काठमांडू. भारत और नेपाल के बीच लिंपियाधुरा, लिपुलेख और कालापानी को लेकर विवाद और गहराता जा रहा है. नेपाल का नया नक्शा जारी करने के एक दिन बाद नेपाली प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने संसद में भारत पर सिंहमेव जयते का तंज कसा. ओली ने इशारों ही इशारों में भारत पर ताकत का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया और कहा कि भारत के राजचिन्ह में सत्यमेव जयते लिखा हुआ है या सिंहमेव जयते.

दरअसल ओली कहना चाहते थे कि भारत सत्य की जीत चाहता है या सिंह (ताकत) की जीत चाहता है. नेपाली प्रधानमंत्री ने कहा कि उनका मानना है कि सत्यमेव जयते होगा. ओली ने कहा कि भारत के साथ दोस्ती को गाढ़ा करने के लिए ऐतिहासिक गलतफहमियों को दूर करना जरूरी है. उन्होंने कहा कि नेपाल ने चीन के साथ अपनी स्थिति को भी स्पष्ट किया है.

ओली ने संसद को बताया कि उन्होंने भारत सरकार से सीमा विवाद का मुद्दा उठाया है. पीएम ने यह भी कहा कि उन्होंने किसी के दबाव में यह मुद्दा भारत के साथ नहीं उठाया है. उन्होंने कहा कि नेपाल केवल अपनी जमीन पर दावा कर रहा है. हमारी सरकार केवल देश के लोगों की भावनाओं का प्रतिनिधित्व कर रही है. इससे पहले भारतीय सेना प्रमुख ने कहा था कि ऐसा लगता है कि नेपाल किसी तीसरे पक्ष के इशारे पर लिंपियाधुरा, लिपुलेख और कालापानी का मुद्दा उठा रहा है.

लिपुलेख हमारा है और हम उसे वापस लेकर रहेंगे

ओली ने कहा कि कालापानी, लिंपियाधुरा और लिपुलेख हमारा है और हम उसे वापस लेकर रहेंगे. उन्होंने आरोप लगाया कि भारत ने अपनी सेना इन जगहों पर रखकर उसे विवादित इलाका बना दिया. उन्होंने कहा, भारत के सेना तैनात करने के बाद वहां पर नेपाली लोगों का जाना रोक दिया गया. उन्होंने कहा कि भारत ने वर्ष 1960 के दशक में सेना को तैनात किया था.

इससे पहले पड़ोसी देश नेपाल ने अपना नया मैप जारी करने का ऐलान किया था. इसमें कम से कम तीन इलाके ऐसे होंगे, जो भारतीय सीमा में आते हैं. सोमवार को प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के नेतृत्व में कैबिनेट की बैठक के दौरान इस मैप को मंजूरी दी गई. इसके मुताबिक, लिंपियाधुरा, लिपुलेख और कालापानी नेपाल में हैं, जबकि ये इलाके भारत में आते हैं. कैबिनेट से प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद नेपाल की राष्ट्रपति बिद्या देवी भंडारी ने कहा, लिंपियाधुरा, लिपुलेख और कालापानी इलाके नेपाल में आते हैं और इन इलाकों को वापस पाने के लिए मजबूत कूटनीतिक कदम उठाए जाएंगे. नेपाल के सभी इलाकों को दिखाते हुए एक आधिकारिक मानचित्र जारी होगा.

नेपाल और भारत के रिश्तों में दरार

पिछले दिनों धारचूला से लिपुलेख तक नई रोड का रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की ओर से उद्घाटन किया गया था. इस रोड पर काठमांडू ने आपत्ति जताई है. इस रोड से कैलाश मानसरोवर जाने वाले तीर्थयात्रियों की दूरी कम हो जाएगी. नेपाल के विदेश मंत्री प्रदीप कुमार ग्यावली ने भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा को तलब कर लिया था.

भारत ने दिया था साफ जवाब

जवाब में भारत ने अपनी पोजिशन साफ करते हुए कह था कि उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में हाल ही बनी रोड पूरी तरह भारत के इलाके में हैं. ग्यावली ने सोमवार को एक ट्वीट में जानकारी दी कि कैबिनेट ने 7 प्रान्त, 77 जिलों और 753 स्थानीय निकायों वाले नेपाल का नक्शा प्रकाशित करने का निर्णय लिया है. इसमें लिंपियाधुरा, लिपुलेक और कालापानी भी होंगे.

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