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कैरियर या राजनीतिक वंशवाद

मनोज कुमार

राजनीति में संतानों को मिलने वाले अवसर को वंशवाद या परिवारवाद के रूप में संबोधित किया जाता रहा है. गांधी-नेहरू परिवार से इंदिरा गांधी के राजनीति में आने के बाद से वंशवाद या परिवारवाद का मुद्दा उठता रहा है. वैसे भी चुनाव के समय ही, खासतौर से राजनीतिक दलों में टिकट वितरण को लेकर मीडिया इतना उतावला हो जाता है कि उसे सिर्फ और सिर्फ इस प्रक्रिया में वंशवाद ही नजर आता है. इसके साथ ही सच्चाई यह है कि जो लोग कांग्रेस पर वंशवाद या परिवारवाद का आरोप मढ़ते रहे हैं, उन्हीं दलों में वंशवाद और परिवारवाद प्रमुखता से हावी है इसलिए कोई भी नेता या राजनीतिक दल इस बात को बहुत तव्वजो नहीं देता है. बदलते समय में इसे वंशवाद या परिवारव



इतनी डरपोक भाजपा !

प्रकाश भटनागर

गोस्वामी तुलसीदास त्रेताकाल के लिए कह गए, समरथ को नहीं दोष गुसार्इं . बात सोलह आने सही है. त्रेताकाल नहीं देखा है तो वर्तमान में मध्यप्रदेश की भाजपा का काल देख लीजिए. तुलसीदास पूरी तरह सही दिखते हैं. क्योंकि इस पार्टी में अब केवल उसे ही दोष नहीं दिया जा रहा जो समर्थ है. बात से और लात से भी. विधानसभा चुनाव की मौजूदा गहमागहमी के बीच केवल उनकी पूछपरख हो रही है, जो खुलकर अपनी नाराजगी का इजहार कर रहे हैं. पार्टी को आंखें दिखा रहे हैं.हम भी खेलेंगे, नहीं तो खेल बिगाड़ेंगे की तर्ज पर धमकी दे रहे हैं. ऐसे लोगों को घर जाकर पुचकारा जा रहा है. उनकी मनुहार की जा रही है. किसी को पद तो किसी के परिवार में टिकट देकर संतुष्ट करने के जतन च



अनंत कुमार को अलविदा नहीं कहा जा सकता

ललित गर्ग

स्मृति शेष : केन्द्रीय मंत्री अनन्त कुमार का अचानक अनन्त की यात्रा पर प्रस्थान करना न केवल भाजपा बल्कि भारतीय राजनीति के लिए दुखद एवं गहरा आघात है. उनका असमय  देह से विदेह हो जाना सभी के लिए संसार की क्षणभंगुरता, नश्वरता, अनित्यता, अशाश्वता का बोधपाठ है. वे कुछ समय से कैंसर से पीड़ित थे. 12 नवम्बर 2018 को रात 2 बजे अचानक उनकी स्थिति बिगड़ी और उन्हें बचाया नहीं जा सका. उनका निधन एक युग की समाप्ति है. भाजपा के लिये एक बड़ा आघात है, अपूरणीय क्षति है. आज भाजपा जिस मुकाम पर है, उसे इस मुकाम पर पहुंचाने में जिन लोगों का योगदान है, उनमें अनन्त कुमार अग्रणी है.
अनंत कुमार भारतीय राजनीति के जुझारू एवं जीवट वाले नेता, सामाजिक



राजनीति में वंशवाद की कमजोरियों में उलझ गया है चैटाला परिवार

सुरेंद्र किशोर

किसी भी राजनीतिक परिवार में उत्तराधिकार की लड़ाई कठिन व दिलचस्प होती है.पर, यदि वह युद्ध किसी हरियाणवी परिवार में हो तो उसमें महाभारत का पुट होना स्वाभाविक है.
इंडियन नेशनल लोक दल के सुप्रीमो  व पूर्व मुख्य मंत्री ओम प्रकाश चैटाला इन दिनों  इसी परेशानी से जूझ रहे हैं.
 उन्होंने अपने पुत्र अभय चैटाला को अपना उत्तराधिकारी बनाने का निर्णय  कर लिया.पर अजय चैटाला के पुत्र द्वय अपने दादा का आदेश नहीं मान रहे हैं.याद रहे कि ओम प्रकाश जी के एक  पुत्र अजय चैटाला अपने पिता ओम प्रकाश चाटाला के साथ सजा काट रहे हैं.
पर अजय का कहना है कि इंडियन नेशनल लोक दल न तो मेरे बाप की पार्टी है और न ही किसी और के बाप की.<



त्यौहारों की संस्कृति का धुंधलाना

ललित गर्ग

दीपावली जैसे त्योहार के मौके पर खुशियों का इजहार करने के लिए बेहतर खानपान और रोशनी की सजावट से पैदा जगमग के अलावा कानफोडू पटाखों का सहारा लोगों को कुछ देर की खुशी तो दे सकता है, लेकिन उसका असर व्यापक होता है. पटाखों की आवाज और धुएं के पर्यावरण सहित लोगों की सेहत पर पड़ने वाले घातक असर के मद्देनजर इनसे बचने की सलाह लंबे समय से दी जाती रही है. ज्यादातर लोग इनसे होने वाले नुकसानों को समझते भी हैं, मगर इनसे दूर रहने की कोशिश नहीं करते. हालांकि पर्यावरणविदों से लेकर कई जागरूक नागरिकों ने इस मसले पर लोगों को समझाने से लेकर पटाखों पर रोक लगाने के लिए अदालतों तक का सहारा लिया है, लेकिन इन पर पूरी तरह रोक लगाने में कामयाबी



कैसा समाज बनाएंगे हम?

