प्रदीप द्विवेदी. कोरोना संकट के दौरान तत्काल राहत के मामले में राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बेहतर प्रदर्शन किया है, जिसकी प्रशंसा पीएम नरेन्द्र मोदी ने भी की है. वर्तमान में जो राहत प्रदान की जा रही है, उसे लंबे समय तक जारी रखना संभव नहीं है, लिहाजा प्रदेश सरकार को कुछ खास, कुछ अलग ऐसे कार्यों पर ध्यान देना होगा जिनके स्थाई और श्रेष्ठ परिणाम प्राप्त हो सकें.

राजस्थान में बेहिसाब श्रमिक शक्ति है, तो बिजनेस टेलेंट की भी कमी नहीं है, यदि इन्हें पर्याप्त सरकारी समर्थन मिल जाए, तो देश में पहले पायदान पर पहुंचने में राजस्थान को वक्त नहीं लगेगा.

कोरोना संकट के दौरान दक्षिण राजस्थान में सबसे ज्यादा मजदूर अन्य राज्यों से आए हैं. यदि प्रदेश सरकार ने इनके लिए तत्काल कार्य-योजनाएं प्रारंभ नहीं की तो निकट भविष्य में स्थिति अनियंत्रित हो जाएगी.

इन्हें तत्काल तो सीधी सहायता की जरूरत है, परन्तु इसे लंबे समय तक जारी रखना संभव नहीं है, इसलिए कुछ विशेष कार्य-योजनाओं को शुरू करना होगा.

एक- दक्षिण राजस्थान में कुछ क्षेत्र सिंचित क्षेत्र हैं, तो कुछ क्षेत्र असिंचित. सिंचित क्षेत्र में खेती के विस्तार की योजनाओं पर ध्यान देने की जरूरत है. ज्यादातर आदिवासी युवा तो खेती-किसानी जानते हैं, लेकिन शेष वर्ग के युवाओं को इसका प्रायोगिक प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए, जिसके लिए सरकारी स्कूलों, प्राइवेट स्कूलों में कृषि विद्यालय प्रारंभ किए जा सकते हैं. बांसवाड़ा में सिंचित और असिंचित क्षेत्र की सीमा बागीदौरा में कृषि विश्वविद्यालय स्थापित किया जाना चाहिए. जिन युवाओं के पास खेती योग्य जमीन नहीं है, उन्हें सरकारी स्तर पर निवास के करीब खेती योग्य जमीन आवंटित की जानी चाहिए. महिलाओं को घर में सब्जियां उगाने का, पौधरोपण का प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए. कुछ समय बाद ही बरसात आने वाली है, ऐसे में यह प्रशिक्षण जीवन उपयोगी साबित होगा.

दो- असिंचित क्षेत्र में ऐसे उद्योग स्थापित करने की जरूरत है, जहां स्थानीय पैदावार से व्यवसायिक प्रोडक्ट तैयार किए जा सकें. खेती की मशीनों, उपकरणों के कारखाने भी स्थापित हो सकते हैं. सोलर एनर्जी पर आधारित उद्योगों को स्थापित करने की जरूरत है तथा कुशलगढ़ जैसे क्षेत्र में सोलर एनर्जी विद्यालय, विश्वविद्यालय स्थापित करने की जरूरत है.

असिंचित क्षेत्र में अधिक-से-अधिक वाटर हार्वेस्टिंग स्ट्रक्चर बनाने की जरूरत है, ताकि जमीन का जलस्तर बढ़े और भविष्य में असिंचित क्षेत्र में पौधरोपण जैसे कार्य कामयाब हो सकें.

तीन- दक्षिण राजस्थान में बंद पड़े बड़े उद्योग सरकार अपने हाथ में ले, यदि उद्योग प्रारंभ हो सके तो ठीक, अन्यथा इनका उपयोग अन्य उद्योग के लिए किया जाए.

चार- वर्तमान में जो उद्योग चल रहे हैं, सरकार उनके प्रबंधन से बातचीत करे और विस्तार की योजना में सहयोग प्रदान करे, ताकि स्थानीय मजदूरों को रोजगार के लिए अन्य राज्यों में नहीं जाना पड़े.

पांच- अस्थाई राहत के बजाय, माही परियोजना जैसे स्थाई समृद्धि के कार्यों पर ध्यान देने की आवश्यकता है. माही परियोजना ने साबित किया है कि इच्छाशक्ति हो तो, कालापानी को भी धरती के स्वर्ग में बदला जा सकता है.

छह- बांसवाड़ा में फिल्म सिटी स्थापित की जा सकती है. इसके लिए ज्यादा प्रयास की जरूरत भी नहीं है. माही काॅलोनी पहले से बनी हुई है, आउट डोर शूटिंग के लिए अनेक स्थान हैं, तो मुंबई के मुकाबले केवल दस प्रतिशत लागत में फिल्म तैयार हो सकती है. और हां, सोशल डिस्टेंसिंग का भी इश्यू नहीं है, क्योंकि जनसंख्या घनत्व अपेक्षाकृत बहुत कम है?

उद्योगों के विकेन्द्रीकरण और इनमें स्थानीय श्रमिकों के योगदान से ही देश फिर से खड़ा हो सकता है!

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