नई दिल्ली. कोरोना वायरस के खिलाफ लडऩे के लिए भारत ने 21 दिन के लॉकडाउन की घोषणा की है. बार्कलेज रिपोर्ट का कहना है कि इससे देश को 12,000 करोड़ अमेरिकी डॉलर (लगभग 9 लाख करोड़) का नुकसान हो सकता है. देश की आर्थिक स्थिति को पटरी पर लाने के लिए जल्द पैकेज की घोषणा करने की आवश्यकता है.

भारतीय रिजर्व बैंक की 3 अप्रैल को होने वाली समीक्षा बैठक में ब्याज दरें घटाने पर फैसला हो सकता है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में कोरोना वायरस संक्रमण के प्रसार को रोकने के लिए देश के तीन सप्ताह के पूर्ण लॉकडाउन की घोषणा की है. इस बीच, मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अगले 48 घंटे में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आर्थिक पैकेज का ऐलान कर सकती है. हालांकि, ये कितना बड़ा होगा और इसका क्या स्वरूप होगा इसके बारे में अभी तक कोई जानकारी नहीं मिली है.

बार्कलेज की रिपोर्ट के मुताबिक, 3 हफ्ते यानी 21 दिन के लॉकडाउन की वजह से भारत को 9000 करोड़ डॉलर (करीब 6.75 लाख करोड़ रुपये) का नुकसान होगा, लेकिन महाराष्ट्र से जैसे कई बड़े राज्य कई दिन पहले से ही बंद हो गए हैं.

इसलिए ये नुकसान और ज्यादा होने की आशंका जताई जा रही है. इस रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार राहत पैकेज देती है तो ऐसे में वित्तीय घाटा बढ़कर 5 फीसदी के पार पहुंच सकता है.

लॉकडाउन एक ऐसा आपातकालीन प्रोटोकॉल है जिसके तहत शहर या प्रदेश में रहने वाले लोगों को क्षेत्र छोड़कर जाने या घर से बाहर निकलने पर पूरी तरह से रोक लगाता है. यह आपदा या महामारी के वक्त सरकारी तौर पर लागू की जाती है. जिस इलाके में लॉकडाउन किया गया है उस क्षेत्र के लोगों को घरों से बाहर निकलने की अनुमति नहीं होती है.

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