सारा देश  भारत छोड़ो आंदोलन  की 75 वीं सालगिरह मना रहा है। इस मौके पर हम उन महान स्वतंत्रता सेनानियों का पुण्य स्मरण कर रहे हैं, जिनकी कुर्बानियों की बदौलत देश आजाद हुआ। साथ ही हम स्मरण करते हैं देश के उन महान सपूतों का, जिन्होंने आजाद भारत को आधुनिक भारत और खुशहाल भारत बनाने के लिए अपने आप को समर्पित कर दिया। इस परिपेक्ष्य में हम बड़ी षिद्दत से स्वर्गीय  राजीव गांधी को याद करते है, जिन्होंने अतीत की धरोहर और भविष्य की संभावनाओं के उत्तराधिकारी के रूप में भारतीय राजनीति में प्रवेश किया।  राजीव गांधी ऐसी शख्सियत थे, जिन्होंने एक जननेता और प्रधानमंत्री के रूप में देश को विकास के पथ पर ले जाकर अंतर्राष्ट्रीय क्षितिज पर नई पहचान दिलाई। राजीव गांधीजी ने जो संकल्प लिया, उससे तेज गति से उस पर काम भी किया।

राजीव गांधी के व्यक्तित्व में परंपरा और आधुनिकता का मणिकांचन योग था। उनका संपूर्ण जीवन सत्यम् शिवम् सुंदरम् का मूर्तिमान रूप था। राजीव गांधी एक सच्चे लोकतंत्रवादी थे, एक ऐसे व्यक्ति थे जो सदा नये विचारों और रचनात्मक आलोचनाओं का स्वागत करते थे। एक सांसद, प्रधानमंत्री, कांग्रेस अध्यक्ष एवं नेताप्रतिपक्ष के रूप में उन्होंने जो भी भूमिका निभाई, सभी में अपनी कार्यकुशलता के उत्कृष्ट मानक स्थापित किये। राजीव गांधी ने विपरीत परिस्थितियों में प्रधानमंत्री के पद का दायित्व संभाला। उस समय के जटिल हालातों को जिस धीरता, दृढ़ता और विवेकशीलता से उन्होंने काबू किया उससे सभी विस्मय विमुख हो गये। राजीवजी ने दल-बदल कानून लाकर राजनीति में फैली “आया राम, गया राम“ की बीमारी पर लगाम लगाई एवं राजनीति में शुचिता को विशेष महत्व दिया। राजीव जी ने कभी भी बदले या द्वेश की भावना की राजनीति नहीं की। द्वेश शब्द तो उनकी डिक्शनरी में था ही नहीं। श्रीलंका में गार्ड आॅफ आनर निरीक्षण के दौरान जिस सैनिक ने उन पर प्राणघातक हमला किया, उसके प्रति भी उन्होंने द्वेश नहीं रखा। राजीव जी ने संसदीय लोकतंत्र की गरिमा को नये आयाम दिये। राजीव जी अपनी दूरदृष्टि और अदम्य साहस के द्वारा मजबूत एवं खुशहाल भारत के निर्माण के लिए दृढ़संकल्पि रहे और इसीलिए उन्हें आधुनिक भारत के शिल्पकार के रूप में जाना जाता है। 

राजीव जी के मन में गरीबों के प्रति सच्ची हमदर्दी थी और वे एक ऐसे समाज की स्थापना के लिए आतुर थे जिसमें सब बराबरी के साथ अपनी जिन्दगी जियें और स्वाभिमान के साथ अपना गुजर-बसर कर सकें। वे गरीब की झोपड़ी में एक ऐसा भारत देखना चाहते थे, जिसमें खुशहाली की इबारत लिखी हो। सार्वजनिक जीवन में प्रवेश के बाद चूंकि उन्होंने देश के विभिन्न स्थानों-खासकर ग्रामीण इलाकों का अनवरत् दौरा किया था, फलस्वरूप भारत के गांव, उन्हें भारत की आत्मा नजर आते थे। महात्मा गांधी द्वारा परिकल्पित “ग्राम स्वराज” राजीव गांधी की प्राथमिकताओं में शामिल था। उन्होंने नहिं दरिद्र कोउ़ दुखी न दीना’ की भावना के अनुरूप रामराज्य को साकार रूप देने का संकल्प लिया था। वे चाहते थे कि गांव के विकास का पैसा सीधे गांव की पंचायतों तक पहुंचे और गांव में विकास की दिषा ग्रामवासी मिलजुल कर तय करें। देश में पंचायती राज व्यवस्था कायम करने के लिए उन्होंने संविधान में 73वां संशोधन कराया, जो आज भी गांवों के विकास में मील के पत्थर के माफिक है।

