पटना. पूरी दुनिया जहां कोरोना संकट का सामना कर रही है वहीं इसी साल बिहार में विधानसभा चुनाव भी होने हैं. ऐसे में यहां कोरोना काल में भी सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीति बयानबाजी थमने का नाम नहीं ले रहा है. लॉकडाउन के चलते राजनेता पत्रकारों को बुलाकर बयान देने के बजाय ट्वविटर पर बयानवीर बने हुए हैं. भ्रष्टाचार के मामले में दोषी राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव भले ही झारखंड की जेल में बंद हैं, लेकिन उनके सोशल मीडिया अकाउंट से सत्ता पक्ष पर आरोप लगाया गया है.

लालू यादव के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से ट्वीट किया गया है, ’15 साल से NDA बिहार को पीसिंग पीसिंग एंड पीसिंग, जनता क्राइंग क्राइंग एंड क्राइंग.’ यहां बता दें कि इस ट्वीट की जो भाषा है वह मशहूर फिल्म शोले के डायलॉग से मिलता-जुलता है. लालू यादव का यह ट्वीट सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है. चुनाव नजदीक आते देख तेजस्वी भी हैं एक्टिव यहां बता दें बिहार में इसी साल विधानसभा के चुनाव संभावित हैं.

उसे देखते हुए आरजेडी नेता तेजस्वी यादव सोशल मीडिया के जरिए सरकार पर लगातार हमले कर रहे हैं. तेजस्वी हर रोज किसी ना किसी मुद्दे को लेकर सरकार को घेरने में जुटे हैं. गुरुवार को तेजस्वी यादव ने ट्वीट कर आरोप लगाया कि ‘क्या माननीय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बताएंगे कि कल (6 मई) रात बिहार के खगड़िया से लगभग 250-300 मजदूरों को ट्रेन द्वारा तेलंगाना क्यों भेजा गया है? क्या यह मामला आपके संज्ञान में है?’ इससे पहले तेजस्वी प्रसाद यादव ने बिहारी श्रमिकों को वापस नहीं भेजने के कर्नाटक की बी. एस. येदियुरप्पा सरकार के फैसले के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से बुधवार को अनुरोध किया कि वह प्रांतीय सरकार को इस संबंध में एक ‘कठोर संदेश’ भेजें.

तेजस्वी ने बुधवार को आरोप लगाया है कि कर्नाटक के मुख्यमंत्री ने स्थानीय उद्योगपतियों से मुलाकात के बाद घर लौटने को बेताब प्रवासी बिहारी श्रमिकों को वापस भेजने से इंकार कर दिया है. तेजस्वी ने कहा कि केन्द्र, कर्नाटक और बिहार तीनों ही जगह भाजपा सत्ता में हैं, ऐसे में उसे घर लौटने के इच्छुक श्रमिकों के लिए विशेष ट्रेनों का संचालन करना चाहिए. उन्होंने कहा ‘मैं पूरे बिहार की ओर से कर्नाटक सरकार को एक कठोर संदेश भेजने के लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जी से अनुरोध करता हूं’.

तेजस्वी ने बिहारी श्रमिकों को वापस नहीं लाए जाने को अन्याय करार देते हुए कहा कि बिहार सरकार इन मजदूरों का अग्रिम किराया रेलवे को दे और उसकी खाली खड़ी करीब 12,000 ट्रेनों का उपयोग कर अपने लोगों को वापस लाए. उन्होंने कहा कि अगर बिहार सरकार अपने लोगों को वापस लाने में सक्षम नहीं हैं तो वह सभी से सहयोग ले. उन्होंने कहा, ‘विपक्ष तैयार है. हमारी पार्टी तन, मन और धन से जो बन पड़ेगा करेगी.

पहले ही हमने 2,000 बस उपलब्ध कराने या 50 ट्रेनों का किराया भरने की बात कही है.’ उन्होंने कहा कि प्रकाश पर्व के दौरान पटना आए लाखों-करोड़ों श्रद्धालुओं की अगर हमलोग मेहमान नवाजी कर सकते हैं तो दूसरे राज्यों में तकलीफ में फंसे अपने लोगों के लिए हाथ आगे क्यों नहीं बढ़ा सकते? तेजस्वी ने कहा कि दूसरे राज्यों में फंसे प्रवासी मजदूरों की संख्या करीब 40 लाख हैं. क्या बिहार के प्रत्येक जिले का प्रशासन अपने यहां एक लाख लोगों को पृथक-वास में रखने और उनके भोजन-पानी की व्यवस्था नहीं कर सकता है.

गौरतलब है कि कर्नाटक सरकार ने प्रवासी कामगारों को उनके गृह राज्यों तक पहुंचाने के लिये विशेष ट्रेनें चलाने का अपना अनुरोध आज वापस ले लिया. दरअसल, कुछ ही घंटे पहले भवन निर्माताओं (बिल्डर) ने मुख्यमंत्री बी एस येदियुरप्पा से मुलाकात की थी और प्रवासी कामगारों के वापस जाने से निर्माण क्षेत्र को पेश आने वाली समस्याओं से अवगत कराया था.

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