मुंबई. शेयर बाजार मंगलवार को 1414 अंकों की बढ़त के साथ खुले. सेंसेक्स 5.58त्न या 1450.71 अंक और निफ्टी 4.91 प्रतिशत या 373.35 पॉइंट ऊपर खुला. शुरुआती 45 मिनट के बाद बाजार में हल्का उतार-चढ़ाव का दौर शुरू हो गया. 35 मिनट के बाद बाजार फिर ऊपर चढऩे लगा, जो बाजार के बंद होने तक बढ़त में रहा.

सेंसेक्स ने 692.79 अंक या 2.67 फीसदी की बढ़त के साथ 26,674.03 पर और निफ्टी ने 190.80 अंक या 2.51 फीसदी की बढ़त के साथ 7,801.05 पर कारोबार खत्म किया. इससे पहले, सोमवार को कारोबार के अंत में सेंसेक्स 3934.72 अंक गिरकर 25,981.24 पर और निफ्टी 1,135.20 पॉइंट नीचे 7,610.25 पर बंद हुआ था. यह सेंसेक्स के इतिहास की सबसे बड़ी गिरावट है.

बाजार में बढ़त के प्रमुख कारण

अर्थव्यवस्था को सहारा के देने के लिए अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने असीमित बॉन्ड खरीद कार्यक्रम की घोषणा की. विशेषज्ञों के मुताबिक, अमेरिका में मांग बढऩे की संभावना से एशिया में निवेशकों की भावनाओं में सुधार हुआ. वॉल स्ट्रीट और अन्य शेयर बाजार के लिए यह व्यापक पैकेज अभूतपूर्व है और यह संदेश है कि आर्थिक संकट को कम करने के लिए दुनिया का सबसे बड़ा केंद्रीय बैंक जो बन पड़ेगा, करेगा. अन्य केंद्रीय बैंकों से ऋण और वित्तीय बाजारों के तनाव को कम करने के लिए ऐसे साहसिक उपायों की उम्मीद है.

वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने कोरोनावायरस फैलने के कारण होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए सरकार की तैयारियों की जानकारी दी. इनकम टैक्स, जीएसटी फाइलिंग जैसी कई बातों में राहत दी गई. पैन-आधार कार्ड को भी लिंक करने की तारीख बढ़ाई गई. छोटे उद्योगों को राहत के लिए कई घोषणाएं की गई. विवाद से विश्वास स्कीम को भी बढ़ाकर 30 जून तक किया गया. 

ऐतिहासिक उच्च स्तर पर पहुंचा इंडिया वालैटिलिटी इंडेक्स

इस बीच बाजार में जोखिम के स्तर को बताने वाला सूचकांक इंडिया वोलैटिलिटी इंडेक्स इंडिया वीआईएक्स सोमवार को अपने जीवनकाल के उच्चतम स्तर तक पहुंच गया. इसने 73.36 का ऊपरी स्तर छूआ, जो इसके जीवनकाल का उच्चतम स्तर है. हालांकि शाम करीब चार बजे यह 7 फीसदी से ज्यादा उछलकर 71.98 पर था. गुरुवार 19 मार्च से यह 70 के स्तर से ऊपर चल रहा है. इंडिया वीआईएक्स का आंकड़ा यह बताता है कि बाजार में अगले 30 दिनों में कितने फीसदी की अस्थिरता दिख सकती है. यह इंडेक्स निफ्टी इंडेक्स ऑप्शन प्राइस पर आधाारित होता है. इंडिया वीआईएक्स इससे पहले 19 मई 2009 को 56.07 के ऊपरी स्तर पर पहुंचा था. यह वह समय था जब पूरी दुनिया वैश्विक आर्थिक संकट से गुजर रही थी और इसके कारण पूरी दुनिया के बाजारों में भारी गिरावट दर्ज की गई थी.

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