स्वर्गीय राजीव गांधीजी का मानना था कि प्रत्येक विकासशील समाज में कुछ आंतरिक समस्यायें होती हैं, जिनका हल केवल शिक्षा के माध्यम से समाज को जाग्रत कर किया जा सकता है। हमारी शिक्षा ऐसी होना चाहिए जो समाज में व्याप्त अन्धविश्वास हटाने, समाज में एक-दूसरे के प्रति सहनषीलता बढ़ाने एवं समाज में राष्ट्रीय मनोभावों को जगाने का काम करे। राजीवजी ने नई षिक्षा नीति लागू की और उसमें टेक्नोलाजी का समुचित समावेष कर देष में नई जागृति लाने का काम किया। 

स्वर्गीय राजीव गांधी भारत में सूचना प्रौद्योगिकी के प्रथम सूत्रधार थे। आज जिस डिजीटल इंडिया की बात पूरे देश में हो रही है, उसकी आधारशिला  राजीव गांधी ने ही रखी है। उन्होंने संचारक्रांति का शंखनाद किया और वे देश में कम्प्यूटर क्रांति के जनक बने। राजीव जी का विश्वास था कि भारत का भविष्य विज्ञान और प्रौद्योगिकी में निहित है। राजीव जी उच्च तकनीक को गरीबी उन्मूलन के कार्यक्रम के उपकरण के रूप में मानते थे। उनकी सोच में उस उन्नतशील भारत की तस्वीर थी, जिसे सूचना प्रौद्योगिकी के द्वारा ही संवारा जा सकता था। विकसित कहे जाने वाले राष्ट्रों तक ने हमारी टेक्नालाॅजी को न केवल स्वीकार किया बल्कि उसकी उच्च गुणवत्ता को विश्व स्तर पर सराहा गया। इसके अलावा उन्होंने जैव प्रौद्योगिकी, परमाणु ऊर्जा, पर्यावरण आदि क्षेत्रों में नये कार्यक्रमों को बढ़ावा दिया तथा पेयजल, खाद्यान्न, दूरसंचार, कृषि और औद्योगिक क्षेत्रों में भी प्रगति हेतु विभिन्न टेक्नोलाजी मिशन गठित किए।

स्वर्गीय राजीव गांधी का मानना था कि किसान हमारे देश की रीढ़ हैं और खेती-किसानी की तरक्की के बिना देश की तरक्की संभव नहीं है। राजीवजी ने सातवी पंचवर्षीय योजनाओं में कृषि में ज्यादा पूंजीनिवेश का इंतजाम किया। कृषि में उत्पादकता बढ़ाने के लिए जल संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल पर जोर दिया और इसी का परिणाम था कि उनके प्रधानमंत्रित्व कार्यकाल में खाद्यान्नों का रिकार्ड उत्पादन हुआ। राजीव जी ने हरितक्रांति की समीक्षा की और यह पाया कि हरितक्रांति से गेंहू का उत्पादन तो काफी बढ़ा है, परंतु तिलहन और दलहन के क्षेत्र में कोई अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है। इसलिए उन्होंने तिलहन का उत्पादन बढ़ाने के लिए तिलहन टेक्नोलाजी मिशन बनाया तथा दलहन के लिए राष्ट्रीय परियोजना शुरू की। 

