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भाजपा की एकल कामयाबी मुश्किल, लेकिन नामुमकिन नहीं?

प्रदीप द्विवेदी

कर्नाटक में येदियुरप्पा सरकार के इस्तीफे के बाद भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर के कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन पर जमकर निशाना साधा, लेकिन कोई नई बड़ी बात नहीं कह पाए, अलबत्ता... उन्होंने अप्रत्यक्षरूप से इस बात पर मुहर लगा दी कि शक्ति परीक्षण के दौरान कांग्रेस की सुरक्षा व्यवस्था तगड़ी थी? 
अमित शाह ने जो कुछ कहा उसका सार है...
* कर्नाटक की जनता ने कांग्रेस के खिलाफ  जनादेश दिया, कांग्रेस-जेडीएस के बीच अपवित्र गठबंध हुआ है. 
* जेडीएस भी केवल अपनी परंपरागत सीटों पर ही चुनाव जीत पाई, जबकि कांग्रेस की सीटें घटी हैं, जेडीएस को समर्थन देकर कांग्रेस ने जनता के साथ धोखा किया है.
* सबसे बड़े दल होने



रेलमपेल रेल से मेलजोल

हेमेन्द्र क्षीरसागर

भारतीय रेल हमारे आवागमन का आधार स्तंभ है.इसके बिना जीवन की परिक्रमा अधूरी रहती क्योंकि इस धूरी से उस धूरी की दूरी तय करने में लौहपथगामिनी का कोई शानी नहीं है.कश्मीर से कन्याकुमारी और कच्छ से कोहिमा तक फैले भारत वर्ष को हमारी रेल ने एक बना के रखा है.सही मायनों में यह विकसित भारत की प्रथम सीढी है.जिसपे चढकर हर कोई मंजिल पार परना चाहता है.वे किस्मत वाले जिन्हें आसानी से रेलवे   की सुविधा मुहैया होती है.इतर ऐसे बदनसीबों की भी कमी नहीं जो इंतजार में आजतक आस  लगाए बैठे है की देर सबेर ही सही रेल के हमराही बनेंगे.किन्तु घूटन भरी जिंदगानी का भ्रमण घर्षण करते-करते बीत गया बावजूद बेखबरों को असर नहीं हुआ।
  ऊहाफ



लोकतंत्र में हिंसा की संस्कृति के दाग

ललित गर्ग

भारत का लोकतंत्र दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, इसको सशक्त बनाने की बात सभी राजनैतिक दल करते हैं, सभी ऊंचे मूल्यों को स्थापित करने की, आदर्श की बातों के साथ आते हैं पर सत्ता प्राप्ति की होड़ में सभी एक ही संस्कृति-हिंसा एवं अराजकता की संस्कृति को अपना लेते हैं. मूल्यों की जगह कीमत की और मुद्दों की जगह मतों की राजनीति करने लगते हैं और इसके लिये सारे मूल्यों एवं मर्यादाओं को ताक पर रख देते हैं. ऐसा ही नजारा हाल के कर्नाटक के विधानसभा एवं पश्चिम बंगाल के पंचायत चुनावों देखने को मिला है. 
पश्चिम बंगाल के पंचायत चुनावों में हिंसा का जो तांडव हुआ उससे न केवल भारत के लोकतांत्रिक मूल्यों को गहरा आघात लगा है, बल्कि आ



कर्नाटक में सरकार के लिए फंसा पेंच 

सुरेश हिन्दुस्तानी

कर्नाटक विधानसभा चुनाव के परिणाम आ गए हैं. परिणामों ने जो तस्वीर  दिखाई है, उसमें देश में लगातार बढ़ती जा रही भाजपा सबसे बड़े राजनीतिक दल के तौर पर उभर कर आई है. इसे भाजपा के लिए दक्षिण में प्रवेश करने के लिए दरवाजा भी माना जा सकता है. हालांकि परिणामों ने त्रिशंकु विधानसभा बनाकर एक बार फिर से राजनीतिक पेंच  उत्पन्न कर दिया है. अब राज्यपाल को तय करना है कि वह किसे सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करते हैं. परिणामों के बाद राज्य में नए समीकरण बनते दिखाई दे रहे हैं, दूसरे नंबर पर रहने वाली कांग्रेस पार्टी ने देवेगौड़ा की पार्टी जनता दल सेक्युलर से हाथ मिलाने के संकेत देकर देश के राजनीतिक वातावरण में हलचल पैदा कर दी है.



ऐसे में भाजपा का जन समर्थन बढ़ेगा या घटेगा?

