Loading...
भारत में और कितने पाकिस्तान!

सुरेश हिन्दुस्तानी

प्राय: देश में इस प्रकार की आवाजें मुखरित होती रही हैं कि देश में कई क्षेत्र इस प्रकार के दिखाई देते हैं, जैसे यह पाकिस्तान के हिस्से हों, यानी पूरी तरह से इस्लामिक. वहां भारत की सांस्कृतिक गतिविधियों पर पूरी तरह से प्रतिबंध सा दिखाई देता है. यहां यह बात करना उल्लेखनीय ही होगा कि आज भारत का जो दृश्य दिखाई देता है, वह वास्तव में भारत की मूल संस्कृति का हिस्सा न होकर एक नवीन संस्कृति को उदित करने का षड्यंत्री प्रयास है. भारत की मूल संस्कृति हजारों वर्ष पुरानी है. यह बात सही है कि संस्कृति का निर्माण कोई दो चार सौ वर्षों में नहीं होता, हजारों, लाखों वर्षों के बाद ही संस्कृति का निर्माण होता है. हम एक हजार वर्ष पूर्व क



गोल्डन गर्ल की गोल्डन जीत से महका भारत 

ललित गर्ग

देश का एक भी व्यक्ति अगर दृढ़ संकल्प से आगे बढ़ने की ठान ले तो वह शिखर पर पहुंच सकता है. विश्व को बौना बना सकता है. पूरे देश के निवासियों का सिर ऊंचा कर सकता है. भारत की नई ‘उड़नपरी’ 18 वर्षीय असमिया एथलीट हिमा दास ने ऐसा ही करके दिखाया है, उसने अपनी शानदार उपलब्धि से भारतीय ऐथलेटिक्स में एक नए अध्याय की शुरुआत कर दी है. जब इस गोल्डन गर्ल की अनूठी एवं विलक्षण गोल्डन जीत की खबर अखबारों में शीर्ष में छपी तो सबको लगा कि शब्द उन पृष्ठों से बाहर निकलकर नाच रहे हैं. फिनलैंड के टैम्पेयर शहर में आयोजित आईएएएफ वल्र्ड अंडर-20 ऐथलेटिक्स चैंपियनशिप की 400 मीटर दौड़ में उन्होंने गोल्ड मेडल जीता है.
देश की अस्मिता पर नित-नये लगने वा



यह लड़ाई है, अच्छाई और बुराई की

डाँ नीलम महेंद्र

उच्चतम न्यायालय ने 9 जुलाई 2018 के अपने ताजा फैसले में 16 दिसंबर 2012 के निर्भया कांड के दोषियों की फाँसी की सजा को बरकरार रखते हुए उसे उम्र कैद में बदलने की उनकी अपील ठुकरा दी है.
दिल्ली का निर्भया कांड देश का वो कांड था जिसने पूरे देश को हिला कर रख दिया था. देश के हर कोने से निर्भया के लिए न्याय और आरोपियों के लिए फाँसी की आवाज उठ रही थी. मकसद सिर्फ यही था कि इस प्रकार के अपराध करने से पहले अपराधी सौ बार सोचे. लेकिन आज छह साल बाद भी इस प्रकार के अपराध और उसमें की जाने वाली क्रूरता  लगातार बढ़ती जा रही है. नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के अनुसार साल 2015 में बलात्कार के 34651, 2015 मे 38947 मामले दर्ज हुए थे. 2013 में यह संख्या 25923 थी. कल तक



आरक्षण वर्गीकरण का अनावश्यक विरोध

सुरेंद्र किशोर

संसद के मौनसून सत्र में सरकार अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा देने वाले विधेयक को नए सिरे से लाने की तैयारी में है.
देखना है कि इस बार विपक्ष इस विधेयक पर क्या रवैया अपनाता है ?
यह सवाल इसलिए क्योंकि कांग्रेस ने ओ.बी.सी.के 27 प्रतिशत आरक्षण के वर्गीकरण के विरोध में खड़े होने का संकेत दिया है.
ऐसा करके वह एक राजनीतिक जुआ ही खेल रही है.
इससे पहले 1990 में राजीव गांधी ने ओबीसी आरक्षण के वी.पी.सिंह सरकार के निर्णय का लोक सभा में विरोध करके कांग्रेस को पिछड़ों से दूर करने का काम किया था.
तब कांग्रेस ने गैर आरक्षित वर्ग के हितों का ध्यान रखा और आज वह पिछड़ों के बीच के संपन्न हिस्से के हितों का ध्यान रख र



आओ एक नयी दुनिया बसाएं

ललित गर्ग

आज का मनुष्य भूलभूलैया में फंसा हुआ है. यदि देखा जाये तो संसार का विस्तार यानी सुविधावादी और भौतिकवादी जीवनशैली एक प्रकार की भूलभूलैया ही है. भोग के रास्ते चारों ओर खुले हुए हैं. धन, सत्ता, यश और भोग - इन सबका जाल बिछा है और यह जान इतना मजबूत है कि एक बार आदमी उसमें फंसा कि निकल नहीं पाता. जिस प्रकार दलदल में फंसा मनुष्य उसमें से निकलने के लिये जितना प्रयत्न करता है, उतना ही और फंसता जाता है, यही स्थिति वर्तमान युग में मनुष्य के साथ है. भोग-विलास, सांसारिक माया-जाल आदि की रचना मनुष्य स्वयं करता है और स्वयं ही उसमें फंसता जाता है. उसकी अपनी बनाई हथकड़ी-बेड़ी उसी के हाथ-पैरों में पड़ जाता है. जब विवेक नष्ट हो जाता है तो ऐसा ह



