मथुरा. कोरोना संक्रमण की अवधि के बारे में देश के ज्योतिषाचार्यों में मतभेद है जहां कुछ ज्योतिषाचार्य कहते हैं कि कोरोना वायरस का संक्रमण सितंबर तक चलेगा वहीं अन्य का मानना है कि कोरोना वायरस  का संक्रमण 30 जून तक ही चलेगा. वैश्विक महामारी कोविड-19 अब पूरे भारत में अब अपने पैर जमा चुका है. इससे निपटने के लिए ज्यों ज्यों सरकार लॉकडाउन बढ़ाती जा रही है त्यों त्यों लोगों के धैर्य का बांध तो टूटने लगा है. बीमारी का इतना डर है कि जहां छूट भी दी गई है वहां अधिकांश लोग घर से नही निकल रहे हैं. 

इस संबंध देश के मंगलवार को चुनिन्दा ज्योतिषाचार्यों  ने अलग अलग राय है. ज्योतिषाचार्यों में इस मामले में एकरूपता नही है. अधिकांश ज्योतिषाचार्यो का आकलन है कि कोरोना संक्रमण की संख्या तो बढ़ेगी पर मृत्यु दर बहुत कम होगी. मुम्बई की ज्योतिषाचार्य यामिनी विमल भोजक ने बताया कि कोरोना वायरस के प्रकोप के कारण जून तक स्थिति ज्यादा खराब हो सकती है. अगस्त से कुछ राहत मिल सकती है. उन्होंने स्पष्ट कहा कि ऊपरवाले की मेहरबानी हो जाय वह अलग बात है पर अभी स्थिति ठीक नही है. उनका कहना था कि प्रलय का लाना और उसका मिटाना ऊपरवाले के ही हाथ में है इसलिए कोरोना के प्रकोप को रोकने या कम करने के लिए सभी कों प्रभु की आराधना करनी चाहिए.

इस संबंध में जयपुर के ज्योतिषाचार्य केदार शर्मा का कहना है कि कोरोना वायरस 30 जून तक चलेगा. उनका कहना था कि शनि और ब्रहस्पति बदलेंगे पर गृह भारत की अर्थव्यवस्था पर प्रभाव नही डालेंगे और नरेन्द्र मोदी के गृह प्रबल होने के कारण वे ’’वर्ल्ड लीडर ’ के रूप में उभरेंगे.

मथुरा के ज्योतिषाचार्य पवन निशांत का मानना है कि 26 मई से कोरोना के मामले और बढ़ेंगे तथा दस जून के बाद इनमें बहुत अधिक तेजी आएगी. उनका कहना था कि सितम्बर से पहले कोरोना से निजात मिलने की इसलिए संभावना नही है कि सभी छह ग्रह वक्रीय हो गए हैं.

दिल्ली के ज्योतिषाचार्य अजय भाम्बी के अनुसार यह बीमारी जुलाई से नियंत्रण में आएगी लेकिन पूरी तरह से सितम्बर मे ही नियंत्रण में होगी. उन्होंने बताया कि मनुष्य ने पृथी, पहाड, स्पेस, समुद्र, चन्द्रमा तथा अन्य गृहों के साथ जो छेड़खानी की है प्रकृति उसका बदला ले रही है.वास्तव में युग परिवर्तन हो रहा है.

द्वारकाधीश मंदिर मथुरा के मशहूर ज्योतिषाचार्य अजय तैलंग ने बताया कि कोरोना वायरस का प्रकोप 20 मई के बाद बढ़ेगा जो जुलाई तक चल सकता है क्योंकि  गृह शनि, मंगल, गुरू, शुक्र, बुध एवं राहु  वक्रीय चल रहे हैं. सावन मे दिक्कत आ सकती है. उन्होंने बताया कि 23 सितम्बर के बाद स्थिति में सुधार आएगा तथा वैक्सीन भी बन सकती है क्योंकि गृहों के सही स्थिति में आने पर दिमाग भी नई खोज के लिए काम करने लगेगा.

जोधपुर के मशहूर ज्योतषाचार्य रमेश द्विवेदी ने बताया कि 26 दिसम्बर को छह ग्रहो बुद्ध, वृहस्पति, शनि, केतु, सूर्य , चन्द्र एवं उसी दिन ग्रहण के पड़ने के कारण भारत में कोरोना का संक्रमण शुरू हुआ. उ्रन्होंने बताया कि कोरोना का प्रभाव आगे और तेज होगा किंतु मृत्यु दर अधिक नही होगी. उन्होंने बताया कि 30 जून के बाद ब्रहस्पति वक्रगति में चलायमान होकर धनुर राशि में प्रवेश करेंगे इसलिए इसके बाद कोरोना का असर कम होने लगेगा. बृहस्पति औषधि के कारक हैं इसलिए इस तिथि के बाद इस रोग की न केवल औषधि खोज ली जाएगी बल्कि वैक्सीन भी निकल आएगी.

वृन्दावन के युवा ज्योतिषाचार्य विभू शर्मा के अनुसार तीस जून के बाद कोरोनावायरस के संक्रमण से कुछ राहत मिल सकती है. उनका मानना है कि इस महामारी से संक्रमित लोगों की संख्या तो बढ़ सकती है लेकिन मृत्यु दर बहुत कम होगी. उन्होंने कहा कि गृहो के अच्छे और खराब प्रभाव का असर पड़ना लाजमी है इस संबंध में उन्होंने कहा कि ’’मुनि वशिष्ठ से पंडित ज्ञानी शोध के लगन धरी. सीता हरण मरण दशरथ कौ वन में विपत्ति परी.’’इसलिए वर्तमान में सत्कर्म ही इसका इलाज है.

ग्वालियर के ज्योतिषाचार्य डॉ0 रमेश वायगांवकर के अनुसार 30 जून तक वर्तमान स्थिति चलेगी उसके बाद कुछ कमी आएगी किंतु सितम्बर के अंत से काफी सुधार हो जाएगा . उनका मानना है कि करोना से पूरी तरह से निजात दो साल में मिलेगी. कुल मिलाकर सभी ज्योतिषाचार्य यह मान रहे हैं कि अभी स्थिति कुछ और खराब हो सकती है इसलिए सभी को अपने खानपान एव स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देना चाहिए क्योंकि वर्तमान में गृह किसी के अनुकूल नही है.

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