मुंबई. महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण आर्थिक संकट से निपटने के लिए धार्मिक संस्थाओं के ट्रस्ट के पास पड़े सोना लेने का बयान देकर घिर गए हैं. बीजेपी नेताओं ने चव्हाण के इस बयान को लेकर जम कर हमला बोला है. अब इस मामले के तूल पकड़ने के बाद चव्हाण ने कहा कि कुछ मीडिया ने उनके बयान को गलत संदर्भ में पेश किया है.

उन्होंने कहा कि धार्मिक संस्थाओं से सोना लेने का बयान उन्होंने देशहित में दिया है. बीजेपी नेताओं पर काउंटर अटैक चव्हाण ने बीजेपी नेताओं को याद दिलाते हुए कहा कि गोल्ड डिपाजिट की स्कीम सबसे पहले बीजेपी के वाजपेयी सरकार के कार्यकाल में शुरू की गई थी, जिसके बाद साल 2015 में पीएम नरेन्द्र मोदी ने गोल्ड मोनेटाइजेशन के नाम से लांच किया. इस स्कीम में काफी मात्रा में धार्मिक संस्थाओं ने निवेश किया था. ऐसे में आज जब देश कोरोना की वजह से आर्थिक संकट में फंस गया है, तो फिर धार्मिक ट्रस्टों से सोना क्यों नहीं लिया जा सकता.

उन्होंने कहा कि वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के मुताबिक भारत के धार्मिक संस्थाओं के पास करीब 1ट्रिलियन सोना है, इस सोने का उपयोग कम ब्याज दर देकर आर्थिक संकट से उबरने के लिए किया जा सकता है. बाद में स्थिति ठीक होने के बाद ट्रस्ट को सोना लौटा दिया जाएगा. धार्मिक रंग देने की कोशिश पूर्व मुख्यमंत्री चव्हाण ने कहा कुछ लोग मेरे बयान को धार्मिक रंग देने की कोशिश कर रहे हैं. मैंने यह बयान सभी धर्मिक संस्थाओं के संदर्भ में दिया है. उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि जो भी मेरे बयान को गलत संदर्भ में पेश करेगा, उनके खिलाफ आवश्यक क़ानूनी कार्रवाई की जाएगी.

आज का दिन : ज्योतिष की नज़र में


जानिए कैसा रहेगा आपका भविष्य


खबर : चर्चा में


************************************************************************************




Disclaimer : इस न्यूज़ पोर्टल को बेहतर बनाने में सहायता करें और किसी खबर या अंश मे कोई गलती हो या सूचना / तथ्य में कोई कमी हो अथवा कोई कॉपीराइट आपत्ति हो तो वह info@palpalindia.com पर सूचित करें। साथ ही साथ पूरी जानकारी तथ्य के साथ दें। जिससे आलेख को सही किया जा सके या हटाया जा सके ।