डाँ नीलम महेंद्र

क्या कानून की जवाबदेही केवल देश के संविधान के ही प्रति है?

क्या सभ्यता और नैतिकता के प्रति कानून जवाबदेह नहीं है ?

क्या ऐसा भी हो सकता है कि एक व्यक्ति का आचरण कानून के दायरे में तो आता हो लेकिन नैतिकता के नहीं?

 दरअसल माननीय न्यायालय के हाल के कुछ आदेशों ने ऐसा ही कुछ सोचने के लिए विवश कर दिया. धारा 497 को लेकर सुप्रीम कोर्ट के हाल के निर्णय को ही लें. निर्णय का सार यह है कि, व्यभिचार अब अपराध की श्रेणी में नहीं है

व्यभिचार, अर्थात परस्त्रीगमन, जिसे आप दुराचार, यानी बुरा आचरण, दुष्ट आचरण, अनैतिक आचरण कुछ भी कह सकते हैं लेकिन एक गैर कानूनी आचरण कतई नहीं ! क्योंकि कोर्ट का मानना है कि स्त्री पति



फिर याद आए राम, क्या होगा अंजाम?

प्रकाश भटनागर

इस साल की बीती 17 सितंबर को लेकर एक कल्पना दिमाग में दस्तक दे रही है. मामला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन का है. समय भाजपा के लिए संक्रमण वाला था. गुजरात में किसी तरह हार से बची पार्टी को मध्यप्रदेश सहित अन्य राज्यों के विधानसभा चुनावों में हार का डर यकीनन सता रहा होगा. यहीं से मेरी यह कल्पना आकार लेती है कि उस दिन मोदी को काली टोपी पहने किसी शख्स की ओर से एक आॅडियो कैसेट भेंट किया गया होगा. हरिओम शरण के भजन वाला. जिसमें केवल और केवल एक भजन होगा, तेरा रामजी करेंगे बेड़ा पार, उदासी मन काहे को डरे. ऐसा ही होता दिख रहा है और मुझे कल्पना की अगली श्रेणी में यह भी लगता है कि इस भजन को मोदी सहित अमित शाह और भाजपा के



वल्लभभाई पटेल बारडोली से बने सरदार

मनोज कुमार

एक आठ-दस साल के छोटे बच्चे ने मुझसे यूं ही पूछ लिया कि सरदार वल्लभभाई पटेल का नाम तो वल्लभभाई पटेल हैं, फिर उन्हें सरदार क्यों कहा जाता है? कुछ देर के लिए मैं अवाक था. सहसा जवाब मुझे भी नहीं सूझा. इसे आप मेरी अज्ञानता कह सकते हैं. थोड़ी देर बाद दिमाग पर जोर डालने के बाद याद आया कि सरदार’ पटेल की उपाधि है. सवाल बच्चे का था तो जवाब भी उसे पूर्ण रूप से संतुष्ट करने वाला देेना उचित होता है क्योंकि कई बार हम टालने के लिए गोलमोल जवाब दे देते हैं लेकिन कच्चे मन में यह बात बैठ जाती है जो कोशिशों के बाद भी उतरती नहीं है और हम ऐतिहासिक भूल कर जाते हैं क्योंकि अपनी अज्ञानता के कारण हम उन्हें इतिहास की गलत जानकारी देते हैं. ऐसा स



48 के राहुल से 70 साल का हिसाब? 68 के मोदी 4 साल का हिसाब नहीं देंते!

प्रदीप द्विवेदी

कमाल है! पीएम मोदी 48 साल के राहुल गांधी से 70 साल का हिसाब मांग रहे हैं, लेकिन 68 साल के पीएम नरेन्द्र मोदी केन्द्र सरकार के 4 साल का हिसाब नहीं देते?
उलझन तो तब आ गई, जब बात उठी कि- 70 साल में तो पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का ही नहीं, खुद पीएम मोदी का कार्यकाल भी शामिल है, तो आंकड़ा 60 साल पर आ गया? अब 60 साल के सवाल में भी एक सवाल है कि- इसमें सरदार पटेल का कार्य शामिल है कि नहीं?
मोदी मैजिक का ही कमाल है कि जब भी चुनाव होते हैं और भाजपा जीतती है तो जीत के लिए मोदी लहर का असर होता है और यदि हार जाती है तो प्रदेश के मुख्यमंत्री जिम्मेदार होते हैं, मतलब... जीते तो मोदी का जादू और हारे तो किसी और की जिम्मेदारी.
अभी तीन प



महिलाओं के लिए ये कैसी लड़ाई, जिसे महिलाओं का ही समर्थन नहीं 

डाँ नीलम महेंद्र

मनुष्य की आस्था ही वो शक्ति होती है जो उसे विषम से विषम परिस्थितियों से लड़कर विजयश्री हासिल करने की शक्ति देती है. जब उस आस्था पर ही प्रहार करने के प्रयास किए जाते हैं, तो प्रयास्कर्ता स्वयं आग से खेल रहा होता है. क्योंकि वह यह भूल जाता है कि जिस आस्था पर वो प्रहार कर रहा है, वो शक्ति बनकर उसे ही घायल करने वाली है.

