रेस महासचिव ज्योतिरादित्य सिंधिया वर्ष 2002 से लगा



काश! मैं होता सांसद

हेमेन्द्र क्षीरसागर

काश! मैं होता सांसद यह प्रश्न बार-बार मेरे जेहन में कौंधकर रहा है कि मुझे अब सांसद बनने जनता की अदालत में जाना चाहिए. इसलिए की मेरे सांसद ने मुझे, क्षेत्र और मूल्क को धोखा देकर विकास व समृद्धि को रोका है. यहां तक कि झोली में आई सांसद निधी मुंह दिखाई के नाम पर रेवड़ियों की तरह बांटी गई वह भी आधी-अधूरी. भेड़चाल इनकी मौजूदगी के कोई मयाने नहीं रहे, रवानगी ही समय की मांग और आवश्यकता है. विपद ये ज्यादा देर टीके रहे तो बचा-कचा भी बेड़ागर्ग हो जाएगा. दुर्भाग्यवश! असलियत कहें या हकीकत अधिकतर सांसदों के आलम यही है. बतौर इनके प्रति बढ़ता जनाक्रोश थमने का नाम नहीं ले रहा है मद्देनजर नकारों को नकारने मुस्तैदी से बदलाव की बयार लाना ह



तो अब बीजेपी-ए बदल रही है बीजेपी-एम में.कैसे दोहराएंगे 2014 की जीत?

प्रदीप द्विवेदी

राजस्थान में भारत वाहिनी पार्टी के प्रमुख घनश्याम तिवाड़ी कांग्रेस में शामिल हो गए हैं, शत्रुघ्न सिन्हा कांग्रेस में शामिल होने जा रहे हैं, लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी आदि का लोस टिकट कट गया है, ये सारे संकेत हैं कि आठवें दशक में अटल-आडवाणी के नेतृत्व में बनी बीजेपी, अब मोदी-शाह की बीजेपी हो गई है? 
उधर, गुजरात में कभी पीएम मोदी के प्रमुख मित्र रहे प्रवीण तोगड़िया, बीजेपी के खिलाफ न केवल झंडा लहरा रहे हैं, बल्कि लोस चुनाव में वाराणसी में पीएम मोदी को चुनौती भी देने की तैयारी कर रहे हैं!
ये सारे बदलाव बताते हैं कि पीएम मोदी के लिए 2019 की राह आसान नहीं है. वर्ष 2014 में पीएम मोदी के पास भ्रष्टाचार के विरूद्ध सि



कल तक वो रीना थी लेकिन आज रेहाना है!

डाँ नीलम महेंद्र

दिन की शुरुआत अखबार में छपी खबरों से करना आज लगभग हर व्यक्ति की दिनचर्या का हिस्सा है. लेकिन कुछ खबरें सोचने के लिए मजबूर कर जाती हैं कि क्या आज के इस तथाकथित सभ्य समाज में भी मनुष्य इतना बेबस हो सकता है? क्या हमने कभी खबर के पार जाकर यह सोचने की कोशिश की है कि क्या बीती होगी उस 12 साल की बच्ची पर जो हर रोज़ बेफिक्र होकर अपने घर के आंगन में खेलती थी लेकिन एक रोज़ उसका अपना ही आंगन उसके लिए महफूज़ नहीं रह जाता? आखिर क्यों उस आंगन में एक दिन यकायक एक तूफान आता है और उसका जीवन बदल जाता है? वो बच्ची जो अपने माता पिता के द्वारा दिए नाम से खुद को पहचानती थी आज वो नाम ही उसके लिए बेगाना हो गया. सिर्फ नाम ही नहीं पहचान भी पराई हो गई. कल



क्या गंगा को सिर्फ चुनावी वाहन मानने वालों को अपना प्रतिनिधि चुनें ?

