छत्तीसगढ़ के सुकमा में नक्सली हमले में सीआरपीएफ के 25 जवानों के शहीद होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि नक्सलियों पर भी होगी सर्जिकल स्ट्राइक। यह उनकी रणनीतिक सोच है। इसमें सच में कामयाबी मिलती है तो निश्चित रूप से कार्रवाई होनी चाहिए। लेकिन यह सोचना अहम जरूरी है कि नक्सल समस्या क्या है। क्या इसका स्वरूप अब विशुद्ध आतंकवाद से प्रभावित है। पाकिस्तान में सर्जिकल स्टाइक करके मोदी सरकार ने जिस तरह से वाहवाही लूटी उसी तरह से नक्सल प्रभावित इलाकों में सर्जिकल स्ट्राइक करके कामयाबी मिलेगी, इसमें संदेह है। मोदी ने तो नोटबंदी के दौरान भी कहा था कि नोटबंदी से आतंकवाद और नक्सलवाद का खात्मा होगा। बावजूद इसके कश्मीर में मारे गए एक आतंकवादी के पास से दो हजार के नए नोट मिले थे। उस समय भी सवाल उठा था कि उस आतंकवादी के पास कैसे पहुंच गया दो हजार का नया नोट। इसके बाद सुकमा हमले की घटना मोदी सरकार की कार्यशैली पर भी सवाल खड़ा कर रही है। 

इस समय मोदी सरकार अपने बेहतरीन तीन साल के जश्न मनाने के मूड में है और देश की जनता को यह बताना चाहती है कि उनकी सरकार भ्रष्टाचार मुक्त सरकार है। लेकिन सुकमा की घटना इसी मोदी सरकार से सवाल करती दिख रही है कि देश के सामाजिक और आर्थिक विकास में किस तरह का योगदान रहा है। इससे कौन लोग लाभांवित हुए हैं। महाराष्ट्र में किसानों की कर्ज मुक्ति के लिए आंदोलन चल रहा है। उत्तर प्रदेश में भाजपा सरकार की घोषणा के बावजूद किसानों को कर्ज मुक्ति से राहत नहीं मिल पाई है। ग्रामीण इलाकों में विकास के काम उस तरह से नहीं हो पा रहे हैं जिससे नक्सल आंदोलन को कमजोर किया जा सके। सबसे बड़ी बात यह है कि नक्सल इलाकों में सीआरपीएफ और अन्य सुरक्षा बलों को तैनात करने के बाद भी नक्सली बारूदी सुरंग और सामूहिक रूप से हमले करने में कामयाब हो रहे हैं। अगर गंभीरता से ध्यान दिया जाए तो यहां भी उसी तरह से खुफिया तंत्र की खामियां नजर आती है जिस तरह से जम्मू-कश्मीर में है। सरकार की तरफ से तो हर हमले के बाद बैठकों को लेकर चुस्ती-दुरुस्ती दिखाई जाती है। लेकिन जमीनी स्तर पर कोई ठोस काम नहीं होते हैं। सुकमा हमले के बाद केंद्र सरकार ने जब नक्सल प्रभावित राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ गृह मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में बैठक की तो उसमें बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने नक्सली आंदोलन से निपटने के लिए केंद्र की ओर से वित्तीय सहायता बंद करने पर सवाल उठाया। इससे स्पष्ट होता है कि नक्सल के खिलाफ केंद्र और राज्यों में तालमेल नहीं है। ऐसे में नक्सल आंदोलन को खत्म करने के लिए बुद्धिजीवियों से भी किस तरह की सहायता ली जा सकती है, यह भी एक सवाल है। सुकमा में सीआरपीएफ के जवान अपनी तरह से नक्सलियों से बदला ले रही है। लेकिन हिंसा का जवाब सिर्फ हिंसा नहीं है। कई नक्सली इलाकों में सीआरपीएफ के जवान तो सड़क निर्माण कर रहे हैं और ग्रामीणों को शिक्षा दे रहे हैं।   