सुरेंद्र किशोर

26 नवंबर, 2008 को मुम्बई पर हुए आतंकी हमले पर अजीज बर्नी ने एक पुस्तक लिखी है .उसका नाम है-     26-11 आर.एस.एस.की साजिश.
उसका लोकार्पण कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने 6 दिसंबर, 2010 को दिल्ली में किया.
पुस्तक के नाम से ही स्पष्ट है कि उसमें क्या लिखा गया है.
उधर पाकिस्तान के पूर्व प्रधान मंत्री नवाज शरीफ ने पाकिस्तान के अंगेजी दैनिक डाॅन से बातचीत में कहा है कि ‘हमारे यहां हथियारबंद गुट मौजूद हैं.आप उन्हें नाॅन स्टेट एक्टर कह लें.
क्या ऐसे गुटों को बार्डर क्रास करने देना चाहिए कि वे मुम्बई जाकर डेढ़ सौ लोगों को मार दें ?
समझाएं मुझे ! हम इसी कोशिश में थे.
हम दुनिया से कट के रह गए हैं.हमारी बात नहीं सु



जनप्रतिनिधियों की सुविधाओं पर उठते सवाल

ललित गर्ग

सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश विधानसभा द्वारा पारित वह कानून निरस्त कर दिया है जिसके मुताबिक पूर्व मुख्यमंत्रियों को आजीवन सरकारी बंगले में रहने की सुविधा दी गई थी.कोर्ट का कहना है कि किसी को इस आधार पर सरकारी बंगला अलॉट नहीं किया जा सकता कि वह अतीत में किसी सार्वजनिक पद पर रह चुका है.बात केवल उत्तर प्रदेश की नहीं हैं, बात केवल सरकारी बंगले की ही नहीं है, बात जनप्रतिनिधियों को मिलने वाले वेतन, पेंशन एवं अन्य सुविधाओं की भी है.संविधान में सांसद, विधायक, विधान परिषद सदस्य, स्पीकर, डिप्टी स्पीकर, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, मंत्रियों के वेतन-भत्ते और अन्य सुविधाओं के संबंध में निर्णय लेने का अधिकार संसद, विधानस



कृषि भूमि सुधार का आधार जैविक खेती

सुरेश हिन्दुस्तानी

वर्तमान में देश में इस बात के लिए गंभीरता पूर्वक चिंतन होने लगा है कि रासायनिक खादों के चलते कृषि भूमि में जो हानिकारक बदलाव आए हैं, उसे कैसे दूर किया जाए. इस बारे में केन्द्र सरकार और राज्यों की सरकारें भी अपने स्तर पर किसानों को इस बात के लिए जागृत कर रहे हैं कि किसान जैविक पद्धति के आधार पर कृषि कार्य करें. इससे जहां भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ेगी, वहीं मानव के लिए उत्पन्न होने वाले अनाज और सब्जियों की गुणवत्ता में भी व्यापक सुधार होगा. इतना ही नहीं जैविक खेती की अच्छाइयों से प्रभावित होकर देश के कई किसान इस ओर प्रवृत्त हुए हैं और अपेक्षा के अुनसार परिणाम भी प्राप्त हो रहे हैं. यह बात सही है कि कोई भी अच्छा काम करन



कावेरी पर राजनीतिक कालिमा क्यों?

ललित गर्ग

एक बार फिर कावेरी जल बंटवारे के मसला चर्चा में है. अदालत ने जल बंटवारे के बारे में फैसला फरवरी में ही सुना दिया था. दरअसल सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार का पक्ष रखते हुए अटॉर्नी जनरल के  के. वेणुगोपाल ने कहा कि ड्राफ्ट कैबिनेट के सामने पेश किया गया है, लेकिन प्रधानमंत्री के कर्नाटक चुनाव में व्यस्त होने के कारण वह अभी तक इसे देख नहीं पाए हैं. केंद्र सरकार के इस जवाब पर सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा, ‘कर्नाटक चुनाव से हमारा कोई लेना-देना नहीं है और न ही यह हमारी चिंता है. कर्नाटक सरकार को तत्काल तमिलनाडु के लिए पानी छोड़ना होगा. कानूनी जानकार मानते हैं कि इस समस्या के समाधान के कानूनी



लोकतंत्र का वीरगाथा काल

अनूप शुक्ल

पुराने समय में जब राजा लोग युद्ध के लिये निकलते थे तो तमाम तरह के ताम-झाम के साथ निकलते थे. मेरा मतलब प्रयाण करते थे. रानियां बख्तरबंद पहनाती थीं. पंडित मंत्रोच्चार करते थे. चारण और भाट उनकी तारीफ़ के किस्से चिल्लाते हुये गाते थे. अपने-अपने राजाओं को सूर्य के समान तेजस्वी, सागर के समान विशाल हृदय वाला, चंद्रमा के समान शीतल टाइप बताते थे. जो भाट जित्ती कुशलता से अपने अन्नदाता की तारीफ़ कर सके वो उत्ता बड़ा कवि माना जाता था. जिसके दरबार में जित्ता बड़ा कवि होता था वो राजा उत्ता शूरवीर कहलाता था. राजाओं की वीरता उनके दरबारी कवियों की काबिलियत पर निर्भर करती थी.


युद्ध में एक राजा हार जाता होगा. मारा जाता होगा. एक रा



डॉ.राम मनोहर लोहिया को भारत रत्न देना चाहिए

सुरेंद्र किशोर

समाजवादी नेता डॉ. राम मनोहर लोहिया को ‘भारत रत्न’ से सम्मानित करने की मुख्य मंत्री नीतीश कुमार की मांग उचित है.हालांकि उन्हें भारत रत्न मिले या नहीं,लोहिया सचमुच भारत के रत्न ही थे.ऐसे रत्नों के बारे में कई कारणों से देश को खास कर नयी पीढ़ी को कम ही जानकारियां हैं.
न सिर्फ चरित्र की दृष्टि से बल्कि विचारों की दृष्टि से भी लोहिया महान नेता थे.
उनकी कथनी और करनी में कोई फर्क नहीं था.
एक गरीब देश के नेता लोहिया सामान्य जीवन जीते थे.
उन्होंने न तो शादी की,न घर बसाया और न कोई मकान बनाया.
वे कहते थे कि सार्वजनिक जीवन में रहने वाले लोगों को अपना परिवार खड़ा नहीं करना चाहिए.
उनके पास न तो कोई बैंक खाता