अरुण तिवारी

2014 के लोकसभा चुनाव को याद कीजिए.मैं आया नहीं हूं.मां गंगा ने बुलाया है. मोदी जी का यह वाक्य याद कीजिए.कहना न होगा कि गंगा के सहारे चुनावी नौका पार करना, 2014 के प्रधानमंत्री पद के दावेदार श्री मोदी का एजेण्डा था.2019 में अब यह राहुल गांधी को प्रधानमंत्री बनाने की अपील करने वाली प्रियंका गांधी का एजेण्डा है.प्रियंका ने लोगों को लिखे खुले खत में कहा है, गंगाजी उत्तर प्रदेश का सहारा है और मैं भी गंगा जी के सहारे हूं.

मोदी जी ने पांच साल तक गंगा के हितों की जमकर अनदेखी की.गंगा की अविरलता-निर्मलता के अनशन करते हुए स्वामी सानंद की मौत हो गई.कुछ पता नहीं कि संत गोपालदास कहां और कैसे लापता हो गए ? स्वामी आत्मबोधानन्द, आज भी सं



चुनाव, नारे और मैनेजमेंट 

मनोज कुमार

कभी इंदिरा इज इंडिया, फिर शाइनिंग इंडिया, फिर चाय पर चर्चा और मोदी है तो मुमकिन है.. कुछ इस तरह के चुनाव प्रचारों का स्वरूप बदलता रहा है. पहले दो नारों ने इंदिरा गांधी और अटलबिहारी वाजपेई को सत्ता से बाहर कर दिया था. राजीव गांधी के समय में चुनाव में एक अलग किस्म का प्रयोग हुआ था जो पारम्परिक प्रचार से दूर था और जिसके शिल्पकार सैम पित्रोदा माने गए थे. यह चुनावी विज्ञापन मतदाताओं को लुभा नहीं पाया। बदले दौर में युवा भारत में युवा मतदाताओं को उनकी ही भाषा में जब चुनाव प्रचार आरंभ हुआ तो जीत जैसे सिर चढ़ कर बोली। 2014 के चुनाव में  चाय पर चर्चा ने मोदी को अकल्पनीय विजय दिलायी तो  इस बार मोदी सरकार ने अपने कार्यकाल में



बीजेपी बाद में, पहले कांग्रेस-बसपा की बढ़ती दूरियां तो कम हों?

प्रदीप द्विवेदी

लोस चुनाव की घोषणा के साथ ही चुनावी चर्चाएं गर्मा गई हैं कि इस बार केन्द्र में किसकी सरकार बनेगी? सबकी नजरें यूपी पर हैं, क्योंकि जो यूपी जीतेगा, वहीं केन्द्र का सियासी सिकंदर होगा!
यूपी का सियासी समीकरण बेहद उलझा हुआ है, लिहाजा न तो बीजेपी 2014 दोहराने की स्थिति में है और न ही सपा-बसपा गठबंधन उपचुनाव जैसा चमत्कार दिखाने की हालत में है? 
कर्नाटक विधानसभा चुनाव तक कांग्रेस-बसपा के सियासी संबंध अच्छे थे, लेकिन एमपी, राजस्थान सहित पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के दौरान, सियासी ताकत से ज्यादा बसपा द्वारा सीटें मांगने के कारण, कांग्रेस ने एकला चालो का रूख अपना लिया. इसके बाद बीएसपी प्रमुख मायावती की नाराजगी कां



केवल उपभोक्ता नही... जागरूक उपभोक्ता बने!

निरंजन द्विवेदी

उपभोक्ता सरंक्षण कानून, अर्थात- बाजार व्यवस्था में खरीदारी के दौरान उपभोक्ता हितों की सुरक्षा हेतु किये गये प्रावधान और व्यवस्थायें. कानूनी तौर पर व्यापक प्रावधानों के बावजूद बाजार व्यवस्था में उपभोक्ता शिकायतें हैं और उपभोक्ताओं को भ्रमित करने पर्याप्त वातावरण मौजूद है. बाजार में हर तरह की सामग्री व सेवायें उपलब्ध हैं और उपभोक्ता अपने विवेक से अच्छी वस्तुओं का चयन करने के लिये स्वतंत्र हैं. बाजार में उपभोक्ताओं को आकर्षित करने की मौजूद- उपहार, ईनाम आदि योजनाएं, विज्ञापनों का प्रभावी वातावरण, ऑफर के इंतजाम और श्रेष्ठ वस्तुसेवा उपलब्ध करवाने के दावों के बीच उपभोक्ता की सजगता की परीक्षा है.
किसी भी



अभिमनोजः काहे अरविंद भाई दिल्ली में मुस्लिम वोटों की गणित में उलझे हैं?