पहले शनि शिंगणापुर, अब सबरीमाला. बराबरी और संविधान में प्राप्त समानता के अधिकार के नाम पर आखिर कब तक भारत की आत्मा, उसके मर्म, उसकी आस्था पर प्रहार किया जाएगा?

आज सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यह उठ रहा है कि संविधान के दायरे में बंधे हमारे माननीय न्यायालय क्या अपने फैसलों से भारत की आत्मा के साथ न्याय क



गुजरात में पलायन की त्रासद घटनाएं क्यों?

ललित गर्ग

हम कैसा समाज बना रहे हैं? जहां पहले हिन्दू और मुसलमान के बीच भेदरेखा खींची गई फिर सवर्ण और हरिजनके बीच, फिर अमीर और गरीब के बीच और ग्रामीण और शहरी के बीच. अब एक प्रांत और दूसरे प्रांत के बीच खींचने का प्रयास किया जा रहा है. यह सब करके कौन क्या खोजना चाहता है- मालूम नहीं? पर यह निश्चित एवं दुखद है कि राष्ट्रीयता को नहीं खोजा जा रहा है, राष्ट्रीयता को बांटने की कोशिश की जा रही है. इनदिनों गुजरात में ऐसा ही कुछ हो रहा है, जहां रहने वाले बिहार और उत्तर प्रदेश के लोगों को धमकी देकर भगाए जाने की त्रासद एवं विडम्बनापूर्ण घटनाएं घटी है और इन मामलों पर सियासत तेज हो रही है.

गुजरात में बिहार और उत्तर प्रदेश के लोगों के प्रत



अधिकार और दायित्व है मतदान

मनोज कुमार

95 साल की बुर्जुगवार महिला की दिलीइच्छा है कि वह आखिरी बार अपने मत का उपयोग करे. उसे नहीं मालूम कि आने वाले पांच साल के बाद उसे मत डालने का अवसर जीवन में मिलेगा या नहीं लेकिन इस बार वह मौका नहीं चूकना चाहती है. कुछ और भी लोग हैं जो शारीरिक रूप से कमजोर हैं लेकिन वे किसी की मदद से अपने मताधिकार का उपयोग करने की आस पाले हुए हैं. चुनाव में अपने मन के प्रत्याशी का चयन करना अधिकार है तो मतदान करना आपका अधिकार है. अक्सर हम इसके लिए स्वयं को निराश पाते हैं. हमारा एक तकियाकलाम होता है कि हमारे एक वोट से क्या बनना-बिगडऩा है लेकिन वे लोग भूल जाते हैं कि एक वोट से सरकार बन भी जाती है और गिर भी जाती है. आमतौर पर पांच वर्ष के अंतराल मे



अपने मौलिक नाम से जाने जाना गौरव का विषय है,विवाद का नहीं

डाँ नीलम महेंद्र

बरसों पहले अंग्रेजी के मशहूर लेखक शेक्सपियर ने कहा था,  व्हाट इस इन द नेम? यानी नाम में क्या रखा है? अगर गुलाब का नाम गुलाब न होकर कुछ और होता,  तो क्या उसकी खूबसूरती और सुगंध कुछ और होती? आज एक बार फिर यह प्रश्न प्रासंगिक हो गया है कि क्या नाम महत्वपूर्ण होते हैं? लेकिन इस पूरे प्रकरण में खास बात यह है कि नाम बदलने पर विरोध के स्वर उस ओर से ही उठ रहे हैं जो भारतीय के बजाए विदेशी लेखकों,  उनके विचारों और उनकी संस्कृति से अधिक प्रभावित नजर आते हैं.

खैर मुद्दा यह है कि उत्तर प्रदेश सरकार के ताजा फैसले के अनुसार, इलाहबाद अब अपने पुराने नाम प्रयागराज से जाना जाएगा. योगी सरकार का यह कदम अप्रत्याशित नहीं है और ना



भारतीय बौद्धिक संपदा को छीनने की कोशिश रावण के अंत की मुख्य वज़ह थी? 

गिरीश बिल्लोरे “मुकुल”

एक था रावण बहुत बड़ा प्रतापी यशस्वी राज़ा, भारत को ही नहीं संपूर्ण विश्व तक विस्तारित करना उसका लक्ष्य था. उसका साम्राज्य वयं-रक्षाम का उदघोष करता.यह तथ्य किशोरावस्था में मैंने  आचार्य चतुरसेन शास्त्री के ज़रिये  जाना था. रावण के पराक्रम उसकी साम्राज्य व्यवस्था को. 
ये अलग बात है कि उन दिनों मुझमें उतनी सियासी व्यवस्था की समझ न थी. पर एक सवाल सदा खुद  पूछता रहा- क्या वज़ह थी कि राम ने रावण को मारा ? 
राम  को हम भारतीय जो  आध्यात्मिक धार्मिक भाव से देखते हैं  राम को मैने कभी भी एक राजा के रूप में आम भारतीय की तरह मन में नहीं बसाया. मुझे उनका करुणानिधान स्वरूप ही पसंद है. किंतु जो अधिसंख्यक आबादी के लिये जो करुण



दशहरा है,शक्ति की साधना का पर्व 

ललित गर्ग

दशहरा-विजयदशमी हिन्दुओं का एक प्रमुख त्योहार है.आश्विन शुक्ल दशमी को यह त्योहार बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है.यह त्योहार भारतीय संस्कृति में वीरता का पूजक, शौर्य का उपासक प्रतीक पर्व है.व्यक्ति और समाज के रक्त में वीरता प्रकट हो, इसलिए दशहरे का उत्सव रखा गया है.भगवान राम ने इसी दिन रावण का वध किया था.इसे असत्य पर सत्य की विजय के रूप में मनाया जाता है.इसीलिए इस दशमी को विजयादशमी के नाम से जाना जाता है.यह केवल भौतिक आकर्षण का ही नहीं है बल्कि प्रेरणा से जुड़ा पर्व है.भारत के लगभग सभी भागों में इस पर्व को एक महान् उत्सव के रूप में मनाया जाता है.


