Loading...
राफेल पर कालिख पोतने का असफल प्रयास

ललित गर्ग

सर्वोच्च न्यायालय के इतिहास में गुरुवार का दिन उल्लेखनीय कहा जायेगा क्योंकि इसने इस दिन सबसे अहम मसला भारतीय वायुसेना के लिए खरीदे गये 36 लड़ाकू राफेल विमानों में भ्रष्टाचार होने के आरोप का फैसला करके वह धुंध छांटी है जो भाजपा सरकार पर बेईमानी एवं भ्रष्ट होने के आरोप को लेकर भारतीय राजनैतिक वातावरण में अर्से से छायी हुई थी. राफेल सौदे की जांच की मांग करने वाली पुनर्विचार याचिका खारिज कर सर्वोच्च न्यायालय ने इस सौदे में बोफोर्स सौदे जैसा कुछ खोज निकालने के शातिर, गैरजिम्मेदाराना एवं विध्वंसात्मक इरादों पर तो पानी फेरा ही, छल-कपट की राजनीति को भी बेनकाब किया. कांग्रेस न जाने क्यों मानसिक दुर्बलता की शिकार ह



राजनीतिक गुस्से का प्रतिशोध प्रतिमाओं से क्यों?

अजय बोकिल

राजनीतिक आक्रोश या हताशा का प्रतिशोध महापुरूषों  की प्रतिमाओं से लेना नई बात नहीं हैं, लेकिन देश की राजधानी नई दिल्ली में प्रतिष्ठित जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी (जेएनयू) में स्थापित स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा को तोड़े जाने का कोई औचित्य समझ नहीं आता. क्योंकि विवेकानंद न तो किसी पार्टी के संस्थापक या प्रचारक थे, न ही आज के सियासी  आग्रह-दुराग्रहों से उनका कोई लेना-देना था. वे तो इस देश में पुनर्जागरण के अग्रदूत थे. उनकी मूर्ति को खंडित करके हम किस बौद्धिकता का संदेश देना चाहते हैं, समझ से परे है. अपनी विचारधाराअों और मान्यातअों के अनुरूप सभी को प्रतिमाएं लगाने और पूजने का हक है, लेकिन जड़बुद्धि होकर किसी



खुशहाल बचपन हमारी सोच का संकल्प बने

ललित गर्ग

आजाद भारत के प्रथम प्रधानमन्त्री पंडित जवाहरलाल नेहरु के जन्मदिवस 14 नवम्बर को बाल दिवस के रूप में मनाया जाता है, हममें से कई लोग सोचते हैं कि बाल दिवस को इतने उत्साह या बड़े स्तर पर मनाने की क्या जरूरत है. परन्तु आज देश का बचपन जिस बड़े पैमाने पर दबाव, हिंसा, शोषण का शिकार है, बाल दिवस मनाते हुए हमें बचपन की विडम्बनाओं एवं विसंगतियों से जुड़ी त्रासदियों को समाप्त करना चाहिए. ऐसा इसलिये भी जरूरी है कि बच्चों को देश का भविष्य माना जाता है. यदि सात दशक तक बाल दिवस मनाते एवं बच्चों के उन्नत भविष्य बनाने का संकल्प दोहराते हुए बीत गया फिर भी बच्चों के खिलाफ होने वाले अत्याचारों और शोषण के विरुद्ध हमने कोई सार्थक वातावरण



सत्ता के समीकरण बनाने में पवार का कोई सानी नहीं!

संजय राय

महाराष्ट्र में सत्ता के समीकरण जमाने और बिगाड़ने में शरद पवार का कोई सानी नहीं है. इस खेल में उन्होंने बड़े -बड़े दिग्गजों को किनारे लगाया है और इसी का परिचय इस बार भी दिया.  विधानसभा चुनावों में अपने भाषणों में पवार कहते थे अभी मैं बूढा नहीं हुआ हूँ ,कुछ लोगों को अब भी सत्ता से बाहर घर बिठाने का मादा रखता हूँ.  उस समय उनके विरोधी सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी के नेता भले ही उनकी बातों को हलके में ले रहे थे लेकिन प्रदेश में चुनाव परिणाम के बाद बीस दिन तक चला सत्ता बनाने के इस संग्राम को देखें तो हर सूत्र शरद पवार से जुड़ा ही नजर आया. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उनके सहयोगी भले ही चुनाव प्रचार में यह कहते रहे की शर



बीएचयू में मुस्लिम प्रोफेसर की नियुक्ति संकीर्णतावादी सोच पर चोट है...

अजय बोकिल

भारत कभी हिंदू राष्ट्र बनेगा या नहीं, कहना मुश्किल है, लेकिन संकीर्णतावादी सोच से तो नहीं ही बनेगा यह तय है. मामला बनारस हिंदू ‍विश्वविद्यालय (जिसे आम तौर बीएचयू कहा जाता है) का है. वि‍वि के प्रतिष्ठित संस्कृत विद्या एवं धर्म विज्ञान संकाय ( एसवीडीवी) में एक मुस्लिम फिरोज खान की असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर ‍नियुक्ति का है. इस नियुक्ति के बाद संकाय के छात्रों ने नियुक्तियों में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए विवि के कुलपति के घर पर धरना दे दिया. उनकी मांग है कि मुस्लिम प्रत्याशी फिरोज खान की नियुक्ति निरस्त की जाए. विरोध कर रहे छात्रों  का कहना है ‍िक यह प्रदर्शन बीएचयू के संस्थापक मदन मोहन मालवीय के मूल्यों की



