कुछ बाबाओं की कारगुजारियों से राष्ट्र का सम्पूर्ण संत समाज संदेह के घेरे में है। सोशल मीडिया से लेकर जन चर्चाओं में बाबाओं का मजाक उड़ाया जा रहा है। यहां तक कहा जा रहा है कि भिखारी भले ही कह दो पर बाबा मत कहो। भारतीय समाज की वैभवशाली परम्पराओं और ऋषि, मुनि, संतो के योगदान को देखते हुये सभी संत-महात्माओं को शक के घेरे में लाना कहां तक उचित है। हमारे समाज में संतों की गुरू, मार्गदर्शक, संकट मोचक की भूमिका रही है। अभी भी देश कुछेक छद्म बाबाओं को छोड़ दे तो व्यापक संत समाज की राष्ट्र निर्माण में अहम भूमिका है। भारतीय समाज का ताना-बाना संत परम्पराओं के मार्गदर्शन में फला-फूला है।

भारत विश्व गुरू की उपाधि से विभूषित रहा है। ऋषि-मुनियों द्वारा रचित वेद, पुराण आदि ग्रंथ ज्ञान का भंडार हैं। उन पर हजारों साल बाद आज भी विश्व में शोध हो रही हैं। जो प्रगति आज विश्व के विकसित देशों में दिख रही है भारत हजारों वर्ष पहले इसका भोग कर चुका है। पश्चातवर्ती भारतीय समाज में भी आदिगुरू शंकराचार्य, भगवान महावीर, बुद्ध, गुरूनानक देव से लेकर वर्तमान में दिशा दर्शन दे रहे संत महात्मा हमारे पूज्य हैं।
    हॉं, गोद ली हुई बेटी पर कुदृष्टि रखने और नातिन-पोती की उम्र की लड़कियों को अपनी हवस का शिकार बनाने वालों को हम भगवान बना लेते हैं। धर्म का धंधा करने वाले हमारी श्रृद्धा का केन्द्र बन जाते हैं। हम उन पर धन सम्पत्ति लुटाते हैं। उनके पास अकूत धन सम्पत्ति इकट्ठी होती जाती है। वे आलीशान महलों में रहते हैं। अय्यासी का सारा साजो-सामान सहेजते हैं। संसार की महंगी से महंगी कार, सेवक, खूबसूरत सेविकायें उनकी सेवा में तैनात रहती हैं। वे हमें गुरू की निंदा कानों से नहीं सुनने का उपदेश देते हैं। कभी बापू, सरकार, सद्गुरू, सरस्वती, मन्नत आदि तरह-तरह के स्वघोषित अलंकरणों से विभूषित होकर हमारी आस्था का शोषण करते हैं। अनुयायी, अन्ध भक्त बनकर हम उनकी कारगुजारियों को नजरंदाज़ किये रहते हैं। सोचिये इसमें दोष किसका । धर्म उनका धंधा है। इसे बढ़ाने के लिये वे हर किस्म की जुगत करेंगे ही। जैसे चोर चोरी करेगा। चोरी नहीं हो इसकी सावधानी किसे रखना चाहिये । निश्चित ही हमें ।
     आसूमल से आशाराम बने बाबा नाबालिग से बलात्कार के आरोप में जेल में हैं। इससे पहले वे देश के बापू थे। भारत के प्रायः हर बड़े शहर-कस्बे में उनकी जमीन-जायदाद है। ऐसी कौन सी फैक्ट्री उनके पास थी जिससे उन्होंने अरबों की सम्पत्ति अर्जित कर ली। कोई डेढ़ दशक पहले देश के एक बड़े हिन्दी दैनिक ने आशाराम के आश्रम में युवतियों के दैहित शोषण का खुलासा किया था। उस पर भक्तों ने इतना तांडव मचाया कि उक्त दैनिक को प्रकाशित खुलासे के अनुपात मेें दूसरे ही दिन क्षमा याचना करना पड़ी। तब से आशाराम का आभा मंडल दिन दूनी रात चौगनी गति से बढ़ता गया। साधारण मनुष्य तो क्या देश-प्रदेशों की सत्ता उनके चरणों में लोटने लगी। आश्चर्य यह है कि कथित संत मानते थे कि बलात्कार के लिये बलात्कारी के साथ पीड़ित भी समान रूप से जिम्मेदार होती है। दिल्ली में हुई सामूहिक बलात्कार की घटना, जिससे पूरा देश आक्रोशित हुआ था, के बारे में आशाराम ने कहा था कि केवल पांच छह लोग ही अपराधी नहीं हैं। बलात्कार का शिकार हुई बिटिया भी उतनी ही दोषी है जितने बलात्कारी। ऐसे कुछ दुर्बुद्धि को हम दसकों तक संत मान कर पूजते रहे। दोष किसका?
