नजरिया. कोरोना वायरस अटैक ने देश की अर्थ व्यवस्था को तो बर्बाद कर ही दिया है, निकट भविष्य में भी कामकाज पटरी पर आसानी से आ जाएगा, ऐसा लगता नहीं है? आखिर किस कारण से कोरोना वायरस भारत में इतना कामयाब रहा? यह सच जानने के लिए जांच आयोग बेहद जरूरी है! जनवरी के पीएम मोदी और मई के पीएम मोदी में जमीन-आसमान का फर्क है?

फरवरी में कोरोना संकट में चीन को सहयोग का प्रस्ताव भेजनेवाले पीएम मोदी, अभी तो राज्यों को, खासकर गैर-भाजपाई राज्यों को मदद कर पाने में ही असमर्थ नजर आ रहे हैं? कभी अचानक लाॅकडाउन जैसी एकतरफा घोषणाएं करने वाले पीएम मोदी चौथे लाॅकडाउन की जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं है, सारा भार राज्यों के कंधों पर डाल दिया है? यही नहीं, लाॅकडाउन-3 से ही उन्होंने लागों से दूरी बना ली है? नमस्ते ट्रंप में गरीबी को तो दीवार के पीछे ढक दिया गया, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि कोरोना की सच्चाई कहां छिपाएंगे? गुजरात में, विशेषरूप से अहमदाबाद में किसकी गलती से कोरोना फैला है? यह जांच का विषय तो है ही!

वैसे, जिनकी लापरवाही से कोरोना ने देश में तबाही मचाई है, उनमें तो इतना नैतिक साहस है नहीं कि- अपनी गलती मान लें? लिहाजा, यह जानने के लिए जांच आयोग जरूरी है कि किसकी गलती से कोरोना भारत में आया और पूरे देश में फैल गया? यदि जांच आयोग बनता है तो देशवासी यह जान सकेंगे कि आखिर किसकी गलती की सजा करोड़ों देशवासी पा रहे हैं?

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