राजनीति की मंडी में नेतागिरी की बोली

हेमेन्द्र क्षीरसागर

राजनीति की पवित्रता व महानता को नकारा राजधर्म का घोर अपमान है. पर कब, जब राजनीति, नीति और जनता का राज होती है तब. नाकि जनता पे राज  की नीति. किन्तु हालातों के मद्देनजर अब, ये कहने में कोई गुरेज नहीं बचा कि तिकड़म बाजी में फसी राजनीति सत्ता पाने के अलावा और कुछ नहीं हैं. हां! बीते दौर की बात करे तो जरूर यह बात नामुराद लगती है क्योंकि जमाने में कभी राजनीति सेवा, संस्कार, अधिकार और विचार की प्रतिकार थी, आज वह मेवा, अनाचार, एकाधिकार के साथ पारिवारिक कारोबार का मजबूत आधार है. सीधे शब्दों में लूट कसोट का सरकारी जरिया या पद, मद दम और दाम वाला  नेतागिरी का ल़ाइसेंस.

    बदस्तुर, अड्डे के चौकीदार व अनकहे राजदार रूपिया-मा



कांग्रेस के गले में अटका महाभियोग प्रस्ताव

सुरेश हिन्दुस्तानी

वर्तमान में देश में जिस प्रकार की विरोधात्मक राजनीति की जा रही है, वह केवल अविश्वसनीयता के दायरे को और बड़ा करती हुई दिखाई देती है। इसको विपक्षी राजनीति करने वाले राजनीतिक दलों की नकारात्मक चिंतन की राजनीति कहा जाए तो ज्यादा ठीक होगा। विरोधी दलों के नेतृत्व करने का दिखावा करने वाली कांग्रेस पार्टी महाभियोग प्रस्ताव को लेकर अपनी किरकिरी तो करवा ही रही है, साथ ही अन्य दलों पर भी सवाल खड़े होने के संकेत मिलने लगे हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद का महाभियोग प्रस्ताव के बारे में दिया गया बयान यही इंगित करता है कि कांग्रेस की इच्छा के अनुसार सर्वोच्च न्यायालय निर्णय देती तो कांग्रेस संभवत: इस प्रस्त



नक्सलवाद को हराती सरकारी नीतियां

डाँ नीलम महेंद्र

24 अप्रैल 2017 को जब "नक्सली हमले में देश के 25 जवानों की शहादत को व्यर्थ नहीं जाने देंगे" यह वाक्य देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा था, तो देशवासियों के जहन में सेना द्वारा 2016 में  की गई सर्जिकल स्ट्राइक की यादें ताजा हो गई थीं। लेकिन नक्सलियों का कोई एक ठिकाना नहीं होना, सुरक्षा कारणों से उनका लगातार अपनी जगह बदलते रहना और सुरक्षा बलों के मुकाबले उन्हें  स्थानीय नागरिकों का अधिक सहयोग मिलना, जैसी परिस्थितियों के बावजूद ठीक एक साल बाद 22 अप्रैल 2018,को जब महाराष्ट्र के गढ़चिरौली क्षेत्र में पुलिस के सी-60 कमांडो की कारवाई में 37 नक्सली मारे जाते हैं तो यह समझना आवश्यक है कि यह कोई छोटी घटना नहीं है, यह वाकई मे



कानून से ज्यादा जरूरी है सोच का बदलना

ललित गर्ग

बाल यौन उत्पीड़न संरक्षण कानून यानी पॉक्सो में संशोधन संबंधी अध्यादेश को केंद्रीय मंत्रिमंडल और फिर राष्ट्रपति की मंजूरी मिल गई. अब बारह साल से कम उम्र की बच्चियों के साथ बलात्कार करने वालों को मौत की सजा का प्रावधान किया जा सकेगा. प्रश्न है कि अभी तक पाॅक्सो कानून ही पूरी तरह से सख्ती से जमीन पर नहीं उतरा है तो उसे और कड़ा करना क्यों जरूरी है? हमारे देश में कानून बनाना आसान है लेकिन उन कानूनों की क्रियान्विति समुचित ढं़ग से न होना, एक बड़ी विसंगति है. क्या कारण है कि पाॅक्सों कानून बनने के बावजूद एवं उसकी कठोर कानूनी स्थितियों के होने पर भी नाबालिग बच्चियों से बलात्कार की घटनाएं बढ़ रही है. पिछले दिनों उन्नाव, कठ



दुष्कर्मियों के लिए बना फांसी का फंदा

सुरेश हिन्दुस्तानी

देश में बढ़ते जा रहे दुष्कर्म मामलों के विरोध में बड़ी कार्रवाई करते हुए केन्द्र सरकार ने दोषियों को फांसी की सजा देने का अभूतपूर्व निर्णय लिया है. इसके लिए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने आपराधिक कानून संशोधन अध्यादेश 2018 को मंजूरी देकर कानून की मान्यता दे दी है. राष्ट्रपति द्वारा इस अध्यादेश की मंजूरी देने के बाद यह देश भर में लागू हो गया.