इतिहास के नये अध्याय का स्वागत हो

ललित गर्ग

अयोध्या में राजनीतिक रूप से अति संवेदनशील श्रीराम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के 5 जजों की संविधान पीठ ने सर्वसम्मति यानी 5-0 से ऐतिहासिक फैसला सुनाया. अदालत ने अपने फैसले में विवादित जगह को रामलला का बताया. साथ ही कोर्ट ने कहा कि सुन्नी वक्फ बोर्ड को मस्जिद निर्माण के लिए वैकल्पिक जमीन दी जाए. इस तरह 40 दिन की लगातार सुनवाई के बाद पांच सौ वर्षांे से चले आ रहे इस विवाद से संबंधित सभी पहलुओं का बारीकी से विचार हुआ एवं निर्णय लिया गया है. सभी पक्षों के द्वारा अपने-अपने दृष्टिकोण से रखे हुए तर्कों का मूल्यांकन हुआ. धैर्यपूर्वक इस दीर्घ मंथन को चलाकर सत्य व न्याय को उजागर करने वाले इस फैसले का न केवल



क्या विपक्षी दलों की एकता साकार होगी?

ललित गर्ग

महाराष्ट्र और हरियाणा के चुनाव परिणामों के बाद राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी एकता के लिये एक सकारात्मक वातावरण बनता हुआ दिखाई दे रहा है. इन चुनावों से पहले तक राजनीतिक परिवेश में विपक्ष के सशक्त एवं प्रभावी होने की संभावनाओं पर सन्नाटा पसरा हुआ था. विगत 4 नवम्बर को राजधानी में 13 विभिन्न राजनीतिक दलों  की संयुक्त बैठक हुई. जिसमें इन दो राज्यों के चुनाव परिणामों पर चर्चा के दौरान यह बात सामने आई कि मतदाताओं का भाजपा को लेकर मुड एवं मन बदल रहा है, यह बदलाव विपक्षी दलों के भविष्य की राजनीति के लिये नवीन संभावनाओं का द्योतक हैं. नवीन बन रही स्थितियां जहां विपक्षी दलों के लिये खुशी का सबब है, वहीं भाजपा के लिये चिन्ता



क्या वाकई आउटगोइंग मुख्यमंत्री साबित होंगे देवेंद्र फडणवीस?

अभिमनोज

महाराष्ट्र में जिस तरह से सियासत ने करवट बदली है, उसका अंदाज मोदी-शाह की बीजेपी को नहीं रहा होगा? बीजेपी, शिवसेना को कच्चा खिलाड़ी मान कर चल रही थी, लेकिन गुजरते समय के साथ शिवसेना ने यह साबित कर दिया कि वह सियासी चतुराई के मामले में बीजेपी से उन्नीस नहीं है?
यही वजह है कि उद्धव ठाकरे ने सीएम फडणवीस के बयान पर नाराजगी जताई थी और कहा गया था कि- भाजपा यूज एंड थ्रो की पॉलिसी पर चल रही है!
इधर खबर है कि..... महाराष्ट्र में सरकार बनाने को लेकर जारी सियासी रस्साकशी के बीच शिवसेना ने देवेंद्र फडणवीस पर निशाना साधते हुए उन्हें आउटगोइंग मुख्यमंत्री करार दिया?
याद रहे, शिवसेना और बीजेपी करीब तीन दशक से एक-दूजे की सहयोगी



क्या राज्यों में चुनाव प्रचार का राष्ट्रीय मॉडल फेल हो गया ?

संजय राय

महाराष्ट्र के चुनावों में भारतीय जनता पार्टी ने भले ही सीट जीतने में 100 का आंकड़ा पार कर लिया है लेकिन चुनाव जीतने का मोदी मॉडल  यंहा एक बार फिर फेल हो गया है. किसी भी राज्य में चुनाव के दौरान स्थानीय समस्याओं और मुद्दे से दूर हटाकर चुनाव प्रचार को राष्ट्रीय स्तर के मुद्दों या राष्ट्रवाद से जोड़ने का जो मोदी मॉडल  है वह चला नहीं. प्रचार का यह  मोदी मॉडल  पहली बार बिहार विधानसभा के चुनावों में फेल हुआ था. उस चुनाव प्रचार में भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने चुनाव प्रचार को पाकिस्तान ,मांस कारोबार ( पिंक रेवोल्यूशन ) आदि पर केंद्रित कर दिया था ,लिहाजा लालू प्



सोशल मीडिया पर एके-47 खरीदना आसान

हेमेन्द्र क्षीरसागर

पहले रोटी, कपड़ा और मकान हमारी मूलभूत जरूरतें थी. फिर इसमें पढ़ाई, दवाई और कमाई जुड़ी. बाद में आर-पार, व्यापार, समाचार, संचार और दूरसंचार  शामिल हुआ. सिलसिले में कंप्यूटर, इंटरनेट और मोबाइल के मकड़जाल से कर लो दुनिया मुट्ठी में नामक सोशल मीडिया का जन्म हुआ. जो बड़े काम की और कमाल का तुंतुरा साबित हुआ. घंटों के काम मिनटों में निपटकर सोहलते और मोहलतें बढ़ने लगी. आंखों देखा हाल सात समुंदर पार दिखाई देने लगे. आभास हुआ कि सोशल मीडिया के जीवाश्म इंटरनेट, मोबाइल, व्हाट्सएप, फेसबुक टि्वटर, इंस्टाग्राम, यूट्यूब, टिक टॉक और ईमेल आदि-इत्यादि के बिना जीवन अधूरा है. वाकई में इनमें ऐसी खूबियां भी बेशुमार है. जिससे जनजीवन में अ



सरकार का ऐलान,आदिवासियों के घर अब नहीं आएगा कोई सुक्खी लाला...