धरती पुत्रों को बंपर सौगात

सुरेश हिन्दुस्तानी

भारत कृषि प्रधान देश है, इसका आशय यह भी है कि भारत में कृषि के विकास के लिए जितने सकारात्मक प्रयास होंगे, भारत उतनी ही तीव्र गति से विकास के पथ पर अग्रसर होगा. यह बात सही है कि कृषि प्रधान देश होने के बाद भी कृषि विकास के लिए स्वतंत्रता के पश्चात उतने प्रयास नहीं किए गए, जितने होने चाहिए. इस कारण किसान खेती से दूर भागने का प्रयास करने लगा. कृषि के क्षेत्र में वर्तमान सरकार की यह महानतम उपलब्धि कही जा सकती है कि उसने कृषि उत्पादन के क्षेत्र में आशातीत सफलता प्राप्त की है, लेकिन किसानों को अपनी फसल का उचित मूल्य नहीं मिल पर रहा था, जिसके कारण किसान बहुत परेशान था. अब मोदी सरकार ने किसानों की फसल के लिए न्यूनतम समर्थन



इस रात की सुबह नहीं!

प्रकाश भटनागर

क्या अब भी यह बहस मौजू है कि राजनीति में वंशवाद हो या नहीं हो? सन्दर्भ उस नियम का है, जिसके तहत भाजपा ने चुनाव में स्थापित नेताओं के परिवारजनों को टिकट देने के नियम कड़े कर दिए हैं. इसे राजनीतिक शुचिता का मामला मत समझिये. शुचिता और सियासत का तालमेल तलाशना चील के घोंसले में मांस पाने की कोशिश जैसा ही है. ऐसे नियम बनते हैं, असंतोष को थामने के लिए. पार्टी के भीतर का असंतोष.
गंदगी से बजबजाते राजनीतिक सिस्टम को  ठीक करने का कोई भी जतन आज तक पूरी तरह कामयाब नहीं हुआ है. दशकों में एकाध टीएन शेषन आता है. वो अकेला जो ठीक कर सका, बस उतना ही लोकतंत्र पर मेहरबानी के  रूप में ले लिया जाना चाहिए. हम निस्पृह भाव से तमाम गलत आचरण उ



अमित शाह के बयान के निहितार्थ

सुरेश हिन्दुस्तानी

अभी हाल ही में पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने यह कहकर सभी राजनीतिक दलों की चिंताएं बढ़ा दी हैं कि अबकी बार लोकसभा चुनाव में भाजपा को कम से कम 22 सीटें चाहिए. वैसे तो हर राजनीतिक दल हर चुनाव में ज्यादा से ज्यादा सीटें की रणनीति बनाता है, लेकिन किसके खाते में कितनी खुशी आती है, यह तब पता चलता है, जब परिणाम आते हैं. यह बात सही है कि भाजपा आज अछूता राजनीतिक दल नहीं है. जो लोग भाजपा पर सांप्रदायिक राजनीतिक करने का खु लकर आरोप लगाते थे, उनमें कई दल उनके साथ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन का हिस्सा हैं. ऐसे में यह भी कहा जा सकता है कि भाजपा के प्रति अब अनुराग उत्पन्न होता जा रहा है. दूसरी सबसे महत्वप



तेल और तेल के दाम

अनूप शुक्ल

तेल फिर चर्चा में हैं . हमेशा रहता है. तेल के दाम चंद्रमा की कलाओं की तरह बढ़ते हैं. चन्द्रमा तो छोटा बड़ा होता है. लेकिन तेल के दाम को छोटा होना पसंद नहीं. कभी मजबूरी में घटना भी पड़ता है तो दोगुना बढ़कर हिसाब बराबर कर लेता है.

तेल का महत्व जगजाहिर है. तेल खुद को जलाकर दूसरों के लिए ऊर्जा पैदा करता है. वोट बैंक की तरह समझिये तेल को. किसी लोकतंत्र में दबे-कुचले , वंचित लोग चुनाव में महत्वपूर्ण हो जाते हैं. वैसे ही जमीन में मीलों नीचे दबा- कुचला, काला-कलूटा , बदसूरत तेल जमीन पर आते ही महत्वपूर्ण हो जाता है. लोग इस पर कब्जे के लिए मारपीट करने लगते हैं.

वोट बैंक पर कब्जे के लिए अपने देश में भाषणबाजी, आरोप-प्रत्यारोप या फिर



एक दूसरी जमीन पानी के बाद भी है!

प्रकाश भटनागर

गये  साल डिस्कवरी चैनल पर एक शो देखा था. नदी में उतरे ज़ेबरा पर मगरमच्छों ने हमला किया. वह घायल हुआ, लेकिन किसी तरह पानी से बाहर आ गया. वहाँ एक शेर परिवार ने उसे निशाना बनाना चाहा. ज़ेबरा घायल होने की वजह से भाग नहीं सकता था. इसलिए फिर वो पानी में उत्तर गया. अब हालत यह कि पानी में मगरमच्छ उसे शिकार बनाना चाह रहे थे और ज़मीन पर शेर उसे देखकर जुबान लपलपा रहे थे. दो समान प्रवृत्ति के किन्तु अलग-अलग प्रजातियों वाले खूंखार जीवों के बीच भागते-भागते अंततः ज़ेबरा उनमें से किसी एक का निवाला बन गया.

