सर्वेश कुमार ’सुयश‘. सदियों से बेवफाई की तोहमत पुरूषों पर लगायी जाती रही है लेकिन एक ताजा अध्ययन में यह बात उभरकर सामने आयी है कि विवाहेत्तर संबंधों के मामलों में महिलाएं पुरूषों से बहुत ज्यादा पीछे नहीं हैं. हालांकि खास बात यह है कि युवा पीढ़ी अब भी संबंधों में ईमानदारी और वफा को तरजीह दे रही है.

जर्मनी के हैम्बर्ग शहर में एक  सर्वेक्षण के मुताबिक बड़ी उम्र की महिलाओं में विवाहेत्तर संबंधों का चलन बढ़ा है और दस में से चार महिलाएं इनमें लिप्त पायी जाती हैं. सर्वेक्षण के आधार पर मनोवैज्ञानिक फसीह कहती हैं कि महिलाओं के विवाहेत्तर संबंधों के पीछे भावनात्मक से लेकर यौन असंतुष्टि तक कई कारण हो सकते हैं. उनका कहना है कि ज्यादातर महिलाएं अपने पति को धोखा देकर इन संबंधों का आनंद उठाना चाहती हैं लेकिन कुछ ऐसी भी महिलाएं हैं जो स्वतंत्राता और लैंगिक समानता के नाम पर इसे खुद को पुरूषों के बराबर साबित करने का जरिया मानती हैं.

मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि अधिकतर महिलाएं विवाहेत्तर संबंधों में वह खोजती हैं जो उन्हें अपने पति या साथी से नहीं मिलता यानी स्नेह, सम्मान और प्रशंसा. भारत में भी अब लगभग हर कार्यालय में इस तरह के किस्से होते दिखायी दे रहे हैं.

समय के साथ ही अब स्त्राी की सोच भी बदल गयी है. कल तक केवल पुरूष घर से बाहर अपनी पत्नी के अलावा दूसरी औरत से संबंध कायम करने की जुर्रत करता था. लंबे अरसे तक वह इसी भ्रम को पाले रहा कि विवाहेत्तर संबंध बनाए रखने का एकाधिकार उसे ही है लेकिन अब अगर औरत की भावनाओं की कद्र न की जाए तो वह भी परपुरूष के कंधे तलाशने में नहीं हिचकती. यह परपुरूष उसका पुराना प्रेमी, पुराना दोस्त या बचपन का साथी भी हो सकता है.

ऐसा भी नहीं है कि गृहणियां इससे अछूती हैं भले ही इनकी संख्या अभी दाल में नमक के बराबर ही क्यों न हो. मनोविशेषज्ञ डॉ. नलिनी डेका का मानना है कि इन गृहणियों में भी अधिकतर वे महिलाएं हैं जो पहले प्रोफेशनल जॉब कर चुकी हैं.

आज से दो दशक पहले तक इस तरह के संबंधों के बारे में सोचना तक पाप समझा जाता था. ऐसी युवती को समाज में कुलटा तक कहा जाता था लेकिन बदलते परिवेश में चैनल संस्कृति के बढ़ते दौर में धारावाहिकों ने इस क्रान्ति को लाने में नयी पहल की है जिसकी देखादेखी अब औरतें विवाहेत्तर संबंध बनाने में बिल्कुल नहीं हिचकिचाती. समाज में अचानक आए इस बदलाव में इंटरनेट पर सेक्स चैटिंग आदि का भी बड़ा योगदान है.

इस तरह के संबंधों के बारे में पुरूषों की सोच होती है कि पुरूष खुद को साबित करने के लिए विवाहेत्तर संबंधों में लिप्त हो पाते हैं और रखैल को अभिजात्य वर्ग की निशानी मानते हैं. इस तरह से उन्हें लगता है कि महिलाएं उनकी ओर आकर्षित होती हैं और उनके साथ शारीरिक संबंध बनाना चाहती हैं जबकि महिलाओं की सोच बिल्कुल उल्टी है. यदि उनका साथी उन्हें धोखा देता है या चोट पहुंचाता है तो बदला लेने के लिये वे दूसरे पुरूष की ओर मुड़ जाती हैं लेकिन कभी-कभी ऐसे संबंधों में पति के मुकाबले वे प्रेमी से ज्यादा भावनात्मक लगाव महसूस करने लगती हैं. इस भावनात्मक लगाव की वजह भी सेक्स में छिपी होती है.

आदमी की तो शुरू से फितरत रही है कि मेरी बीबी न सही तो किसी दूसरे की ही सही पर औरत जब यह महसूस करती है कि पति जो चाहता है पा लेता है, तब वह भी उसे पछाड़ने के चक्कर में इस तरह के संबंध बना बैठती है. ऐसे संबंध वह आवेश-आवेग में आकर बनाती है.

महिलाओं में इधर सेक्स अपील भी बढ़ी है. आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर महिलाओं में आत्मविश्वास तो बढ़ा है, साथ ही वे अपने प्रति सचेत भी हुयी हैं. वे पहनने, ओढ़ने के सलीके में भी आधुनिक होती जा रही हैं. वह अपने को मंेटेन रखना चाहती हैं भले ही वह एक बच्चे की मां क्यों न हो. जब पुरूष उससे आकर्षित होकर संबंध बनाने को उतावला हो जाता है वह भी परीक्षण के तौर पर संबंध बना बैठती है. वह यही सोचकर खुश हो जाती है कि उसमें अभी भी परपुरूष को आकर्षित करने की क्षमता है.

इस समय वैसे भी लोगों पर आधुनिकता का नशा इस कदर चढ़ गया है कि वे आपस में एक दूसरे की पत्नियों को मौज मस्ती के लिये आदान प्रदान करने से भी नहीं चूक रहे हैं. इसे वे फैशन के तौर पर लेते हैं. यह भी देखने में आया है कि जिन महिलाओं के पति ऊंचे ओहदे पर हैं या दूसरे जिलों में तैनात हैं और घर में तीन-चार नौकर चाकर हैं तथा बच्चे भी होस्टल में रहकर पढ़ रहे हैं, ऐसे में पत्नियों के पास दिनभर का काम करने के लिये कुछ भी नहीं बचता. तब वे समय बिताने के लिये भी पराये पुरूषों के कंधे का सहारा लेती हैं. उस समय भले ही ये संबंध तनाव दूर करने का कारण बनें लेकिन बाद में बड़ी परेशानी खड़ी कर देते हैं.

सर्वेक्षण में यह तथ्य भी उभरकर सामने आया है कि बड़ी उम्र की महिलाएं विवाहेत्तर संबंधों के लिए ज्यादा भटकती हैं लेकिन वे इन संबंधों को छिपाने की भरपूर कोशिश करती हैं ताकि वैवाहिक जीवन बर्बाद न हो जाए. मनोवैज्ञानिकों की सलाह भी यही है कि विवाहेत्तर संबंधों पर लिप्त होने पर अपने साथी से इस बारे में बेबाकी से बात करनी चाहिए. यदि ऐसा न हो तो किसी विश्वस्त साथी को इस बारे में बताना चाहिए ताकि यह पता चल सके कि समस्या की जड़ कहां है.

उनका यह भी कहना है कि यदि आप अपने पति या साथी से असंतुष्ट हैं और दूसरे पुरूष के साथ संबंध बना चुकी हैं तो साथी से बात करें वर्ना ऐसा पुनः हो सकता है जो आपके वैवाहिक जीवन के लिये बहुत ही घातक सिद्ध हो सकता है. 

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