लोकसभा चुनाव के अंतिम चरण में 59 सीटों पर शाम 5 बजे तक 60.01 फीसदी मतदान

कांग्रेस ने बदली अपनी TWITTER DP - लगाई महात्मा गांधी की फोटो

हार जायेंगे मोदी, बनारस में दोहराया जायेगा 1977 वाला रायबरेली का इतिहास : मायावती

प्रदीप द्विवेदीः प्रधानमंत्री की मौनी प्रेस कॉन्फ्रेंस पर विदेशी प्रेस ने भी निशाना साधा?

इस बार लोकसभा चुनाव में 255 करोड़पति महिलाएं चुनाव मैदान में

अभिमनोजः इसलिए बीजेपी के लिए खास है, अन्तिम चरण का लोकसभा चुनाव मतदान!

प्रदीप द्विवेदीः पीएम मोदी की पहली गूंगी प्रेस कॉन्फ्रेंस, किसी भी सवाल का जवाब नहीं दिया!

लोकसभा चुनाव: 50 लोकसभा सीटों पर थमा प्रचार, 19 मई को डाले जाएंगे वोट

प्रदीप द्विवेदीः पीएम मोदी की किस्मत अच्छी है जो प्रियंका गांधी संयुक्त विपक्ष उम्मीदवार नहीं बन पाई?

प्रदीप द्विवेदीः सीएम अशोक गहलोत राजस्थान में, तो उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट प्रदेश के बाहर सियासी मोर्चे पर!

अभिमनोजः सियासत में आदर्श प्रस्तुत करना जितना आसान, इसके लिए औरों को तैयार करना उतना ही मुश्किल है!

पीएम मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह बोले -300 से ज्यादा सीटें, जिताएगा बंगाल

अराजक तत्वों ने तोड़ा मंच, योगी आदित्यनाथ की कोलकाता रैली रद्द

प्रदीप द्विवेदीः कमल हासन! आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता है, हत्यारे की कोई जाति नहीं होती है...

राजस्थानः मालवीया को विश्वास- केन्द्र में कांग्रेस सरकार होगी, राहुल होंगे प्रधानमंत्री!

प्रदीप द्विवेदीः अब समझ में आया! पीएम मोदी क्यों प्रेस कांफ्रेंस से कतराते हैं?

मोदी पर मायावती का विवादित बयान, कहा घबराती हैं भाजपा नेताओं की पत्नियां

अभिमनोजः सामूहिक दुष्कर्म जैसे मामलों पर सियासत क्यों करते हैं राजनेता?

सुमित्रा महाजन से बोले मोदी-ताई भूख लगी है, भोजन लाई हो, मैं गाड़ी में खा लूंगा

पीएम मोदी ने कहा दिग्विजय सिंह ने वोट न डालकर बहुत बड़ा पाप किया

मल्लिकार्जुन खड़गे के बिगड़े बोल, कहा- कांग्रेस 40 सीटें जीती तो मोदी लगाएंगे फांसी? ?

कमल हासन का विवादित बयान, बोल- आजाद भारत का पहला आतंकी था हिंदू

वाराणसी से मोदी के खिलाफ चुनाव लड़ रहे बाहुबली अतीक अहमद ने मैदान छोड़ा

बंगाल में अमित शाह की रैली को नहीं मिली मंजूरी, हेलिकॉप्टर लैंडिंग की भी इजाजत नहीं

प्रदीप द्विवेदी: राजस्थान की लोकसभा सीटों के हिसाब से- कौन बनेगा प्रधानमंत्री?

लोकसभा चुनाव: छठे चरण में 59 सीटों पर कुल 61.16 प्रतिशत वोटिंग, बंगाल में बवाल

बंगाल में ‘हिंसा’ का छठा चरण, TMC-BJP कार्यकर्ताओं की हत्या, 2 को मारी गोली

अभिमनोजः सियासी जंग में फेक न्यूज का जोर, सच सामने आने तक तो बहुत असर दिखा जाती हैं ऐसी खबरें!

