नजरिया. लंबे समय से पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के हर सुझाव को नजरअंदाज किया जाता रहा है, हालांकि समय-समय पर यह साबित हुआ है कि उनके कई सुझाव बेहद महत्वपूर्ण थे और यदि उन पर ध्यान दिया जाता तो देश को कोरोना जैसी महामारी की इतनी बड़ी कीमत नहीं चुकानी पड़ती? राहुल गांधी ने 12 फरवरी को ही कोरोना संकट के बड़े खतरे से आगाह किया था, किन्तु पीएम नरेन्द्र मोदी ने इसकी परवाह नहीं की, जिसकी कीमत आज पूरा देश चुका रहा है?

जाहिर है, कोरोना संकट को लेकर एक बार पीएम नरेन्द्र मोदी और राहुल गांधी को टीवी पर आमने-सामने आना चाहिए? वैसे तो ऐसी कोई संभावना नहीं है, क्योंकि पीएम मोदी ऐसे किसी भी आयोजन से बचते ही रहे हैं! अलबत्ता, राहुल गांधी प्रेस के सामने आने से कत्तई नहीं डरते हैं? खबर है कि शनिवार को भी राहुल गांधी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए मीडिया से बात की. इस दौरान उन्होंने पीएम नरेंद्र मोदी द्वारा हाल ही में 20 लाख करोड़ रुपये के विशेष आर्थिक पैकेज के ऐलान को लेकर कहा कि- जब बच्चा रोता है तो मां उसे कर्ज नहीं देती है, ट्रीट देती है.

सड़क पर चलने वाले प्रवासी मजदूरों को कर्ज नहीं पैसे की जरूरत है. इसलिए सरकार को साहूकार की तरह काम नहीं करना चाहिए? दिलचस्प बात यह है कि इस दौरान एक प्रेसप्रश्न राहुल गांधी से किया गया कि- अगर आप प्रधानमंत्री होते तो क्या करते? जवाब में राहुल गांधी ने कहा कि- मैं प्रधानमंत्री नहीं हूं. इसलिए एक काल्पनिक स्थिति को लेकर मैं बात नहीं कर सकता, लेकिन एक विपक्ष के नेता के तौर पर कहूंगा कि कोई भी आदमी घर छोड़कर दूसरे राज्यों में काम की तलाश में जाता है.

इसलिए सरकार को रोजगार के मुद्दे पर एक राष्ट्रीय रणनीति बनानी चाहिए. उन्होंने कहा कि- मेरे हिसाब से सरकार को तीन टर्म- शॉट, मिड और लॉन्ग में काम करना चाहिए. शॉर्ट टर्म में डिमांड बढ़ाइए. इसके तहत आप हिंदुस्तान के छोटे और मझौले व्यापारियों को बचाइए, इन्हें रोजगार दीजिए. आर्थिक मदद कीजिए, स्वास्थ्य के हिसाब से आप उन लोगों का ख्याल रखिए जिन्हें सबसे ज्यादा खतरा है. मनरेगा के संदर्भ में राहुल गांधी ने सुझाव देते हुए कहा कि- दस साल पहले का भारत और आज का हिंदुस्तान, दोनों अलग-अलग हैं. आज बहुत सारे मजदूर शहरों में रहते हैं.

इसलिए मेरा विचार है कि गांव में इनकी सुरक्षा के लिए मनरेगा और शहर में न्यूनतम आय योजना होनी चाहिए, जिससे कि इनके बैंक अकाउंट में कुछ पैसा भेजा जा सके. सरकार चाहे तो न्यूनतम आय योजना को कुछ समय के लिए लागू करके देख सकती है. राहुल गांधी का साफ कहना था कि- केन्द्र सरकार की मदद नाकाफी है, उनकी सहायता, कर्ज का पैकेज नहीं होना चाहिए.

किसान, प्रवासी मजदूरों की जेब में सीधा पैसा जाना चाहिए! बहरहाल, बड़ा सवाल यह है कि क्या पीएम मोदी प्रेस का सामना करने की या फिर राहुल गांधी से आमने-सामने बहस की हिम्मत जुटा पाएंगे?

यह भी पढ़ें, काहे, मोदी-मोदी के बजाय योगी-योगी के स्वर बुलंद हो रहे हैं?

आज का दिन : ज्योतिष की नज़र में


जानिए कैसा रहेगा आपका भविष्य


खबर : चर्चा में


************************************************************************************




Disclaimer : इस न्यूज़ पोर्टल को बेहतर बनाने में सहायता करें और किसी खबर या अंश मे कोई गलती हो या सूचना / तथ्य में कोई कमी हो अथवा कोई कॉपीराइट आपत्ति हो तो वह info@palpalindia.com पर सूचित करें। साथ ही साथ पूरी जानकारी तथ्य के साथ दें। जिससे आलेख को सही किया जा सके या हटाया जा सके ।