क्या सभ्य समाज के नाम पर पनपे जंगल में हम भी शिकारियों के निशाने पर हैं? एक-सी प्रवृत्ति किन्तु अलग-अलग प्रजाति वालों के निशाने प



भीड़तंत्र का हत्यारा बन जाने का दर्द

ललित गर्ग

महाराष्ट्र के औरंगाबाद जिले के चंदगांव में सोशल मीडिया पर फैलाये जा रहे फर्जी मेसेज पर यकीन करके भीड़ द्वारा दो लोगों को पीट-पीट के हत्या कर दिये जाने का मामला सामने आया है. इससे पहले असम के कार्बी आंग्लोंग जिले में भीड़ ने बच्चा चोरी के संदेह में पेशे से साउंड इंजीनियर नीलोत्पल दास और गुवाहाटी के ही व्यवसायी अभिजीत की पीट-पीटकर हत्या कर दी. कुछ अर्से पहले दिल्ली में खुलेआम दो लड़कों को पेशाब करने से रोकने पर एक ई-रिक्शा चालक की पीट-पीट कर हत्या कर दी गई. कभी गौमांस खाने के तथाकथित आरोपी को मार डाला जाता है, कभी किसी की गायों को वधशाला ले जाने के संदेह में पीट-पीटकर हत्या कर दी जाती है, कभी छोटी-मोटी चोरी करने वाले क



आम चुनाव 2019? अच्छे दिन वाला कि अच्छे दिल वाला पीएम होगा?

प्रदीप द्विवेदी

लगता है, राहुल गांधी के राजनीति में अच्छे दिन आ गए हैं? कम-से-कम भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी के सहयोगी रहे सुधीन्द्र कुलकर्णी के राहुल गांधी पर भरोसे को देख कर तो यही लगता है.
यही नहीं, शायद बाबा रामदेव को भी राहुल गांधी का अच्छा भविष्य नजर आने लगा है, तभी तो वह कह रहे हैं- राहुल गांधी और सोनिया गांधी से मेरे दोस्ताना रिश्ते हैं. 
वैसे, कांग्रेसी तो राहुल गांधी के समर्थक हैं ही, लेकिन कांग्रेस में भी शीला दीक्षित जैसे नेता, जिनकी कभी राहुल गांधी लेकर अलग राय थी, का यह कहना कि... राहुल एक सक्षम नेता के तौर पर उभरे हैं, कामयाबी के किसी प्रमाण-पत्र से कम नहीं है? 
सुधीन्द्र कुलकर्णी का कहना था कि... भारत



जयललिता के समर्थकों का सत्ता संघर्ष जारी है!

अभिमनोज

तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता के गुजर जाने के बाद से प्रदेश में एआईएडीएमके के विभिन्न पक्षों में सत्ता संघर्ष जारी है. वैसे तो जयललिता की सबसे करीब रही शशिकला सत्ता की सबसे प्रबल दावेदार थी, लेकिन ऐन मौके पर कोर्ट के एक फैसले के कारण उन्हें जेल जाना पड़ा और सत्ता उनके हाथ से निकल गई. इस वक्त तमिलनाडु में एआईएडीएमके की राजनीति शशिकला पक्ष के टीटीवी दिनाकरन, सीएम पलानीसामी और पूर्व मुख्यमंत्री पन्नीरसेल्वम के इर्दगिर्द है?
खबर है कि... मद्रास हाई कोर्ट ने 18 एमएलए की सदस्यता रद्द किए जाने के मामले में निर्णय दे दिया है, इस मामले में हाई कोर्ट की दो जजों की बेंच ने विभाजित फैसला सुनाया है जिसके तहत हाई



फ़ादर्स डे बनाम तर्पण

मनोज कुमार

रिश्ते में हम तेरे बाप लगते हैं, तब लगता है कि बाप कोई बड़ी चीज होता है लेकिन बाज़ार ने 'फादर्स डे' कहकर उसे भी टेडीबियर की शक्ल दे दी है. ब्च्चे उन्हीं की जेब काटकर, उन्हें गिफ्ट देते हैं. उपहार कहने पर बाज़ार की नज़रों में देहाती हो जाएंगे, इसीलिए गिफ़्ट कहना ही ठीक रहेगा. ये डे का कॉन्सेप्ट बाज़ार के है, क्योकि भारत में बाप आज भी वैसा ही है, जैसा कि फ़ादर डे के पहले था. रफू किये कपड़े और फ़टी बनिया एक बाप को बाप बनाता है क्योंकि वह बाप बच्चों को नए कपड़ों में देखकर खुश होता है. उसकी तमन्ना तब पूरी होती है जब उसके बच्चे जीने लायक नोकरी पा लें. बहुत मजबूरी हो तब बच्चों से वह ना कहता है, वरना उनकी हर ज़रूरत बाप की खुशी होती है, मज़बूर



