जान है तो जहान है.... यदि ऐसा कहा गया है तो गलत नहीं है.  क्योंकि आप कामयाबियां तभी प्राप्त कर सकते हैं , जब आपका स्वास्थ्य भी बेहतर हो.  और स्वास्थ्य आपका तभी बेहतर होगा जब आप उसका पूरा पूरा ध्यान रखेंगे.  शायद यही वजह है कि स्वास्थ्य की गंभीरता को समझते हुए पूरी दुनिया में एक ऐसा दिन तय किया गया जब एकजुट होकर सब सेहतमंद रहने का संकलप लें, वो तमाम जानकारियां हासिल करें जो उत्तम जीवन के लिए आवश्यक हैं.  और ये भी कितना सुखद है कि 7 अप्रैल का दिन चुना गया जब पूरा विश्व इस दिन को स्वास्थ्य दिवस के रूप में मानता है. उत्तम स्वास्थ्य के लिए भी जीवन में सात चीजें आवश्यक है - अच्छा मन,  अच्छा तन, अच्छे विचार , अच्छे कार्य , अच्छे संकल्प , अच्छा खान-पान और अच्छी दिनचर्या.  सन 1948 में 7 अप्रैल के दिन संयुक्त राष्ट्र संघ की एक अन्य सहयोगी और संबद्ध संस्था के रूप में दुनियां के 193 देशो ने मिल कर स्विट्जरलैंड के जेनेवा में विश्व स्वास्थ संगठन (W H O) की नींव रखी थी. 1950 में पूरे विश्व में पहली बार विश्व स्वास्थ्य दिवस मनाया गया. इसको मनाने का मुख्य उद्देश्य दुनियां भर के लोगों के स्वास्थ्य के स्तर को ऊँचा उठाना है. इस दिन सारी दुनियां का ध्यान मानव स्वास्थ्य की और आकर्षित किया जाता है. जिसके लिए अनेक प्रकार से स्वास्थ्य सम्बन्धी चर्चा की जाती है और राष्ट्रीय स्तर पर सरकारों को स्वास्थ्य सम्बन्धी आवश्यक कदम उठाने के लिए प्रेरित किया जाता है. W H O के द्वारा अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय  स्तर पर विभिन्न कार्यक्रम का आयोजन होता है. 
भारत भी विश्व स्वास्थ्य संगठन का एक सदस्य देश है और इसका मुख्यालय भारत की राजधानी दिल्ली में स्थित है. हमारे देश  में बहुत बड़ी संख्या में लोग कुपोषण के शिकार है. जो कि  चिन्ता का कारण है. राष्ट्रीय  परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के अनुसार तीन वर्ष की अवस्था वाले 3. 88 प्रतिशत बच्चों का विकास अपनी उम्र के हिसाब से नही हो पाता और 46 प्रतिशत बच्चे अपनी अवस्था की तुलना में कम वजन के होते है. जबकि 79. 2 प्रतिशत बच्चे एनीमिया से पीड़ित है. गर्भवती महिलाओं में एनीमिया 50 से 58 प्रतिशत देखने को मिलता है. इतिहास गवाह है की हर युग में संक्रामक रोगों ने मानव समाज पर बार बार कहर ढाया है. कभी कभी तो पूरे गाँव के गाँव और बस्तियां संक्रामक रोगों की चपेट में आकर उजड़ गयी हैं. अतः संक्रामक रोग मानव सभ्यता के लिए हमेशा चुनौती बने हैं .गत वर्षों में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने पूरे विश्व में संक्रामक रोगों पर विजय पाने के लिए सराहनीय कार्य किया है.इन रोगों से बचाव के लिए जनता को जागरूक किया है,यही कारण है की आज हैजा, चेचक, प्लेग, ,पोलियो जैसी बीमारियाँ या तो ख़त्म हो गयी है या ये बीमारियाँ होने पर संक्रामक रूप नहीं ले पाती और विशाल जनहानि नहीं कर पाती. परन्तु अभी भी संक्रामक रोगों से यह लडाई  ख़त्म नहीं हुई है,आज भी कुछ नयी बीमारियों ने सर उठा iलिया है जिनका कारगर इलाज उपलब्ध नहीं हो पा रहा है, जिनमे बर्ड फ्लू,एड्स,स्वाइन फ्लू जैसे अनेक संक्रामक रोग शामिल है.जिसके लिए सभी देशों को अपनी जनता को सुरक्षित रखने के लिए आवश्यक कदम उठाने की आवश्यकता है. ताकि विश्व स्वास्थ्य संगठन के मिशन को सफल बनाया जा सके और स्वस्थ्य विश्व की कल्पना को साकार किया जा सके. हमारे देश में डॉक्टरों की संख्या सन्तोष जनक नही है 1000 मरीज पर एक डॉक्टर भी नही है. जैसा की हम सब ये जानते है की किसी भी देश में उस देश के नागरिको के स्वास्थ्य की पूरी की पूरी जिम्मेदारी उस देश के डॉक्टरों पर होती है. हमारे देश में तो डॉक्टरों को भगवान का दर्जा दिया जाता है. ये डॉक्टर ही है जो लम्बे समय से अपनी सेवाएं सरकारी और गैर सरकारी अस्पतालों में