सरकार ने कोरोना संकट के कारण लाॅकडाउन को फिर बढा दिया है.

कहा जाता है यदि बिल्ली का मुँह बंद कर दो, उसे भागने भी न दो तो बिल्ली शुरवीर हो जाती है, यदि सम्भाला गया दूध दोहन न करें तो वह बीमार पड़ जाती है.

आज लाॅकडाउन से भी कुछ स्थिति लोगों में ऐसी हो गई है. गालिब के शेर का सार रुपान्तरण आज के क्षण में प्रासंगिक है कि, लाॅकडाउन ने हमें ऐसा निकम्मा बना दिया, नहीं तो हम आदमी होते काम के!

कोरोना के कहर से लाॅकडाउन में जिन्दगी ठहर सी गई है, लोगों का जीवन कमरों में सिमट गया है. यह होम क्वारेन्टाइन ही है, ऐसे में बिना किसी काम के आदमी कैसे स्वस्थ्य रहे, यह हमारे लिए कसौटी है.

कहा जाता है आधुनिक आदमी माडर्न केव मेन की तरह है, बन्द कमरों में रहता है, बन्द गाड़ी से आॅफिस जाता है और बन्द आॅफिस में काम करता है. यह स्थिति निःसन्देह महानगरों और एक्सीक्यूटिव लोगों में तो प्रासंगिक है. हमें नियमित पानी, सूर्य की तपन लेनी पड़ती है. पूरा विश्व हालिया विटामिन-डी की कमी से त्रस्त है एवं विटामिन-बी12 वैसे भी अधिकांश आबादी का कम ही है.

आप इस लाॅकडाउन में कई सस्ते सुन्दर प्रायः बी-काम्पलेक्स आदि ले सकते हैं, जो नियमित विटामिन के सप्लीमेंट होते हैं. इस दौर में अपने शौक- लिखना, पढ़ना, खाना बनाना इत्यादि पूरा कर सकते हैं.

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार स्वास्थ्य की परिभाषा रही है कि, व्यक्ति शारीरिक, मानसिक, सामाजिक और आध्यात्मिक रुप से मजबुत  रहे.

शारीरिक रुप से आप नियमित योगा, जोगिंग, पुश अप, सूर्य नमस्कार, दण्ड-बैठक इत्यादि क्षमता के अनुरुप कर सकते हैं. योग के आसन, प्राणायाम नियमित कर सकते हैं, प्राणायम एक आध्यात्मिक खोज है, जो चमत्कारिक परिणाम देती है, जिससे हृदय और फेफड़े की जीवन शक्ति बढ़ती है. आप कुर्सी पर बैठकर चेयर योगा भी कर सकते हैं.

मानसिक स्वास्थ्य को अच्छा बनाने हेतु आप तनाव मुक्त रहें, इस समय हमारी आवश्यकताएं कम हो गयी हैं. आज न हमे कोई नीड है न कोई ग्रीड है. यह एक बड़ी अच्छी स्थिति में हम आ गये हैं. जहां प्रत्याहार का एक सफल स्थिति बनती जा रही है.

सामाजिक स्वास्थ्य की दृष्टि से व्यक्तियों से दूर रहकर हम उनकी अनुपस्थिति का महत्व समझ पा रहे हैं. सामाजिक रुप से एक-दूसरे के प्रति लगाव, भाव और सेवा का प्रादुर्भाव जाग उठता है. कई लोग दान-पुण्य, भोजन सामग्री उपलब्ध करा रहे हैं, तो कई लोग आर्थिक सहयोग दे रहे हैं. यह सामाजिक सुरक्षा का भी, भाईचारे का भी और मानवता का माॅडल हो चुका है और हमारी मानसिकता लोगों के प्रति करुणा की बन जाती है.

आध्यात्मिक स्वास्थ्य की दृष्टि से जब उपरोक्त स्वास्थ्य के तीनों आयामों को जो व्यक्ति भोगता है, उसे भौतिक परिदृश्य में धार्मिकता के साथ खुद के दर्शन का लाभ होता है, हम मौन, धारणा, ध्यान आदि से समाधि की अवस्था प्राप्त कर सकते हैं. प्रार्थना का मूल भी ईश्वर से ही मिलता है.

आध्यामिकता से हमारी आन्तरिक उर्जा जाग जाती है, यह एक देविय या डिवाइन अनुभूति है, जो आप इस समय प्राप्त कर सकते हैं. विशेषकर सहज ध्यान, ईशा क्रिया, विपासना, सोहम ध्यान एवं सूदर्शन क्रिया से अध्यात्मिक उर्जा से ओत-प्रोत हो सकते हैं. आपका आभा-मण्डल कई गुना बढ़ सकता है तथा आपसे एक विशेष शक्ति का संचार होता रहेगा, जो आपको प्रसन्न उत्साहित स्वस्थ्य रखेगा साथ ही कभी थकने नहीं देगा.

आहार की प्राप्ति से हम दूध, फल और रसों को सम्मिलित करें. इन दिनों जीवन्त भोजन जैसे अंकुरित चना, मंूग, मेथी, जवार इत्यादि ले सकते हैं. हम हमारे इम्यून सीस्टम को मजबूत करने हेतु गिलोप, काली मिर्च, तुलसी, हल्दी, ग्वारपाठा इत्यादि का काढ़ा पी सकते हैं. गोल्डन मिल्क (हल्दी दूध) का नियमित सेवन कर सकते हैं.

लाॅकडाउन में हमारा शरीर लाॅकडाउन न हो, हमारे स्वस्थ्य दृष्टिकोण की जरुरत है. कई लोग वर्षों तक बंद कमरों में साधना करते हैं. हमारे प्रधानमंत्री भी हिमालय की कन्दराओं में जाकर अनुभव ले चुके हैं. जहां इंसान की वाभूजा ही अमुल्य नहीं हुआ करती थी, तो आपको ऐसी कड़ी में मजबूत बनने का मौका मिला है, इसे न गवांये. सोना तो तपकर भी कुंदन बनता है. अतः स्वस्थ्य रहें, मस्त रहें तथा देश को जल्द तंदुरुस्त करें!

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