मनोज कुमार

उत्सव का अर्थ होता है अपनों के साथ अपनी खुशियां बांटना. उत्सव का अर्थ होता है दूसरों की जिंदगी को रोशन कर देना. उत्सव का अर्थ यह भी होता है हाशिये पर खड़े लोगों को गले लगाना और उनकी चिंता को अपनी चिंता बनाना. उत्सव का यह खुशनुमा चेहरा शायद आप पहली बार देख रहे होंगे. एक नवम्बर को मध्यप्रदेश अपना 64वां स्थापना दिवस सेलिब्रेट करे और इस दिन को गोंडी जनजाति की संस्कृति और साहित्य के नाम कर दे लेकिन जिनसे मध्यप्रदेश की पहचान है, उन आदिवासी परिवारों की चिंता की शुरूआत स्वाधीनता दिवस पर ही शुरू हो गई थी. बीते 15 अगस्त का दिन उन हजारों-हजार आदिवासी परिवारों के लिए सचमुच आजादी का दिन था जब सरकार ने ऐलान कर दिया था कि अब कोई सु



शिवसेना के दावे में दम, लिखित में होना ही चाहिए सीएम बनाने का समझौता!

प्रदीप द्विवेदी

महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद शिवसेना के नवनिर्वाचित विधायकों की मातोश्री में उद्धव ठाकरे से मुलाकात के दौरान  फैसला किया गया कि.... जिस तरह अमित शाह ने लोकसभा चुनावों से पहले 50-50 फार्मूले का वादा किया था, उसी प्रकार दोनों सहयोगी दलों, भाजपा और शिवसेना को 2.5-2.5 वर्षों के लिए सरकार चलाने का मौका मिलना चाहिए?
खबर है कि.... शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे का कहना है कि हमें बीजेपी से लिखित में यह आश्वासन चाहिए!
याद रहे, बीजेपी-शिवसेना गठबंधन को महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में बहुमत तो मिल गया है, लेकिन सत्ता किसकी होगी? इसका निर्णय अभी नहीं हुआ है!
खबर यह भी है कि.... शिवसेना के टिकट पर सिल्लोड से जी



भाजपा के लिये चुनौती भी और चिन्ता भी 

ललित गर्ग

हरियाणा और महाराष्ट्र के चुनाव नतीजे अनुमान के विपरीत आए हैं.भाजपा को पूरा विश्वास था और मतदान पश्चात के सर्वेक्षण भी बता रहे थे कि दोनों राज्यों में भाजपा को ऐतिहासिक जीत हासिल होंगी, यह भाजपा का अहंकार था या विश्वास.भले ही दोनों ही प्रांतों में सत्ता विरोधी लहर नजर नहीं आयी हो, लेकिन जो आधी अधूरी जीत हासिल हुई है उसका कारण सामने सशक्त विपक्षी दलों एवं उम्मीदवारों का अभाव ही कहा जायेगा.यह एक संकेत या चेतावनी है भाजपा के लिये.चंद माह पहले लोकसभा चुनावों में भाजपा ने नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और अमित शाह के कुशल चुनावी नेतृत्व में देश के अन्य अनेक हिस्सों के साथ महाराष्ट्र और हरियाणा में भी शानदार जीत हासिल क



पांच पर्वों का संगम है दीपावली

ललित गर्ग

दीपावली पांच पर्वों का अनूठा त्योहार है. इसमें धनतेरस, नरक चतुर्दशी, दीपावली, गोवर्धन पूजा और यमद्वितीया आदि मनाए जाते हैं. दीपावली की रात्रि को महानिशीथ के नाम से जाना जाता है. इस रात्रि में कई प्रकार के तंत्र-मंत्र से महालक्ष्मी की पूजा-अर्चना कर पूरे साल के लिए सुख-समृद्धि और धन लाभ की कामना की जाती है. यद्यपि लोक मानस में दीपावली एक धार्मिक एवं सांस्कृतिक पर्व के रूप में अपनी व्यापकता सिद्ध कर चुका है. फिर भी यह तो मानना ही होगा कि भगवान श्रीराम,  भगवान महावीर, स्वामी दयानन्द सरस्वती आदि ऐतिहासिक महापुरुषों के घटना प्रसंगों से इस पर्व की महत्ता जुड़ी है, वे अध्यात्म जगत के शिखर पुरुष थे. इस दृष्टि से दीपाव



भारतीय बाजार से लुप्त हो जाएंगे अखबार ?

प्रो.संजय द्विवेदी

 दुनिया के तमाम प्रगतिशील देशों से सूचनाएं मिल रही हैं कि प्रिंट मीडिया पर संकट के बादल हैं. यहां तक कहा जा रहा है कि बहुत जल्द अखबार लुप्त हो जाएंगे. वर्ष 2008 में जे. गोमेज की किताब प्रिंट इज डेड इसी अवधारणा पर बल देती है. इस किताब के बारे में लाइब्रेरी रिव्यू में एंटोनी चिथम ने लिखा,यह किताब उन सब लोगों के लिए वेकअप काल की तरह है, जो प्रिंट मीडिया में हैं किंतु उन्हें यह पता ही नहीं कि इंटरनेट के द्वारा डिजिटल दुनिया किस तरह की बन रही है.  बावजूद इसके क्या खतरा इतना बड़ा है. क्या भारतीय बाजार में वही घटनाएं दोहराई जाएंगी, जो अमरीका और पश्चिमी देशों में घटित हो चुकी हैं. इन्हीं दिनों में भारत में कई अखबारों के बंद



समाज महिलाओं की प्रतिभा को उचित सम्मान दे

डाँ नीलम महेंद्र

समय निरंतर बदलता रहता है, उसके साथ समाज भी बदलता है और सभ्यता भी विकसित होती है.लेकिन समय की इस यात्रा में अगर उस समाज की सोच नहीं बदलती तो वक्त ठहर सा जाता है. 

