व्यूज. दुनिया कोरोना के कहर से जूझ रही है और इससे बचाव का रास्ता हर तरीके से ढूंढा जा रहा है. कोरोना के इलाज और बचाव के विकल्पों के बीच राहतकारी व्यवस्थाओं को तलाशने की प्रक्रिया जारी है. कोरोना मरीजोे की मौत न्यूमेनीया व रेस्पीरेटरी फैल्युअर से हो रही है.

इसके गंभीर संक्रमितों को वेन्टीलेटर पर रखकर जीवन रक्षक दवाइयां देते हुए प्रतिरोध क्षमता बढ़ाकर उन्हें बचाने की कोशिश हो रही है. इण्डियन कौंसिल आफ मेडीकल रिसर्च और फूड एण्ड ड्रग ऐडमिनिस्ट्रेशन अमेरीका ने भारतीय उत्पाद हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन को अनुंसधानों के आधार पर कोरोना के संक्रमितों के उपचार में प्रभावी दवाई मानते हुए इसके उपयोग को हरी झण्डी दी है.

मलेरिया के गंभीर रोग से सतत पीड़ित भारत देश में क्लोरोक्वीन को सरकार व विश्व स्वास्थ्य संगठन ने आवश्यक दवाई की श्रेणी में सूचीबद्ध कर रखा है अतः यह सस्ती व प्रभावी दवाई के रूप में सर्वसुलभ है. हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन, क्लोरोक्वीन का ही बदला हुआ रसायनिक रूप है, जिसका साईड इफेक्ट ढाई गुना कम है और एन्टी रूमेटिक दवाई के रूप में सर्व व्यापक है. कोरोना संक्रमण में हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन के उपयोग के बारे में चर्चा से पहले गठिया की बात करते हैं.

गठिया रोग स्व-प्रतिरोघक रोग यानि आटो इम्यून डिसिजेस कहलाई है. इसमें शरीर के मोलीक्यूल अपने ही शरीर के अवयवों को बाहरी समझते हैं, जिससे शरीर में इनकी आपस की लड़ाई होती है और इन्फ्लेमेशन व सूजन आदि प्रभाव सामने आते हैं. जोड़ो का गठिया रोग, चमडी के लूप्स व स्क्लेरोडर्म के रूप में प्रदर्शित होता है, जो रोगी को जीवनभर के लिये अपाहिज बना देता है.

इस गठिया के इलाज में हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन काम में ली जाती है. हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन एक तरह की डीएमआरडी यानि डिसीज मोडीफाईड ऐन्टी स्मोलिक ड्रग कहलाती है, जो हमारे इम्यून सिस्टम पर कार्य करती है तथा गठिया रोगों की दिशा बदल देती है. हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन बहुत ही टाॅक्सीक दवाई है, जिसे चिकित्सक की देखरेख में लेते हुए नियमित रूप से ब्लड काउन्ट करवाया जाना चाहिये ताकि इसके हर तरह के प्रभाव की जानकारी रहे.

इस दवाई का उपयोग घबराहट, उल्टी, दस्त, आंखो में तकलीफ, ह्दय धड़कन में उतार-चढ़ाव जैसे साईड इफैक्ट भी दे सकता है, अतः निगरानी आवश्यक है. कोरोना महामारी में इसका उपयोग एन्टी रेट्रो वायरल व ऐजिथ्रोमाईसिन के साथ करने पर सुखद परिणाम आ रहे हैं अतः इसका उपयोग विकट परिस्थितियों में करने की अनुशंसा हुई है, लिहाजा कोरोना संक्रमण को खत्म करने के लिए यह दवाई संजीवनी बनकर सामने आयी है.

भारतीय उत्पाद हाईड्रोक्सी क्लोरोक्वीन के लिये कई देश मदद की उम्मीद में हैं. हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन के मुख्य उत्पादकों में एक भारत के चिकित्सक वर्षों से इसका उपयोग करते आ रहे हैं और उन्हें इस पर भरोसा भी है. विश्व के औषधी उत्पादन व्यवसाय में भारत के इस उत्पाद को मिले महत्व के लिये हमारे दवाई उत्पादक बधाई के पात्र हैं!

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