शनिदेव को न्याय का देवता कहा जाता है, जब वे किसी राशि पर जाते है तो उस राशि को शनि की साडे साती लग जाती है,यह समय उस राशि के लिए अग्नि परिक्षा का समय रहता है, जिस राशि की जैसी प्रकृति रहती है, शनिदेव उसकी वैसी ही परिक्षा लेते है, जैसे कर्क राशि पर साडे साती हो तो जातक के मन की परिक्षा होती है, सिंह राशि पर हो तो जातक के अहंकार, मान, सम्मान की परिक्षा ली जाती है,व्रिश्चिक राशि हो तो जातक के बल, युद्ध, मुकदमे लड़ाई झगड़े आदि मे जातक को कठिन समय गुजारना पड़ता है,इसी तरह मिथुन राशि मे शनि जातक के संयम और विवेक की परिक्षा लेते है,वही शुक्र प्रधान राशि मे शनि को साढेसाती हो तो जातक को अपने प्रेम की परिक्षा देनी पड़ती है,गुरु प्रधान राशि मे शनि जातक के ज्ञान की परिक्षा होती है. 

*वर्तमान मे शनि का खुद राशि से भ्रमण* वर्तमान समय मे शनिदेव अपनी खुद की राशि मकर मे भ्रमण कर रहे है, आगे वे कुंभ राशि मे भ्रमण मे करेंगे, जो उनकी खुद की राशि है,शनिदेव सीमेंट,तेल,पेट्रोलियम,लोहा

निर्माण, मजदूर वर्ग का नेतृत्व करते है, मकर राशि काल पुरुष की कर्म की राशि है, वर्तमान मे शनिदेव की साडे साती का मध्यकाल इसी राशि पर है, इसिलिए शनिग्रह से जुड़ी सभी चीजे जैसे मजदूर, सभी प्रकार के नौकरी पेशा वर्ग, उद्योग धंधों की बहुत बुरी हालत है,मजदूरों पर तो कहर टूट पड़ा है ये स्थिति विश्व व्यापी है. 

*तेल उद्योग की हालत बदतर हो गई है

पहले ऐसा विचार आता था की यदि तेल नही होगा तो क्या होगा, आज तेल उद्योग की हालत खराब है. 

*पश्चिम देशो मे बर्बादी के हालत है, कोरोना के कहर से सबसे ज्यादा बुरे और बदतर हालत पश्चिम देशो की है पश्चिम दिशा शनिदेव की मानी जाती है,मशीनीकरण के जनक पश्चिम देश ही है,नौकरी और उद्योग धंधों से चमन रहने वाला पश्चिमी जगत आज वीरान पड़ा है,तेल के रेट शून्य से भी नीचे चला गया है. 

*कोरोना से मरने वाले 90% लोग पश्चिम देशों के ही है,शनि ग्रह की मुख्य नगरी अमेरिका पर शनि का सबसे ज्यादा कहर है,ऐसा लगता है अमेरिका और यूरोप देशो को शनि की साडे साती का मध्यकाल चल रहा है. 

*डॉक्टर और पुलिस को शनिग्रह् का परम कारक माना गया है,आज सबसे ज्यादा पीड़ित यही लोग है. 

*शनि महाराज को शमशान घाट का कारक माना जाता है आज ये स्थान आबाद है. 

*वर्तमान मे संपूर्ण विश्व पर शनिदेव अपनी कोप दृष्टि रख रहे है,जिसके कारण हर जगह त्राहिमाम है, जो लोग ईश्वर और प्रकृति की सेवा करते है वे ही इस कोप से बचे है और बचे रहेंगे, इसलिए सभी जीवों के लिए करुणा रखिये तथा स्वयं को ईश्वर का सेवक समझिये, सभी प्राणियों मे उस परम आत्मा का दर्शन करेंगे तो ही कल्याण होगा, अन्यथा पूरे यूरोप मे धन संग्रह करने वालो की लाशों का संग्रहालय बन गया है यह समय सोचने समझने आपस मे प्रेम भाव विकसित करने का है,तभी ईश्वर कृपा करेंगे. 

प.चंद्रशेखर नेमा हिमांशु

9893280184,7000460931

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