इस अध्यादेश के लागू होने के बाद दुष्कर्म करने वालों को कड़ी सजा देना संभव हो सकेगा. सवाल यह आता है कि संस्कारित भारत देश में इस प्रकार के अपराध की प्रवृति कैसे पैदा हो रही है? ऐसा वातावरण बनाने के पीछे वे कौन से कारण हैं, जिसके चलते समाज ऐसे गुनाह करने की ओर कदम बढ़ा रहा है. गंभीर



सोसायटी की हार्टबीट है पीआर 

मनोज कुमार

अंग्रेजी के पब्लिक रिलेशन को जब आप अलग अलग कर समझने की कोशिश करते हैं तो पब्लिक अर्थात जन और रिलेशन अर्थात सम्पर्क होता है जिसे हिन्दी में जनसम्पर्क कहते हैं. रिलेशन अर्थात संबंधों के बिना समाज का तानाबाना नहीं बुना जा सकता है और इस दृष्टि से पब्लिक रिलेशन का केनवास इतना बड़ा है कि लगभग सभी विधा उसके आसपास या उसमें समाहित होती हैं. पब्लिक रिलेशन को लेकर भारत में आम धारणा है कि यह एक किस्म का सरकारी का काम होता है या सरकारी नौकरी पाने का एक जरिया होता है. कुछ लोग पब्लिक रिलेशन को जर्नलिज्म से अलग कर देखते हैं. वास्तविकता यह है कि वह भारत की सोसायटी हो या दुनिया के किसी देश की सोसायटी, इन्हें जीवंत रखने के लिए जर्



बेटियों पर हो रहे अत्याचार के खिलाफ पलपल इंडिया का संकल्प अभियान

पलपलइंडिया

आज भारतीय संस्कृति का महान पर्व अक्षय तृतीया  है. आज इस महान पर्व पर हम सब संकल्प लें कि अपने घर, नगर, प्रदेश या जहाँ भी हो बेटियां रक्षा करेंगे.अपना हो या पराया, जो भी दोषी होगा, उसकी सज़ा के लिए हम मोर्चा खोलेंगे.
यह संकल्प हे समाज में व्याप्त रूढ़ियों के खिलाफ, बेटियों पर हो रहे अत्याचार के खिलाफ. अक्षय तृतीया  रूढ़ियों को तोड़ने का साहस देता है और एक नए भारत बनाने की शक्ति.
आइये हम सब साथ साथ चलते है एक संकल्प के साथ. आप सेल्फी सहित अपने सुझाव, अपने अनुभव और बदलाव के लिए जो कुछ भी किया जा सकता है. हमें मेल आईडी  palpal.editor@gmail.com पर भेज दें. हां, अपना संकल्प-पत्र भेजना ना भूलें. 



अन्ना अब लोकपाल नहीं, लोकलाज पर आवाज उठाओ

अभिमनोज

अन्ना हजारे हमारे समय की उस पीढ़ी के प्रवक्ता के रूप में मौजूद हैं जिनकी बातें लोग सुनते हंै और उस पर अमल करने की कोशिश भी करते हैं. ये वही अन्ना हजारे हैं जिनकी वजह से कांग्रेस केन्द्र की सत्ता से बेदखल हो गई.जनलोकपाल के मुद्दे पर उन्होंने ऐसा समां बांधा कि कांग्रेस सरकार के खिलाफ जनमत एकत्र हो गया.इस अभियान में अचानक से कहीं से भाजपा ने अपना स्पेस क्रिएट कर लिया और नरेन्द्र मोदी प्रधानमंत्री के रूप में स्वयं को स्थापित कर लिया.तब के प्रधानमंत्री मनमोहनसिंह का मौन रहना कांग्रेस को भारी पड़ा तो बेलाग बोलने वाले नरेन्द्र मोदी में लोगों ने बदलते भारत का सपना देखा था.इस बदलाव का श्रेय अन्ना हजारे को जाता है लेक



गोल्ड कोस्ट में भारत की चमक 

ललित गर्ग

देश पर छाई विपरीत स्थितियों की धुंध को चीरते कॉमनवेल्थ गेम्स से आती रोशनी एवं भारतीय खिलाड़ियों के जज्बे ने ऐसे उजाले को फैलाया है कि हर भारतीय का सिर गर्व से ऊंचा हो गया है. वहां से आ रही रोशनी के टुकड़े देशवासियों को प्रसन्नता का प्रकाश दे रहे हैं . संदेश दे रहे हैं कि देश का एक भी व्यक्ति अगर दृढ़ संकल्प से आगे बढ़ने की ठान ले तो वह शिखर पर पहुंच सकता है. विश्व को बौना बना सकता है. पूरे देश के निवासियों का सिर ऊंचा कर सकता है. इन दिनों अखबारों के पहले पन्ने के शीर्ष में छप रहे समाचारों से सबको लगा कि  ईक्कीसवें राष्ट्रमंडल खेलों में, कॉमनवेल्थ गेम्स में हमारे खिलाड़ियों ने जिस तरह से पदक जीते हैं, जो शारदार प्रदर्शन



संत-स्मृति पर्याप्त नहीं, संत-मार्ग पर भी चलें!

