संयुक्त राष्ट्र. चार भारतीय कंपनियां उन 150 वैश्विक निगमों में शामिल हैं, जिन्होंने दुनिया भर की सरकारों से अपील की है कि वे अपने कोविड-19 आर्थिक प्रोत्साहनों और सुधार के प्रयासों को जलवायु विज्ञान के साथ जोड़ें, ताकि ‘हरित अर्थव्यवस्था’ (ग्रीन इकनॉमी) की ओर तेजी से बढ़ा जा सके. ग्रीन इकनॉमी का आशय ऐसी व्यवस्था से है, जहां पर्यावरण को बिल्कुल नहीं या कम से कम नुकसान हो. डालमिया सीमेंट (भारत) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी महेंद्र सिंघी, पॉलीजेंटा टेक्नालॉजीज के मुख्य विपणन अधिकारी मकरंद कुलकर्णी, टेक महिंद्रा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सी पी गुरनानी और विप्रो के मुख्य कार्यकारी अधिकारी आबिद अली नीमचवाला ने इस बयान पर हस्ताक्षर किए हैं.

उनके अलावा इस बयान पर 33 देशों के 34 क्षेत्रों के शीर्ष कार्यपालकों ने हस्ताक्षर किए हैं. इस बयान पर हस्ताक्षर करने वाली कंपनियों में वैश्विक फार्मा कंपनी नोवार्टिस, एडोब, एस्ट्राजेनेका, बरबेरी, कैपजेमिनी, कोलगेट पामोलिव और हेवलेट शामिल हैं. यह बयान संयुक्त राष्ट्र द्वारा समर्थित प्रयासों का हिस्सा है और इसमें 155 कंपनियों के हस्ताक्षर हैं, जिनका कुल बाजार पूंजीकरण 2400 अरब डॉलर से अधिक है और इनके यहां 50 लाख से अधिक कर्मचारी काम करते हैं.

संयुक्त बयान में कहा गया, ‘‘विभिन्न देश कोविड-19 का मुकाबला करने के लिए आर्थिक सहायता और सुधार पैकेज पर काम कर रहे हैं, और जैसा कि वे पेरिस समझौते के तहत बढ़ी हुई राष्ट्रीय जलवायु योजनाओं को लागू करने की तैयारी कर रहे हैं, हम सरकारों से आह्वान करते हैं कि वे साहसी जलवायु कार्रवाई के जरिए बेहतर भविष्य के निर्माण के लिए काम करें.

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