भोपाल. एमपी में जारी सियासी घमासान व ऑपरेशन लोटस की अपार सफलता के बाद शिवराज सिंह चौहान के चौथी बार मुख्यमंत्री बनने की राह लगभग तय हो चुकी है.  कमल नाथ के इस्तीफे के बाद भाजपा विधायक दल की बैठक होगी और सब कुछ ठीक रहा तो श्री चौहान विधायक दल के नेता चुने जाएंगे. इस तरह पिछले विधानसभा चुनावों तक रिकॉर्ड 13 साल 17 दिन मुख्यमंत्री पद पर रहने वाले शिवराद एक बार फिर प्रदेश के मुखिया बनने जा रहे हैं. 

यह रही है उनकी राजनीतिक यात्रा

किसान परिवार में जन्म- 5 मार्च 1959 को मध्यप्रदेश के बुधनी में किसान परिवार में जन्में शिवराज ने 1977 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ गए थे और लंबे समय तक अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के लिए काम किया.

- 4 बार लोकसभा के लिए चुने गए और संसद की कई समितियों के सदस्य भी रहे. 2000 से 2003 तक भारतीय जनता युवा मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और भाजपा के राष्ट्रीय सचिव भी रहे.

पहला चुनाव- 1990 में पहला चुनाव लड़ा था. पहली बार राज्य विधानसभा के लिए 1990 में सीहोर जिले की बुधनी विधानसभा सीट से चुने गए थे. बाद में अगले साल हुए विदिशा संसदीय चुनाव क्षेत्र से लोकसभा के लिए पहली बार चुने गए. इसके बाद 5 बार विदिशा संसदीय क्षेत्र से सांसद चुने गए.

साधना सिंह से शादी- 1992 में शिवराज की शादी साधना सिंह से हुई था. उनके दो बेटे, कार्तिकेय सिंह चौहान और कुणाल सिंह चौहान हैं.

दिग्विजय सिंह से हारे- 2003 में भाजपा ने दिग्विजय सिंह के 10 साल के शासन के खिलाफ पूरे दम से चुनाव लड़ा. पार्टी ने जबरदस्त जीत दर्ज की, लेकिन तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के खिलाफ राघौगढ़ से चुनाव लडऩे वाले शिवराज सिंह हार गए. हालांकि बाद में बुधनी विधानसभा के लिए उपचुनाव लड़कर जीता.

पहली बार बने सीएम- 30 नवंबर, 2005 को स्शिवराज सिंह चौहान पहली बार सीएम बने. इसके बाद 2018 में हुए चुनावों तक मुख्यमंत्री बने रहे.

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