डॉ. युधिष्ठिर त्रिवेदी

संतों की स्मृति ही पर्याप्त नहीं है, संत-मार्ग पर हम चल सकें तो ही उनके सद्कार्य और हमारा जीवन सार्थक है! कर्मवीर स्वामी स्वतंत्रानंद महाराज का जीवन भी ऐसा ही प्रेरणास्पद है. उनका जन्म हुआ बिहार में, कर्मभूमि बना वागड़ तो कर्म में प्रमुख रहे... सेवा, शिक्षा, संस्कार, धर्म, वेद और यज्ञ-हवन. 
बिहार प्रांत के गया जिले में अप्रैल 1912 में पटवारी रामशरण शर्मा के घर जन्में स्वामी स्वतंत्रानंद प्रारंभ से ही शिक्षाप्रेमी थे. शिक्षा के कारण ही राष्ट्रीय चेतना उनमें बाल्यकाल से ही पैदा हो गई थी. पटना विश्वविद्यालय से वकालात पास करके जहानाबाद में वकालात का कार्य प्रारंभ किया. राष्ट्रभक्ति और आध्यात्मिक यात्रा उनको आं



भलमनसाहत प्रचार की मोहताज नहीं होती

अनूप शुक्ल

सबेरे घर के बाहर बैठे चाय पी रहे हैं. धूप निकल आई है. बढिया वाली हवा बह रही है. आसपास के कुत्ते लगातार भौंक रहे हैं. शायद कुछ संकेत देने की कोशिश कर रहे हैं. हम समझ नहीं रहे. कौन उठकर जाए बाहर देखने.

अखबार में पहले पेज पर विराट कोहली की फोटो है. सलमान खान अंदर हैं. आधा पेज पर सलमान से सम्बंधित खबरें हैं. किस्से-कहानियां, झलकियां भी. सोशल मीडिया गंजा पड़ा है सलमान खान की खबरों से. अपनी अक्ल और तरफदारी के हिसाब से लोग बयान जारी कर कर रहे हैं. मीडिया को भी एकाध दिन की तसल्ली हुई कि नया मसाला खोजना नहीं पड़ेगा.

कुछ दिन पहले सलमान खान 'हिट एंड रन' मामले में छूट भी गए थे. तब भी खूब स्टेटस बाजी हुई थी. कोई 'फुरसतिया' दोनों



क्या समाज के लिए घातक हो रहा है... सोशल मीडिया?

प्रदीप द्विवेदी

इस वक्त एक गंभीर सवाल यक्षप्रश्र बनता जा रहा है कि... क्या समाज के लिए घातक है- सोशल मीडिया?
इस दस अप्रैल को भारत बंद का आयोजन हुआ... आयोजन किसने किया? किसी को नहीं पता... न किसी संगठन ने जिम्मेदारी ली और न ही सरकार को कुछ समझ में आया... यह अपनी तरह का पहला बंद था जिसकी जिम्मेदारी किसी भी संगठन ने नहीं ली, लेकिन सोशल मीडिया पर इसकी अपील चलती रही और देश के कई हिस्सों में न केवल कामकाज ठप्प हो गया, बल्कि... हिंसक प्रदर्शन के नतीजे भी नजर आए? केन्द्र/प्रादेशिक सरकारों ने सुरक्षा के मद्देनजर भारी इंतजाम किए तो ज्यादातर ने... न हम बंद के समर्थक हैं और न ही विरोधी, कह कर पल्ला झाड़ लिया. नतीजा? देश की प्रगति का... उपयोगी कामकाज का, एक



सत्ता की तड़प और विरोधी दलों की राजनीति

सुरेश हिन्दुस्तानी

भारतीय राजनीति कब किस समय कौन सी करवट बैठेगी, यह कोई भी विशेषज्ञ अनुमान नहीं लगा सकता. अगर इसका अनुमान लगाएगा भी तो संभव है कि उसका यह अनुमान भी पूरी तरह से गलत प्रमाणित हो जाए. हमारे देश में लम्बे समय तक सत्ता पक्ष की राजनीति करने वालों राजनेताओं के लिए यह समय वास्तव में ही अवसान काल को ही इंगित कर रहा है, अवसान इसलिए, क्योंकि उनके पास अपने स्वयं के शासनकाल की कोई उपलब्धि नहीं है. अगर उनका शासन करने का तरीका सही होता तो संभवत: उन्हें इस प्रकार की स्थिति का सामना नहीं करना पड़ता.

कांग्रेस आज भले ही अपनी गलतियों को वर्तमान सरकार पर थोपने का काम करे, परंतु इस बात को कांग्रेस भी जानती है कि वह केन्द्र सरकार का विरोध



 दंगाईयों के सामने घुटने टेकती व्यवस्था

डॉ.भूपेंद्र गौतम

न्यायालयों के निर्णय भी भारत में धर्म-जाति के चश्में से देखे जाने लगे हैं.फिल्म जगत के सुप्रसिद्ध अभिनेता को मिली सजा हो या अनुसूचित जाति-जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम का दुरुपयोग रोकने का निर्णय.ऐसे अनेक निर्णयों पर सार्वजनिक प्रश्न उपस्थित किये जा रहे हैं.न्यायपालिका की साख तार-तार हो रही है.ऐसे भी अवसर देखे गये हैं जब अधीनस्थ अदालतां को छोड़िये देश की सर्वोच्च अदालत के निर्णयों की भी खुलेआम अवहेलना की गई.प्रजातन्त्र के लिए यह शुभ संकेत नहीं है.
अभी फिल्म जगत के सुप्रसिद्ध अभिनेता सलमान खान को न्यायालय द्वारा काले हिरण के शिकार के जुर्म में पाँच वर्ष की सजा सुनायी गयी.इससे पहले इन्हें ही हिट एण्ड रन



जान है तो जहान है! 

