मुद्दा. दुनिया में मचे कोरोना के कोहराम के बाद स्वच्छता से लेकर कर्तव्यों के प्रति सजगता के मामले में अब आमजन को जगानेे का प्रयास हो रहे हैं और नई-नई व्यवस्थायें भी कायम हो रही हैं. सरकार ने सार्वजनिक स्थानों पर थूकने को प्रतिबन्धित कर दिया है और बाजार में पान, गुटखों, तम्बाकू पान मसाले, धुम्रपान सामग्री आदि की उपलब्धता नहीं होने से इसके शौकीन वैसे ही तनाव में हैं, उनके लिये यह किसी सदमें से कम नहीं है. पान-गुटखों की पिचकारी व थूक से सड़कों से लेकर दीवारों को बदरंगी बनाने वालों के लिये यह कोरोना संकट किसी त्रासदी से कम नही है. एक जिम्मेदार नागरिक के कर्तव्यों से कोसो दूर रहने वाले पान-गुटखों के शौकीनों ने न केवल स्वच्छता को प्रभावित किया है, बल्कि प्रदूषण का इंतजाम भी किया है. पान-गुटखों का सेवन करने वाले इस बात को भी बखूबी जानते हैं कि वो अपनी मौत की तरफ तेजी से बढ़ रहे हैं क्योंकि ये सभी शौक कई बीमारियों का कारण हैं और मीडिया में इससे जुड़ी जागरूकता की सूचनायें नियमित रूप से आती भी हैं, बावजूद इसके वे अपनी आदतों से बाज नहीं आ रहे हैैं, यह दुर्भाग्यपूर्ण है.

तम्बाकूू के रसायनों से 28 प्रकार के कैंसर कारक रसायन होते हैं, इस बात को अधिकतर लोग जानते हैं, बावजूद इसका सेवन लगातार होता है, यह आश्चर्यजनक है. सामान्य रूप से तम्बाकू का सेवन करने वाले लोगों के बीमार होने की आशंकाएं अन्य से चार-पांच गुना ज्यादा होती हैं. इसी तरह गुटखों का सेवन करने वालो का मुंह ख्ुालना कम होता जाता हैं, दांत खराब होते व मसूड़ों के सड़ने की प्रक्रिया प्रारम्भ हो जाती है. बुढ़ापे के समय से पहले दस्तक देने की आशंकाएं भी यह बढ़ाते हैं. हालात यह है कि देश में कैंसर से मरने वालो में से एक तिहाई ओरल कैंसर के कारण मरते हैं, यह भयावाह सच्चाई है.

व्यक्ति में मुंह में बनने वाली लार शरीर का स्त्राव है, तो मुंह की आर्द्रता बनाये रखती है. दरअसल व्यक्ति के पाचन की क्रिया मुंह की लार से ही प्रारम्भ हो जाती है. लार में पाये जाने वाले ऐन्जाईम मुंह मे ही स्टार्च को शक्कर में बदल देते है, तो लार में पाये जाने वाले रसायन दांत, मसूड़ों व मुंह की सुरक्षा का काम भी करते हैं. दिनभर में एक व्यक्ति के मुंह में डेढ लीटर तक लार बन जाती है और भोजन के दौरान इसका स्त्राव अधिक होता है.

लार व्यक्ति के लिये उपयोगी है, इसे थूक थूक कर नष्ट करना उपयुक्त नहीं है. लार थूक के माध्यम से कोरोना संक्रमण का भी माध्यम बनता जा रहा है, अतः ऐसी आदतों पर नियंत्रण सभी के हित में है. तम्बाकू के उत्पादों पर नियंत्रण के लिये कोरोना ने एक अवसर दिया है. यह व्यसन मुक्ति अभियान का सर्वश्रेष्ठ समय बन सकता है. समाज में इस संदेश का संचार आवश्यक है कि हम सार्वजनिक स्थलों पर थूके नहीं ताकि स्वच्छता के साथ सभी की सुरक्षा को सुनिश्चित किया जा सके.

वैसे कोरोना संकटकाल किसी भी स्थिति में मानव समाज के लिये ठीक नहीं माना जा सकता है, परन्तु इस समस्या ने कुछ मामलों में हालात सुधारने का जो मौका दिया है उसका सही उपयोग हो तो सभ्य मानव समाज के हित में ही होगा, लेकिन टीका या उपचार मिलने के बाद हालात जस-के-तस रहते हैं तो इससे बड़ी त्रासदी नहीं हो सकती है.

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