1901 में जब नोबल पुरस्कारों की शुरुआत होती है और 118 सालों बाद  2019 में जब  नोबल पुरस्कार विजेताओं के नामों की घोषणा होती है तो कहने को इस दौरान 118 सालों का लंबा समय बीत चुका होता है लेकिन महसूस कुछ ऐसा होता है कि जैसे वक्त थम सा गया हो.

क्योंकि 2019 इक्कीसवीं सदी का वो दौर है जब विश्व भर की महिलाएं डॉक्टर इंजीनियर प्रोफेसर पायलट वैज्ञानिक से लेकर हर क्षेत्र में अपना योगदान दे रही हैं.  यहाँ तक कि हाल ही के भारत के महत्वकांक्षी चंद्रयान 2 मिशन का नेतृत्व



पीसी भाई का मतलब पब्लिक कनेक्टिंग लीडर

मनोज कुमार

एक राजनेता और एक जननेता में फर्क देखना हो तो आपको मध्यप्रदेश के उस लीडर से मिलना होगा, जिसे लोग अपना कहते हैं. उनके नाम के साथ उनका कोई पदनाम या उपनाम नहीं लगाया जाता है. सारे लोग नाम के साथ भाई का संबोधन देते हैं. उनके बारे में लोगों का मानना है कि ऐसा सहज और संवाद स्थापित करने वाला नेता अर्से बाद प्रदेश को मिला है. निश्चित रूप से यह उनकी तारीफ नहीं है बल्कि यह उनके तासीर की बात की जा रही है.आप शायद अनुमान लगा रहे होंगे या कह रहे होंगे.. अरे ये तो पीसी भाई के बारे में बात हो रही है. आप पी.सी. शर्मा को तो बेहतर जानते होंगे लेकिन प्रकाश चंद्र शर्मा से आपका परिचय नहीं है. हो भी नहीं सकता है क्योंकि उनकी पहचान पीसी भाई के रूप



भूख की लाइलाज बीमारी का उपचार

हेमेन्द्र क्षीरसागर

अन्न खाये मन भर छोड़ेना कन भर. अब मंदातों के कारण उलट अन्न खाये कन भर छोड़ो मन भर हो गया. विभीषिका, कोई खां-खां के मरता है तो भूख रहकर यह दंतकथा प्रचलित होने के साथ फलीभूत भी है. ये दोनों ही हालात में भूख को लाइलाज बीमारी बनाने में मददगार है. लिहाजा, भूख और कुपोषण एक सिक्के के दो पहलु हैं. जहां तक कुपोषण की बात करे तो कुपोषण एक बुरा पोषण होता हैं. इसका संबंध आवश्यकता से अधिक हो या कम किवां अनुचित प्रकार का भोजन, जिसका शरीर पर कुप्रभाव पडता हैं. वहीं बच्चों में कुपोषण के बहुत सारे लक्षण होते है.  जिनमें से अधिकांश अज्ञानता, गरीबी, भूखमरी और कमजोर पोषण से संबंधित हैं. 
       दुर्भाग्य जनक, गिरफ्त आऐ बच्चे



प्रकृति ही देगी प्लास्टिक का हल

डाँ नीलम महेंद्र

आदमी भी क्या अनोखा जीव है, उलझनें अपनी बनाकर आप ही फंसता है, फिर बेचैन हो जगता है और ना ही सोता है.  आज जब पूरे विश्व में प्लास्टिक के प्रबंधन को लेकर मंथन चरम पर है तो रामधारी सिंह दिनकर जी की ये पंक्तियाँ बरबस ही याद आ जाता है . वैसे तो कुछ समय पहले से विश्व के अनेक देश सिंगल यूज़ प्लास्टिक का उपयोग बंद करने की दिशा में ठोस कदम उठा चुके हैं और आने वाले कुछ सालों के अंदर केवल बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक का ही उपयोग करने का लक्ष्य बना चुके हैं. भारत इस लिस्ट में सबसे नया सदस्य है. जैसा कि लोगों को अंदेशा था, उसके विपरीत अभी भारत सरकार ने सिंगल यूज़ प्लास्टिक को कानूनी रूप से बैन नहीं किया है केवल लोगों से स्वेच्छा से इसका



हरियाणा में बीजेपी के लिए चुनौती? कांग्रेस के लिए अवसर!

अभिमनोज

हरियाणा में बीजेपी के लिए प्रादेशिक सरकार बचाने की चुनौती है, तो कांग्रेस के लिए लोकसभा की हार का सियासी बदला चुकाने का अवसर है, लेकिन यह इतना आसान भी नहीं है?
हरियाणा में विधानसभा चुनाव की घोषणा हो चुकी है. नब्बे सीटों वाली हरियाणा विधानसभा के चुनाव के लिए 21 अक्टूबर 2019 को मतदान होगा और नतीजे 24 अक्टूबर 2019 को आएंगे.
चुनावी इतिहास पर नजर डालें तो वर्ष 2014 में बीजेपी ने 47 सीटें जीतकर प्रदेश में पहली बार अपने दम पर सरकार बनाई थी और कांग्रेस को केवल 15 सीटें मिली थीं, जबकि आईएनएलडी को इस चुनाव में 19 सीटें मिली थीं.
संघ की पृष्ठभूमि से आए मनोहर लाल खट्टर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने और कई सियासी विवादों के बावजूद अब तक ब



