जबलपुर. कोरोना महामारी के बीच अपने घरों से दूर रोजी-रोजगार के लिए गये श्रमिकों को वापस अपने गृह राज्य पहुंचाने के लिए चलाई जा रही श्रमिक स्पेशल ट्रेन खतरे के साये में दौड़ रही है. इस ट्रेन व सैकड़ों यात्रियों को सकुशल पहुंचाने की जिम्मेदारी जिन लोको पायलेट (ड्राइवर) व सहायक लोको पायलेट पर है, वे जबर्दस्त तनाव व थकान में ट्रेन चलाने मजबूर हो रहे हैं. पिछले एक सप्ताह में ही एक दर्जन से ऐसे मामले सामने आये हैं, जिसमें इन चालकों को 15 से 20 घंटे तक ड्यूटी करना पड़ रही है. दुर्भाग्य की बात यह है जब चालक दल इसकी सूचना वरिष्ठ अधिकारियों को देते हैं तो उन्हें अनुशासनात्मक कार्रवाई का भय दिखाकर ट्रेन को चलाते रहने का जबरिया दबाव बनाया जा रहा है.

पश्चिम मध्य रेलवे के जबलपुर रेल मंडल में श्रमिक स्पेशल ट्रेन के यात्रियों के साथ-साथ रेल संपत्ति व चालक दल की सुरक्षा व संरक्षा को इन दिनों रेल प्रशासन के असंवेदनशील रवैये से खतरे में पड़ गया है. पिछले कुछ दिनों में ऐसे कई गंभीर मामले सामने आये हैं, जिसमें रेलवे बोर्ड के रेल संचालन के संरक्षा से संबंधित नियम-कायदों को धता बताते हुए 8 से 10 घंटा तक ट्रेन चलवाने की बजाय 15 से 20 घंटे तक ट्रेन चलवाया जा रहा है, जिससे रेल कर्मचारियों के साथ-साथ यात्रियों की जान को भी जबर्दस्त खतरा उत्पन्न हो गया है.

जबलपुर से सतना पहुंचने में 8 से 10 घंटा लग रहा

बताया जाता है कि अधिकांश श्रमिक स्पेशल ट्रेनों को जबलपुर से सतना तक पहुंचने में ही 8 से 10 घंटा हो रहा है, जब चालक दल मेमो देकर सतना में रिलीव करने की मांग कर रहा है तो उसे इलाहाबाद छिवकी तक ट्रेन को ले जाने के लिए दबाव डाला जा रहा है और ट्रेन चलाने मजबूर किया जा रहा है.

स्टेशन की बजाय आउटर में रोक रहे ट्रेन

कई रेल चालकों ने बताया कि ट्रेन में परेशान श्रमिक यात्रा कर रहे हैं. यात्रा के दौरान इन ट्रेनों को स्टेशनों की बजाय आउटर में ही काफी देर तक रोक दिया जा रहा है. यह इसलिए ताकि स्टेशन के स्टाफ को कोरोना संकट में कोई परेशानी नहीं हो, आउटर में ट्रेन खड़ा रखने से यात्री चालक दल को परेशान करते हैं और सोशल डिस्टेेंसिंग का उल्लंघन कर रहे हैं, ऐसे में रेल चालकों में भी कोरोना संक्रमण फैल सकता है.

यह है वह मामले, जिसमें अधिक घंटे ड्यूटी की हुई शिकायत

- गाड़ी संख्या 01918, 21 मई, जिसमें चालक दल ने सुबह 5.45 बजे साइन आन किया, यह ट्रेन लगभग 4 बजे अपरान्ह सतना पहुंची. यानी लगभग 10 घंटे तो सतना पहुंचने में ही लगे, जबकि ट्रेन को इलाहाबाद छिवकी तक ले जाने का दबाव बनाया गया.

- गाड़ी संख्या 09435, 21 मई 2020 का चालक दल तड़के 2.25 बजे साइन आन किया, यह ट्रेन अपरान्ह 3.30 बजे तक मानिकपुर नहीं पहुंची थी, यानी चालक दल लगातार 12 घंटे से ज्यादा ड्यूटी पर था और उसे इलाहाबाद तक गाड़ी पहुंचाना है.

- गाड़ी संख्या 09437, 21 मई 2020, के चालक दल ने सुबह 4.35 बजे साइन आन किया और यह ट्रेन अपरान्ह 4 बजे के लगभग चितहरा स्टेशन पर पहुंची थी, 11.30 घंटे चालक दल को हो चुका था और ट्रेन इलाहाबाद तक ले जाना था. इन ट्रेनों के अलावा ऐसे और मामले इसी तरह के हैं, जिसमें चालक दल बीच रास्ते में फंसे हैं, जहां पर उनकी ड्यूटी निर्धारित घंटा से अधिक हो चुकी है.

भूखे-प्यासे, नित्यक्रिया को परेशान स्टाफ

कोरोना महामारी के बीच श्रमिकों को लगातार उनके घरों तक पहुंचाने के लिए रेलवे के यह चालक दल कोरोना वारियर्स की भूमिका बखूबी निभा रहा है, लेकिन अधिकारी इस बात को शायद भूल गये हैं कि वे भी इंसान है और वे भी लगातार ड्यूटी करते-करते थक सकते हैं और वह भी 15 से 20 घंटे तक तनाव में नौकरी करना, बिना खाये, पीने को ठंडा पानी तक नहीं मिल पा रहा है. यही नहीं नित्य क्रिया के लिए भी समय नहीं दिया जा रहा है.

इनका कहना...

- लोको पायलट, सहायक लोको पायलट, गार्ड के ओवर ऑवर्स ड्यूटी कराने की घटना पिछले कुछ समय से लगातार बढ़ती जा रही है. थकावट व तनाव में कोई बड़ा हादसा भी हो सकता है. इस मामले को वेस्ट सेंट्रल रेलवे एम्पलाइज यूनियन ने डीआरएम के समक्ष उठाया है, किंतु डीआरएम ने इस मामले को गंभीरता से नहीं लिया है.

-नवीन लिटोरिया, मंडल सचिव, डबलूसीआरईयू, जबलपुर.

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