मुंबई. भारत री-इंश्‍योरेंस ब्रोकर्स प्राइवेट लिमिटेड के पूर्णकालिक निदेशक टी.एल. अरूणाचलम ने कहा है कि कोरोना वायरस के चलते दुनिया के सभी क्षेत्रों के कारोबार प्रभावित हुए हैं. चाहे वो मैन्‍युफैक्‍चरिंग, हॉस्पिटैलिटी, एंटरटेनमेंट, टूरिज्‍म, फूड एंड बेवरेज का क्षेत्र हो या फिर सप्‍लाई चेन और लॉजिस्टिक्‍स का. दुनिया भर की सरकारों ने दुकान, कारखाना और व्‍यापार बंद कर दिये हैं, ताकि वायरस को फैलने से रोका जा सके.  

“व्‍यवसाय ही न हुआ हो, तो फिर बीमा की बात ही कहां आती है”, यह सवाल अनगिनत लोगों के दिमाग में चल रहा है. चूंकि कंपनियों को उनकी विनिर्माण परिसंपत्तियों की जोखिम से उपयुक्‍त सुरक्षा सुनिश्चित करनी होती है, जो कि बंधक के रूप में बैंकों के पास गिरवी भी हो सकती है, लेकिन उनसे इन व्‍यावसायिक परिसंपत्तियों के लिए उचित बीमा आवश्‍यक रूप से सुनिश्चित हो सकेगा.

कॉर्पोरेट ग्राहकों की चिंता

भारत के कॉर्पोरेट ग्राहकों के सामने दो मुद्दे रहे. पहला मुद्दा यह था कि दो महीने से अधिक समय (जारी लॉकडाउन अवधि सहित) के लिए हुई इस बंदी के चलते कारोबार को हुए नुकसान का दावा फायर इंश्‍योरेंस पॉलिसीज के तहत किया जा सकता है या नहीं. दुर्भाग्‍यवश, यह पहलु लॉस ऑफ प्रॉफिट्स इंश्योरेंस के तहत आता है और उस पॉलिसी के तहत यह आवश्‍यक होगा कि जब तक बीमित परिसंपत्तियों को फिजिकल नुकसान या हानि नहीं होती है, तो उसे प्रॉफिट्स ऑफ लॉस नहीं माना जायेगा. कोरोना के चलते कारोबार की बंदी के संबंध में, प्‍लांट और मशीनरी या बिल्डिंग को कोई फिलिकल नुकसान नहीं हुआ. दरअसल, इस मुद्दे को लेकर दुनिया भर में बहस चल रही है और ऐसा लगता है कि बीमाकर्ताओं की भी यही राय है. इसके अलावा, भारत में फायर इंश्‍योरेंस पॉलिसीज के तहत कोरोना का मामला बीमित नहीं है.

क्या कोरोना से जुड़ा कारोबारी नुकसान कवर होगा?

बीमाकर्ताओं का यह भी मानना है कि वो कोरोना से जुड़े कारोबारी नुकसान को कवर नहीं कर सकते हैं, क्‍योंकि यदि उन्‍हें प्रत्‍येक पॉलिसीधारक के कारोबारी नुकसान के लिए भुगतान करना पड़ा, तो वो दिवालिया हो जायेंगे, क्‍योंकि इससे हर एक कारोबारी प्रभावित होगा और दावा करेगा.

दूसरा मुद्दा यह था कि फायर इंश्योरेंस पॉलिसी में एक शर्त है कि यदि कारोबारी प्रतिष्‍ठान जिस जगह पर है. वहां 30 दिनों से अधिक समय तक कोई गतिविधि नहीं हुई, तो बीमा कवरेज समाप्‍त हो जायेगा. तो इसको लेकर बीमा बिचौलियों जैसे ब्रोकर्स और बीमाकर्ताओं के बीच बहस शुरू हो गई और काफी विचार-विमर्श के बाद, बीमा प्राधिकरणों ने यह दिशानिर्देश दिया है कि असामान्‍य स्थिति में, यह कवरेज 3 मई, 2020 तक लॉकडाउन की अवधि तक जारी रहेगा. बीमा विनियामक आईआरडीए द्वारा एक अधिसूचना जारी कर इसकी पुष्टि भी की गयी.

चूंकि सरकार ने अनेक विनिर्माण एवं व्‍यावसायिक प्रतिष्‍ठानों को उनकी कारोबारी गतिविधियां शुरू करने की ढील दे दी है, ऐसे में यह शर्त अब लागू नहीं हो सकती है. जिन व्‍यवसायों या प्रतिष्‍ठानों को दोबारा शुरू करने की अनुमति नहीं दी गयी है, केवल वहीं उनके द्वारा ली गयी फायर पॉलिसीज के तहत कवरेज को बढ़ाने को लेकर चिंतित हैं. ऐसे में यह संभव है कि लॉकडाउन अवधि तक कवरेज को जारी रखा जाये. जहां कंपनियां अपने व्‍यवसाय को जारी रखने के लिए संघर्ष कर रही हैं, वहीं उनके द्वारा सामना की गयी जोखिमों को ध्‍यान में रखते हुए उनके मन में बीमा को लेकर चिंताएं भी बनी हुई हैं.

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