परशुराम संबल. महान् मुगल सम्राट के दरबार में बीरबल उनके नौ रत्नों में से एक थे. बीरबल चतुर और बुद्धिमान तो था ही, हाजि़र जवाबी में भी उसका कोई सानी नहीं था. आज भी उनकी हाजि़र जवाबी और बुद्धिमता के अनेक किस्से मशहूर हैं. एक किस्सा है.

एक बार सम्राट अकबर के दरबार में यह चर्चा चल पड़ी कि राजा और भगवान में क्या अन्तर है? दरबारियों ने अपने-अपने ढंग से भगवान को ही सर्वोपरि बताया.

जब बीरबल की बारी आई तो उसने विपरीत ढंग से अपनी बात कही. कहा-’आप महाराज हैं, आप महान हैं. सच पूछिये तो जो काम भगवान भी नहीं कर सकता, वह काम आप आसानी से कर सकते हैं.‘

यह सभी जानते थे कि बीरबल कभी भी कोई बात गलत नहीं कहता. जो भी वह कहता है, बड़ी सूझबूझ के साथ कहता है लेकिन यह बात तो जगतपिता परमात्मा और एक बादशाह की थी. कहा जाये तो, ’कहां राजा भोज, कहां गगूं तेली‘ वाली बात थी. भगवान की तुलना में बादशाह की बढ़ाई करना भी कुछ ऐसा ही था लेकिन बादशाह की प्रशंसा में बीरबल ने यह कहकर कि जो काम भगवान भी नहीं कर सकता, वह बादशाह कर सकता है, सभी दरबारियों को आश्चर्यचकित कर दिया था. सब के मन में जिज्ञासा पैदा हो गई थी कि वह ऐसा कौन सा काम है जो भगवान के भी बस में नहीं है?

बीरबल की विद्वता और सूझबूझ के कारण बादशाह उसे औरों की अपेक्षा अधिक तरज़ीह देते थे. इसलिये दरबार में जहां बीरबल के हितैषी और प्रंशसक थे, वहीं अनेक दुश्मन भी थे. वे बीरबल से जलते थे और हमेशा इस फिराक में रहते थे कि कब उसे भरे दरबार में नीचा दिखाकर बादशाह की नजरों से गिराया जाये.

उनमें से एक दुश्मन खड़ा हो गया. उसने बादशाह को आदाब किया और बोला-जहांपनाह आप एक महान बादशाह हैं. आपकी कीर्ति चारों तरफ फैली हुई है. आप तारीफ़ के काबिल हैं लेकिन बीरबल ने आपकी तारीफ अल्लाह ताला से बढ़कर की है. भला उससे ऊपर इस दुनिया में कौन हो सकता है? लगता है, ऐसा कहकर एक तरह से बीरबल ने भरे दरबार में हुजूर का मजाक उड़ाया है. बीरबल को अपनी इस उद्दंडता के लिये सजा मिलनी चाहिये. अगर उसकी बात में जरा भी सच्चाई है तो वह इसका प्रमाण देकर साबित करे.‘

वास्तव में बीरबल ने जो कुछ कहा था वह अकबर को भी अच्छा नहीं लगा था. उनकी समझ में यह बात नहीं आई थी कि बीरबल जैसा सयाना और नपी तुली बात कहने वाला आदमी यह कैसे कह रहा है कि जो काम खुदा नहीं कर सकता, वह एक अदना सा बादशाह कर सकता है.

उन्होंने बीरबल से पूछा-’बीरबल! जो काम खुदा नहीं कर सकता, वह काम एक बादशाह कैसे कर सकता है? सबके सामने इस बात साबित करो, नहीं तो मैं समझूंगा कि तुम मुझे बेवकूफ बना रहे हो. तुम्हारी इस धृष्टता के लिये तम्हें सजा भी मिल सकती है.

बीरबल खड़ा हो गया. वह हल्के से मुस्कराया और कहा-’क्षमा हो जहांपनाह. आप एक बादशाह हैं. बादशाह जरूरत पड़ने पर अपने राज्य से किसी को भी देश निकाले की सजा दे सकता है. यह बात तो सही है न हुजूर?‘

’हां, यह सही है.‘‘ अकबर ने बात को स्वीकारते हुए गरदन हिलाकर हामी भरी.

’लेकिन ईश्वर चाह कर भी ऐसा नहीं कर सकता.’’ बीरबल ने कहा.

’क्यों?‘ अकबर ने आश्चर्य से पूछा.

’हुजूर‘, इस संसार का मालिक ईश्वर है. सारा संसार उसका राज्य है. यदि ईश्वर किसी को अपराधी मानकर देश निकाले की सजा दे तो वह ऐसा कर नहीं सकता क्योंकि वह स्वयं भी नहीं जानता कि अपराधी को कहां भेजना है? क्योंकि संसार की सारी सीमाएं तो उसी की हैं. अब आप ही बताइये हुजूर, कि इस सच्चाई से कौन इन्कार करेगा?‘ बीरबल ने कहा.

बादशाह अकबर और उपस्थित दरबारी बीरबल की बात सुनकर वाह-वाह कर उठे. सबने मुक्त कंठ से बीरबल की प्रशंसा की.

दुश्मन बेचारा अपना सा मुंह लेकर चुपचाप बैठ गया. 

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