दशहरा बुराइयों से संघर्ष का प्रतीक है, आज भी अंधेरों से संघर्ष करने



स्वामी सानंद का गंगा स्वप्न,सरकार और समाज

अरुण तिवारी

20 जुलाई, 1932 को जन्मे प्रो. गुरुदास अग्रवाल जी ने 11 अक्तूबर, 2018 को अपनी देहयात्रा पूरी की. वह पश्चिमी उत्तर प्रदेश के ज़िला मुजफ्फरनगर के कांधला में जन्मे. उत्तराखण्ड के ज़िला ऋषिकेश के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान  में उन्होने अंतिम सांस ली. 

उनकी एक पहचान जी डी के रूप में है और एक स्वामी श्री ज्ञानस्वरूप सानंद के रूप में. गंगा की अविरलता के अपने संघर्ष को धार देने के लिए उन्होने शारदापीठ एवम् ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य श्री स्वरूपानंद सरस्वती जी के शिष्य प्रतिनिधि स्वामी श्री अविमुक्तेश्वरानंद जी से दी़क्षा ली और एक सन्यासी के रूप में उनका नया नामकरण हुआ - स्वामी श्री ज्ञानस्वरूप सानंद. 



भूख एक लाइलाज बीमारी

हेमेन्द्र क्षीरसागर

 विचारणीय: कोई खां-खां के मरता है तो भूख रहकर यह दंतकथा प्रचलित होने के साथ फलीभूत भी है. ये दोनों ही हालात में भूख को लाइलाज बीमारी बनाने में कोई कोर कसर नहीं छोड रहे है. लिहाजा, भूख और कुपोषण एक सिक्के के दो पहलु हैं जहां तक कुपोषण की बात करे तो कुपोषण एक बुरा पोषण होता हैं. इसका संबंध आवश्यकता से अधिक हो या कम किवां अनुचित प्रकार का भोजन, जिसका शरीर पर कुप्रभाव पडता हैं. वहीं बच्चों में कुपोषण के बहुत सारे लक्षण होते है, जिनमें से अधिकांश गरीबी, भूखमरी और कमजोर पोषण से संबंधित हैं. ऐसे बच्चे अपनी पढाई निरंतर जारी नहीं रख पाते और गरीबी के दोषपूर्ण चक्र में फंस जाते हेैं. कुपोषण का प्रभाव प्रौढावस्था तक अपनी जड



मी टू की आवाज को सुनें

ललित गर्ग

इनदिनों देश में नारी शक्ति की प्रतीक समझी जाने वाली देवी मां दुर्गा की उपासना हो रही है और इसी समय नारी का एक तबका यौन शोषण के मामले पर एकजुट हो रहा है. इन्हीं यौन शोषण के मामलों को उजागर करने के लिए अमेरिका में मी टू नाम से शुरू हुआ अभियान दुनिया के अन्य देशों में होता हुआ भारत में भी हलचल पैदा कर रहा है. एक फिल्म अभिनेत्री के बयान से शुरू हुआ यह किस्सा भारत में इनदिनों सुर्खियां बना हुआ. विभिन्न क्षेत्रों से जुड़ी स्त्रियां अपने साथ हुए यौन अत्याचार के ब्योरे दे रही हैं और कुछेक मामलों में दोषी को समाज से बहिष्कृत करने या उसे सजा देने की मांग भी कर रही हैं. इस तरह फिल्म, टीवी, मॉडलिंग, पत्रकारिता और साहित्य से लेक



Mind Over Matter   

पलपलइंडिया

Rajiv Sardana. Mind Over Matter (MOM) is a term which is usually used to signify the capacity of our mind to achieve miraculous results. Statistics give evidences of the power of the human mind to achieve what seems impossible. Modern day stress is now linked to the leading causes of death like heart diseases, cancer, lung ailments, cirrhosis of the liver and suicide.
It is important to understand that mind and body are inter-connected. Human mind power can move mountains. Lord Buddha mentions that Our Mind is Everything, What You Think, You Become. It is therefore, very important to empower the mind regularly with positive side of life. One must begin each day differently and learn to enjoy the present moment and move on in life, without looking back. One must not get bogged down in life when we face health problems (physical or mind related). If you put yourself down, down is where you will stay. Keep in mind that healing is an inside job and one must avoid negative brooding harmful self-talk and unhappy memories. Keep in mind that Almighty has given us a strong will to achieve the unachievable and we should learn to unleash this Divine Power.
When it is discovered that we or our loved one, or a close friend is diagnosed with some chronic ailment, then the first impression which gets registered in the mind is  Its all over’ or I am finished or Now, how will I get cured and so on. These negative triggers / impressions weaken the immune system and create impediments in road to



