डाॅ. आरके मालोत. देश और दुनिया के सामने उत्पन्न हुई कोरोना वायरस की महामारी ने लोगों को न केवल अपने स्वास्थ्य के प्रति सचेत किया है, बल्कि स्वच्छता, व्यक्तिगत फिटनेस, प्रतिरोध क्षमता जैसे मुद्दों पर भी गंभीरता से विचार करने प्रेरित किया है. बार-बार हाथ धोने की बात करें तो यह बड़ा आश्चर्यजनक तथ्य है कि हाथ साफ रखे जायें तो प्रतिवर्ष डायरीया से होने वाली मोतों का आकंडा पचास फीसदी कम हो सकता है, हाथ की स्वच्छता से श्वसन सम्बन्धित रोग सर्दी, जुकाम आदि के मामलों में तीस प्रतिशत कमी आ सकती है. सीधी बात करें तो हाथों की सफाई जीवाणुओं व वायरस से बचने का सबसे प्रभावी तरीका है.

कोरोना वायरस जिसका अब तक कोई इलाज नहीं मिल पाया है, उससे बचाव का सबसे प्रभावी तरीका हाथों की स्वच्छता ही है ताकि नाक, मुंह, आंख आदि को अनजाने में हाथ लगने से संक्रमण न फैले. हमारे हाथ दिनभर में कई स्थानों पर लग जाते जाते हैं, कई सतहों को छूते हैं, कई लोगों के सम्पर्क में आने पर मिलते हैं. ऐसी स्थिति में कहीं से कोई जीवाणु या वायरस वाली सतह से मिलते हैं तो संवाहक बनकर आगे बढ़ जाते हैं. हमारे हाथ की सफाई नहीं होने तक इनका सफर जारी रहता है और हाथ की सतह जहां सम्पर्क में आती है, वहां इनका दायरा बढ़ता जाता है. हाथ घोने से 99 फीसदी तक कीटाणुओं को समाप्त किया जा सकता है.

शोधकर्ताओं की माने तो हम अपने नाक, मुंह, आंख को एक घण्टे में लगभग 16 बार छूते हैं और ये तीनों अंग हमारे शरीर की आंतरिक व्यवस्था से सीधे सम्पर्क में हैं जिससे किसी भी तरह का संक्रमण हमारे शरीर में प्रवेश कर सकता है. एक तरह से ये स्थान हमारे शरीर का प्रवेश द्वार हैं जहां हमारे हाथ सर्वाधिकार सुरक्षित ढंग से पहुंच सकते हैं.

वर्ष 2008 से विश्व स्तर पर हैण्ड वाशिंग डे मनाया जा रहा है, ताकि दुनिया के सभी लोगों को स्वच्छता व हाथ धोने के प्रति जागरूक किया जा सके. पूर्व में इस रोज 70 देशो के एक करोड बीस लाख बच्चों ने एक साथ हाथ धोने का रिकार्ड बनाया था. हाथ धोने के मामले में हमारी सजगता महत्वपूर्ण है, यदि बीस सैकेण्ड तक साबुन से सही ढंग से हाथ धोये जायें तो कीटाणुओं को हटाया जा सकता है. आमतौर पर लोग हाथों को पानी से घोकर स्वयं को सुरक्षित मान लेते हैं, यह गंभीर भूल है जो कई बीमारियों को आमंत्रित कर सकती है.

राष्ट्रपिता माहात्मा गांधी ने एक बार कहा था कि स्वच्छता, स्वतंत्रता से अधिक महत्वपूर्ण है. इस मूल बात पर भी ध्यान देने की आावश्यकता है. हमारे देश में स्वच्छ जल की कमी है और खुले हुए जल क्षेत्रों में वाहन से लेकर पशुओं की गंदगी तक शामिल होती है ऐसी हालत में यह हमारे स्वास्थ्य के लिये नुक्सानदेह साबित हो सकता है. बिना साबुन के हाथ धोने से प्रदूषित जल के साथ आये कीटाणु भी शरीर में प्रवेश कर जाते हैं, यह फिको ओरल कोन्टामिनेशन कहलाता है. यह व्यक्तिगत व जन स्वास्थ्य दोनों मामलों में नुक्सानदेह है, जिसके बारे में सतर्कता आवश्यक है.

अनुसंधान से पता चला है कि कोरोना वायरस संक्रमित के मल में भी मौजूद रहते हैं. यह संभावना खतरनाक है. फिको ओरल कोन्टामिनेशन को सिक्स एफ- फूड, फिंगर, फोमाईट्स, फ्लाईस, फ्लूड्स, फिल्ड के मामले में नियंत्रण कर रोका जा सकता है, क्योंकि इन छः घटकों के आधार पर प्रदूषण का चक्र बनता है. हमारे हाथ संक्रमण व विसंक्रमण का सबसे प्रमुख माध्यम हैं इन्हें अच्छे ढंग से धोया जाये तो विभिन्न तरह की समस्याओं से राहत संभव है. फिलहाल हमारे लिये कोरोना वायरस सबसे बडी चुनौती है और इसके पीछे हाथ धोकर पडे तो कोई कारण नही हैं हमारी सुरक्षा प्रभावित हो!

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