सींगों से घिरे कमलनाथ

प्रकाश भटनागर

मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह की गायों को लेकर चिंता और प्रदेश की मंत्री इमरती देवी की पुरूषों को लेकर. रविवार को मैं भोपाल से बाहर कुछ दूर तक गया था. विदिशा रोड़ पर मुझे दिग्विजय सिंह की चिंता बिछी नजर आयी. उन गायों की शक्ल में, जो जहां तक सड़क किनारे तो अधिकांश जगहों पर बीच सड़क पर ठीक बीच में बैठकर जुगाली कर रही थीं. गाय का पुल्लिंग सांड होता है. जो आदमी, औरतों के मामले में बदलचन हो जाए, उसे समाज में छुट्टा सांड भी कहा जाता है. सो इन गायों के झुंड के आसपास जहां-तहां ताक में खड़े सांड दिखे, वहां इमरती देवी की चिंता नजर आ गयी. मजे की बात यह कि सड़क किनारे कई जगह मुख्यमंत्री क



महर्षि वाल्मीकि: खगोल और ज्योतिष के प्रकांड पंडित

हेमेन्द्र क्षीरसागर

आश्विन माह में शरद पूर्णिमा के दिन महर्षि वाल्मीकि का जन्म हुआ था.वाल्मीकि वैदिक काल के महान गुरु, यथार्थवादी और चतुर्दशी ऋषि हैं.महर्षि वाल्मीकि को कई भाषाओं का ज्ञान था.संसार का पहला महाकाव्य रामायण लिखकर आदि कवि होने का गौरव पाया.वाल्मीकि ने कठोर तप के पश्चात महर्षि की पदवी हासिल की.उनके द्वारा रचित रामायण को पढ़ें तो पता चलता है कि महाग्रंथ में प्रभु श्रीराम के जीवन से जुड़े सभी महत्वपूर्ण पहलुओं के समय पर आकाश में देखी गई खगोलीय स्थितियों का विस्तृत एवं सारगर्भित उल्लेख है. यथेष्ठ, महर्षि वाल्मीकि खगोल विद्या और ज्योतिष शास्त्र के भी प्रकांड पंडित माने गए.
अवतरण, जब माता कौशल्या ने श्रीराम को जन्



विजय-उद्बोधन के विजयी स्वर 

ललित गर्ग

अस्तित्व को पहचानने, दूसरे अस्तित्वों से जुड़ने, राष्ट्रीय पहचान बनाने और अपने अस्तित्व को राष्ट्र एवं समाज के लिये उपयोगी बनाने के लिये इस वर्ष राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्थापना दिवस विजयादशमी का उत्सव एवं नागपुर में स्वयंसेवकों के बीच सरसंघचालक मोहन भागवतजी का उद्बोधन संघ के दृष्टिकोण से अवगत कराने का एक सशक्त माध्यम बना है. एक सशक्त हिन्दुत्व राष्ट्र के निर्माण में संघ की सकारात्मक भूमिका को भी प्रभावी ढ़ंग से प्रस्तुति देने के साथ-साथ यह एक दस्तक है, एक आह्वान है जिससे न केवल सशक्त हिन्दुत्वमय भारत का निर्माण होगा, बल्कि इस अनूठे काम में लगे संघ, सरकार एवं सकारात्मक शक्तियों को लेकर बनी भ्रांतियांे



रावण को बस एक दिन मरना है...

प्रकाश भटनागर

रास्तों से यहां-वहां गुजरते हुए यह इस समय का आम दृश्य है. नवरात्रि के दौरान कई जगह लोगों को रावण के पुतले का निर्माण करते देखा. लेकिन इस आम नजारे ने भी कुछ खास किस्म के विचार मन के भीतर रोंपने का काम किया है. मां के नौ पवित्र दिनों में कई श्रद्धालु जिस तरह शरीर पर ज्वार उगाते हैं उसी तरह मेरे मन के भीतर विचार उगते रहे. आज वे बड़े हो गये महसूस होते हैं. किसी इंसान के शैशव से बाहर आने के पहले लक्षण के तौर पर यह देखा जाता है कि वह बोलने लगा है. नौ दिन की अवधि में मेरे दिमाग के विचार ने भी बोलने लायक अवस्था हासिल कर ली है. वह मुझसे सतत रूप से यही कह रहा है कि उस बांस लुगदी और कपड़े आदि का क्या कसूर है जो उन्हें खींच-तान और तरोड़-मोड़



पटवारी रिश्वतखोर तो मंत्री क्या ?

हेमेन्द्र क्षीरसागर

चलिए कई दिनों बाद किसी मंत्री ने शिष्टाचार की बात कही है. सुनकर अच्छा लगा कि जनता के साथ-साथ नुमाइंदे भी व्यवस्था की व्यथा से ग्रसित है. तभी तो लगाम लगाने के लिए भ्रष्टाचार पर तंज कस रहे हैं. वह भी रिश्वत जैसी अमरबेली महामारी के हद दर्जे की आफत से कुंठित होकर. वाकई में मध्य प्रदेश के एक नामी उच्च शिक्षित मंत्री बधाई के पात्र जिन्होंने रिश्वत को रुखसत करने का साहस सुनाया. रणभेरी में भ्रष्टाचार मुक्त भारत की शुरुआत मध्य प्रदेश की सरजमीं से होने जा रही है, जिसके प्रवक्ता ये मंत्री जी बने. माननीय ने सार्वजनिक मंच से अपनी ही सरकार के अधीनस्थ सभी शासकीय पटवारियों को रिश्वतखोर बताया. 

