हजारों सालों से अंडमान-निकोबार के द्वीप पर रहने वाली जारवा जनजाति के आदिवासियों को कोरोना वायरस से बचाने के लिए यहां की सरकार ने विशेष इंतजाम किए हैं. हालांकि, यह सब लोग कोरोना वायरस के प्रकोप से एकदम अंजान है. लेकिन इसके बावजूद भी जहां यह लोग रहते हैं, उस द्वीप के पास से एक रोड जाती है. जिसे अब सरकार ने आवाजाही के लिए बंद कर दिया है.

अंडमान-निकोबार आइलैंड में सरकार ने कड़े कदम उठाए हैं ताकि जारवा जनजाति के आदिवासियों तक किसी भी सूरत में कोरोना वायरस का संक्रमण ना पहुंच पाए. यहां के ट्राइबल वेलफेयर डिपार्टमेंट ने भी कई काम किए हैं. इसके तहत यहां से गुजरने वाली एक सड़क को 16 मार्च से बंद कर ही दिया गया था.

इसके अलावा इस पूरे इलाके में जारवा प्रोटेक्शन पोस्ट बना दी गई हैं. ताकि कोई भी टूरिस्ट या स्थानीय नागरिक जारवा लोगों के करीब तक भी ना पहुंच सके. समुद्र के रास्ते पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है. ताकि कोई मछुवारा अपने आप या किसी टूरिस्ट को वहां तक ना ले जाए. इसके लिए निगरानी शुरू कर दी गई है.

हालांकि अंडमान-निकोबार में 13 मार्च से ही एयरपोर्ट पर स्क्रीनिंग करनी शुरू कर दी गई थी. लेकिन यहां 24 मार्च को निजामुद्दीन मरकज से आए दो लोगों को तेज बुखार के कारण अलग किया गया था. उस जत्थे में कुल 9 लोग थे. बाद में वह कोरोना पॉजिटिव निकले थे. इन सभी का इलाज किया जा रहा है. ताकि कोरोना वायरस का संक्रमण यहां अपनी जड़ ना जमा लें.

कहा जाता है कि जारवा जनजाति के लोग तो सामान्य आदमी के संपर्क में आने से भी संक्रमित हो सकते हैं. इसलिए उनमें कोरोना का संक्रमण तो बहुत ही बड़ा संकट पैदा कर सकता है. दुनियाभर में अपनी तरह की यह आदिवासियों की एक अलग ही जनजाति यहां अकेली बची है.

ऐसे में इन्हें बचाना बेहद जरूरी है. यहीं सेंटीनल द्वीप पर रहने वाले आदिवासियों के बारे में कहा जाता है कि वह तो पिछले करीब 30 हजार सालों से किसी के संपर्क में आए ही नहीं हैं.

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