    इंजीनियरिंग छोड़कर धर्म का व्यवसाय करने वाले रामपाल इन दिनों देश द्रोह के आरोप में जेल में हैं। ये संत कबीर का अवतार बन कर परमेश्वर घोषित हो गये। सत्रह अठारह वर्ष पहले हरियाणा के करोंथा में सतलोक आश्रम बना कर विवादित प्रवचन करने लगे। हालांकि उन्हें अदालत ने अभी दो प्रकरणों में दोषी नहीं माना पर वे अभी जेल में ही रहेंगे। उनके ऊपर तीन अन्य प्रकरण लंबित हैं। इस विवादित व्यक्ति ने अनुयायियों की सशस्त्र सेना तैयार कर ली थी। इसे गिरफ्तार करने में हरियाणा सरकार को एड़ी-चोटी का जोर लगाना पड़ा। पुलिस को लगभग दो सप्ताह आश्रम की घेराबंदी करनी पड़ी। इस पर  प्रतिदिन छह करोड़ का खर्चा आया। रामपाल पर हत्या और विरोधियों को गायब कराने सहित नरबलि तक के भी आरोप लगे। तमाम अय्यासियों के अलावा प्रचलित है कि रामपाल महलनुमा पंच सतारा होटल को भी मात देने वाले आश्रम में बने स्वीमिंग पूल में दूध से नहाता था। इसी स्नानामृत की खीर बनायी जाती थी। यही खीर खिलाकर भक्त बनाया जाता था। बंगलौर के स्वामी नित्यानंद पर बलात्कार का आरोप है।

भक्तों के सौजन्य से वे स्वर्ण सिंहासन पर विराजते हैं। इसी तरह स्वनामधन्य इच्छाधारी संत सेक्स रैकेट चलाने के आरोपी हैं। तरह-तरह के जादू दिखा कर सम्मोहित करने वाले कितने ही बाबा देश में मिल जायेंगे। संतान पैदा करने का आशीर्वाद देने वाले तो कुछ केवल पुत्र रत्न की प्राप्ति का वरदान देने वाले बाबा, चुनाव में जीत का जतन करने वाले बाबा, दुश्मन का अंत करने वाले बाबा और न जाने कितने षट्कर्म करने वाले बाबा देश में जगह-जगह देखे जा सकते हैं। इतना ही नहीं नीला पहने हो तो पीला पहनों अथवा दाल के साथ चावल खाने अथवा नहीं खाने जैसी सीखों से भला करने वाले बाबाओं के यहां भी हम बाकायदा निर्धारित शुल्क जमा करके अपना क्रम आने का इंतजार करते हैं। हमने केवल भगवान ही नहीं बनाये देवियां भी बनायी हैं। सुन्दर मनमोहक छवि के साथ भक्तजनों को आशीर्वाद देती यह देवियां भी किसी से कम नहीं हैं। मीडिया में ऐसे बाबा-देवियां अपना खूब प्रचार करते हैं। उनके पास जाते हम हैं। दोष किसका।
    आजकल प्रवचनों का बड़ा जोर चल रहा है। अब तो टी वी के अनेक चेनल प्रारम्भ हो गये हैं जो दिन-रात केवल प्रवचन ही दिखाते हैं। पर उपदेश कुशल बहुतरों की चांदी हो गयी। इनमें से ज्यादातर बाकायदे पैकेज तय कर प्रवचन देने जाते हैं। इन्दौर में ऐसे ही प्रवचनकार का किस्सा आयोजकों में ख्यात है। हुआ यूं कि पैकेज तय कर प्रवचन देने मंच पर पहुंचते ही प्रवचनकार गुरू ने अपने पैकेज की राशि आयोजकों से मांगी। आयोजकों ने कार्यक्रम के पश्चात् देने की बात कही। प्रवचनकार मंच पर ही राशि उपलब्ध कराने की जिद पर अड़ गये। आयोजकों के पास निर्धारित राशि उपलब्ध नहीं थी। संभवतः उनकी आयोजन में दानदाताओं से प्राप्त राशि से भुगतान करने की मंशा थी। बात बिगड़ गयी। प्रवचनकार बगैर मुंह खोले मंच से उतर कर इन्दौर से चले गये। इस हरकत पर प्रवचनकार को वर्षों इन्दौर नहीं बुलाया गया। पर भक्त कहां मानते हैं। आयोजकों का भी काम नहीं चलता । फल स्वरूप उनका इन्दौर में पुनः आगमन होने लगा है।