बयान मे दम है तो स्थिति अनि



अंधविश्वास एवं जादू-टोना की क्रूरताएं कब तक?

ललित गर्ग

ओडीशा के गंजाम जिले के कुछ अंधविश्वासी लोगों ने वहां के छह बुजुर्ग व्यक्तियों के साथ जिस तरह का बर्ताव किया, उससे एक बार फिर यही पता चलता है कि हम शिक्षित होने एवं विकास के लाख दावे भले करें, लेकिन समाज के स्तर पर आज भी काफी निचले पायदान पर खड़े हैं. एक स्वस्थ समाज, स्वस्थ राष्ट्र एवं स्वस्थ जीवन के लिये जादू-टोना, अंधविश्वास, तंत्र-मंत्र और टोटकें बड़ी बाधा है. इनकी दूषित हवाओं ने भारत की चेतना को प्रदूषित ही नहीं किया बल्कि ये कहर एवं त्रासदी बनकर जन-जीवन के लिये जानलेवा भी साबित होते रहे हैं. कैसी विडम्बना है कि हम बात चाँद पर जाने की करते हैं या 5 ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था बनाने की, लेकिन हम जनजीवन को इन अंधविश्वा



शांत पंजाधारी कमलनाथ...शांत

प्रकाश भटनागर

भ्रम का शिकार हो गया हूं. मध्यप्रदेश की सरकार कमलनाथ के भरोसे हैं या भगवान के. कमलनाथ का क्या किया जाए. उन पर गुस्सा करें! तरस खायें! हंसे! या फिर इस सारे घटनाक्रम को प्रदेश के दुर्भाग्य से जोड़कर खुद का ही सिर धुन लें. हनी ट्रैप मामले पर कुंभकर्णी नींद से जागकर मुख्यमंत्री ने जिस स्वरूप का परिचय दिया है, उस पर प्रतिक्रिया के लिए न तो पर्याप्त शब्द मिल पा रहे हैं और न ही सही मनोभाव. छिंदवाड़ा, दिल्ली दरबार के बाद अब भोपाल स्थित मंत्रालय नाथ की राजनीतिक परिक्रमा का तीसरा पड़ाव बन चुका है. यहां अपने चैंबर में बैठे-बैठे नाथ पूरे प्रदेश की स्थिति पर तीखी नजर होने का भ्रम जीवित रखे हुए हैं. ठीक वैसे ही, जैसे राग दरबारी उपन्य



ऐसे ही नहीं बन जाता कोई गांधी

सुरेश हिन्दुस्तानी

भारत परंपराओं की भूमि रही है. इन पम्पराओं को जीवन में आत्मसात करने वाले व्यक्तित्वों की भी लम्बी श्रंखला है. जिन्होंने इन परम्पराओं को अपने जीवन में उतारा है, वे निश्चित रुप से महान भारत की संस्कृति को ही जीते दिखाई दिए हैं. इसी कारण वर्तमान में उनके अनुसरण कर्ता भी भारी संख्या में दिखाई देते हैं. वे नि:संदेह महान आत्मा के रुप में आज भी हमारा मार्गदर्शन करने में सक्षम हैं. इस पूरी धारणा को आत्मसात करने वाले मोहनदास भारत के साथ इस प्रकार से एक रुप हो गए थे कि वे मोहनदास से महात्मा बन गए. आज आवश्यकता इस बात की है कि हम भी महात्मा गांधी के जीवन से प्रेरणा प्राप्त करके भारत के संस्कारों के साथ तादात्म्य स्थापित कर स



महात्मा गांधी और हिंदी 

संगीता पांडेय

आजादी के आंदोलन के सबसे बड़े नेता रहे मोहनदास करमचंद गांधी भले ही स्वयं गुजराती भाषी थे, लेकिन हिंदी को लेकर उनका योगदान अतुलनीय रहा है. जब दक्षिण अफ्रीका से गांधी भारत आए तो उनका पहला आंदोलन चंपारण से शुरू हुआ. गांधीजी जब चंपारण गए तो सबसे बड़ी दिक्कत उन्हें भाषा को लेकर आई. इस मामले में कुछ स्थानीय साथियों ने उनकी मदद की, लेकिन गांधीजी ने खुद बहुत जतन से हिंदी सीखी. 
स्वतंत्रता आंदोलन में आने से पहले गांधीजी ने पूरे देश का भ्रमण किया और पाया कि हिंदी ही एकमात्र ऐसी भाषा है, जो पूरे देश को जोड़ सकती है. इसलिए उन्होंने हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाने की बात कही. आजादी के बाद जब देश का बंटवारा हुआ तो किसी विदेशी पत्रक



झारखंड विधानसभा चुनावों के लिए BJP ने जारी की तीसरी लिस्ट

झारखंड चुनाव: बीजेपी ने काटे कई मौजूदा विधायकों के टिकट

प्रदीप द्विवेदीः सहयोगियों को सियासी बोनसाई बनाने की राजनीति को महाराष्ट्र में तगड़ा झटका?

संजय राय : क्या राज्यों में चुनाव प्रचार का राष्ट्रीय मॉडल फेल हो गया ?

उपचुनाव में कांग्रेस का 12 सीटें जीतने का दावा, येदियुरप्पा को बताया सबसे कमजोर CM

पांच चरणों में होंगे झारखंड विधानसभा चुनाव, 23 दिसंबर को आएंगे नतीजे

हरियाणा सियासी सिनेमा! विक्ट्री नंबर 203?