दिल नहीं दिमाग से करें मतदान

हेमेन्द्र क्षीरसागर

भारत दुनिया का सबसे बडा लोकतांत्रिक देश है, देश की लोकतांत्रिक प्रणाली को विश्व में बडे सम्मान, स्वंछच्दता के साथ देखा जाता हैं. इस महान लोकतांत्रिक पंरपरा के महायज्ञ का आगाज चुनाव आयोग ने कर दिया. दौर में पांच राज्यों में सम्पन्न होना हैं, जिसमें सभी मतदाताओं को अपनी मतदान रूपी आहुती देना है. पुण्य स्वरूप हमारा लोकतंत्र और अधिक मजबूत, सर्वस्पर्शी बनेगा. मतदान से ही अपने जनप्रतिनिधी को चुनेगें, वह जनप्रतिनिधी प्रदेशों की नई सरकारों का गठन करेगें. नई सरकारों से हमारी बहुत सारी आशाऐं, अपेक्षाऐं, जरूरतें जुडी हुई हैं. यह सरकारें प्रदेश के विकास, जनकल्याण और देश की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण हैं. आखिर यह सब संभव



गठबंधन की राह में रोड़ा बनते छोटे दल

सुरेश हिन्दुस्तानी

देश में 2019 में होने वाले लोकसभा चुनावों के लिए बनने वाले विपक्षी गठबंधन के प्रयासों में हर बार कोई न कोई राजनीतिक दल दरार पैदा कर रहा है. विशेषकर छोटे राजनीतिक दलों की महत्वाकांक्षाओं ने प्रस्तावित गठबंधन की राह में बहुत बड़ा पेच खड़ा कर दिया है. एक प्रकार से देखा जाए तो इस राजनीतिक गठबंधन की दिशा में कांग्रेस पर कोई भी दल विश्वास नहीं कर रहा. जब क्षेत्रीय दल कांग्रेस को अविश्वसनीयता की श्रेणी में रखकर व्यवहार कर रहे हैं, तब कांग्रेस को भी अपनी राजनीतिक हैसियत का अंदाजा लगा लेना चाहिए. कांग्रेस के बारे में इस प्रकार की राजनीतिक धारणा बनती जा रही है कि कांग्रेस को अपनी स्थिति सुधारने के लिए छोटे दलों का मुंह ताक



अलग मन मिजाज वाली मीडिया की उम्मीद ही क्यों कर रहे हैं आप ?

सुरेंद्र किशोर

आज न सिर्फ एक नेता दूसरे को चोर,कुत्ता और नीच 
कह रहा है,बल्कि एक टी.वी.एंकर दूसरे एंकर को गुंडा भी कह रहा है.
साठ के दशक से राजनीति व मीडिया को देख-समझ रहा हूं.राजनीति की शब्दावली में भले पहले  इतनी नीचता  न थी,पर मीडिया को तो हर दम बंटा हुआ ही देखा.
बिहार के जेपी आंदोलन के दौरान मीडिया बंटा हुआ था.
बोफर्स प्रकरण के दौरान भी वही हाल था.आपातकाल तो अपवाद था.उस समय तो सब धान साढ़े बाइस पसेरी था.
याद कीजिए साठ -सत्तर के दशक को और बंबई के ब्लिट्ज और करंट के तेवर को.दोनों साप्ताहिक टैबलाॅइड.
  एक घोर वामपंथी तो दूसरा घनघोर दक्षिणपंथी.
वह भी शीत युद्ध के जमाने में.
एक चिग्घाड़ता था तो दूसरा फु



विवादित बयानों की राजनीति बन्द हो

ललित गर्ग

दिल्ली के मुख्यमंत्री का गाय को लेकर दिया गया विवादित बयान अत्यन्त निराशाजनक, अमर्यादित एवं भड़काऊ है. दो दिन पूर्व उनकी ओर से लखनऊ में शुक्रवार को देर रात हुए विवेक तिवारी हत्याकांड को मजहबी रंग देने वाले बयान को भी उचित नहीं माना जा सकता, इस बयान में पुलिसकर्मियों की गोली के शिकार हुए एप्पल के एरिया मैंनेजर को हिन्दू बताते हुए उन्होंने धार्मिक बयानबाजी कर उसे राजनीतिक रंग देने की कोशिश की है. इस तरह आक्रामक भाषा का प्रयोग उनके लिये कोई नई बात नहीं हैं. लेकिन ऐसे भड़काऊ एवं अशिष्ट बयानों से देश में अराजकता का माहौल निर्मित होता है. धार्मिक भावनाएं भड़काकर किसी धर्म विशेष के लोगों को अपने पक्ष में करने की कोशि



Aadhar: Are we the Marked Surveillance Peoples?

पलपलइंडिया

Bhagyashree Pande. The Supreme Court in its forward looking judgement few days back barred the private entities and govt from using the data on Aadhar for any other purpose but to give subsidies and other social scheme benefits. The judgement is indeed important but its applicability is for tommorow. But what happens today with all the data that has been already furnished to these entities ? The urban Indian was hastily forced by the govt violating the Supreme Court order of 2015 to link Aadhar with bank account, as also telephone services like JIO made it compulsory to furnish Aadhar to get sim cards etc. So today can the data that has been furnished be used against us ? It is not a surprise that telephone data is used to monitor our conversation, our bank data can be used by bankers for selling it to private individuals for other purposes. The govt can itself use the data to track the movement of political rivals, monitor citizens who have contrary opinion on various issues etc. So we coming gradually under surveillance and repression by the govt? This is not just the authors opinion  there is enough evidence in the thought process of the present govt. It was during the UPA govt when the Aadhar project was actually launched the BJP had made an accusation of surveillance. None other than the present National Security Advisor (NSA) Ajit Doval who has been a Spy in an interview  in 2009 had stated  with this system, people can be located anywhere because all databases will be connected. He further stated tha



क्यों मुद्दा गौण हो जाता है और राजनीति बड़ी? 

