नजरिया. पता नहीं क्यों, पीएम मोदी प्रेस के सामने आने से घबराते हैं?

उनके प्रायोजित कार्यक्रमों को छोड़ दें तो एक-दो पत्रकारों के साथ इंटरव्यू में भी वे सवालों से घबरा कर बीच में ही इंटरव्यू छोड़ चुके हैं!

दरअसल, उन्हें ब्रांडिंग की प्रवचन शैली ही रास आती है, हालांकि, कुछ दिनों से मीडिया में उनकी मौजूदगी तेजी से घट गई है?

मीडिया वालों की जनता पर पकड़ होती है और संभवतया उन्हें सियासी हवा के रूख बदलने के संकेत मिलने लगे हैं?

बहरहाल, देशवासी कोरोना संकट से लड़ रहे हैं और वे जानना चाहते हैं कि आगे क्या? पिछली गलतियां जारी रहेंगी या फिर कोई बदलाव होगा?

जनता को अपने सवालों के जवाब मिलें उसके लिए जरूरी है कि देश की प्रेस से एक बार पीएम मोदी की सीधी बात की जाए?

कइयों की नजर में वे राहुल गांधी से तो कई ज्यादा ज्ञानी हैं, जब राहुल गांधी प्रेस कांफ्रेंस कर सकते हैं, तो पीएम मोदी क्यों नहीं?

वैसे भी आजादी के बाद देश में आए सबसे बड़े कोरोना संकटकाल में देशवासी बेचैन हैं, अच्छा होगा यदि पीएम मोदी प्रेस के माध्यम से जनता के सवालों का जवाब दें! यह जानने का जनता को हक भी है?

उम्मीद की जा रही है कि पीएम मोदी, आम कैसे खाएं, जैसे कार्यक्रम में अपना और जनता का समय खराब नहीं करेंगे? और देश की वास्तविक प्रेस से रूबरू हो कर सवालों के जवाब देंगे!

याद रहे, लोकसभा चुनाव के बाद पीएम मोदी प्रेस कांफ्रेंस में आए जरूर थे, लेकिन सारे सवालों के जवाब के लिए अमित शाह को आगे कर दिया था?

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