दसवे_भाव_मे_राजयोग_का_फल,                                    
राजयोग का बनना एक आम बात है.

लेकिन राजयोग किस तरह से और किस भाव मे ,किन भावो के स्वामियों द्वारा कितनी बलवान और शुभ स्थिति में बन रहा हैं यह राजयोग के लिए महत्वपूर्ण होता है.

जब केंद्र और त्रिकोण के स्वामी आपस मे युति/दृष्टि या राशि परिवर्तन संबंध बनाते है तब राजयोग बनता है.अब यहाँ विषय है जब राजयोग बने और वह दसवे भाव मे बनता है तब ऐसा राजयोग महाराजयोग होता है क्योंकि राजयोग का मतलब है सफलता, तरक्की, आर्थिक उन्नति, सुख, नाम,इज्जत एक उच्च स्तरीय और भोतिक रूप से संपन्न जीवन जीना.कुंडली का दसवा भाव भी उच्च पद, प्रतिष्ठा, सम्मान और राजयोग देने वाला भाव है.जब दो या दो से ज्यादा ग्रह संबंध बनाकर दसवे भाव मे बैठते है चाहे वह युति संबंध हो या दृष्टि संबंध हो तब जातक को अच्छी सफलता और राजयोग का ज्यादा से ज्यादा लाभ मिलता है क्योंकि यही भाव इंसान सामाजिक इज्जत, रुतवा, पहचान, उच्च स्तरीय नोकरी, अधिकार आदि देता है और जब इस भाव मे केंद्र त्रिकोण भावों के स्वामी राजयोग बनाकर बैठेंगे तब इससे अच्छी स्थिति और कोई नही हो सकती.हालांकि दशमः भाव मे राजयोग किस्मत वालो की कुंडली मे बनता है.1,4,5,7,9,10 भावों के स्वामी का युति दृष्टि संबंध दसवे भाव मे प्रबल से प्रबल राजयोग देगा.राजयोग बनाने वाले ग्रहो में कोई भी अस्त, नीच राशि का न हो(अगर नीचभंग हो गया हो तब दिक्कत नही है) पीड़ित न हो, बहुत ज्यादा नैसर्गिक अशुभ योग ऐसे राजयोग कारक ग्रह न बनाते हो तब यह राजयोग जो दशमः भाव मे बनेगा काफी तरक्की देगा...

हरण_अनुसार1:- मेष लग्न में दशम भाव मे सूर्य(पंचमेश) मंगल(लग्नेश) शुक्र(सप्तमेश) का युति या दृष्टि संबध सर्वश्रेष्ठ राजयोग भोगने को देगा.इस स्थिति में यह राजयोग मेष लग्न के दशम भाव मे शनि की राशि मे बनेगा.इस कारण शनि भी दशमेश होने के कारण कही न कही बलवान होना जरूरी होगा..

उदाहरण2:- कुम्भ लग्न कुंडली मे दशम भाव मे लग्नेश शनि पंचमेश बुध और चतुर्थेश नवमेश शुक्र का युति या दृष्टि संबंध दसवे भाव मे काफी बड़ा राजयोग देगा.इसी तरह यही कुम्भ लग्न में पंचमेश बुध, सप्तमेश सूर्य और चतुर्थेश-नवमेश योगकारक शुक्र का संबंध बलवान राजयोग होगा इसमे मंगल संबंध बना ले जो कि दशमेश है तब उससे ज्यादा बढ़िया स्थिति कुछ हो ही नही सकती..

उदाहरण3:- सिंह लग्न में दशमेश शुक्र, पंचमेश गुरु और योगकारक मंगल का संबंध+सूर्य का भी साथ बैठकर संबंध बना लेना बहुत प्रबल राजयोग देगा..

इस तरह से कोई भी केंद्र और त्रिकोण स्वामी ग्रहो का संबंध हो पर यदि वह दसवे भाव मे बलवान और शुभ स्थिति में बनता है तब एक तो ऐसे जातक प्रबल भाग्यशाली होते है और राजा के समान जीवन जीते है.अधिकार, तरक्की सफलता,उच्च स्तरीय जीवन आदि इस तरह से दसवे भाव मे बनने वाले राजयोग से ऐसे जातक/जातिकाओ को प्राप्त होता है.

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