नई दिल्ली. फेसबुक के स्वामित्व वाला मैसेंजर यूजर्स की सहूलियत को ध्यान में रखते हुए लगातार नये-नये फीचर्स ला रहा है. हाल ही में कंपनी द्वारा वीडियो कॉलिंग फीचर में 8 लोगों को जोड़ने की सुविधा देने के बाद कंपनी पेमेंट फीचर लाने वाली थी.

भारत में व्हाट्सऐप पेमेंट फीचर की लॉन्चिंग से पहले ही इसके खिलाफ आवाजें उठने लगी हैं. दरअसल, व्हाट्सऐप की ओर से कुछ दिन पहले शुरू की गई बीटा पेमेंट सर्विस बंद कराने के लिए एक थिंकटैंक ने एक याचिका दायर की है, जिस पर सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट तैयार भी हो गया है.

थिंकटैंक गुड गवर्नेंस चैंबर्स ने सुप्रीम कोर्ट में व्हाट्सऐप के खिलाफ याचिका दायर की थी. थिंकटैंक की शिकायत थी कि व्हाट्सऐप को बीटा टेस्टिंग के लिए लाइसेंस दिया गया था, ताकि वह यूपीआई ट्रांजैक्शंस के लिए डेडिकेटेड ऐप बनाये. साथ ही इस सर्विस को अपने मेसेजिंग ऐप से जोड़े. थिंकटैंक का आरोप है कि कंपनी ने रेगुलेटरी से जुड़े नियमों का उल्लंघन किया है.

गुड गवर्नेंस चैंबर्स की याचिका स्वीकार करते हुए प्रधान न्यायाधीश शरद अरविंद बोबड़े की अध्यक्षता वाली बेंच ने भारतीय रिजर्व अैंक, एनपीसीआई और व्हाट्सऐप से अगले तीन हफ्तों के भीतर अपना-अपना पक्ष रखने को कहा है. व्हाट्सऐप ने इस बाबत फैसला किया है कि जब तक कंप्लाएंस पूरा नहीं हो जाता, तब तक वह इस सर्विस शुरू नहीं करेगी.

कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक व्हाट्सऐप ने टेस्टिंग के बाद सर्विस इस महीने के अंत तक के लिए रोक दी है. बता दें कि बीटा फेज में व्हाट्सऐप के एक करोड़ यूजर्स ने साइनअप किया है. बाजार में पहले से ही कई पेमेंट ऐप्स मौजूद हैं और ऐसे में व्हाट्सऐप के आने से प्रतियोगिता बढ़ जाएगी.

थिंकटैंक का आरोप है कि कंपनी ने रेगुलेटरी से जुड़े नियमों का उल्लंघन किया है. थिंकटैंक की शिकायत थी कि वॉट्सऐप को बीटा टेस्टिंग के लिए लाइसेंस दिया गया था ताकि वह UPI ट्रांजैक्शंस के लिए डेडिकेटेड ऐप बनाए. साथ ही इस सर्विस को अपने मैसेजिंग ऐप से जोड़े.

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