यह माना जाता है कि नक्सल आंदोलन को समाप्त करने के लिए सरकारों की राजनीतिक इच्छा कम है। इसे एक चुनावी मुद्दा भी बनाकर रखा जा रहा है। वर्ना, नक्सल प्रभावित इलाकों के विकास के नाम पर करोड़ों रूपए सिर्फ खर्च नहीं किए जाते। ये इलाके अभी भी विकास के लिए तरस रहे हैं। इन इलाकों में रहने वाले लोग और आदिवासी सामाजिक और आर्थिक रूप से कमजोर हैं और शिक्षा का भी अभाव है। आदिवासियों की जमीन हड़पे जा रहे हैं। गरीबी, अशिक्षा और बेरोजगारी के कारण ही नक्सल प्रभावित इलाके के लोग भी भटक रहे हैं। नक्सल प्रभावित कई ऐसे इलाके हैं जो सड़क मार्ग से जुड़े नहीं हैं, जंगल हैं। नक्सलियों को बारूदी सुरंग बनाने के लिए उद्योगपतियों से मुफ्त में बारूद मिलते हैं और उन्हें आर्थिक मदद भी दी जाती है। बेरोजगार युवकों को कुछ पैसों की लालच में नक्सल बनाया जाता है और उन्हें खूनी हिंसा के लिए प्रशिक्षण भी दिया जाता है जबकि रूसी क्रांति की तरह भारत में खूनी क्रांति की जरूरत नहीं है। यहां इसकी पूरी संभावना है कि सरकार चाहे तो जंगल मे भी विकास हो सकता है। मोदी सरकार जम्मू-कश्मीर में पहाड़ को काटकर टनल और पुल का निर्माण कर रही है तो जंगल में विकास करने की क्यों नहीं जरूरत महसूस की जा रही है। सड़क मार्ग से ही विकास को गति मिल सकती है। पता नहीं क्यों, सड़क मार्ग बनाने में भी सरकार की दिलचस्पी नहीं है। मोदी तो कह रहे हैं कि उनकी सरकार गरीबों की है तो नक्सल इलाके में रहने वाले गरीबों पर वह मेहरबान क्यों नहीं हो पा रहे हैं। नीति आयोग के हक़ साहब भी कहते हैं कि सुरक्षा का सवाल जितना अहम है, विकास का सवाल भी उतना ही ज़रूरी है। सुकमा की असली चुनौती यही है।  

देश के दस राज्यों के 88 जिले नक्सल से प्रभावित हैं। इसमें छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओड़िशा, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश राज्य शामिल हैं। हालांकि, छत्तीसगढ़ और झारखंड का निर्माण तो नक्सल आंदोलन खत्म करने के लिए किया गया था। बावजूद इसके ये राज्य अब तक नक्सल हिंसा से प्रभावित हैं। इससे जाहिर होता है कि सरकारी स्तर पर नक्सल समस्या को खत्म करने के प्रयास नहीं हो रहे हैं। नतीजा यह है कि नक्सली हिंसा में हमारे जवान शहीद हो रहे हैं। नक्सलियों में भी यह भावना भरी जा रही है कि सुरक्षा रक्षक उनके दुश्मन हैं। ऐसी ही भावना के प्रचार जम्मू-कश्मीर में अलगाववादियों और आतंकवादियों की ओर से किए जा रहे हैं। केंद्र सरकार अब बुद्धिजीवियों की मदद लेना चाहती है, खासकर जेएनयू के प्रोफेसरों की। हाल में जिस तरह से जेएनयू का नया चेहरा सामने आया जिससे विवादास्पद सवाल पैदा हुए कि क्या जेएनयू में माओवादी उग्रवाद और आतंकवाद से प्रभावित युवाओँ को पनाह मिल रहा है। जेएनयू में माओवादी समर्थक प्रोफेसरों का भी मानना है कि नक्सल प्रभावित इलाकों का सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक स्तर पर विकास हो और गरीबी-अमीरी की दूरी मिटाने के साथ बेरोजगारी दूर की जाए तो माओवादी उग्रवाद पर लगाम लग सकता है। इस दिशा में केंद्र और राज्य सरकारों को पहल करनी है।  