डाँ नीलम महेंद्र

देर आयद दुरुस्त आयद !

सुप्रीम कोर्ट के हाल के फैसलों से-देश का-आम आदमी कुछ बातें सोचने के लिए मजबूर हो गया-है. आईये समझते-हैं कैसे ? इसे समझने के लिए कोर्ट के कुछ ताज़ा फैसलों पर एक नज़र डालते हैं ,

1. सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की पीठ ने 4:1 के बहुमत से सबरीमाला मन्दिर में हर उम्र की स्त्री को प्रवेश का अधिकार देकर सालों पुरानी धार्मिक प्रथा का अंत कर दिया है. लेकिन बेंच में शामिल एकमात्र महिला जज जस्टिस इंदु मल्होत्रा ने पाबंदी का समर्थन करते हुए कहा कि धार्मिक रीति रिवाजों में कोर्ट को दखल नहीं देना चाहिए.

2. इससे दो दिन पहले राम मंदिर मुकदमे पर सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय पीठ ने 2:1 के बहुमत से अपना ताजा फैसल



पीएम नरेन्द्र मोदी की टीम ने राहुल गांधी को बनाया प्रमुख राष्ट्रीय नेता?

प्रदीप द्विवेदी

कांग्रेस और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को पीएम नरेन्द्र मोदी की टीम का आभारी होना चाहिए, जिसने वर्ष 2014 में कांग्रेस की नाकामयाबी के बावजूद कभी कांग्रेस और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को पॉलिटिकल फोकस से बाहर होने नहीं दिया? सोचो, वर्ष 2014 के आम चुनाव में पीएम मोदी की टीम ने जो वादे किए थे, वो पूरे कर देते? जो सपने दिखाए थे वो साकार कर देते? तो, राहुल गांधी की बोलती बंद हो जाती.

राहुल गांधी को जितनी घेरने की कोशिश की गई? जितना अज्ञानी साबित करने का प्रयास हुआ? जितना अपरिपक्व घोषित किया गया? उसका नतीजा यह रहा कि जनता ने राहुल गांधी पर की गई नकारात्मक टिप्पणियों पर ध्यान देना बंद कर दिया.
राहुल गांधी के सियासी



वर्जनाओं के विरुद्ध खड़े : सोच और शरीर

गिरीश बिल्लोरे “मुकुल”

लाइफ़-स्टाइल में बदलाव से ज़िंदगियों में सबसे पहले आधार-भूत परिवर्तन की आहट के साथ कुछ ऐसे बदलावों की आहट सुनाई दे रही है जिससे सामाजिक व्यवस्था में आमूल-चूल परिवर्तन अवश्यंभावी है. कभी लगता था मुझे भी  कि सामाजिक-तानेबाने के परम्परागत स्वरूप को आसानी से बदल न सकेगा . किंतु पिछले दस बरसों में जिस तेजी से सामाजिक सोच में बदलाव आ रहे हैं उससे तो लग रहा कि बदलाव बेहद निकट हैं शायद अगले पांच बरस में... कदाचित उससे भी पहले .कारण यह कि अब जीवन को कैसे जियें ? सवाल नहीं हैं अब तो सवाल यह है कि जीवन का प्रबंधन कैसे किया जाए. कैसे जियें के सवाल का हल सामाजिक-वर्जनाओं को ध्यान रखते हुए खोजा जाता है जबकि जीवन के प्रबंधन



महिलाओं को भी बदलना होगा अपना दृष्टिकोण 

डाँ नीलम महेंद्र

अभी हाल ही में सोशल मीडिया पर एक वीडियो जिसका शीर्षक था, रन लाइक अ गर्ल  अर्थात एक लड़की की तरह दौड़ो, काफी सराहा गया जिसमें 16- 28 साल तक की लड़कियों या फिर इसी उम्र के लड़कों से जब लड़कियों की तरह  दौड़ने के लिए कहा गया तो लड़के तो छोड़िए लड़कियाँ भी अपने हाथों और पैरों से अजीब अजीब तरह के ऐक्शन करते हुए दौड़ने लगीं. कुल मिलाकर यह बात सामने आई कि उनके अनुसार लड़कियों की तरह दौड़ने का मतलब कुछ अजीब तरीके से  दौड़ना होता है. लेकिन जब एक पाँच साल की बच्ची से पूछा गया कि अगर तुमसे कहा जाए कि लड़कियों की तरह दौड़ कर दिखाओ तो तुम कैसे दौड़ोगी? तो उसका बहुत ही सुन्दर जवाब था, अपनी पूरी ताकत और जोश के साथ  .
मतलब साफ़ है कि एक पांच साल की



सौदे की तथ्यात्मक सच्चाई ही बचा सकती है मोदी पर भरोसा...

