नया घर खरीदने या बनवाने पर हर घर में वास्तु शांति करवाई जाती है. वास्तु शांति वास्तुदेवता की प्रसन्नता के लिए करवाई जाती है. इस बात के पीछे यह मान्यता है कि जमीन के किसी हिस्से पर जब भी कोई निर्माण करवाया जाता है तो उस जमीन पर निवास कर रहीं शक्तियां जाग जाती हैं. ये शक्तियां ही वास्तु पुरुष हैं. वास्तु पुरुष देवता के शरीर पर ही 33 कोटि देवता का वास होता है. इन्हीं देवताओं की प्रसन्नता के लिए वास्तु पूजन किया जाता है ताकि ये सभी देवता खुश रहें और हमारे जीवन में खुशियां बिखरें.

नए घर में क्यों ज्यादा प्रभावित कर सकता है वास्तु

किसी भी नए घर में वास्तु पूजन का महत्त्व पुराने घर से कई गुना अधिक होता है, क्योंकि यह माना जाता है कि वास्तु पुरुष को जो भी कष्ट मिलता है, उसका बदला वह उस घर में निवास करने वाले सदस्यों से पहले साल में ही वसूल कर लेता है. जिस प्रकार से कोई भी जख्म भरने में समय लगता है. उसी प्रकार से वास्तु पुरुष को मिलें कष्ट भी मिटने में समय लगता है. किसी भी जगह पर किया निर्माण साल भर तक वास्तु पुरुष को बेचैन रखता है. जिससे वास्तु पुरुष की नींद में खलल पड़ती है. नींद से जागे वास्तु पुरुष को भूख अधिक लगती है. वास्तु पुरुष की भूख को मिटाने के लिए ही हवन किया जाना चाहिए. यही कारण है कि भूमि पूजन के समय भी नारियल फोड़कर उसका प्रसाद वास्तु पुरुष को भोजन स्वरुप दिया जाता है.

मतस्य पुराण में वास्तु पुरुष के जन्म के विषय में एक कहानी दी गई है.

जिसके अनुसार अंधकासुर नामक राक्षस को मारने के लिए भगवान शंकर को उससे युद्ध करना पड़ा. शिव के उस राक्षस को मारते ही उनके माथे से पसीने की कुछ बूंदे गिरीं. इन बूंदो से एक बड़े आकार का पुरुष की तरह दिखाई देने वाला जीव पैदा हुआ. यह जीव अंधकासुर के जमीन पर फैले हुए खून को पीने लगा. जब अंधकासुर के खून से उसकी भूख नहीं मिटीं. तब उसने शिव के पास जाकर तीनों लोेेकों (देवलोक, पृथ्वीलोक, आकाशलोक) को खाने की इच्छा जाहिर कीं.

उस जीव ने अंधकासुर के सफाया में शिव की मदद की थीं. इसलिए शिव ने उसे इच्छा पूरी कर लेने की अनुमति दे दी. तब वह जीव देवलोक और आकाश को लांघकर पृथ्वीलोक पर आ पहुुंचा. तीनों लोको के सफाये से घबराए देवताओं ने उस जीव को जोर का धक्का दिया. तब वह जीव पृथ्वी पर ओंधे मुहं गिर पड़ा. वह जीव जिस तरह से जमीन पर गिरा था. उसे उसी स्थिति में सभी देवताओं और राक्षसों ने मिलकर दबोच दिया और उस पर बैठ गए. उस जीव का मुंह पूरी तरह से जमीन में दबा हुआ था. जिसके कारण उसे घुटन होने लगीं. सभी देवताओं ने उसे इतनी बुरी तरह जकड़ा हुआ था कि वह जरा भी हिल नहीं पा रहा था. देवताओं के उस जीव के शरीर पर वास हो जाने के कारण ही उसका नाम वास्तु पड़ा.

उस वास्तु पुरुष ने देवताओं से निवेदन किया कि आप इस तरह से मुझे दबोचे हो कि मैं हिल भी नहीं पा रहा हूं.

तब उसके निवेदन से खुश होकर ब्रह्मा आदि सभी देवताओं ने उसे वरदान दिया कि तुम जिस स्थिति में अभी हो, उसी स्थिति में तुम्हारा शरीर इसी धरती पर वास करेगा. हम सभी देवताओं का तुम्हारे शरीर पर वास रहेगा. जब भी कोई इंसान इस पृथ्वी पर अपना आवास बनाऐंगे. उस आवास में निवास करने से पहले उसे हम सभी देवताओं सहित तुम्हारी पूजन करना जरुरी होगा.

वास्तु पूजन के अंत में और बलि वैश्वेदेव के पूजन में जो बलि दी जाएगी वह तुम्हारा भोजन होगी. वास्तुपूजन के अंत में जो यज्ञ किया जाएगा. वह भी भोजन के रूप में तुम्हें प्राप्त होगा. नए घर के बनने पर जो इंसान वास्तु पूजन नहीं करेंगे, उनके द्वारा अनजाने में ही घर में किए गए किसी भी यज्ञ या होम व आहूति का भाग तुम्हें जरुर मिलेगा.

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