सत्यजीत रे ने भारतीय सिनेमा का परिचय दुनिया से और दुनिया के सम्मानों का परिचय भारत से कराया. बंगाली फिल्म निर्देशक सत्यजीत रे चलता-फिरता फिल्म संस्थान कहे जाते थे.

उन्होंने भारतीय सिनेमा का परिचय दुनिया से और दुनिया भर के सम्मानों का परिचय भारत से करवाया. देश ने उन्हें 1985 में दादा साहब फालके सम्मान दिया तो विश्व ने उन्हें 1992 में ऑस्कर लेडी से नवाजा. फिल्मों में उनके योगदान के लिए सन 1992 में उन्हें देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न भी दिया गया.

दुनिया भर में उनकी लोकप्रियता कुछ ऐसी थी कि इससे पहले 1987 में ही वे फ्रांस के सबसे बड़े सम्मान लीज़न ऑफ ऑनर से सम्मानित किए जा चुके थे. कोलकाता में 2 मई 1921 को सत्यजीत रे का जन्म हुआ था. सत्यजीत रे के बारे में ये बहुत कम ही लोग जानते है कि उन्होंने अपने करियर की शुरुआत महज एक चित्रकार के तौर पर की थी.

बाद में फ्रांसिसी फिल्म निर्देशक जॉ रन्वार से मिलने और लंदन में इतालवी फिल्म लाद्री दी बिसिक्लेत फिल्म बाइसिकल चोर देखने के बाद फिल्म निर्देशन की ओर उनका रुझान हुआ. इन्होंने सिनेमा जगत पर अपनी एक ऐसी छवी छोड़ी जिसे हर पीढ़ी याद करेंगी.

सत्यजीत रे अपनी फिल्मों में वास्तविकता को बहुत ही बारीकी से दर्शाते थे. फिल्म ’पाथेर पांचाली’ डॉक्यूमेंट्री के लिए 1991 में ऑस्कर पुरस्कार से नवाज़ा गया. इतना ही नहीं फिल्म ‘पाथेर पांचाली’ (1955 ) और अपू त्रयी को दुनिया भर के फिल्म फेस्टिवल्स में सैकड़ों अवॉर्ड मिले हैं.

सत्यजीत रे मशहूर फिल्मकार के साथ साथ बेहतरीन विज्ञापन निर्माता, ग्राफिक डिज़ाइनर, चित्रकार और लेखक भी थे.36 वर्षों में पाथेर पांचाली ( 1955 ) से लेकर आगंतुक (1991 ) तक सत्यजीत रे ने 36 फिल्में बनाई हैं. इनमें कुछ वृत्तचित्र हैं, फीचर फिल्में और लघु फिल्में शामिल हैं.

सत्यजीत को फिल्मों के लिए कई राष्ट्रीय के साथ साथ 11 अन्तरराष्ट्रीय पुरस्कारों से नवाजा गया. भारतीय सिनेमा को अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने का श्रेय सत्यजीत रे को ही जाता है. फिल्मी जगत के सबसे बेहतरीन निर्देशकों में शुमार रे को 1992 में लाइफटाइम अचीवमेंट की श्रेणी में ऑस्कर से सम्मानित किया गया था.

छह साल की उम्र में पिता के इंतक़ाल के बाद सत्यजीत रे के दादाजी की प्रिंटिंग प्रेस बंद हो चुकी थी. पैसों की तंगी के कारण उन्हे पैतृक गांव छोड़कर मामा के घर बालगंज जाना पड़ा. इसी के साथ इनकी पत्रिका ‘संदेश’ भी गुमनामी की दराज़ों में दफ़न हो गई. इस पत्रिका को उन्होंने एक बार फिर से 1960 में शुरु किया. इस पत्रिका ने सफलता के नए आयाम रचे.

कवि सुभाष मुखर्जी को इसका संयुक्त एडिटर नियुक्त किया गया. रे ने इसमें ख़ूब लिखा, ख़ासकर बच्चों के लिए लिखा. जासूसी कहानियां, साइंस फिक्शन, लघु कथाओं ने इतनी प्रसिद्धी पाई कि यह पत्रिका हर घर में पढ़ी जाने लगी. अपने जीवन में संघर्ष का सामना करने वाले सत्यजीत रे ने कभी हार मानना नहीं सखा था.

अपने कड़े परिश्रम के साथ वे हमेशा ही नई ऊंचाईयों को छूते चलें गए. और 23 अप्रैल 1992 को उन्होंने इस दुनिया को हमेशा हमेशा के लिए अलविदा कह दिया. रे की फिल्मों ने कुल मिलाकर 32 राष्ट्रीय पुरस्कार जीते थे. दुनिया भर में कान्स, बाफ्टा, बोडिल, वेनिस जैसे फिल्म समारोहों में उन्हें मिले सम्मानों का आंकड़ा करीब पचास तक पहुंचता है.

उनकी फिल्म पाथेर पांचाली को ही अकेले 11 अंतर्राष्ट्रीय सम्मान मिले. इनमें कांस में उसे मिले बेस्ट ह्यूमेन डॉक्युमेंट का खिताब भी शामिल है. उनकी फिल्म अपराजितो ने वेनिस फिल्म फेस्टिवल में गोल्डन लायन पुरस्कार जीता और सेन फ्रांसिस्को फिल्म फेस्टिवल में रे को अकीरा कुरोसावा लाइफटाइम अचीवमेंट सम्मान दिया गया.

सत्यजीत रे ने निर्देशन के साथ पटकथा, संवाद और गीत लिखने के लिए भी करीब 20 अवार्ड जीते. फिल्मों से हटकर रे, पेंटिंग और कैलिग्राफी में भी रुचि लेते थे. उन्होंने कई टाइपफेस भी बनाए थे. इनमें से रे रोमन और रे बिजार नाम के उनके दो अंग्रेजी टाइपफेसों ने 1971 में एक अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता भी जीती.

उनके सम्मानों का सिलसिला कुछ यूं था कि डीयू, बीएचयू सहित देश के सात विश्वविद्यालयों ने उन्हें डॉक्टरेट की उपाधियां दी थीं. 1978 में ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी ने भी उन्हें मानद डॉक्टरेट से सम्मानित किया. यह सम्मान उनसे पहले केवल चार्ली चैप्लिन को ही दिया गया था. जिंदगी की फिल्म में सत्यजीत रे फिल्मकार, लेखक, संपादक, चित्रकार बनते रहे और अपनी हर भूमिका में हमेशा सर्वश्रेष्ठ रहे.

आज का दिन : ज्योतिष की नज़र में


जानिए कैसा रहेगा आपका भविष्य


खबर : चर्चा में


************************************************************************************




Disclaimer : इस न्यूज़ पोर्टल को बेहतर बनाने में सहायता करें और किसी खबर या अंश मे कोई गलती हो या सूचना / तथ्य में कोई कमी हो अथवा कोई कॉपीराइट आपत्ति हो तो वह info@palpalindia.com पर सूचित करें। साथ ही साथ पूरी जानकारी तथ्य के साथ दें। जिससे आलेख को सही किया जा सके या हटाया जा सके ।