संगीता पांडेय

जान है तो जहान है.... यदि ऐसा कहा गया है तो गलत नहीं है.  क्योंकि आप कामयाबियां तभी प्राप्त कर सकते हैं , जब आपका स्वास्थ्य भी बेहतर हो.  और स्वास्थ्य आपका तभी बेहतर होगा जब आप उसका पूरा पूरा ध्यान रखेंगे.  शायद यही वजह है कि स्वास्थ्य की गंभीरता को समझते हुए पूरी दुनिया में एक ऐसा दिन तय किया गया जब एकजुट होकर सब सेहतमंद रहने का संकलप लें, वो तमाम जानकारियां हासिल करें जो उत्तम जीवन के लिए आवश्यक हैं.  और ये भी कितना सुखद है कि 7 अप्रैल का दिन चुना गया जब पूरा विश्व इस दिन को स्वास्थ्य दिवस के रूप में मानता है. उत्तम स्वास्थ्य के लिए भी जीवन में सात चीजें आवश्यक है - अच्छा मन,  अच्छा तन, अच्छे विचार , अच्छे कार्य ,



इधर चला, मैं उधर चला... 

टी के मारवाह

चुनावों की सुगबुगाहट होते ही कुछ सदैव अतृप्त आत्माएं अपने वास्तविक स्वरूप में लौट आती हैं. अचानक बुद्धि जाग्रत हो, चक्षु दाएं-बाएं थिरकने लगते हैं. 
आखिर चार साल तक चुप रह कोने में पड़े रहकर तनखा भत्तों की भरपूर चांदी काटने के अलावा होता ही क्या है? कभी-कभी पार्टी मुखिया की तरफ से साल में दो चार अवसरों पर  सामूहिक बेहतरीन सुस्वाद भोजन का आनंद मिल जाता है, वो भी तमाम नसीहतों के बाद.  बहुत ही कम ऐसे नेता होते हैं जिनकी घ्राण शक्ति यानी सूंघने की बड़ी तेज होती है. ऐसे लोग मतदान पूर्व ही स्थिति  भांप लेते हैं और अगली सरकार के गठन होने से पहले ही अपनी सशर्त मांगे मनवा अपना और अपने परिवार का भविष्य सुनिश्चित कर ल



कब खुलेंगे! हिन्दी माध्यम, विशेष स्कूल

हेमेन्द्र क्षीरसागर

कब खुलेंगे! हिन्दी माध्यम विशेष स्कूल, यह जिज्ञासा समाप्त होने के बजाय दिनानुदिन बढते ही जा रही हैं। हिन्द देश में हिन्दी की व्यथा निराली है निजी क्षेत्र तो छोडिए! सरकारी तंत्र भी हिन्दी माध्यम विशेष  स्कूल खुलाने परहेज करता है। यकीन नही तो पन्ने पलट लीजिए खुदबखुद समझ आ जाएगा कि हमारे रहनुमाओं ने कितने हिन्दी  भाषी  विशिष्ट  विद्यालय का शंखनाद किया। रवैये से तो साफ जाहिर होता है कि मूल्क में हिन्दी की तालिम की जरूरत ही नहीं है। तभी गली-मोहल्ले और गांव-कस्बों में धडल्ले से अंग्रेजी माध्यम खुलते और हिन्दी माध्यम स्कूल बंद होते जा रहे है। खासतौर पर हमारी सरकारें भी अंग्रेजियत की दीवानी होकर प्रेम में



परेशान होने का मौसम

अनूप शुक्ल

आजकल परेशान होने का मौसम है. आदमी को और कुछ आये चाहे न आये परेशान होना आना चाहिये. बिना परेशानी के गुजर नहीं. आज के समय में अगर कोई परेशान नहीं है तो समझ लो कछु गड़बड़ है.

पहले के जमाने में लोग लोग लुगाइयों से और वाइस वर्सा परेशान होकर जिन्दगी निकाल लेते थे. लेकिन आज इत्ते भर से काम नहीं चल सकता. बहुत परेशान होना पड़ता है. लोग अपने आस पास से , दुनिया जहान से परेशान होते हैं तब कहीं काम चल पाता है.

परेशान होने के लिये बहुत परेशान नहीं होना पड़ता. आपकी इच्छा शक्ति हो घर बैठे परेशान हो सकते हैं. आजकल तो हर चीज की होम डिलीवरी का चलन है तो परेशानी का काहे नहीं होगा. बैठे-बिठाये हो सकते हैं. तरह-तरह के पैकेज हैं परेशानी के.