स्व-प्रेरणा की मिसालों से बनता समाज

ललित गर्ग

कहते हैं कि जिसके सिर पर कुछ कर गुजरने का जुनून सवार होता है तो फिर वो हर मुश्किल हालात का सामना करते हुए अपनी मंजिल को हासिल कर ही लेता है. ऐसे लोग अपने किसी भी काम के लिए दूसरों पर निर्भर नहीं होते बल्कि वो आत्मनिर्भर होकर अपने सभी कामों को अंजाम देते हैं और दुनिया के सामने एक अनोखी मिसाल पेश करते हैं. जुनून, स्वप्रेरणा, श्रमदान और आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश करनेवाला एक ऐसा ही अनूठा उदाहरण छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से मात्र पच्चीस किलोमीटर दूर आमदी नाम के एक गांव में लोगों द्वारा खुद तालाब बना लेने का है. यह गांव हर साल गर्मी में पानी के लिए तरस जाता था. लेकिन विकास के बड़े-बड़े दावे करने वाली राज्य सरकार ने कोई स



आरएसएस की ताकत? कोई ईर्ष्या तो कर सकता है, लेकिन इंकार नहीं

प्रदीप द्विवेदी

भारतीय राजनीति में आरएसएस का प्रत्यक्ष हस्तक्षेप नहीं होने के बावजूद आरएसएस की ताकत को सियासी दुनिया नजरअंदाज नहीं कर सकती है? आरएसएस की ताकत से कोई भी ईर्ष्या तो कर सकता है, लेकिन उसकी ताकत से इंकार नहीं कर सकता है. अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि यदि संघ का समर्थन भाजपा को नहीं मिले तो भाजपा की सियासी सफलताएं आधी भी नहीं बचेंगी?
कुछ समय पहले देश के पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के आरएसएस के कार्यक्रम में भाग लेने के कारण संघ एक बार फिर चर्चाओं में है. बगैर किसी आधार के संघ की आलोचना तो होती रही है, परन्तु संघ के खिलाफ ठोस सबूतों का अभाव रहा है, यही नहीं... समय-समय पर संघ ने देश-समाज में अपनी श्रेष्ठ भूमिका अ



 माना की पीएम मोदी बहादुर हैं, पर प्रेस से क्यों दूर हैं?

अभिमनोज

पीएम नरेन्द्र भाई मोदी की जिस तरह की ब्रांडिंग हो रही है, उससे लगता है कि वे बहादुर हैं, पर सवाल यह है कि फिर वे प्रेस से क्यों दूर हैं? प्रेस से बातचीत तो छोडि़ए, वे तो कईं ज्वलंत मुद्दों पर ही चुप्पी साध लेते हैं, और शायद इसीलिए मौन रहने का भाजपाई आरोप झेलने वाले पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भी कुछ समय पूर्व पीएम मोदी पर व्यंग्यबाण चलाए थे कि... उन्हें बोलने का उपदेश देने वाले मोदी क्यों ज्वलंत मुद्दों पर चुप्पी साधे रहते हैं?
नरेंद्र भाई मोदी प्रेस के साथ एक तरफा संवाद रखते हैं जैसा अपनी पार्टी के नेताओं के साथ रखते हैं, उनके भाषण सुनो, उनके मन की बात सुनो और उनके बयान खुब प्रचारित करो. 
यही वजह है कि भ



प्रेम ही संसार की नींव है...!

गिरीश बिल्लोरे “मुकुल”

संत वैलेंटाइन के नाम पर प्रेम का सन्देश देने वाले दिन में बुराई क्या..? इस सवाल पर घच्च से अपने राम पर पक्ष द्रोही होने का आरोप तय कर दिया जावेगा कोई डंडा लेकर मारने भी आ जावे इसका मुझे पूरा पूरा अंदाज़ है. देर रात तलक नेट पर निर्वसना रतियों को निहारते लोग या फिर रूमानी चैट सेवाओं का लाभ उठाते लोग ही सर्वाधिक शक्ति के साथ इस दिवस पर सक्रीय नज़र आते हैं . जबकि परिवारों में बालिकाओं और महिलाओं के साथ दुराचारों पर इनकी निगाह कभी कभार ही ही पड़ती होगी.
घरेलू शोषण पर आक्रामक क्यों नहीं होते ये लोग. वास्तव में यह सब एक पूर्वाग्रही मिशन के हिस्से होते हैं. जो बिना समझ के विरोध का परचम लेकर आगे बढ़ते हैं. वास्तव में होना ये चा



प्रेम एक सहज गठबंधन होता है... 

अनूप शुक्ल

सुबह-सुबह कार से टहलने निकले. पप्पू की दुकान के पास की फ़ुटपाथ पर बैठे एक जोड़ा कानाफ़ूसी वाले अंदाज में बतिया रहा था. अंदाजे-ए-गुफ़्तगू वही वाला जिसमें गांधी जी-नेहरू जी के साथ बतियाते हुये तस्वीरों में दिखते हैं. तस्वीर में भले ही नेहरू जी, गांधीजी से , किसी मीटिंग में स्वयंसेवकों को सब्जी-पूड़ी बंटेगी कि दाल-चावल, विषय पर चर्चा कर रहे हों लेकिन उनके महापुरुष होने के नाते माना यही जायेगा कि वे देश-विदेश की किसी बड़ी समस्या पर चर्चा कर रहे हैं. ऐसे ही ये फुटपाथिया लोग भले ही अमेरिका और उत्तर कोरिया के राष्ट्रपतियों के सनकी बयानों की चर्चा कर रहे हों लेकिन हम यही सोचेंगे कि ये शाम के दाल-रोटी के इंतजाम की चर्चा कर रहे ह



