सुनीता गाबा. कुछ समय पहले खाना मात्रा पेट भरने के लिए बनता था. अब खाने के स्वाद और पौष्टिकता पर भी पूरा ध्यान दिया जाता है. अब महिलाएं ध्यान देती हैं कि भोज्य पदार्थों के प्राकृतिक तत्व अपनी मूल अवस्था में अधिक से अधिक विद्यमान रह सकें. यदि हम भी चाहें कि भोजन में पोषक तत्व अधिक से अधिक सुरक्षित रहें तो हमें भोजन तैयार करते समय आवश्यकता है अधिक सचेत रहने की. सबसे पहले हमें बर्तनों की ओर ध्यान देना होगा जिनमें हम भोजन पका रहे हैं.

यदि हम पीतल के बर्तन में भोजन पका रहे हैं तो वह पूरा कलईदार होना चाहिए. वैसे प्रेशर कुकर सबसे अच्छा बर्तन है. इसमें भोजन के पौष्टिक तत्व अधिक मात्रा में सुरक्षित रहते हैं. ध्यान दें अधिक छोटे और ऊंचे बर्तन में भोजन न पकायें. चौड़े तले वाले बर्तन भी श्रेष्ठ होते हैं. यदि आप चावल पकाने जा रहे हैं तो उन्हें कम से कम धोना चाहिए. बार-बार धोने से पोषक तत्व भी पानी के साथ बह जाते हैं.

चावल में उतना ही पानी डालें जितना उसको पकाने के लिए आवश्यक हो. किसी कारणवश पानी अधिक हो जाए तो उसे दाल पकाते समय या आटा गूंथने में प्रयोग कर सकते हैं. हरी सब्जियां पकते समय खुद पानी छोड़ देती हैं. उनमें अतिरिक्त पानी न डालें. कुछ सब्जियां सख्त होती हैं. उन्हें पकाने में अतिरिक्त पानी की आवश्यकता होती है.

उनमें पानी उतना ही डालें जितना जरूरी हो. यदि किसी सब्जी में अतिरिक्त पानी है तो उस पानी को निकाल कर रख लें. दाल बनाते समय या सूप बनाते समय उसका प्रयोग करें. पहले से सब्जियों को काटकर मत रखें नहीं तो उनकी पौष्टिकता समाप्त हो जाएगी. सब्जी तभी काटें जब आप उसे पकाने जा रही हैं. यदि आप कामकाजी महिला हैं और समय की कमी के कारण सब्जी पहले काटकर रखना चाहती हैं तो टपरवेअर के हवाबंद डिब्बों में भरकर फ्रिज में रखें.

सब्जी काटकर उसी समय सब्जी पका रही हैं तो काटने से पहले सब्जी धो लें. कटी सब्जी को बाद में धोने से उसके पोषक तत्व भी साथ धुलकर बह जाते हैं. उन्हें आप बचा सकती हैं. राजमां व चने पकाते समय उनमें सोडे का प्रयोग न करें क्योंकि सोडे से भोज्य पदार्थों की पौष्टिकता समाप्त हो जाती है. उन्हें 7-8 घंटे पहले भिगो कर रखें और प्रेशर कुकर में उबालें. पकौड़े आदि बनाते समय भी लोग सोडा डालते हैं ताकि पकौड़े खस्ता बनें.

स्वाद में तो शायद खस्ता होंगे परन्तु सेहत के लिहाज़ से ठीक नहीं है. सोडे वाला बेसन तेल भी अधिक सोखता है और स्वास्थ्य को हानि पहुंचाता है. सब्जियों के छिलके तभी उतारें जब जरूरी हों अन्यथा जिन सब्जियों को छिलकों के साथ बनाया जा सकता है, वैसे बनाएं. छिलकों में विटामिन सबसे अधिक होते हैं. चौड़े तले वाले बर्तन में सूखी सब्जी बनाते समय उन्हें अच्छी तरह से ढक कर रखें ताकि भाप अपने साथ पोषक तत्वों को उड़ने न दें और सब्जी भी जल्दी पक जाये.

तले हुए खाद्य पदार्थों से जो अतिरिक्त तेल बच जाता है उसे बाद में प्रयोग में न लाएं. यदि उसी समय कुछ बना रही हैं तो प्रयोग में ला सकती हैं. तला हुआ पुराना बचा तेल स्वास्थ्य को हानि पहुंचाता है. बार-बार खाद्य पदार्थों को गर्म कर उनकी पौष्टिकता नष्ट न करें. जितनी आवश्यकता हो, उतना ही गर्म करें. कुछ दालों को उबालते समय अधिक पानी चाहिए, उन्हें खुले पानी में उबालकर बाद में तरी के रूप में प्रयोग कर सकती हैं जैसे राजमांह, काले चने, सफेद चने आदि. वैसे दालों में उतना ही पानी डालकर उबालें जितनी दाल को उबालने के लिए आवश्यक हो.

भोज्य पदार्थों में मसालों का अपना योगदान है. मसाले उतने ही प्रयोग करें जितने जरूरी हों. अधिक मसाले भोजन की पौष्टिकता और स्वाद को बिगाड़ देते हैं. भुना और उबला भोजन स्वास्थ्य के लिए अधिक लाभप्रद है. तला हुआ भोजन स्वास्थ्य को हानि पहुंचाता है. इन छोटी छोटी सावधानियों को ध्यान में रखते हुए आप परिवार को अधिक पौष्टिकता भरा भोजन दे सकती हैं.

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