    इन सबके बीच पिछले तीन-चार दिनों से जिस बाबा का जिक्र अधिकांश देशवासियों की जुबां पर है उसका नाम है डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत सिंह उर्फ राम रहीम । उसे सीबीआई की विशेष अदालत के न्यायाधीश ने बलात्कार के दो आरोपों में दस-दस वर्ष की सजा सुनायी है। दोनों सजायें अलग-अलग चलने से सजा की कुल अवधि बीस वर्ष हो गयी है। यह ऐसा व्यक्ति है जिसने दसवीं तक भी पढ़ाई नहीं की। इसके देश-विदेशों में करोड़ों अनुयायी हैं। मीडिया और सोसल मीडिया में पिछले दिनों में चल रही चर्चाओं से इसके अनेक रहस्य उजागर हुए हैं। पाप का घड़ा भर जाने पर उसके कुकृत्यों का भंड़ा फूट गया।

आगे संभावना है कि प्याज के छिलके की तरह इसके अपराधों की और भी अनेक परतें खुलेंगी। देखने में आया है कि इस बाबा के आगे सरकारें भी नतमस्तक थीं। वैसे इसके कारनामों की जानकारी बहुत वर्ष पहले इसी बाबा के सेवादार रहे खट्टा सिंह तथा गुरदास सिंह नाम के दो व्यक्तियों ने दी थी। उन्होंने बताया था कि राम रहीम नाम का यह दुराचारी ढाई सौ लड़कियों को यौन शोषण का शिकार बना चुका है। अपनी दत्तक बेटी तक को नहीं छोड़ा। जब लड़की के पति ने इस पर आपत्ति ली तो राम रहीम ने उसे तमाम तरीकों से परेशान किया। अन्ततः पति ने बाबा की दत्तक बेटी से तलाक लेकर डेरा छोड़ दिया। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि इस आडंबरी ने बहुत ही कम उम्र की लड़कियों को भी अपनी हवस का शिकार बनाया। अपने आश्रम डेरा सच्चा सौदा के सेवादारों को लड़कियों से दूर करने के लिये यह बाबा आश्रम के अस्पताल में उनके अण्डकोष निकलवाकर नपुंसक बनवा देता था। बाबा की इच्छापूर्ति लड़कियों के लिये अनिवार्य थी। आना कानी करने अथवा विरोध करने वाली लड़की को या तो जान से मार दिया जाता या उसके साथ इतनी मारपीट की जाती वह अपंग हो जाती। भय की वजह से कोई शिकायत नहीं होती थी। 
    वह तो डेरा सच्चा सौदा की ही दो साध्वियों ने इस तरह के दैहिक शोषण से तंग आकर तत्कालीन प्रधानमंत्री और पंजाब हरियाणा उच्च न्यायालय को गुमनाम पत्र भेज कर अपनी व्यथा व्यक्त कर दी। परिणाम स्वरूप सीबीआई जांच के आदेश हुए। जांच के दौरान भी साध्वियों को जान से मारने की धमकी दी गयी। लालच भी दिये गये। साध्वियों ने हिम्मत नहीं हारी। इसी बीच सांध्य दैनिक पूरा सच के सम्पादक रामचन्द्र छत्रपति ने साध्वियों के साथ राम रहीम के दुष्कृत्य की पूरी जानकारी प्रकाशित कर दी। इस पत्रकार की हत्या करा दी गयी। सीबीआई की जांच में बाबा को बलात्कार का दोषी पाया गया। उस पर सीबीआई की विशेष अदालत में मुकद्मा चला। बलात्कार का दोषी पाये जाने पर सीबीआई के जज जगदीप सिंह ने बाबा को दोनों आरोपों में दस-दस साल की सजा सुना दी। अब यह राम रहीम से कैदी नम्बर 1977 बन गया है। 