प्रकाश भटनागर

अब इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि यूपीए सरकार के दौरान रफाएल को लेकर भारत और फ्रांस के बीच गोपनीयता को लेकर कोई समझौता हुआ था.अगर फ्रांस के पूर्व राष्टपति फ्रांस्वा ओलांद ने कहा है कि करोड़ों डालर के रफाएल सौदे में अनिल अंबानी को भारत सरकार ने आफसेट पार्टनर के तौर पर फ्रांस पर थोपा था.तो भारत के वर्तमान प्रधानमंत्री को इस सौदे की सारी सचाई देश के सामने रखने में कहां से कोई अड़चन आ सकती है? हां, अगर भूतपूर्व होकर ही उन्हें भी अपने दामन पर लगे दागों की सफाई करनी है तो बात अलग है.हालांकि ओलांदे के बयान के बाद फ्रांस और भारत सरकार की इस मामले पर सफाई भी आ गई है.खुद ओलांदे को भी कहना पड़ा कि मीडिया ने उन्हें गलत तरीके से प



भाजपा के बागी अड़े, कांग्रेस के शांत हुए, अब 8 विधानसभा में 114 उम्मीदवार चुनाव मैदान में

अमित शाह का एमपी में तूफानी दौरा 15 से, 7 दिनों में 25 जिलों में लेंगे सभाएं, जबलपुर को छूकर निकलेंगे

अभिमनोजः सिद्धान्तों की नहीं, सत्ता की जंग जारी है एनडीए में?

कमलनाथ ने संघ के सामने घुटने टेके, पार्टी लाइन के बाहर जाकर की संघ की तारीफ

चुनावी चकल्लस.. माननीयों सबको बताओ धन कैसे बढ़ता है..!

अभिमनोजः प्रादेशिक चुनाव में, बगावत हाय-हाय! वंशवाद जिन्दाबाद?

राजस्‍थान में भाजपा विधायक और मंत्री सुरेंद्र गोयल ने पार्टी से दिया इस्‍तीफा

छत्तीसगढ़ चुनाव: नक्सलवाद से जीता लोकतंत्र, पहले चरण में 70 प्रतिशत मतदान

प्रदीप द्विवेदीः पीएम-सीएम उम्मीदवार को चुनाव लड़वाने की सियासी परंपरा बंद होनी चाहिए?

छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव: दोपहर 3 बजे तक 47.18 फीसदी वोटिंग

अभिमनोजः पीएम नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में यह कैसा गठबंधन?

INDORE: कैलाश विजयवर्गीय के घर में बगावत, बेटे के खिलाफ दामाद मैदान में

रोड नहीं तो तो वोट नहीं, ग्रामीणों ने लगाया बोर्ड, प्रत्याशी टेंशन में

चुनावी चकल्लस...किस-किस को समझाएं कि हम यही के है

सीएम शिवराज को एक और झटका, भतीजा भी हुआ कांग्रेस में शामिल

प्रदीप द्विवेदीः अच्छे दिन भी आएंगे, जब मोदी-राजे जाएंगे!

तेलंगाना में BJP ने जारी किया घोषणा-पत्र, हर साल एक लाख गाय मुफ्त बांटने का वादा

बागियों ने बढ़ाई भाजपा-कांग्रेस की टेंशन

किसानों के ऋण माफी घोषणा से कांग्रेस के पक्ष में गांवों में लहर

चुनावी चकल्लस.. भैया मान तो जाएंगे, पर....!

नक्सलवाद में क्रांति देखने वाली पार्टी छत्तीसगढ़ का भला नहीं कर सकती: अमित शाह

राहुल गांधी ने चारामा में भरी हुंकार, कहा – आउटसोर्सिंग बंद कर देंगे युवाओं को रोजगार

चुनाव आयोग ने एग्जिट पोल दिखाने पर 12 नवंबर से 7 दिसंबर तक लगाई पाबंदी

अभिमनोजः एमपी सहित पांच प्रादेशिक चुनाव, एक और सर्वे का आनंद लें!

एमपी में अब प्रचार की बारी, पीएम मोदी का तूफानी दौरा 16 से, 25 को आएंगे जबलपुर

भाजपा मीडिया सेंटर मीडिया के साथ संपर्क और संवाद स्थापित करेगा: राकेश सिंह

भाजपा के आठ प्रत्याशियों ने एक साथ भरा नामांकन, निकाली रैली

राहुल बोले- छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार बनी तो किसानों का पूरा कर्ज होगा माफ

चुनावी चकल्लस.. एक को मनाओ, दस हो रहे खफा..!

छत्तीसगढ़: PM मोदी के हमशक्ल कांग्रेस के लिए करेंगे प्रचार,बोले 'अच्छे दिन नहीं आएंगे'

लोकसभा चुनाव 2019: एनडीए के खिलाफ लॉबिंग तेज, देवगौड़ा से मिले चंद्रबाबू नायडू

अभिमनोजः भाजपा को जीतना है तो सिद्धान्त नहीं चलेंगे एमपी में?

प्रदीप द्विवेदीः पीएम नरेन्द्र मोदी काहे माफी मांगे, भाई?

अभिमनोजः हर उपचुनाव का नतीजा कुछ कहता है!

प्रदीप द्विवेदीः भाजपा के लिए चेतावनी हैं कर्नाटक उपचुनाव के नतीजे!

भाजपा में बढ़ा अतर्कलह, बागियों की धमकी से प्रत्याशियों का बढ़ा टेंशन

प्रदीप द्विवेदीः वे जाएंगे बुलेट ट्रेन से, हम बसों में धक्के खाएं?

चुनावी चकल्लस.. इतना सन्नाटा क्यों छाया है भाई...