ज्योतिष शास्त्र विचार का विषय है, विवाद का नहीं

प्रदीप द्विवेदी

ज्योतिष को लेकर अक्सर बहस की स्थितियां बनती हैं और अनेक तर्कशास़़्त्री इसे पूरी ताकत से गलत साबित करने में लग जाते हैं. मैं न तो ज्योतिष शास्त्र का प्रवक्ता हूं  और न ही इसे सही-गलत साबित करना मेरी जिम्मेदारी है, क्योंकि... यह निजी उपयोग का ज्ञान है, सार्वजनिक बहस का विज्ञान नहीं.
ज्योतिष का ज्ञान एकत्रित करने में सैकडों ऋषियों को हजारों साल लगे और इसकी गणनाएं आधुनिक उपकरणों से ज्ञात गणनाओं से प्रमाणित हो रही हैं तो यह मान लेना चाहिए कि ज्योतिष ज्ञान महज कल्पना नहीं है, हकीकत का विज्ञान है?
ज्योतिष के साथ दो बडी समस्याएं है, एक- ज्योतिष ज्ञान के लिए ज्योतिषी होने का योग होना चाहिए, और दो- ज्यादातर ज्योति



उपचुनाव में एक बार फिर मतदाता मुखर हुआ 

ललित गर्ग

भारत के लोकतन्त्र की सबसे बड़ी विशेषता यह रही है कि चुनाव के समय मतदाता ही बादशाह होता है. इस समय राजनेताओं के भाग्य का फैसला करने का अधिकार उसी को होता है. हमने यह बात सत्तर वर्षीय लोकतंत्र के जीवन में एक बार नहीं, बल्कि अनेक बार देखी है. जब-जब इन मतदाताओं को नजरअंदाज किया गया, राजनैतिक दलों को मुंह की खानी पड़ी है. हाल में सम्पन्न हुए कई राज्यों के विधानसभा व लोकसभा उपचुनावों के नतीजों से जो सन्देश निकला है वह यही है कि भारत के लोकतन्त्र को जीवन्त और ऊर्जावान बनाये रखने में मतदाताओं ने एक बार फिर अपने अधिकार का बहुत सूझबूझ एवं विवेक से उपयोग किया हैं. उसने जो निर्णय दिया है उससे कुछ राजनैतिक नेतृत्व जीत की खुशफहम



दिवस विशेष: उदन्त मार्तण्ड की परम्परा निभाता हिन्दी पत्रकारिता

मनोज कुमार

कथाकार अशोक गुजराती की लिखी चार पंक्तियां सहज ही स्मरण हो आती हैं कि 

राजा ने कहा रात है

मंत्री ने कहा रात है

सबने कहा रात है

यह सुबह सुबह की बात है

कथाकार की बातों पर यकीन करें तो मीडिया का जो चाल, चरित्र और चेहरा समाज के सामने आता है, वह दुर्भाग्यपूर्ण है किन्तु क्या यही पूरा सच है? यदि हां में इसका जवाब है तो समाज की विभिन्न समस्याओं और उपलब्धियों को जन-जन तक पहुंचाने के लिए मीडिया के साथ क्यों बात की जाती है? क्यों मीडिया को भागीदार बनाया जाता है? सच तो यही है कि मीडिया हमेशा से निरपेक्ष और स्वतंत्र रहा है. हां में हां मिलाना उसकी आदत में नहीं है और यदि ऐसा होता तो जिस तरह समाज के



विदेश नीति: सुषमा नहीं मोदी का जादू !

कुमार राकेश

भारत की विदेश नीति में मोदी प्रभाव ज्यादा है, बनिस्पत सुषमा के. कोई कुछ भी कहे,प्रधानमंत्री नरेन्द्र भाई मोदी ने विदेशों में भारत के जयघोष का जो डंका बजाया है,वो आज तक कमोबेश अटलबिहारी बाजपाई को छोड़कर किसी प्रधानमंत्री या विदेश मंत्री ने बजाया.
 भारतीय संस्कृति के तहत ये बात चरितार्थ और प्रमाणित है कि हैं- दंभ ईश्वर का आहार है.यदि आप दम्भी हो गए या कहीं से उस दंभ का अंश मात्र में आप में आ गया तो आपके अन्दर की इंसानियत मर जाती है. शायद देश की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के साथ ऐसा ही हो रहा है . कभी नम्रता,शोखी,अदब,नफासत,नज़ाकत,तहजीब के लिए मशहूर रही श्रीमती स्वराज,आज वो पहले  वाली सुषमा स्वराज नहीं रही है. कारण ज



देख तेरे भगवान की हालत क्या हो गई इंसान!

प्रदीप द्विवेदी

धरती पर मानव जीवन के भविष्य को लेकर मैं बहुत आश्वस्त हूं , कारण? इस धरती पर बडे-से-बडे राक्षस आए, नीच-से-नीच आतंकवादी आए, लेकिन इस धरती को नर्क नहीं बना पाए, ठीक इसी तरह महान-से-महान संत आए लेकिन धरती को स्वर्ग नहीं बना पाए!
मतलब, सर्वशक्तिमान ईश्वर के आगे सभी बौने हैं? कोई भी संत हो या राक्षस, उसकी समय सीमा तय है और उसके गुजरने के बाद कोई दूसरा उसकी जगह ले नहीं सकता है, बल्कि कईं बार तो राक्षस के घर में संत पैदा हो जाते हैं और उस राक्षस की तमाम नकारात्मक उर्जा को ही नष्ट कर देते हैं!
ईश्वर ने इंसान को बनाया या नहीं, यह तो पता नहीं, लेकिन इंसान ने कई ईश्वर बना दिए हैं, जबकि सच्चाई यह है कि ईश्वर एक है और जातियां केवल तीन!


