प्रदीप द्विवेदी. वर्ष 2014 से पहले चीन के बाजार को पांच मिनट का समय देने को तैयार नहीं थे, बताइए प्रधानमंत्रीजी? इन पांच वर्षों में उस चीन को भारत में बाजार किसने दिया? हमने चीन को कोकोनट वाटर पिलाया उसने कोरोना वायरस पहुंचाया, हमने चीन को झूला झुलाया, उसने हमें अधरझूल में छोड़ दिया! बताइए प्रधानमंत्रीजी, चीन से ऐसी सियासी दोस्ती का राज क्या है? स्वदेशी आंदोलन वाले तो देश में चीन के बाजार को बंद करवाने का मुद्दा उठा रहे थे, चीन ने तो हमारे देश में ही भारत का बाजार बंद करवा दिया?

कई लोगों को शिकायत है कि ढाई सौ रुपयों की रैपिड टेस्ट किट 600 रुपयों में बेची गई? अरे, घी खिचड़ी में ही तो है! चीन ने मेहनत करके जितने पैसे नहीं कमाए, हमारे देश के लोगों ने उससे ज्यादा तो दिमाग से कमा लिए? आपको याद होगा, पिछली दीपावली पर चीन के सामान के बहिष्कार का अभियान शुरू होने ही वाला था की ऐन मौके पर चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग, भारत यात्रा पर आ गए,

पहले इधर-उधर टहले, नारियल पानी पिया और फिर चल दिए चीन, नतीजा? स्वदेशी आंदोलन तो ठीक-से शुरू भी नहीं हो पाया और दीपावली ही निकल गई? खबर है कि.... चीन से सालाना लगभग 3000 से 3500 करोड़ रुपए के गैर-जरूरी उत्पाद आयात किए जाते हैं. स्वदेशी आंदोलन में आस्था रखनेवाले, इस दीपावली तक इसे रोकना चाहते हैं! प्रधानमंत्रीजी! क्या आपकी सरकार में यह आयात रोकने की इच्छाशक्ति है?

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