प्रदीप द्विवेदीः क्या महान प्रधानमंत्री बनने का अवसर गंवा चुके हैं पीएम नरेन्द्र मोदी?

अभिमनोजः तो इसलिए राजीव गांधी पर निशाना साध रहे हैं पीएम नरेन्द्र मोदी?

दक्षिणी दिल्ली के प्रत्याशी दलबीर सिंह मलिक को मिल रहा भारी जनसमर्थन

डॉ चौहान का भाजपा पर संवैधानिक संस्था के दुरुपयोग का आरोप

प्रदीप द्विवेदीः अब बतौर पीएम, मोदी के विकल्प में गड़करी, राजनाथ के अलावा नीतीश का नाम भी आया?

अभिमनोजः दिल्ली में कांग्रेस के पास खोने के लिए कुछ नहीं, आप-बीजेपी की प्रतिष्ठा दांव पर?

प्रदीप द्विवेदीः सियासी सागर में धक्के मार-मार कर पीएम मोदी ने राहुल गांधी को सफल राजनीतिक तैराक बना दिया?

बीजेपी नेता हेमंत बिस्वा सरमा और पश्चिम बंगाल बीजेपी अध्यक्ष दिलीप घोष पर हमला

प्रियंका गांधी का पीएम मोदी पर वार, कहा- अहंकार तो दुर्योधन का भी नष्ट हुआ था

अभिमनोजः अब बीजेपी नेताओं के भी स्वर... अबकी बार, गठबंधन सरकार?

प्रदीप द्विवेदीः जनता के तो छोड़ो, जनसंघ-बीजेपी के भी अच्छे दिन नहीं आए पीएम मोदी राज में?

ईवीएम-वीवीपैट के मुद्दे पर 21 दलों की पुनर्विचार याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज किया

स्वामी के बाद बोले राम माधव- चुनाव बाद पड़ सकती है सहयोगियों की जरूरत

लोकसभा चुनाव : पांचवें चरण में 62.56% वोटिंग, कई दिग्गजों की किस्मत EVM में बंद

प्रदीप द्विवेदीः यह राजीव गांधी का नहीं, देश के सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न का अपमान है?

दक्षिणी दिल्ली के प्रत्याशी मलिक बोले भाजपा और आम आदमी पार्टी एक ही थाली के चट्टे-बट्टे

निर्वाचन आयोग की दो टूक- रमजान में मतदान का समय नहीं बदला जायेगा

अभिमनोजः अब कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल बोले- अबकी बार, गठबंधन सरकार!

पांचवां चरण: 7 राज्यों की 51 सीटों पर डाले जाएंगे वोट, दांव पर दिग्गजों की प्रतिष्‍ठा

प्रदीप द्विवेदीः पीएम नरेन्द्र मोदी पर ऐसी टिप्पणियों के लिए कौन जिम्मेदार है? क्या स्वयं नरेन्द्र मोदी!

दक्षिणी दिल्ली चुनावी मैदान में जमीन से जुड़े अनुभवी राजनेता दलबीर सिंह मलिक

अभिमनोजः राहुल गांधी की रोटीवाद की सियासी तलवार से पीएम मोदी को बचा पाएगी राष्ट्रवाद की राजनीतिक ढाल?

अभिमनोजः बिहार में क्राॅस वोटिंग का सियासी खतरा बीजेपी-जेडीयू को, तो उदासीनता की परेशानी महागठबंधन में?

प्रदीप द्विवेदीः 70 साल में कुछ नहीं हुआ होता तो अभी भी साइक्लोस्टाइल पर्चे बांट रहे होते?

सेना के जवानों ने किया फर्जी मतदान, शिकायत की जांच शुरू

जब अचानक सांप से खेलने लगीं प्रियंका गांधी - जिंदा सांपों को लिया अपने हाथों में

प्रदीप द्विवेदीः जो पलपल इंडिया ने सबसे पहले बताया था, उस पर सुब्रमण्यम स्वामी ने सियासी मुहर लगा दी?

