‘अच्छे को बुरा साबित करना, दुनिया की पुरानी आदत है’ वर्तमान राजनीतिक वातावरण को देखते हुए यह आसानी से कहा जा सकता है कि आज यह गाना कांग्रेस  के लिए सटीक लग रहा है। कांग्रेस  के नेता संदीप दीक्षित ने सेना प्रमुख के बारे में जिस प्रकार की टिप्पणी की है, उससे ऐसा लगने लगा है कि कांग्रेस  जिस प्रकार से विनाश की ओर कदम बढ़ा रही है, उसी प्रकार उसके नेताओं की बुद्धि भी विपरीत होती जा रही है। देश में जो अच्छा हो रहा है, उसे गलत ठहराने की कांगे्रस में परम्परा सी बनती जा रही है। 
कांग्रेस  ने हिन्दुओं के लिए मां का दर्जा रखने वाली गौमाता को सरेआम काटकर उसका राक्षसी रुप से भक्षण किया और आज कांग्रेस  के नेता भारत माता की रक्षा में तत्पर रहने वाले सेना प्रमुख को सड़क का गुंडा जैसी उपाधि प्रदान कर रहे हैं। कांग्रेस  के ऐसे कारनामों को देखते हुए यही कहा जा सकता है कि या तो उसके नेताओं को इतना ज्ञान नहीं है कि देश का मान बढ़ाने वाली भाषा कौन सी है या फिर कांगे्रस के नेता सोची समझाी साजिश के तहत इस प्रकार के बयान दे रहे हैं। हालांकि इन बयानों के बाद देश में कांग्रेस  की खिल्ली उड़ने के बाद वे माफी मांगने को तैयार हो जाते हैं। कोई बताता है तब ही कांग्रेस  को अपने नेताओं द्वारा कही गई बात गलत लगती है। कांगे्रस के नेता अगर बोलने से पहले अपने विवेक का इस्तेमाल करें तो संभवत: इस प्रकार की गलती नहीं होगी।
कांग्रेस  के नेताओं के इन बयानों के पीछे केवल राजनीतिक प्रचार पाने का की साजिश दिखाई देती है। राजनीतिक दलों के नेता अपना नाम सुर्खियों में लाने के लिए ऐसे बयान पहले भी देते रहे हैं। कांग्रेस  के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह वह बयान शायद ही कोई भूला होगा, जिसमें उन्होंने आतंकवादियों के लिए सम्मानित भाषा का प्रयोग किया था। इसी प्रकार कई बड़े नेताओं ने भी ऐसी भाषा बोलकर देश का माहौल खराब करने का प्रयास किया। इन नेताओं को समझना चाहिए कि आज देश की जनता बहुत समझदार हो गई है। राजनेताओं की ओर प्रतिक्रिया भले ही न आए, लेकिन जनता की ओर से तत्काल प्रतिक्रिया दी जाने लगी है। संदीप दीक्षित के बयान और केरल में की गई कांग्रेस  की गौहत्या वाली कार्यवाही की पूरे देश ने प्रतिक्रिया दी। जिसके कारण कांग्रेस  के नेताओं ने अपने किए पर माफी भी मांगी।

 


अब सवाल यह उठता है कि मुंह से शब्द निकालने के बाद ही कांग्रेस  के नेताओं को होश क्यों आता है। इसका जवाब यही है कि कांगे्रस देश की जनता के मिजाज को अभी तक नहीं समझ पा रही है। लोकसभा चुनाव में भारी पराजय का सामना करने के बाद भी कांग्रेस  बेहोशी की अवस्था में दिखाई दे रही है। इसी बेहोशी के चलते अपने बयानों के माध्यम से विवेकहीनता का प्रदर्शन किया जा रहा है। कांगे्रस की इस प्रकार की मानसिकता निर्मित करने के पीछे कौन सी शक्तियां काम कर रही है, यह उनकी अंतरात्मा ही जानती होगी, लेकिन इस प्रकार की मानसिकता भारत के भविष्य के लिए दुखदायी ही साबित होगी।
लोकसभा चुनाव में कांग्रेस  के सिमटने के बाद कांगे्रस ने अपने आपको संभालने का कोई प्रयास नहीं किया, इसके चलते उसे देश के महत्व पूर्ण राज्यों में भी पराजय का दंश झेलना पड़ा। कांगे्रस ऐसा क्यों कर रही है, इसका जवाब यही हो सकता है कि सरकारी सुविधाओं के बिना कांगे्रस के नेताओं की स्थिति जल बिन मझली के समान हो जाती है। उसकी तड़पन कांग्रेसी  नेताओं के स्वरों में सुनाई देती है। सीधे शब्दों में कहा जाए तो कांग्रेस  सत्ता प्राप्त करने के लिए तड़पती हुई दिखाई देने लगी है। वास्तव में जो भी व्यक्ति सुविधाओं का दास हो जाता है, वह अपने परिश्रम के बल पर प्रगति नहीं कर सकता। आज कांग्रेस  सुविधाओं का दास बनती हुई दिखाई दे रही है। इसी कारण उसके नेताओं को सीमा की रक्षा करने वालों का त्याग दिखाई नहीं देता। सेना पर पत्थर फेंकने वाले उग्रवादी दिखाई नहीं देते। कांगे्रस नेता संदीप दीक्षित का बयान निश्चित रुप से सेना के त्याग का अपमान ही कहा जाएगा। हम यह भी सोच सकते हैं कि ऐसे बयानों के कारण कांग्रेस  संभवत: आतंकवादियों के प्रति हमदर्दी जताने का प्रयास करती हुई दिखाई देती है। ऐसे में प्रश्न यह भी आता है कि कांग्रेस  आतंकवादियों का मनोबल बढ़ाना क्यों चाह रही है। इससे कांग्रेस  को क्या हासिल होने वाला है। कांग्रेस  कम से कम देश हित के मुद्दों पर विरोध की राजनीति करना बंद करे, तभी देश में राष्ट्रीय भावना का प्रकटीकरण हो सकेगा।


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