गैरभाजपाइयों की चुनौती वास्तविक. लाभ की गणित काल्पनिक?

अभिमनोज

कर्नाटक प्रकरण ने विपक्षी एकता की राह दिखा दी है और ज्यादातर गैरभाजपाई नेता उस राह पर चल भी पड़े हैं, लेकिन... इस राह पर चल कर मंजिल हासिल करने के मामले में अभी भी कईं किन्तु-परन्तु हैं.
अलबत्ता... गैरभाजपाइयों ने 2019 में मोदी के विजय रथ को रोकने का तरीका तलाश लिया है, जिसके जरिए देश के 13 राज्यों में 15 दल मिलकर सवा चार सौ से ज्यादा लोकसभा सीटों पर भाजपा की जीत खटाई में डाल देंगे? इस गैरभाजपाई चक्रव्यूह को रचना आसान नहीं है, लेकिन यदि बन गया तो भाजपा के लिए चक्रव्यूह तोडऩा बेहद मुश्किल होगा?
कर्नाटक चुनाव नतीजों के बाद भाजपा सबसे बड़े दल के रूप में उभरी और अपने कामयाब जोड़तोड़ के इतिहास के भरोसे 21वें राज्य के रूप मे



ज्वलंत सवाल: आठ राज्यों में हिन्दू अल्पसंख्यक

सुरेश हिन्दुस्तानी

देश में कश्मीर से विस्थापित हुए हिन्दुओं के बारे में अगर उसी समय समाधान निकलता तो संभवत: अन्य राज्यों में इसकी पुनरावृति रुक सकती थी, लेकिन समाधान निकालने के किसी भी तरीके पर सरकार की ओर से कोई चिंतन नहीं किया गया. इस कारण यह समस्या आज पूरे देश में तेजी से पैर पसारती जा रही है. इसका मुख्य कारण देश विरोधी कार्यों को अंजाम देने वाली राजनीति को माना जा सकता है. कश्मीर का सबसे जघन्य सच यह है कि वहां से जो हिन्दू धर्म को पूरी तरह से मानते थे, उन्हें ही भगाया गया, बाकी सब मुसलमान बन गए. यह एक प्रकार से धर्मान्तरण का ही खेल था. धर्मांतरण का खेल कौन चला रहा है, यह भी लगभग सभी जानते हैं.

महात्मा गांधी ने धर्मान्तरण के बारे



देश बदलना है तो देना होगा युवाओं  को सम्मान

डाँ नीलम महेंद्र

भारत एक युवा देश है. इतना ही नहीं , बल्कि युवाओं के मामले में हम विश्व में सबसे समृद्ध देश हैं. यानि दुनिया के किसी भी देश से ज्यादा युवा हमारे देश में हैं. भारत सरकार की यूथ इन इंडिया,2017 की रिपोर्ट के अनुसार देश में 1971 से 2011 के बीच युवाओं की आबादी में 34.8% की वृद्धि हुई है. बता दिया जाए कि इस रिपोर्ट में 15 से 33 वर्ष तक के लोगों को युवा माना गया है.

इस रिपोर्ट के मुताबिक, 2030 तक एशिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देश चीन में युवाओं की संख्या जहां कुल आबादी की 22.31% होगी, और जापान में यह 20.10% होगी, भारत में यह आंकड़ा सबसे अधिक 32.26% होगा. यानी भारत अपने भविष्य के उस सुनहरे दौर के करीब है जहाँ उसकी अर्थव्यवस्था नई ऊँचाईयों को छू सकती



राजनीति में माफी मांगने का बढ़ता प्रचलन

ललित गर्ग

राजनीति में इनदिनों माफी मांगने का प्रचलन बढ़ रहा है. दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने इस प्रचलन को हवा दी है, वे माफी मांगने वाले शीर्ष पुरुष बन गये हैं. देशभर में खुद पर दर्ज तकरीबन चालीस से अधिक मानहानि के मुकदमों से निपटने के लिए उन्होंने माफी मांगने की शुरुआत की है. काफी सोच-विचार के बाद उन्होंने महसूस किया कि या तो काम कर लें, या मुकदमे ही लड़ लें. पंजाब के अकाली नेता बिक्रम मजीठिया से माफी मांगने के साथ शुरू हुई उनकी यह प्रक्रिया अभी दिल्ली तक पहुंच गई है, जहां केजरीवाल ने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, केन्द्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली और पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल के पुत्र अमित सिब्बल सहि



2019 लोकसभा चुनाव के कारण भाजपा को जोड़तोड़ जारी रखनी पड़ेगी?