एमपी : भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की आज 3 चुनावी सभा

विरोधियों के खतरे के चलते अजीत डोभाल के बेटे को मिलेगी जेड श्रेणी की सुरक्षा

प्रदीप द्विवेदीः यूपी में क्या होगा? कोई नहीं जानता, क्योंकि क्राॅस वोटिंग कुछ भी रंग दिखा सकती है!

एमपी: साध्वी प्रज्ञा पर चुनाव आयोग ने 72 घंटे की लगाई रोक

एमपी: पिपरिया में राहुल गांधी ने कहा चौकीदार चोर है.. यह नारा मेरा नहीं, जनता की आवाज

वाराणसी लोकसभा चुनाव में पीएम मोदी के खिलाफ मैदान में उतरे 101 प्रत्याशी

लोकसभा चुनाव 2019: टाटा समूह ने दिया 600 करोड़ का चंदा

अभिमनोजः कांग्रेस से मायावती की नाराजगी क्या राजनीतिक रंग दिखाएगी?

"नहीं करूंगा मतदान"





बंपर वोटिंग जारी, अब तक पश्चिम बंगाल में 48 और यूपी में 36 फीसदी मतदान


योग शिविरों को न बनाएं राजनीतिक मंच: चुनाव आयोग


सबको पेंशन, दवा और घर देगी काँग्रेस, घोषणापत्र जारी


राजस्थान में खिलेगा कमल, मुरझाएगा पंजा, चुनावी सर्वे का दावा


प्राकृतिक आपदा में राहत देने से नहीं रोकती चुनाव आचार संहिता, भोपाल में बोले मुख्य चुनाव आयुक्त


चुनावी सर्वे में शिवराज ने लगाई हैटट्रिक


अब इलेक्शन नॉमिनेशन फॉर्म में बताना होगा सोशल मीडिया एकाउंट


हरियाणावासी नहीं, कैदी बनाएंगे चौटाला को सीएम : बीरेंद्र सिंह


सोशल मीडिया पर चुनाव प्रचार का खर्च भी उम्मीदवार के खर्च में जुड़ेगा


अफवाहों में बट रहा टिकट, उम्मीदवारों ने पार्टी मुख्यालय में डाला डेरा


बढी भाजपा-कांग्रेस की मुश्किलें


छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनावों के पहले चरण का नामांकन शुक्रवार से


सरताज सहित तीन मंत्रियों के नाम रोके


भाजपा लगी मोदी की छवि सुधारने में, 50 देशों के दूतावास को भेजा न्यौता


चुनाव के लिए तैयार रहे कांग्रेस


बंपर वोटिंग जारी, अब तक पश्चिम बंगाल में 48 और यूपी में 36 फीसदी मतदान


योग शिविरों को न बनाएं राजनीतिक मंच: चुनाव आयोग


सबको पेंशन, दवा और घर देगी काँग्रेस, घोषणापत्र जारी


राजस्थान में खिलेगा कमल, मुरझाएगा पंजा, चुनावी सर्वे का दावा


प्राकृतिक आपदा में राहत देने से नहीं रोकती चुनाव आचार संहिता, भोपाल में बोले मुख्य चुनाव आयुक्त


चुनावी सर्वे में शिवराज ने लगाई हैटट्रिक


अब इलेक्शन नॉमिनेशन फॉर्म में बताना होगा सोशल मीडिया एकाउंट


हरियाणावासी नहीं, कैदी बनाएंगे चौटाला को सीएम : बीरेंद्र सिंह


सोशल मीडिया पर चुनाव प्रचार का खर्च भी उम्मीदवार के खर्च में जुड़ेगा


अफवाहों में बट रहा टिकट, उम्मीदवारों ने पार्टी मुख्यालय में डाला डेरा


बढी भाजपा-कांग्रेस की मुश्किलें


छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनावों के पहले चरण का नामांकन शुक्रवार से


सरताज सहित तीन मंत्रियों के नाम रोके


भाजपा लगी मोदी की छवि सुधारने में, 50 देशों के दूतावास को भेजा न्यौता


चुनाव के लिए तैयार रहे कांग्रेस