भगवान महावीर हैं सार्वभौम धर्म के प्रणेता 

ललित गर्ग

सदियों पहले महावीर जनमे. वे जन्म से महावीर नहीं थे. उन्होंने जीवन भर अनगिनत संघर्षों को झेला, कष्टों को सहा, दुख में से सुख खोजा और गहन तप एवं साधना के बल पर सत्य तक पहुंचे, इसलिये वे हमारे लिए आदर्शों की ऊंची मीनार बन गये. उन्होंने समझ दी कि महानता कभी भौतिक पदार्थों, सुख-सुविधाओं, संकीर्ण सोच एवं स्वार्थी मनोवृत्ति से नहीं प्राप्त की जा सकती उसके लिए सच्चाई को बटोरना होता है, नैतिकता के पथ पर चलना होता है और अहिंसा की जीवन शैली अपनानी होती है. महावीर जयन्ती मनाने हुए हम केवल महावीर को पूजे ही नहीं, बल्कि उनके आदर्शों को जीने के लिये संकल्पित हो.
 भगवान महावीर की मूल शिक्षा है- ‘अहिंसा’. सबसे पहले ‘अहिंसा



कर्नाटक की RR सीट पर चुनाव टला, अब 28 मई को होगी वोटिंग

बेंगलुरू में वोटिंग के दौरान सुरक्षा सुनिश्चित करने कड़े इंतजाम

चुनाव जीतने के लिए EVM में हेराफेरी कर रही है भाजपा : शिवसेना

कर्नाटक चुनाव: जुबानी जंग खत्म, अब 12 मई को 224 सीटों पर होगा मतदान

बीजेपी कर रही अंबेडकर के शक्तिशाली और समृद्ध भारत के सपने को साकार

कर्नाटक चुनाव: बोले अमित शाह, कांग्रेस की हार पक्की और सिद्धारमैया भी हार जाएंगे

मोदी का दावा विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का कर्नाटक से हो जाएगा सफाया

बीजेपी ने ली चुटकी राहुल से कहा आखिर दिल की बात जुबां पर आ ही गई

सिद्धरमैया ने जल्दबाजी में की मोदी की तारीफ, फिर बोले सॉरी

मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के नेतृत्व में ही लड़ा जाएगा राजस्थान विधानसभा चुनाव

उपचुनाव: कैराना सीट पर तबस्सुम को टक्कर देने BJP ने मृगांका सिंह को मैदान में उतारा

सोनिया का मोदी पर हमला कहा जुमलेबाजी से जनता का पेट नहीं भरता

बिहार में 2019 में लोकसभा के साथ हो सकते हैं विधानसभा चुनाव

बीजेपी ने सोनिया को श्रीमती एंटोनियो कहकर किया व्यक्तिगत विरोध

कर्नाटक के रण में भाजपा का घोषणा पत्र जारी, महिलाओं को फ्री में मिलेंगे सोने के मंगलसूत्र

बिहार और झारखंड की खाली विधानसभा सीटों के लिए उपचुनाव का ऐलान, अचार संहिता लागू

मनमोहन सिंह की भूमिका निभाना करियर का सबसे मुश्किल रोल: अनुपम खेर

मैं नहीं, मेरी योजनाएं गेमचेंजर हैं: सीएम सिद्धारमैया

कर्नाटक विधानसभा चुनाव: निर्वाचन आयोग ने मतदान के समय को 1 घंटे बढ़ाया

महाराष्ट्र और आंध्र में 31 मई और 21 जून को होंगे चुनाव

देश में एक साथ चुनाव कराने की कवायद तेज, चुनाव आयोग की राय जानेगी सरकार

प्रदीप द्विवेदी: कितना फायदा मिलेगा कर्नाटक में एनसीपी से कांग्रेस को?

लोकसभा चुनाव 2019: तो मायावती के खिलाफ चुनाव लड़ेंगी राखी सावंत

कर्नाटक विधानसभा चुनाव पहले जेडीएस को झटका, 7 विधायकों ने थामा कांग्रेस का हाथ

नए राज्यसभा सांसदों की पूरी लिस्ट: यूपी में भाजपा का परचम, ममता की मदद से सिंघवी जीते

जयप्रकाश पाराशर: राजनीति क्या विज्ञानविरोधी है!

राज्यसभा चुनाव: सात विधायकों के साथ बीएसपी का साथ देगी कांग्रेस

प्रदीप द्विवेदी: त्रिपुरा, नागालैंड और मेघालय? न कोई जीता, न कोई हारा, सर्वत्र सत्ता विरोधी लहर!

उपचुनाव: मप्र की मुंगावली और कोलारस सीट पर कांग्रेस का कब्जा, उड़ीसा में बीजद ने मारी बाजी

छिटपुट हिंसक घटनाओं के साथ मेघालय और नगालैंड में मतदान खत्म, 3 मार्च को आएंगे नतीजे

16 राज्यों में राज्यसभा की 58 सीटों पर चुनाव की घोषणा, 23 मार्च को होगी वोटिंग

त्रिपुरा में चुनाव प्रचार थमा, क्या बीजेपी पलट पाएगी बाजी

प्रदीप द्विवेदीः 2017... 2018 और 2019 ?.. कल, आज और कल!

उपचुनाव में भाजपा ने तीन सीटों पर लहराया परचम, प्रधानमंत्री खुश

प्रदीप द्विवेदी: यदि दिसंबर 2017 में शनि अस्त नहीं होते तो चुनावी नतीजे कुछ और होते!

