कैलाश मानसरोवर यात्रा अब आसान हो जाएगी. यात्रियों को अब कम पैदल चलना पड़ेगा साथ ही यात्रा करने में पहले के मुकाबले 6 दिन कम लगेंगे. उत्तराखंड के रास्ते कैलाश मानसरोवर यात्रा मार्ग पर बीआरओ ने लिपुलेख दर्रे से पांच किलोमीटर पहले तक सड़क तैयार कर ली है. यह सड़क सामरिक लिहाज से भी अहम है. इससे सुरक्षा बलों को भी राहत मिलेगी और कनेक्टिविटी आसान होगी.

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए इस लिंक रोड का उद्घाटन किया. इस दौरान सीडीएस जनरल बिपिन रावत और आर्मी चीफ जनरल एमएम नरवणे भी मौजूद थे.

उत्तराखंड में बीआरओ कैलाश मानसरोवर तक का रास्ता बना रहा है. यह रास्ता काली नदी के किनारे किनारे बनाया गया है. काली नदी भारत और नेपाल के बीच में है. यह सड़क लिपुलेख दर्रे तक बनेगी. बीआरओ के डीजी लेफ्टिनेंट जनरल हरपाल सिंह ने कहा कि उत्तराखंड के पिथौरागढ़ से तवाघाट तक 107 किलोमीटर की दूरी है और डबल लेन रोड है, जिसका मेंटेनेंस बीआरओ कर रहा है.

तवाघाट से आगे घटियाबगड़ तक 19.5 किलोमीटर की सिंगल लेन रोड है जिसे डबल लेन किया जा रहा है. घटियाबगड़ से लिपुलेख तक की 80 किलोमीटर की सड़क पर भी बीआरओ काम कर रहा है. इसमें लिपुलेख दर्रे से पांच किलोमीटर पहले तक सड़क बन गई है.

सड़क बनने से सुरक्षा बलों का आना जाना भी आसान हो जाएगा. पिथौरागढ़ से चीन और नेपाल बॉर्डर लगता है. यहां आर्मी के अलावा आईटीबीपी और एसएसबी भी तैनात है. सड़क बनने से इन्हें भी राहत मिलेगी. साथ ही कैलाश मानसरोवर यात्रियों को फायदा होगा.

अब लिपुलेख दर्रे के पांच किलोमीटर पहले तक गाड़ी जा सकती हैं. इसका मतलब है कि गुंजी में एक्लेमटाइजेशन के लिए पहला नाइट स्टे कर एक्लेमटाइजेशन की दूसरी स्टेज लिपुलेख के पास पूरी कर सकते हैं. साथ ही अब पांच दिन पैदल चलने के बजाय यह दूरी दो दिन में गाड़ी से पूरी हो जाएगी. इससे 6 दिन बचेंगे.

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