प्रदीप द्विवेदी

 कर्नाटक में हालांकि भाजपा की 55 घंटे पुरानी सरकार को विदा करने में कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन कामयाब रहा, लेकिन खतरा अभी टला नहीं है... भाजपा फिर से मौके की तलाश में है और भविष्य में कभी भी कांग्रेस-जेडीएस सरकार को भाजपा की चुनौती का सामना करना पड़ सकता है?
भाजपा को जोड़तोड़ की राजनीति इसलिए भी जारी रखनी पड़ेगी कि 2019 के लोकसभा चुनाव तक यदि कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन रह गया तो दोनों मिलकर चुनाव लड़ेंगे और ऐसी स्थिति में भाजपा को कर्नाटक में 28 में से आधा दर्जन सीटें मिलना भी मुश्किल हो जाएगा! 
भाजपा का अब भी मानना है कि वह कर्नाटक में कांग्रेस-जेडीएस के आपसी विरोध के चलते सत्ता में वापस आ सकती है? 
कर्नाटक विधा



मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में भी किस्मत आजमाएगी जेडीयू

अभिमनोज: युवाओं को किधर ले जाएगी पान-पकौड़ा रोजगार नीति?

प्रदीप द्विवेदी: महागठबंधन छोड़ो, सपा-बसपा ही काफी हैं भाजपा को रोकने के लिए?

प्रदीप द्विवेदी: दक्षिण राजस्थान बनेगा प्रादेशिक चुनावी महाभारत का कुरूक्षेत्र?

EC का आदेश- मतदान से 48 घंटे पहले फेसबुक से हटा ले प्रचार सामग्री

अभिमनोज: तमिलनाडु में कौन से कमल का असर रहेगा आम चुनाव 2019 में?

14 सीटों पर हुए उपचुनाव में भाजपा को लगा झटका, 11 पर विपक्षियों ने मारी बाजी

चुनाव आयोग का निर्णय, कैराना-नूरपुर के 73 बूथों पर दोबारा होगी वोटिंग

अखिलेश यादव ने लोकसभा चुनाव लड़ने का किया ऐलान

EC का बयान गर्मी की वजह से खराब हुई कुछ ईवीएम

चुनावी चंदे के सवाल पर चुनाव आयोग का जवाब- राजनीतिक दल RTI के बाहर

महाराष्ट्र के पालघर और भंडारा-गोंदिया लोकसभा चुनाव में होगा करीबी मुकाबला

प्रदीप द्विवेदी: क्या 2019 में मिलेगी भाजपा को एकल कामयाबी?

प्रदीप द्विवेदी: 2019 लोकसभा चुनाव के कारण भाजपा को जोड़तोड़ जारी रखनी पड़ेगी?

सुरेश हिन्दुस्थानी: भाजपा की सरकार, कांग्रेस का नाटक

प्रदीप द्विवेदी: कर्नाटक में नाटक? कानून-न-कायदा, सत्ता मिल जाए तो फायदा!

शुरू हुआ पॉलिटिकल ड्रामा, येदियुरप्पा ने कहा कांग्रेस कर रही जानदेश का अपमान

जेडीएस बनेगी किंगमेकर, देवगौड़ा ने दिए गठबंधन के संकेत

कर्नाटक चुनाव: वोटिंग खत्म, 64 प्रतिशत हुए मतदान

कर्नाटक एग्जिट पोल: त्रिशुंक विधानसभा के आसार, जेडीएस बन सकता है किंगमेकर

कर्नाटक चुनाव : 3 बजे तक 56 फीसद वोटिंग, पूर्व प्रधानमंत्री देवगौड़ा ने किया मतदान

बेंगलुरू में वोटिंग के दौरान सुरक्षा सुनिश्चित करने कड़े इंतजाम

कर्नाटक की RR सीट पर चुनाव टला, अब 28 मई को होगी वोटिंग

कर्नाटक में बड़ी संख्या में महिलाएं कर सकती हैं 'नोटा' का उपयोग

चुनाव जीतने के लिए EVM में हेराफेरी कर रही है भाजपा : शिवसेना

कर्नाटक चुनाव: जुबानी जंग खत्म, अब 12 मई को 224 सीटों पर होगा मतदान

बीजेपी कर रही अंबेडकर के शक्तिशाली और समृद्ध भारत के सपने को साकार

कर्नाटक चुनाव: बोले अमित शाह, कांग्रेस की हार पक्की और सिद्धारमैया भी हार जाएंगे

मोदी का दावा विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का कर्नाटक से हो जाएगा सफाया

बीजेपी ने ली चुटकी राहुल से कहा आखिर दिल की बात जुबां पर आ ही गई

सिद्धरमैया ने जल्दबाजी में की मोदी की तारीफ, फिर बोले सॉरी

मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के नेतृत्व में ही लड़ा जाएगा राजस्थान विधानसभा चुनाव

उपचुनाव: कैराना सीट पर तबस्सुम को टक्कर देने BJP ने मृगांका सिंह को मैदान में उतारा

सोनिया का मोदी पर हमला कहा जुमलेबाजी से जनता का पेट नहीं भरता

बिहार में 2019 में लोकसभा के साथ हो सकते हैं विधानसभा चुनाव

बीजेपी ने सोनिया को श्रीमती एंटोनियो कहकर किया व्यक्तिगत विरोध

कर्नाटक के रण में भाजपा का घोषणा पत्र जारी, महिलाओं को फ्री में मिलेंगे सोने के मंगलसूत्र

बिहार और झारखंड की खाली विधानसभा सीटों के लिए उपचुनाव का ऐलान, अचार संहिता लागू

मनमोहन सिंह की भूमिका निभाना करियर का सबसे मुश्किल रोल: अनुपम खेर

मैं नहीं, मेरी योजनाएं गेमचेंजर हैं: सीएम सिद्धारमैया

कर्नाटक विधानसभा चुनाव: निर्वाचन आयोग ने मतदान के समय को 1 घंटे बढ़ाया

महाराष्ट्र और आंध्र में 31 मई और 21 जून को होंगे चुनाव

देश में एक साथ चुनाव कराने की कवायद तेज, चुनाव आयोग की राय जानेगी सरकार

प्रदीप द्विवेदी: कितना फायदा मिलेगा कर्नाटक में एनसीपी से कांग्रेस को?

