अक्षय तृतीया के पर्व बड़े त्योहारों में माना जाता है. साल में एक मात्र यही दिन होता है जब बिना मुहूर्त के ही शादी की जाती है. यही वजह है कि अक्षय तृतीया को अबूझ मुहूर्त भी कहा जाता है. जानकारों की मानें तो द्वितीय विश्व युद्ध के बाद ऐसा पहली बार होगा कि इस दिन शहनाई नहीं बजेगी.

कोरोना महामारी के वैश्विक संकट काल में यह स्थिति भी लोगों को देखनी पड़ रही है. हिन्दू धर्म के मुताबिक अक्षय तृतीया को सतयुग के शुभारंभ का दिन माना जाता है. वहीं इसी दिन भगवान परशुराम का भी अवतरण हुआ था. हयग्रीव जिन्हें बुद्धि का देवता माना जाता है समुद्र मंथन के दौरान उनका भी इस दिन प्रादुर्भाव हुआ थ. यही वजह है कि इस दिन को अबूझ मुहूर्त माना जाता है. साथ ही मान्यता होती है कि इस दिन यदि शादी या कोई भी शुभ संस्कार किया गया तो उसका फल अक्षय होता है.

अक्षय तृतीया में हर साल इस दिन इतनी शादियां होती थी कि पंडितों को सांस लेने की फुरसत नहीं होती थी. शादियों के साथ ही गृह प्रवेश, मुंडन और जनेऊ संस्कार के साथ ही कई शुभकाम होते थे. उनके मुताबिक राजधानी रायपुर में ही केवल अंदाजन सौ से सवा सौ शादियां होती थीं. इस बार भी ऐसा ही होता मान सकते थे लेकिन अब कोरोना की वजह से इसे लोगों को स्थगित करना पड़ा. लोगों ने शादियां पोस्पोंड करा दी है. तारीख आगे बढ़ा दी.

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