राजीव गांधी पर्यावरण, प्रदूषण तथा मानव सभ्यता पर इसके घातक प्रभाव की समस्या से बहुत चिंतित रहते थे। उन्होंने वन एवं पर्यावरण के संरक्षण के लिए मजबूत कदम उठाये। राजीव गांधी जी का मानना था कि पर्यावरण संरक्षण और विकास की अवधारणा में संतुलन आवष्यक रूप से होना चाहिए। उन्होंने केन्द्रीय गंगा विकास प्राधिकरण की स्थापना कर गंगा नदी की सफाई का अभियान शुरू किया। राजीव जी ने अपरंपरागत ऊर्जा स्त्रोतों के दोहन को वरीयता दी एवं बायोगैस के प्रयोगों को बढ़ावा दिया।

सांप्रदायिकता के खिलाफ राजीवजी की दृष्टि और दिशा दोनों बहुत स्पष्ट थी। राजीव जी ने लगातार फिरकापरस्त ताकतों, घृणा, आतंकवाद, अषिक्षा एवं गरीबी के खिलाफ संघर्ष किया। धर्म निरपेक्षता के पक्षधर राजीव गांधी अहिंसा, सौहार्द और शांति के अग्रदूत थे। राजीव गांधी कौमी एकता और सद्भाव को देश की सांस्कृतिक अस्मिता और गौरवशाली विरासत की धुरी मानते थे। वे जाति, धर्म और सम्प्रदाय के संकीर्ण दायरे से देश को उबारना चाहते थे। उनका प्रयास था कि भारत पारस्परिक सद्भावना का एक ऐसा गुलदस्ता बने जो नवनिर्माण के साथ विकास की मंजिल की ओर निरन्तर बढ़ता रहे। 

राजीव जी हमेशा कांग्रेस संगठन की मजबूती और विस्तार को उच्च प्राथमिकता देते थे। जनता से सीधा संवाद और संगठन की मजबूती ही उनका मिषन था। राजीव जी कांग्रेस को जन-आंदोलन के रूप में देखना चाहते थे। राजीव जी ने कहा था - “हमें गरीबों और वंचित वर्गो के अधिकारों के लिए लड़ने की अपनी परंपराओं को पुनः जीवित करना है। ऐसा करके ही हम अपने सपनों का भारत बनाने की ताकत प्राप्त कर सकेंगे।“ 

राजीव जी ने कहा था , कांग्रेस भारत की विविधता का दर्पण है। यह भारत की अनेकता में एकता का प्रतिनिधित्व करती है। कांग्रेस जाति, धर्म, भाषा और क्षेत्र का फर्क किये बिना सभी भारतवासियों का सम्मान करती है। कांग्रेस ही ऐसी राजनैतिक पार्टी है जो यह मानती है कि सामाजिक एकता के बिना देष का विकास संभव नहीं है। आपस में बँटा हुआ भारत न तो प्रगति कर सकता है और न ही समृद्ध हो सकता है।

स्वर्गीय राजीव गांधी एक ऐसे भागीरथ थे, जो विकास गंगा की अविरल धारा को हिमालय से लेकर कन्याकुमारी तक ले जाना चाहते थे। जीवन की अंतिम सांस तक वे इस संकल्प को पूरा करने में लगे रहे। अपने निष्कलंक सार्वजनिक व राजनैतिक जीवन में उन्होंने जिस भी भूमिका का निर्वहन किया, पूरी तन्मयता से किया और इसीलिए उन्होंने देश  के जनमानस में सर्वप्रिय जननेता की उत्कृष्ट व अमिट छाप छोड़ी।  राजीव गांधी की स्मृति बनाए रखना सिर्फ एक रस्म नहीं, बल्कि उस सपने का भी सम्मान होगा, जो उन्होंने नवीन, सक्षम और समृद्ध भारत के लिए देखा था। ऐसे युग पुरूष का जीवन, उनकी शहादत और स्मृतियां देश के लिए प्रेरणा का स्त्रोत बनी रहेंगी। 


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