कर्नाटक में येदियुरप्पा सरकार के इस्तीफे के बाद भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर के कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन पर जमकर निशाना साधा, लेकिन कोई नई बड़ी बात नहीं कह पाए, अलबत्ता... उन्होंने अप्रत्यक्षरूप से इस बात पर मुहर लगा दी कि शक्ति परीक्षण के दौरान कांग्रेस की सुरक्षा व्यवस्था तगड़ी थी? 
अमित शाह ने जो कुछ कहा उसका सार है...
* कर्नाटक की जनता ने कांग्रेस के खिलाफ  जनादेश दिया, कांग्रेस-जेडीएस के बीच अपवित्र गठबंध हुआ है. 
* जेडीएस भी केवल अपनी परंपरागत सीटों पर ही चुनाव जीत पाई, जबकि कांग्रेस की सीटें घटी हैं, जेडीएस को समर्थन देकर कांग्रेस ने जनता के साथ धोखा किया है.
* सबसे बड़े दल होने के नाते भाजपा को ही सबसे पहले सरकार बनाने का अधिकार था और इसीलिए हमने राज्यपाल के सामने दावा पेश किया, इसमें कुछ भी गलत नहीं है.
* भाजपा पर विधायकों की हॉर्स ट्रेडिंग का आरोप झूठा है, कांग्रेस ने तो पूरा अस्तबल ही बेच खाया है.
* कांग्रेस लोकतंत्र की दुहाई किस मुंह से दे रही है? अब तक पचास सरकारों को गिराने का काम कांग्रेस ने किया है.
* कांग्रेस ने अपने विधायकों को अलोकतांत्रिक तरीके से होटल में कैद कर रखा है, जब वे बाहर आएंगे तो जनता उनसे हिसाब मांगेगी.
* कर्नाटक चुनाव की बदौलत कांग्रेस की संवैधानिक संस्थाओं में आस्था बढ़ गई है, हम आशा करते हैं कि... आगे चुनाव हारने पर भी कांग्रेस सुप्रीम कोर्ट और चुनाव आयोग का सम्मान करेगी.
भाजपा अध्यक्ष अमित शाह कुछ भी कहें, परन्तु कर्नाटक प्रकरण के बाद भाजपा के भविष्य को लेकर अनेक सवाल उठाए जा रहे हैं, हालांकि... ये सवाल भी अर्धसत्य पर आधारित हैं.
इस वक्त देश में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी है, इस सत्य को अब सभी ने स्वीकार कर लिया है, लेकिन फिर भी ताजा चुनावी नतीजे बताते हैं कि भाजपा की एकल कामयाबी अभी आसान नहीं है.
यदि 2019 में भाजपा का सीधा मुकाबला एकजुट विपक्ष से हुआ तो भाजपा की परेशानी बढ़ जाएगी, परन्तु यदि त्रिकोणीय संघर्ष हुआ तो भाजपा की जीत बेहद आसान होगी? अर्थात... भाजपा की एकल कामयाबी का सबसे बड़ा रोड़ा विपक्ष की एकता है.
कर्नाटक चुनाव के बाद के सियासी घटनाक्रम को लेकर विपक्षी उत्साहित जरूर हैं, लेकिन... विपक्ष के बड़े नेताओं की जब निजी राजनीतिक महत्वकांक्षाएं जोर मारेंगी तब यह एकता बिखरने में वक्त नहीं लगेगा?
भाजपा के लगातार बढ़ते सियासी खतरे के बावजूद ममता बनर्जी जैसे नेता कहां संपूर्ण विपक्षी एकता के लिए राजी नजर आ रहे हैं? तीसरा मोर्चा जैसी धारणा के बीच विपक्ष की संपूर्ण एकता कैसे संभव है? जाहिर है कि... ममता बनर्जी जैसे नेता पहले कांग्रेस के एकाधिकार से मुक्ति पाना चाहते हैं और फिर भाजपा के बारे में सोच रहे हैं? ऐसी स्थिति में भाजपा की कामयाबी कैसे रूकेगी? हो सकता है तत्काल गठबंधन के दम पर विपक्ष भाजपा को सत्ता से कुछ समय के लिए दूर कर दे, लेकिन... ऐसे गंठबंधन चलेंगे कितना? 
खैर, ये तो वो बिन्दू है जो भाजपा के हाथ में नहीं हैं, लेकिन भाजपा के हाथ में अभी भी कईं बिन्दू हैं जिन पर अगर भाजपा ध्यान दे तो विपक्ष के सत्ताई इरादों पर पानी फैर सकती है?
* सबसे पहले भाजपा को जनहित के मुद्दों पर ध्यान देना होगा ताकि रोजगार, महंगाई जैसे मुद्दों के कारण भाजपा के खिलाफ जो माहौल बन रहा है, उससे मुक्ति पाई जा सके.
* भाजपा को सहयोगी दलों को विश्वास में लेकर सहयोगी ढांचे को व्यवस्थित करने की जरूरत है ताकि विपक्षी गठबंधन का मुकाबला बेहतर तरीके से संभव हो सके.
* दक्षिण भारत सहित तमाम गैरभाजपाई क्षेत्रों में नए सहयोगियों की तलाश करके उन्हें जोडऩा होगा, चाहे सहयोगी कमजोर ही क्यों न हो, कुछ सीटों का तो फायदा मिल ही सकता है?
* भाजपा के पास सशक्त संगठन है, इसे अहसास कराना होगा कि केन्द्र में भाजपा की एकल जीत क्यों जरूरी है?
* इस वक्त भाजपा में अनुशासन को लेकर बड़ी चुनौतियां हैं, एक... शत्रुघ्र सिन्हा जैसे बागी स्वर, और दो... भाजपा समर्थकों के अनियंत्रित बोल. 
* बागी नेताओं से सीधी बात करके या तो उन्हें अनुशासित रहने के लिए राजी किया जाए या फिर भाजपा से बाहर कर दिया जाए, क्योंकि उनके बागी बोल न केवल विपक्ष को ताकत देते हैं बल्कि भाजपा को घेरने का अवसर भी उपलब्ध करवा देते हैं?
* भाजपा के कई समर्थक अनियंत्रित टिप्पणियां करते रहते हैं, इन टिप्पणियों के जरिए वे अपनी भड़ास तो निकाल लेते हैं, लेकिन भाजपा की इमेज को इससे भारी नुकसान होता है, खासकर... भाजपा के करीब आ रहे गैरभाजपाई मतदाता सोचने पर मजबूर हो जाते हैं.
* भाजपा के पास पीएम नरेन्द्र मोदी जैसा सशक्त नेता है तो संगठन को नेतृत्व और दिशा देने में अमित शाह एक्सपर्ट हैं, लेकिन... जहां 2014 में भाजपा का स्वाभिमानी चेहरा नजर आ रहा था वहीं अब यह अभिमानी चेहरे में बदलता जा रहा है, इस चेहरे को सुधारने की जरूरत है.
यदि भाजपा समय रहते इन कमियों को दूर करने में सफल हो जाती है तो... 2019 में फिर से भाजपा को 2014 जैसी कामयाबी मिल सकती है... अब मोदी लहर 2014 जितनी असरदार तो रही नहीं है, इसलिए यदि भाजपा सुधार में नाकामयाब रहती है तो उसे कामयाबी के लिए शायद अय्यर लहर की जरूरत पड़ेगी?


 


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