महाराष्ट्र में 176 नवनिर्वाचित विधायकों के खिलाफ आपराधिक मामलें

प्रदीप द्विवेदीः शिवसेना के दावे में दम, लिखित में होना ही चाहिए सीएम बनाने का समझौता!

प्रकाश भटनागर : इन नतीजों से सबक ले भाजपा

हरियाणा चुनाव का मजा लें खूबड़ू के धारदार व्यंग्यचित्र से....

पल पल इंडिया ने कहा था.... हरियाणा में बीजेपी के लिए चुनौती? कांग्रेस के लिए अवसर!

फेल हुआ बीजेपी की Tik Tok स्टार सोनाली फोगाट का जादू, मिली हार

देवेंद्र फडनवीस ने नागपुर दक्षिण पश्चिम सीट जीत हैट्रिक बनायी

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव परिणाम: बीजेपी-शिवसेना गठबंधन को बहुमत, कांग्रेस पिछड़ी

परली विस चुनाव 2019 रिजल्ट: धनंजय मुंडे से हार गईं पंकजा मुंडे

अभिमनोजः तेरी-मेरी छोड़िए! एग्जिट पोल का मजा लीजिए?

महाराष्ट्र-हरियाणा में कितने बजे शुरू होगी काउंटिंग, इतने बजे तक नई सरकार की साफ होगी तस्वीर

महाराष्ट्र-हरियाणा चुनाव: शाम 5 बजे तक महाराष्ट्र में 44.61, हरियाणा में 53.70 फीसदी मतदान

हरियाणवी सिंगर सपना चौधरी उम्मीद टूट जाने के कारण निर्दलीय का साथ दिया

महाराष्‍ट्र चुनाव: 8 करोड़ 98 लाख मतदाता करेंगे 3237 उम्मीदवारों की किस्‍मत का फैसला

बारिश की वजह से अमित शाह के हेलिकॉप्टर की आपात लैंडिंग

अभिमनोजः चुनाव प्रचार का शोर तो थम जाएगा, जन समस्याओं का शोर कब थमेगा?

बारिश में भीगते हुए भाषण देते रहे शरद पवार, मानी अपनी ये गलती

महाराष्ट्र चुनाव: 288 सीटों पर 3112 उम्मीदवार आजमा रहे किस्मत, 1007 हैं करोड़पति

ललित गर्ग: महाराष्ट्र एवं हरियाणा में मतदाता जागे

महाराष्‍ट्र चुनाव: आचार संहिता के उल्‍लंघन पर वॉट्सऐप ग्रुप के 12 एडमिन को नोटिस

मेरी मां शीला दीक्षित की मौत के जिम्‍मेदार हैं पीसी चाको: संदीप

मैं मुख्यमंत्री बनूं, यह मेरी नहीं बल्कि कार्यकर्ताओं की इच्छा है: पंकजा मुंडे

अभिमनोजः एमपी उपचुनाव में पीएम मोदी नहीं आएंगे? स्टार प्रचारकों में प्रज्ञा सिंह भी नहीं!

सांसद-विधायक के परिजन को नहीं देगें टिकट, बैठक में फैसला

विधानसभा उपचुनाव: बीजेपी ने खोले अपने पत्ते, जारी की 32 उम्मीदवारों की लिस्ट

प्रदीप द्विवेदी: महाराष्ट्र-हरियाणा चुनाव.... राजस्थानियों की भी है महत्वपूर्ण भूमिका!

उप्र विधानसभा उपचुनाव के लिए कुल 31 नामांकन दाखिल

सपा के प्रत्याशी होंगे मेजर आशीष चतुर्वेदी, काटा अपर्णा यादव का टिकट

हिमाचल उपचुनावः जयराम बोले कहा-जल्द होगी प्रत्याशियों के नाम की घोषणा

भारत-पाकिस्तान विभाजन से भी भयंकर है 288 सीटों का बंटवारा: शिवसेना

कर्नाटक के हुंसुर विस उपचुनाव में पहली बार होगा एम 3 ईवीएम का उपयोग

चुनाव आयोग की प्रेस कॉन्फ्रेंस शुरू, विधानसभा चुनाव की तारीखों का होगा ऐलान

उपचुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी करिश्मा ठाकुर के खिलाफ मुकद्दमा दर्ज

मध्यप्रदेश के झाबुआ विधानसभा उपचुनाव को लेकर राजनैतिक सरगर्मियां तेज

प्रदीप द्विवेदीः इस बार गुजरात माॅडल पर नहीं, संघ के दिनरात माॅडल पर काम कर रही है पीएम मोदी सरकार!

अभिमनोजः राहुल गांधी उसी दिशा में आगे बढ़ रहे हैं, जिस दिशा में बीजेपी चाहती है?

महाराष्ट्र चुनाव के लिए कांग्रेस की तैयारियां शुरू , उम्मीदवारों के इंटरव्यू होंगे

प्रदीप द्विवेदीः चन्द्र के कारकत्व के सापेक्ष चन्द्र ग्रहण से बढ़ेगा सियासी तनाव!

अभिमनोजः कर्नाटक में कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन सरकार को कोई चमत्कार ही बचा सकता है!

प्रदीप द्विवेदीः कर्नाटक के नाटक का अंत तो तय है? लेकिन, राजस्थान में तख्ता-पलट आसान नहीं है!

अभिमनोजः अध्यक्ष के लिए नाम तो बहुत हैं, पर कौन कांग्रेस की सियासी नैय्या पार लगाएगा?

अभिमनोजः राहुल गांधी की जिद पर भरोसा करें या कांग्रेसी नेताओं की उम्मीदों पर?

प्रदीप द्विवेदीः मोदी-शाह, गांधी परिवार पर क्यों निशाना साधते रहे हैं?