योगी ने गुजरात में जहां किया प्रचार वहां मिली 25 से ज्यादा सीटें

चुनाव नतीजों पर पहली बार बोले राहुल, कहा - रिजल्ट हमारे लिए अच्छा, बीजेपी को लगा झटका

गुजरात की कुछ सीटों पर रही कांटे की टक्कर,सिर्फ 200 वोटों से हुई जीत-हार

पूनावाला के समर्थकों ने प्रदर्शन कर कहा राहुल की वजह से हारे

गुजरात चुनाव में शस्त्र की तरह चले ये जुमले

सूरत में कांग्रेस को बहुत भरी पड़ा गब्बर, 12 की 12 सीट्स पर भाजपा

गुजरात चुनाव परिणाम: फिर छाया 'भगवा', बीजेपी ने अब तक 88 सीटों पर दर्ज की जीत

ट्विटर पर भी जारी है जंग

गुजरात चुनाव : विजेताओं की सूचि

चुनाव में इस बार छाये रहे औरंगजेब और ब्लूटूथ

चुनाव नतीजों का असरः शेयर बाजार में उछाल,धारक मालामाल

गिरिराज सिंह ने राहुल पर साधा निशाना- जेएनयू-केरल में बीफ पार्टी और गुजरात में जनेऊ-तिलक नहीं चलेगा

मतगणना से पहले सज रहा बीजेपी दफ्तर, जिग्नेश-अल्पेश कह रहे कमल की होगी हार

निरंजन परिहार: गुजरात से निखरी राहुल गांधी की तस्वीर और गहलोत निकले चाणक्य

गुजरात चुनाव में कौन जीतेगा पर कुत्ते ने की ये भविष्यवाणी, वायरल हुआ वीडियो

प्रदीप द्विवेदी: अब 18 दिसंबर 2017 को ही खुलेगी एग्जेट पोलपट्टी!

गुजरात चुनाव: दूसरे चरण में दोपहर डेढ़ बजे तक 44.3 फीसदी मतदान

राहुल को आयोग के नोटिस पर भड़की कांग्रेस, कहा- सबसे पहले मोदी पर दर्ज हो FIR

अभिमनोज: जीते तो लोकप्रियता हमारी! हारे तो ईवीएम की जिम्मेदारी?

प्रदीप द्विवेदी: पीएम नरेन्द्र मोदी गुजराती मतदाताओं को पहचानते हैं!

मोदी जी, गुजरात में आपको प्यार से बिना गुस्से के हराने जा रहे है: राहुल

गुजरात चुनाव: पहले चरण का मतदान जारी, 12 बजे तक 31 फीसदी वोटिंग

मणिशंकर ने पाकिस्तान जाकर मुझे रास्ते से हटाने की बात कही थी, इसका क्या मतलब था?:मोदी

प्रदीप द्विवेदी: इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन को छोड़ो, महागठबंधन की सोचो!

गुजरात में बीजेपी से छिन सकती है सत्ता, कांग्रेस से कांटे का मुकाबला: सर्वे

कर्नाटक में बड़ी संख्या में महिलाएं कर सकती हैं 'नोटा' का उपयोग

कर्नाटक चुनाव : 3 बजे तक 56 फीसद वोटिंग, पूर्व प्रधानमंत्री देवगौड़ा ने किया मतदान

कर्नाटक एग्जिट पोल: त्रिशुंक विधानसभा के आसार, जेडीएस बन सकता है किंगमेकर

कर्नाटक चुनाव: वोटिंग खत्म, 64 प्रतिशत हुए मतदान

जेडीएस बनेगी किंगमेकर, देवगौड़ा ने दिए गठबंधन के संकेत

शुरू हुआ पॉलिटिकल ड्रामा, येदियुरप्पा ने कहा कांग्रेस कर रही जानदेश का अपमान

प्रदीप द्विवेदी: कर्नाटक में नाटक? कानून-न-कायदा, सत्ता मिल जाए तो फायदा!

"नहीं करूंगा मतदान"





बंपर वोटिंग जारी, अब तक पश्चिम बंगाल में 48 और यूपी में 36 फीसदी मतदान


योग शिविरों को न बनाएं राजनीतिक मंच: चुनाव आयोग


सबको पेंशन, दवा और घर देगी काँग्रेस, घोषणापत्र जारी


राजस्थान में खिलेगा कमल, मुरझाएगा पंजा, चुनावी सर्वे का दावा


प्राकृतिक आपदा में राहत देने से नहीं रोकती चुनाव आचार संहिता, भोपाल में बोले मुख्य चुनाव आयुक्त


चुनावी सर्वे में शिवराज ने लगाई हैटट्रिक


अब इलेक्शन नॉमिनेशन फॉर्म में बताना होगा सोशल मीडिया एकाउंट


हरियाणावासी नहीं, कैदी बनाएंगे चौटाला को सीएम : बीरेंद्र सिंह


सोशल मीडिया पर चुनाव प्रचार का खर्च भी उम्मीदवार के खर्च में जुड़ेगा


अफवाहों में बट रहा टिकट, उम्मीदवारों ने पार्टी मुख्यालय में डाला डेरा


बढी भाजपा-कांग्रेस की मुश्किलें


छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनावों के पहले चरण का नामांकन शुक्रवार से


सरताज सहित तीन मंत्रियों के नाम रोके


भाजपा लगी मोदी की छवि सुधारने में, 50 देशों के दूतावास को भेजा न्यौता


चुनाव के लिए तैयार रहे कांग्रेस