नई दिल्ली. बाबा रामदेव की पतंजलि आयुर्वेद को माल एवं सेवाकर (जीएसटी) दरों में कटौती का फायदा ग्राहकों को नहीं पहुंचाने का दोषी पाया गया है. नेशनल एंटी प्रॉफिटिंग अथॉरिटी (एनएए) ने पतंजलि आयुर्वेद को दोषी ठहराते हुए 75.08 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है. वर्ष 2017 में जीएसटी काउंसिल ने कई उत्पादों पर जीएसटी की दरें 28 से घटाकर 18 फीसदी कर दी थी. इसके बावजूद पतंजलि ने कीमतें तो नहीं घटाई, बल्कि वाशिंग पाउडर का बेसिक प्राइस भी बढ़ा दिया.

नेशनल एंटी प्रॉफिटिंग अथॉरिटी ने बताया कि पतंजलि आयुर्वेद ने अपने लोकप्रिय डिटर्जेंट पाउडर का बिक्री मूल्य तो नहीं घटाया, बल्कि सामानों के बेस प्राइस में इजाफा किया.

इस तरह से पतंजलि आयुर्वेद ने 74.08 करोड़ रुपये का मुनाफा बनाया. एंटी प्रॉफिटिंग कमिटी ने कंपनी को इतनी रकम 18 फीसदी ब्याज के साथ केंद्र और राज्यों के कंज्यूमर वेलफेयर फंड्स में 3 महीने के भीतर जमा कराने को कहा है. उल्लेखनीय है कि पतंजलि आयुर्वेद ऐसी इकलौती कंपनी नहीं है, जिस पर इस तरह मुनाफाखोरी रोधी प्रावधानों के तहत कार्रवाई हुई है.

हाल ही में डव साबुन बनाने वाली कंपनी हिंदुस्तान युनिलिवर लिमिटेड (एचयूएल) और मैगी नूडल्स बनाने वाली कंपनी नेस्ले इंडिया के खिलाफ भी इस तरह की कार्रवाई हो चुकी है.

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