प्रदीप द्विवेदी: यूपी, पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में बीजेपी को हराना मुश्किल है?

अभिमनोजः ममता बनर्जी को तब समझ में आ गया होता तो आज ऐसी अपील नहीं करनी पड़ती?

ललित गर्गः कांग्रेस पार्टी को सही दिशाओं की तलाश

अभिमनोजः वीरप्पा मोइली की बात में दम है- गठबंधन नहीं होता तो कांग्रेस फायदे में रहती?

अभिमनोजः क्या आपसी सियासी विवादों के बोझ से ही कर्नाटक में टूट जाएगा कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन?

प्रदीप द्विवेदीः कमाल है! एक राज्य, एक चुनाव तो हो नहीं पा रहे हैं और एक देश, एक चुनाव की चर्चा हो रही है?

अभिमनोजः आयाराम-गयाराम की भीड़ में खोती जा रही है बीजेपी, क्या यही सियासी उपलब्धियां हैं?

प्रदीप द्विवेदीः तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में एआईएडीएमके के लिए सत्ता बचाना मुश्किल होगा!

अमरनाथ यात्रा के बाद होंगे जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव आयोग ने कर दिया ऐलान

कर्नाटक में बीजेपी की करारी हार, कांग्रेस ने मारी बाजी- सुरजेवाला ने मोदी पर कसा तंज

अभिमनोजः छिंदवाड़ा के कारण एमपी, गुजरात-राजस्थान बनने से रह गया!

नरेंद्र मोदी दोबारा सर्वसम्मति से चुने गए एनडीए संसदीय दल के नेता

अग्निपरीक्षा में खरी उतरी ईवीएम, वीवीपैट का मिलान 100 फीसदी सही साबित हुआ

17 राज्यों में नहीं खुला कांग्रेस का खाता

मुंबई नॉर्थ सीट से उर्म‍िला मातोंडकर की करारी 'हार', ट्वीट कर EVM पर उठाए सवाल

अभिमनोजः कांग्रेसी एक-दूजे को निपटा रहे थे, जनता ने सबको निपटा दिया?

कर्नाटक में उपचुनाव का ऐलान - 5 दिसंबर को वोटिंग, 9 दिसंबर को रिजल्‍ट

झारखंड: भाजपा ने जारी की चौथी सूची, सभी 81 सीटों पर लड़ेगी चुनाव

झारखंड: तीसरे चरण के चुनाव की अधिसूचना जारी, 17 सीटों पर नामांकन शुरू

"नहीं करूंगा मतदान"





बंपर वोटिंग जारी, अब तक पश्चिम बंगाल में 48 और यूपी में 36 फीसदी मतदान


योग शिविरों को न बनाएं राजनीतिक मंच: चुनाव आयोग


सबको पेंशन, दवा और घर देगी काँग्रेस, घोषणापत्र जारी


राजस्थान में खिलेगा कमल, मुरझाएगा पंजा, चुनावी सर्वे का दावा


प्राकृतिक आपदा में राहत देने से नहीं रोकती चुनाव आचार संहिता, भोपाल में बोले मुख्य चुनाव आयुक्त


चुनावी सर्वे में शिवराज ने लगाई हैटट्रिक


अब इलेक्शन नॉमिनेशन फॉर्म में बताना होगा सोशल मीडिया एकाउंट


हरियाणावासी नहीं, कैदी बनाएंगे चौटाला को सीएम : बीरेंद्र सिंह


सोशल मीडिया पर चुनाव प्रचार का खर्च भी उम्मीदवार के खर्च में जुड़ेगा


अफवाहों में बट रहा टिकट, उम्मीदवारों ने पार्टी मुख्यालय में डाला डेरा


बढी भाजपा-कांग्रेस की मुश्किलें


छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनावों के पहले चरण का नामांकन शुक्रवार से


सरताज सहित तीन मंत्रियों के नाम रोके


भाजपा लगी मोदी की छवि सुधारने में, 50 देशों के दूतावास को भेजा न्यौता


चुनाव के लिए तैयार रहे कांग्रेस


बंपर वोटिंग जारी, अब तक पश्चिम बंगाल में 48 और यूपी में 36 फीसदी मतदान


योग शिविरों को न बनाएं राजनीतिक मंच: चुनाव आयोग


सबको पेंशन, दवा और घर देगी काँग्रेस, घोषणापत्र जारी


राजस्थान में खिलेगा कमल, मुरझाएगा पंजा, चुनावी सर्वे का दावा


प्राकृतिक आपदा में राहत देने से नहीं रोकती चुनाव आचार संहिता, भोपाल में बोले मुख्य चुनाव आयुक्त


चुनावी सर्वे में शिवराज ने लगाई हैटट्रिक


अब इलेक्शन नॉमिनेशन फॉर्म में बताना होगा सोशल मीडिया एकाउंट


हरियाणावासी नहीं, कैदी बनाएंगे चौटाला को सीएम : बीरेंद्र सिंह


सोशल मीडिया पर चुनाव प्रचार का खर्च भी उम्मीदवार के खर्च में जुड़ेगा


अफवाहों में बट रहा टिकट, उम्मीदवारों ने पार्टी मुख्यालय में डाला डेरा


बढी भाजपा-कांग्रेस की मुश्किलें


छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनावों के पहले चरण का नामांकन शुक्रवार से


सरताज सहित तीन मंत्रियों के नाम रोके


भाजपा लगी मोदी की छवि सुधारने में, 50 देशों के दूतावास को भेजा न्यौता


चुनाव के लिए तैयार रहे कांग्रेस