पीसीसी सचिव जैनेन्द्र ने कहा- पीएम मोदी और सीएम राजे याद किए जाएंगे झूठे वादों के लिए!

चुनावी चकल्लस.. तूम रूठे रहो, मैं मनाता रहूं...

अभिमनोज: क्या शिवराजसिंह चौतरफा घिर रहे हैं?

केंडीडेट्स थानों के लगा रहे चक्कर, पता कर रहे अपना क्राइम रिकॉर्ड

मध्यप्रदेश में अब हाइजेक का दौर शुरू !

प्रदीप द्विवेदीः भाजपा ही नहीं, क्षेत्रीय दलों के लिए भी सियासी खतरा बन रही है कांग्रेस?

चुनावी चकल्लस.. आसमान से टपके खजूर में अटके..

एमपी में बीजेपी को जबर्दस्त झटका, शिवराज का साला कांग्रेस में शामिल

बीजेपी में टिकट वितरण पर बवाल, इंदू तिवारी के खिलाफ भाजपाई हुए एकजुट, पार्टी छोड़ऩे की धमकी

प्रदीप द्विवेदीः संघ ने चाहा तो राजनाथ सिंह होंगे अगले प्रधानमंत्री!

प्रदीप द्विवेदी: राजनीति का संदर्भ ग्रंथ है- लोकतंत्र का स्पंदन!

BJP ने जारी की मिजोरम के 24 और तेलंगाना के 28 उम्मीदवारों की सूची

भाजपा की लिस्ट में जबलपुर के मंत्री, पूर्व मंत्री की टिकट रुकी, टेंशन बढ़ा

4 राज्यों के विधायकों की संपत्ति के बराबर है इस कांग्रेस विधायक की दौलत

प्रदीप द्विवेदीः सर्वे का सार- कप्तान की सेंचुरी के बावजूद राजस्थान में भाजपाई टीम हार रही है?

छत्तीसगढ़: कांग्रेस ने जारी की उम्मीदवारों की आखिरी लिस्ट, रेणु जोगी का टिकट कटा

SSKP में शामिल हुए कथावाचक देवकीनंदन, MP की सभी सीटों पर चुनाव लड़ेंगे

प्रदीप द्विवेदीः आम चुनाव 2019 से पहले ही भाजपा की हार शुरू?

चुनावी चकल्लस.. विधायक जी का पारा है गरम...

राजस्थान प्रदेश काग्रेस सचिव बामनिया बोले- भाजपा को वापसी का भरोसा नहीं!

प्रदीप द्विवेदीः नेहरू-पटेल जैसी कहानी तो भाजपा में भी है?

नजरियाः राजस्थान, मिजोरम को छोड़ अन्य तीन राज्यों में अंतिम समय में तय होगी जीत-हार!

चुनावी चकल्लस....मैडम ने फंसा दिया पेंच, मुश्किल में है भईया

मालवीया का बड़ा सवाल- क्या हुआ पीएम मोदी के 2014 के चुनावी वादों का?

चुनावी चकल्लस....फूटने लगे पटाखे, मनाया गया टिकट मिलने का जश्र

अभिमनोजः वंशवाद से इतनी परेशान क्यों है पीएम मोदी टीम?

31 अक्टूबर को कांग्रेस के सभी प्रत्याशियों की घोषणा होगी: कमलनाथ

चुनाव प्रचार के कारण फेसबुक ने बंद किए 43 अकाउंट और 68 पेज

प्रदीप द्विवेदीः ज्योतिषों से जान रहे हैं- क्या है चुनावी भविष्य? और कैसे चुनाव जीतेंगे?

मनोज तिवारी को नहीं मिली सभा की अनुमति, बोले- जानबूझकर किया जा रहा है डिस्टर्ब

बड़वानी में अमित शाह बोले- कांग्रेस में रहकर भी बीजेपी का प्रचार करते हैं राहुल

"नहीं करूंगा मतदान"





बंपर वोटिंग जारी, अब तक पश्चिम बंगाल में 48 और यूपी में 36 फीसदी मतदान


योग शिविरों को न बनाएं राजनीतिक मंच: चुनाव आयोग


सबको पेंशन, दवा और घर देगी काँग्रेस, घोषणापत्र जारी


राजस्थान में खिलेगा कमल, मुरझाएगा पंजा, चुनावी सर्वे का दावा


प्राकृतिक आपदा में राहत देने से नहीं रोकती चुनाव आचार संहिता, भोपाल में बोले मुख्य चुनाव आयुक्त


चुनावी सर्वे में शिवराज ने लगाई हैटट्रिक


अब इलेक्शन नॉमिनेशन फॉर्म में बताना होगा सोशल मीडिया एकाउंट


हरियाणावासी नहीं, कैदी बनाएंगे चौटाला को सीएम : बीरेंद्र सिंह


सोशल मीडिया पर चुनाव प्रचार का खर्च भी उम्मीदवार के खर्च में जुड़ेगा


अफवाहों में बट रहा टिकट, उम्मीदवारों ने पार्टी मुख्यालय में डाला डेरा


बढी भाजपा-कांग्रेस की मुश्किलें


छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनावों के पहले चरण का नामांकन शुक्रवार से


सरताज सहित तीन मंत्रियों के नाम रोके


भाजपा लगी मोदी की छवि सुधारने में, 50 देशों के दूतावास को भेजा न्यौता


चुनाव के लिए तैयार रहे कांग्रेस