अनूपपुर. पश्चिमी-उत्तरी एवं पश्चिमी मध्यप्रदेश में टिड्डियों के प्रकोप की समस्या को दृष्टिगत रखते हुए कृषि विभाग के मैदानी अमले एवं राजस्व अधिकारियों को जिले की सीमा में किसी भी प्रकार की प्रकोप की सम्भावनाओं हेतु तैयार रहने के निर्देश शनिवार को कलेक्टर चंद्रमोहन ठाकुर ने दिए है.

उन्होने कहा टिड्डियों के खेतों पर आक्रमण की सूचना तत्काल सम्बंधित अनुविभागीय अधिकारियों राजस्व को कृषि विभाग के कर्मचारियों एवं पंचायतों के माध्यम से टिड्डियों के आक्रमण से लडने के उपाय की तैयारियों को सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं.

उप संचालक कृषि एनडी गुप्ता ने बताया कि प्रदेश के कई भागों में टिड्डी दल के प्रकोप की खबरें प्राप्त हो रही हैं. टिड्डी दल हवा की गति अनुसार लगभग 100-150 कि.मी. प्रति घंटा की गति से उड़ सकती हैं, जो पश्चिम तथा पश्चिम-उत्तरी मध्यप्रदेश में पहुंच चुकी हैं.

टिड्डा, टिड्डी दल फसलों को नुकसान पहुंचाने वाला कीट है जो कि समूह में एक साथ चलता है और बहुत लम्बी-2 दूरियों तक उड़ान भरता है. यह फसल को चबाकर, काटकर खाने से नुकसान पहुंचाता है. उद्यानिकी फसलों, वृक्षों एवं कृषि की फसलों को बहुत बड़े रूप में एक साथ हानि पहुँचा सकता है. उप संचालक ने सभी किसानो से अनुरोध किया है कि सतत निगरानी रखें और टिड्डी दल का प्रकोप होने पर बताई गई विधियों को अपनाकर फसलों का बचाव करें.

भौतिक साधन किसान टोली बनाकर विभिन्न तरह के परम्परागत उपाय जैसे शोर मचाकर तथा ध्वनि वाले यंत्रो को बजाकर, टिड्डियों को डराकर भगा सकते हैं. इसके लिये मांदल, ढोलक, ट्रैक्टर, मोटर साइकिल का सायलेंसर, खाली टीन के डिब्बे, थाली इत्यादि से भी सामूहिक प्रयास से ध्वनि की जा सकती है. ऐसा करने से टिड्डी नीचे नहीं आकर फसलों पर न बैठकर आगे प्रस्थान कर जाते हैं.

रासायनिक नियंत्रण में सुबह से कीटनाशी दवा ट्रेक्टर चलित स्प्रे पंप, पावर स्प्रेयर द्वारा जैसे क्लोरपॉयरीफॉस 20 ईसी 1200 मिली या डेल्टामेथरिन 2.8 ईसी 600 मिली अथवा लेम्डाईलोथिन 5 ईसी 400 मिली, डाईफ्लूबिनज्यूरॉन 25 डब्ल्यूटी 240 ग्राम प्रति हे. 600 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें. किसान सतत निगरानी रखें और टिड्डी दल का प्रकोप होने पर बताई गई विधियों को अपनाकर फसलों का बचाव करें. अगर किसान भाइयों को टिड्डी दल दिखे या उनके बारे में कुछ खबर मिले तो तुरंत निकटतम राजस्व कार्यालय, ग्राम पंचायत में सूचित करें.

सामान्यत: टिड्डी दल का आगमन शाम को लगभग 6 बजे से 8 बजे के मध्य होता है तथा सुबह 7:30 बजे तक दूसरे स्थान पर प्रस्थान करने लगता है. ऐसी स्थिति में टिड्डी का प्रकोप हाने पर तत्काल बचाव के लिये उसी रात्रि में सुबह 3 बजे से लेकर 7.30 बजे तक उक्त विधि से टिड्डी दल का नियंत्रण किया जा सकता है.

आज का दिन : ज्योतिष की नज़र में


जानिए कैसा रहेगा आपका भविष्य


खबर : चर्चा में


************************************************************************************




Disclaimer : इस न्यूज़ पोर्टल को बेहतर बनाने में सहायता करें और किसी खबर या अंश मे कोई गलती हो या सूचना / तथ्य में कोई कमी हो अथवा कोई कॉपीराइट आपत्ति हो तो वह info@palpalindia.com पर सूचित करें। साथ ही साथ पूरी जानकारी तथ्य के साथ दें। जिससे आलेख को सही किया जा सके या हटाया जा सके ।