पहले तीन तलाक से आज़ादी का मसला,मदरसों का आधुनिकीकरण,अब मक्का जाने के लिए हज सब्सिडी खत्म. क्या सचमुच देश बदल रहा है? पर बोलेगा कोई कुछ भी नहीं. मोदी सरकार अपने आक्रामक शैली से लवरेज है तो प्रमुख विपक्ष कांग्रेस की बोलती बंद है.फर्क तुष्टिकरण और संतुष्टीकरण का  है.कौन मुसलमान समाज को संतुष्ट कर रहा है ,कौन तुष्टिकरण कर रहा था.सब कुछ साफ़ दिख रहा है.
भाजपा की मोदी सरकार अपने सुर में अपना राग अलापते जा रही है.जिसको उनका धुन सुनना है,सुने ,नहीं सुनना हो तो अपने कान बंद कर ले.पर सरकार अपने सुर,लय और ताल के साथ अपना काम करती रहेगी.रही बात क्रेडिट लेने का,वो तो भाजपा सरकार ही लेगी.क्योकि वह दबंग है.वैसे भी जो सत्ता में होता है.वो दबंग ही होता है.चाहे वो भाजपा हो या कांग्रेस.
लेकिन हज सब्सिडी को खत्म किये जाने मुसलमान नेताओं और कठमुल्ला धर्म गुरुओं में एक खौफ सा प्रतीत हो रहा है.मोदी सरकार अब तक की सबसे वीआईपी कौम मुसलमान को वाकई में  समाज के मुख्य विकास धारा में लाने की कोशिश कर रही है ,लेकिन कुछ कठमुल्ला किस्म के  नेता इससे मुसलमान विरोध का रंग देने की जुगत में जुट गए  हैं.जो कि नहीं होना चाहिए.
ऐसा लगता है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी “सबका साथ-सबका विकास” वाला जुमला अपनी पहचान बनाते हुए भारतीय समाज में स्थापित होता दिख रहा है.मोदी सरकार हज सब्सिडी को खत्म कर मुसलमान समाज की महिलाओ और बच्चों को पहले से ज्यादा सशक्त बनाने की एक ने नयी पहल की शुरुआत की है.
16 जनवरी 2018 को भारत का ये ऐतिहासिक दिन  सबको याद रहेगा.देश में एक नया संदेश गया है.शायद अब सभी भारतवासी कहलाये.देश धर्म के नाम पर नहीं राष्ट्रवादिता के तौर पर जाना जाए.कोई कुछ भी कहे ,देश से बड़ा कोई धर्म नहीं.
अल्पसंख्यक मामलों के केन्द्रीय मंत्री मुख़्तार अब्बास नकवी ने इस घोषणा के क्रम में कहा कि हज सब्सिडी के इस फैसले से देश को 700 करोड़ रुपये की विशेष बचत होगी.इस राशि का उपयोग मुसलमान समाज की महिलाओ और बच्चों के समग्र विकास के लिए खर्च किया जायेगा.
हालांकि ये फैसला देश के उच्चतम न्यायालय का है.जो वर्ष 2012 में कांग्रेस शासन काल में ही दिया गया था.परन्तु मुसलमान को सिर्फ वोट बैंक बनाकर रखने की नीयत से एक विशेष याचिका के जरिये उसे तात्कालिक तौर पर लागू नहीं किया गया था.अब जब मोदी सरकार ने उच्चतम न्यायालय के उस निर्णय को लागू किया तो वामपंथी और कांग्रेस की तरफ से मिश्रित प्रतिक्रियाए सामने आई हैं .
कांग्रेस के सदाबहार मुसलमान नेता व सांसद गुलाम नबी आज़ाद बड़े उदास से लगे.बुझे स्वर में श्री आजाद ने कहा कि ये तो हमारी कोशिश थी,क्योकि हज सब्सिडी से मुसलमान समाज को कोई खास फायदा नहीं मिल रहा था.ये कुरान के खिलाफ भी था .जस्टिस आफ़ताब आलम के बेंच ने ये फैसला सुनाया था.उस फैसले में इस मसले को 2022 तक लागु करने की बात थी.
इसका मतलब ये हुआ कि उच्चतम न्यायालय के उस फैसले को मोदी सरकार ने लागु कर बहुत जल्दबाजी कर दी.जबकि भाजपा के हरफनमौला राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ संबित  पात्रा ने कहा कि भाजपा सबका साथ सबका विकास चाहती है.उनका कहना था कि भाजपा सबके साथ मुसलमान समाज की सबसे बड़ी हितैषी है,जिसको उचित समय पर उनके हित में लागू किया.
गौरतलब है मुसलमान समाज के पवित्र ग्रन्थ कुरान में इस बात का जिक्र किया गया है की हराम के पैसे से कोई पवित्र कार्य नहीं किया जाये ,साथ ही जो समर्थवान है ,वही हज का अधिकारी है.वैसे नए प्रावधान के बावजूद हज जाने वाले हाजियों को मोदी सरकार सभी प्रकार की सुरक्षा और संरक्षा की व्यवस्था जरुर करेगी,देश में भी और विदेश में भी.
वैसे इस हज सब्सिडी को बंद किये जाने से एक नया सवाल पैदा हुआ है कि मोदी सरकार हिन्दू और अन्य धर्मों के साथ भी ये व्यवहार करेगी,इस पर केंद्र सरकार में मंत्री मुख़्तार अब्बास नकवी का कहना है हमने अपने पवित्र कुरान की आयतों का पूरी तौर पर पालन किया है ,पर जहाँ तक अन्य धर्मो की बात है तो प्रधानमंत्री श्री मोदी जी जगजाहिर नारा है ,सबका साथ सबका विकास.साथ में हमारे इस फैसले से ये भी साफ़ व स्पष्ट है तुष्टिकरण किसी का नहीं ,संतुष्टि सबके लिए.
जहाँ तक मुसलमान समाज को बरगला कर अब तक राजनीति करने वाले मौलाना ओवैसी मोदी सरकार के इस फैसले को राजनीतिक रंग देने की जुगत में बताये जा रहें हैं.शायद ओवैसी की यादाश्त कमजोर हो गयी है.गौरतलब है कि 2012 में उच्चतम न्यायालय के हज सब्सिडी बंद किये जाने के फैसले की श्री ओवैसी ने सराहना की थी,लेकिन अब क्या.उनकी अलगाववाद राजनीति का क्या होगा.ईश्वर ओवैसी जैसे नेताओं को सदबुध्धि दे,जिससे उन्हें पहले स्वयं को भारतीय समझे.बाद में जो समझना हो,समझे.क्योकि मेरा मत  है ,सबका मत होगा कि देश से बड़ा कोई नहीं,देश बड़ा है न कि धर्म.
देश को मोदी सरकार सीधा और सरल सन्देश है -सबका साथ-सबका विकास.संतुष्टि सबके लिए,पर तुष्टिकरण किसी का नहीं.संभवतः सरकार उसी दिशा में अग्रसर है.
 


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