    राम रहीम के इस कांड में पंजाब हरियाणा के उच्च न्यायालय की अभूतपूर्व भूमिका रही। बाबा द्वारा चुनाव में दिये गये सहयोग के अहसान तले दबी हरियाणा सरकार सुसुप्तावस्था में थी। सरकार को भले ही पता नहीं हो, दुनिया जानती थी कि यदि सजा हुई, जिसकी कि प्रबल संभावना थी, तो राम रहीम के गुंड़े जनता की भीड़ में घुस कर उत्पात मचायेंगे। अदालत द्वारा निर्धारित फैसले की तारीख से एक दिन पहले ही पंचकुला में भीड़ जमा होने लगी थी। प्रशासन ने कहने को धारा 144 घोषित की पर आश्चर्य की बात यह है कि उसमें पांच या इससे अधिक व्यक्तियों के इकट्ठा होने पर रोक का कोई उल्लेख नहीं था। शासन के इस तरह के सुस्त रवैये को भांपते हुए और जाट आंदोलन तथा रामपाल की गिरफ्तारी के दौरान सरकार की विफलता से हुई जान-माल की भारी क्षति जैसी इस बार भी आशंका के मद्देनजर हाई कोर्ट ने एक दिन में तीन-तीन बार विशेष बेंच गठित कर खुद ही कानून व्यवस्था को सम्हालने का कार्य किया।

हाई कोर्ट ने सेना बुलाने तथा जरूरत पड़ने पर हर तरह का औचित्य पूर्ण बल प्रयोग करने का आदेश दिया। पंजाब हरियाणा उच्च न्यायालय द्वारा बरती गयी इतनी ऐतिहासिक सतर्कता और सक्रियता के बाद भी भीड़ हिंसा पर उतारू हो गयी। हरियाणा में बत्तीस लोग मारे गये। करोड़ो रूपये की सम्पत्ति नष्ट हुई। उच्च न्यायालय ने एक और सुमोटिव आदेश पारित कर हिंसक घटनाओं में हुए नुकसान की भरपाई राम रहीम के डेरे से करने का आदेश भी दिया। यदि उच्च न्यायालय आगे नहीं आता तो क्या हालत होती। अभी इस पाखंडी बाबा के बहुत से कुकृत्यों का चिट्ठा खुलना बाकी है। सुना है  इसने अपने आश्रम में आलीशान भूतल बनवाया है। जिसे गुफा कहा जाता है। सेवादारों ने इस गुफा से लड़कियों की चीखें सुनी हैं। विचार करने की बात है कि बाबा जो सरकार, कानून, न्याय सबको धत्ता बताता रहा, इतना बड़ा हो गया कि उसे सजा मिलने पर दो सौ से अधिक रेलों की आवाजाही रोकना पड़ी, इंटरनेट सेवा ठप की गयी। बिजली गुल की गयी। हत्या, बलात्कार के ऐसे आरोपियों को हमने भगवान बना दिया। धर्म का धंधा हमारी ही बदौलत फलता-फूलता है। भगवान बने बैठे अधिकांश शातिर अपराधी हैं। भारतीय संस्कृति के पोषक साधु-संत, जो वास्तव में त्याग-तपस्या की प्रतिमूर्ति हैं, व्यर्थ ही ऐसे दुराचारियों की वजह से बदनाम हो रहे हैं।  


 


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