Disclaimer : इस न्यूज़ पोर्टल को बेहतर बनाने में सहायता करें और किसी खबर या अंश मे कोई गलती हो या सूचना / तथ्य में कोई कमी हो अथवा कोई कॉपीराइट आपत्ति हो तो वह info@palpalindia.com पर सूचित करें। साथ ही साथ पूरी जानकारी तथ्य के साथ दें। जिससे आलेख को सही किया जा सके या हटाया जा सके ।


आज का दिन : ज्योतिष की नज़र में


जानिए कैसा रहेगा आपका भविष्य


खबर : चर्चा में


1. 20 फरवरी से बचत खाते से हफ्ते में 50000 रु निकाल सकेंगे, 13 मार्च से 'नो लिमिट': आरबीआई

2. सभी भारतीय हिंदू और हम सब एक हैं: मोहन भागवत

3. रिजर्व बैंक ने दरों में नहीं किया कोई बदलाव, रेपो रेट 6.25 पर कायम

4. भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था में नगदी बहुत महत्‍वपूर्ण, नोटबंदी से होगा फायदा: पीएम मोदी

5. अपने दोस्तों से शादी-शुदा जिंदगी की परेशानियों को ना करें शेयर, मिल सकता है धोखा!

6. तमिलनाडु में राजनीतिक संकट जारी: शशिकला ने 131 विधायकों को अज्ञात जगह भेजा

7. भीमसेन जोशी को सुनना भारत की मिट्टी को समझना है

8. मोदी के कार्यों से जनता को कम अमीरों को ज्यादा फायदा : मायावती

9. माल्या को झटका, कर्नाटक हाईकोर्ट ने यूबीएचएल की परिसंपत्तियों को बेचने का दिया आदेश

10. मजदूरों को डिजिटल भुगतान से सम्बन्धित विधेयक लोकसभा में पारित

11. आतंकी मसूद अजहर पर प्रतिबंध लगाने अमेरिका ने यूएन में दी अर्जी

12. जियो के फ्री ऑफर को लेकर सीसीआई पहुंचा एयरटेल

13. गर्भाशय निकालने वाले डॉक्टरों के गिरोह का पर्दाफाश, 2200 महिलाओं को बनाया शिकार

14. वेलेंटाइन डे पर लॉन्च होगी नई सिटी सेडान होंडा कार

15. उच्च के सूर्य ने दी बुलंदी, क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर को इसी दशा में मिला सम्मान

************************************************************************************

बॉलीवुड      कारोबार      दुनिया      खेल      इन्फो     राशिफल     मोबाइल

************************************************************************************


पलपलइंडिया का ऐनडरोएड मोबाइल एप्प डाउनलोड करने के लिए क्लिक करे.

खबरे पढने और राय देने के लिए हमारे फेसबुक पन्ने, ट्विटर और गूगल+ पर फालो भी कर सकते है.



अन्य जानकारियां :

सुरुचि: इस पेज पर कुकिंग और रेसेपी के बारे में रोज़ जानिए कुछ नया

तनमन: इस पेज पर जाने सेहतमंद रहने के तरीके और जानकारियां

शैली: यह पेज देगा स्टाइल और ब्यूटीटिप्स सहित लाइफस्टाइल को नया टच

मंगलपरिणय: इस पेज पर मिलेगी विवाह से जुड़ी हर वो जानकारी जिसे आप जानना चाहेंगी

आधी दुनिया: यह पेज साझा करता है महिलाओं की जिन्दगी के हर छुए-अनछुए पहलुओं को

यात्रा: इस पेज पर जानें देश-विदेश के पर्यटन स्थलों को

वास्तुशास्त्र: यह पेज देगा खुशहाल जिन्दगी की बेहद आसान टिप्स