सुनीता गाबा. कहा जाता है कि इलाज के साथ परहेज करना आवश्यक है. उसी प्रकार स्वयं को स्वस्थ रखने के लिए खान-पान में परहेज उतना ही आवश्यक है. कुछ लोग खाते समय भूल जाते हैं कि उन्हें कम तेल घी का भोजन हितकर है या चीनी का प्रयोग उनके लिए अनुचित है. मस्ती में वे सब कुछ खा तो जाते हैं पर बाद में दवाओं के सहारे स्वयं को संभाल पाते हैं.

खाते समय जो मना है  इस बात का ध्यान रखें तो अपने आप में यह परहेज कहलाएगा. इस प्रकार आप भोजन का आनंद अधिक समय तक ले पायेंगे. भोजन में निम्न बातों का ध्यान भी परहेज में आता है.

* मूत्रा त्याग करने के बाद जल का सेवन करें. दिन भर में 10.12 गिलास जल अवश्य पिएं.

* प्रातःकाल कुल्ला करने के पश्चात तांबे के लोटे वाला जल या ताजा जल 1 से 2 गिलास अवश्य पिएं ताकि मल-विसर्जन में परेशानी न हो.

* भोजन करते समय भोजन के साथ जल न पियें. भोजन लेने से कम से कम आधा घंटा पहले जल लें या भोजन करने के एक घंटा बाद जल पियें.

* नींबू पानी का सेवन भोजन के साथ न करें.

* प्रतिदिन तीन ठोस आहार ही लें. अधिक ठोस आहार स्वास्थ्य को हानि पहुंचाते हैं.

* भोजन निश्चित समय पर लें. असमय भोजन लेने पर भूख कम होती है और शरीर कमजोर पड़ता चला जाता है.

*  बिल्कुल भूख न लगने पर, जी मिचलाने पर हल्का भोजन लें या फिर दही का मट्ठा, सूप, फलों का जूस आदि लें.

*  चाय का सेवन उपवास में कम से कम करें. सूप, जूस, सादा जल उपवास में अधिक लाभप्रद होता है.

* अधिक मसालेदार, अधिक तैलीय भोजन, अधिक मीठा व अधिक नमकीन भोजन का हिस्सा न बनने दें.

* डिब्बाबंद व फास्टफूड के सेवन से बचें.

* ब्रेड, बिस्कुट, आइसक्रीम, अरबी, भिंडी, कटहल आदि का सेवन बहुत आवश्यक होने पर ही लें.

* रात्रि को हल्का व कम प्रोटीन वाला भोजन लें. सोने से कम से कम दो घंटे पूर्व रात्रि भोजन का सेवन करें.

* भोजन के 15.20 मिनट बाद वज्रासन करें जिससे भोजन पचने में आसानी हो.

* भोजन करते समय कम से कम बोलें. टी. वी. देखते समय खाने से बचें. भोजन शंात स्वभाव से धीरे-धीरे चबा कर करें.

* सोच - विचार करते हुए जल्दी जल्दी भोजन न लें.

* सलाद व अंकुरित दालों का सेवन भोजन से पहले करें ताकि भोजन जरूरत से ज्यादा न कर सकें. जरूरत से अधिक भोजन न खायें.

* हर प्रकार के भोजन को नियत्रांण में खाना ही उचित है.

* भोजन के तुरंत बाद व्यायाम न करें.

* कब्ज होने की अवस्था में नियमित ईसबगोल दोपहर के भोजन के पश्चात लें.

* रेशेदार भेाजन, चोकरयुक्त आटे को भोजन का अभिन्न अंग बनायें.

* मौसमी सब्जियां और फल खायें.

* भोजन के उपरान्त थोड़ा सा गुड़ चूसें. गुड़ खाने से पेट में वायु नहीं बनती.

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