लोकसभा चुनाव 2019: तो मायावती के खिलाफ चुनाव लड़ेंगी राखी सावंत

कर्नाटक विधानसभा चुनाव पहले जेडीएस को झटका, 7 विधायकों ने थामा कांग्रेस का हाथ

नए राज्यसभा सांसदों की पूरी लिस्ट: यूपी में भाजपा का परचम, ममता की मदद से सिंघवी जीते

जयप्रकाश पाराशर: राजनीति क्या विज्ञानविरोधी है!

राज्यसभा चुनाव: सात विधायकों के साथ बीएसपी का साथ देगी कांग्रेस

प्रदीप द्विवेदी: त्रिपुरा, नागालैंड और मेघालय? न कोई जीता, न कोई हारा, सर्वत्र सत्ता विरोधी लहर!

उपचुनाव: मप्र की मुंगावली और कोलारस सीट पर कांग्रेस का कब्जा, उड़ीसा में बीजद ने मारी बाजी

छिटपुट हिंसक घटनाओं के साथ मेघालय और नगालैंड में मतदान खत्म, 3 मार्च को आएंगे नतीजे

16 राज्यों में राज्यसभा की 58 सीटों पर चुनाव की घोषणा, 23 मार्च को होगी वोटिंग

त्रिपुरा में चुनाव प्रचार थमा, क्या बीजेपी पलट पाएगी बाजी

प्रदीप द्विवेदीः 2017... 2018 और 2019 ?.. कल, आज और कल!

उपचुनाव में भाजपा ने तीन सीटों पर लहराया परचम, प्रधानमंत्री खुश

प्रदीप द्विवेदी: यदि दिसंबर 2017 में शनि अस्त नहीं होते तो चुनावी नतीजे कुछ और होते!

योगी ने गुजरात में जहां किया प्रचार वहां मिली 25 से ज्यादा सीटें

चुनाव नतीजों पर पहली बार बोले राहुल, कहा - रिजल्ट हमारे लिए अच्छा, बीजेपी को लगा झटका

गुजरात की कुछ सीटों पर रही कांटे की टक्कर,सिर्फ 200 वोटों से हुई जीत-हार

पूनावाला के समर्थकों ने प्रदर्शन कर कहा राहुल की वजह से हारे

गुजरात चुनाव में शस्त्र की तरह चले ये जुमले

सूरत में कांग्रेस को बहुत भरी पड़ा गब्बर, 12 की 12 सीट्स पर भाजपा

गुजरात चुनाव परिणाम: फिर छाया 'भगवा', बीजेपी ने अब तक 88 सीटों पर दर्ज की जीत

ट्विटर पर भी जारी है जंग

गुजरात चुनाव : विजेताओं की सूचि

‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ का जदयू व टीआरएस ने किया समर्थन, हां-ना में फंसी कांग्रेस व द्रमुक

प्रदीप द्विवेदी: बिहार में भाजपा की मुश्किल सीटें जदयू को मिलेंगी?

छत्तीसगढ़ में नजर आदिवासियों पर, लेकिन 47% ओबीसी तय करते हैं चुनावी खेल

प्रदीप द्विवेदी: वोटों और सीटों पर नहीं, बहुकोणीय चुनाव पर निर्भर है भाजपा की जीत!

अभिमनोज: केन्द्र से जनता की नाराजगी एमपी के शिव-राज को भारी पड़ेगी?

"नहीं करूंगा मतदान"





बंपर वोटिंग जारी, अब तक पश्चिम बंगाल में 48 और यूपी में 36 फीसदी मतदान


योग शिविरों को न बनाएं राजनीतिक मंच: चुनाव आयोग


सबको पेंशन, दवा और घर देगी काँग्रेस, घोषणापत्र जारी


राजस्थान में खिलेगा कमल, मुरझाएगा पंजा, चुनावी सर्वे का दावा


प्राकृतिक आपदा में राहत देने से नहीं रोकती चुनाव आचार संहिता, भोपाल में बोले मुख्य चुनाव आयुक्त


चुनावी सर्वे में शिवराज ने लगाई हैटट्रिक


अब इलेक्शन नॉमिनेशन फॉर्म में बताना होगा सोशल मीडिया एकाउंट


हरियाणावासी नहीं, कैदी बनाएंगे चौटाला को सीएम : बीरेंद्र सिंह


सोशल मीडिया पर चुनाव प्रचार का खर्च भी उम्मीदवार के खर्च में जुड़ेगा


अफवाहों में बट रहा टिकट, उम्मीदवारों ने पार्टी मुख्यालय में डाला डेरा


बढी भाजपा-कांग्रेस की मुश्किलें


छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनावों के पहले चरण का नामांकन शुक्रवार से


सरताज सहित तीन मंत्रियों के नाम रोके


भाजपा लगी मोदी की छवि सुधारने में, 50 देशों के दूतावास को भेजा न्यौता


चुनाव के लिए तैयार रहे कांग्रेस