दे रहे है परन्तु कुछ समय से ये देखा जा रहा है की डॉक्टर और मरीजों के रिश्ते में काफ़ी खटास आ रही है. जिसका मुख्य कारण डॉक्टरों की कमी तथा औषधियों की प्रतिरोधक क्षमता है. इसकी वजह से छोटे से छोटे ऑपरेशन के बाद भी मरीज़ में  सेप्टिसीमिया (ब्लड इन्फेक्शन) हो जाता है जिस  के कारण मरीज़ की मृत्यु हो जाती है कभी कभी तो ये भी देखा गया है की मरीजों को अस्पताल में देरी से भर्ती कराया जाता है जिसकी वजह से मरीज़ की हालत गम्भीर हो जाती है और उनकी मृत्यु हो जाती है  तब  मरीज़ के परिजन इसका सारा दोष डॉक्टर पर मढ़ देते है. कई बार तो वे डॉक्टरों के साथ हाथा पाई करने से नही चूकते है. ऐसे समय पर मरीज का इलाज डॉक्टर कैसे करेंगे जब वे ही  डर के माहौल में रहेंगे.      आज कल सोसल मीडिया में जैसे फेसबुक,वाटसैप पे प्रतिदिन डॉक्टरों के अपमान जनक विडियो अपलोड होते रहते हैं. जिसमें यह जताया जाता है कि डॉक्टर मरीजों से बेफिजूल का ब्लड टेस्ट और रोटिन चेकअप करवाते हैं. इन सबके साथ यह भी दर्शाया जाता है कि डॉक्टर के साथ पैथोलॉजीस्ट और डाय्गनॉसिस सेरन्ट मिलकर गलत रिपोर्ट बनवाते हैं. इस तरल के कार्य से डॉक्टरो की छवि खराब होती है साथ ही मरीजों का विश्वास भी कम होता जा रहा है. जिसका खामियाजा मरीजों को ही भुगतना पड़ता है.
आज मरीज जब एक छोटा सा आपरेशन  जैसे अपेन्डीस  यदि डॉक्टर के कहने पर इलाज करवाता है तो पहले उसकी सौपिंग करता है मतलब वह अपने सामर्थ के हिसाब से अलग अलग डॉक्टरों को परखते है .इस प्रकार से परखने में  कई बार अपेंडिक्स की फोड़ी फुट जाती है. मरीज के  पुरे शरीर में अपेंडिक्स का मवाद फैल जाता है. जिससे मरीज को ही जान और माल का नुक़सान भुगतना पड़ता है. अगर मनुष्य को मलेरिया या डेंगू हो जाता है तब डॉक्टर मरीजों को औबजरवेसन के लिए जब एडमिट करना चाहता है .तब भी मरीज हिचकिचाते हैं. जिससे उनके पुरे शरीर में इनफैक्सन फैल जाता है और उनकी जान पर बन जाती है.
 जिस तरह हम रेल की यात्रा पर जाते हैं तो समय पर पहुंचना जरूरी होता है उसी प्रकार रोग के चरम  सीमा पर पहुंचने से पहले डॉक्टर पर विश्वास कर के अपना इलाज कराना चाहिए. इसके साथ मैं यह भी कहना चाहूंगी की आज जो लोग डॉक्टरों के खिलाफ विज्ञापन करते हैं वे क्या बीमार होने पर डाक्टर के पास नहीं जाते हैं. देश का विकास तभी सम्भव है जब देश के नागरिक शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ्य हो. वर्तमान दौर में हम औद्योगीकरण की और बढ़ते जा रहे है और जाने अनजाने में अपने चारो तरफ प्रदूषण फैला रहे है जिससे मौसम का चक्र बिगड़ रहा है. जो प्राकृतिक आपदाओं को आमन्त्रित करने का कारण बन रही है. इन प्राकृतिक आपदाओं के कारण मानव समाज को जान माल का नुकसान उठाना पड़ता है. इसके कारण हम कई खतरनाक बीमारियों को आमन्त्रित करते है जैसे मलेरिया ,क्षय रोग ,पीलिया ,अस्थमा ,आदि. इस लिए प्रत्येक देश का यह दायित्व बन जाता है की वह विकास के साथ साथ मानव स्वास्थ्य को सुरक्षित करने के लिए भी प्रयास करे. आज भी कुछ ऐसी बीमारिया है जैसे एड्स ,कैंसर ,बर्ड फ्लू ,स्वाइन फ्लू जिनका कारगर इलाज सम्भव नही है परन्तु यदि लोगों को इन बीमारियों से बचाव के उपाय बताये जाए तो हम इन बीमारियों की रोक थाम कर सकते है. हमारे देश में गम्भीर बीमारियों के प्रति जागरूपता व शिक्षा के आभाव के कारण हम इन बीमारियों से बचने में असमर्थ है. हमे आज रोगों से बचाव के लिए विशेष प्रचार प्रसार की जरूरत है. जिससे हमारे देश की आम जनता जागरूक  होकर स्वयम अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखे. वर्तमान समय में विश्व स्वास्थ्य संगठन की सेवाएं विश्व भर में फैली है. मानव जीवन में स्वास्थ्य का मूल्य समझ कर ही विश्व स्वास्थ्य संगठन की स्थापना की गयी थी.


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