बीजिंग. चीन लगातार एवरेस्ट पर अपना कब्जा दिखाने की कोशिश में लगा हुआ है. चीन के सरकारी टीवी चैनल ने एवरेस्ट की तस्वीरें शेयर कर कहा था कि वह हमारा हिस्सा है. जिसका नेपाल ने कड़ा विरोध जताया था लेकिन अब एकबार फिर चीन की सरकारी एजेंसी सिन्हुआ ने एवरेस्ट की तस्वीर शेयर कर अपने नापाक इरादे जाहिर कर दिए हैं.

एवरेस्ट की ऊंचाई मापने भेजी टीम

चीन की एक टीम एवरेस्ट की ऊंचाई मापने निकली है जो कि 22 मई को 6500 मीटर की ऊंचाई वाले ऐडवांस कैम्प पहुंच जाएगी. उधर, नेपाल माउंट एवरेस्ट की ऊंचाई को फिर से मापने के लिए सरकार द्वारा नियुक्त पर्वतारोहियों का एक दल वहां भेजा था.

चीन के दावे पर विशेषज्ञों की यह है राय

विशेषज्ञों के मुताबिक तिब्बत और नेपाल के बीच एवरेस्ट आधा-आधा बंटा हुआ है. दरअसल, 1960 में सीमा विवाद के समाधान के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे. इसके मुताबिक माउंट एवरेस्ट को दो हिस्सों में बांटा जाएगा. इसका दक्षिणी हिस्सा नेपाल के पास रहेगा जबकि उत्तरी हिस्सा तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र के पास होगा. तिब्बत पर चीन का कब्जा है.

चीन के दावे में नहीं है कोई नई बात

क्या चीन का यह दावा नया है. इस पर जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में चाइनीज स्टडीज के प्राेफेसर श्रीकांत कोंडापल्ली ने कहा, ‘इसमें कोई नई बात नहीं है. चीन तिब्बत और एवरेस्ट पर अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रहा है.’

दावे के पीछे यह है चाल

चीन पूरे एवरेस्ट पर दावा ठोक रहा है और वह वहां 5जी नेटवर्क स्थापित किया है. विशेषज्ञों का कहना है कि यह एक विवादास्पद कदम है क्योंकि इससे पूरा हिमालय उसकी जद में आ सकता है. इस 5जी नेटवर्क का सैन्य पहलू भी है क्योंकि इसे समुद्र की सतह से 8,000 मीटर की ऊंचाई पर स्थापित किया गया है. इससे चीन भारत, बांग्लादेश और म्यांमार पर नजर रख सकता है.

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