मुंबई. देश के चौथे सबसे बड़े निजी बैंक, यस बैंक के संकट में आने के बाद आर्थिक मोर्चे की एक और डरावनी तस्वीर शुक्रवार 6 मार्च को सामने आई. महाराष्ट्र विधानसभा में पेश राज्य के आर्थिक सर्वे से खुलासा हुआ है कि नोटबंदी की घोषणा वाले साल में अकेले महाराष्ट्र में कम से कम 44,000 लोगों की नौकरी चली गई थी.

गौरतलब है कि पीएम मोदी ने 8 नवंबर 2016 को देशभर में 500 और 1000 रुपए के नोटों पर पाबंदी लगा दी थी. महाराष्ट्र के आर्थिक सर्वे में बताया गया है कि इस दौरान राज्य में एक हजार से ज्यादा उद्योग धंधे भी बंद हो गए थे. सर्वे के मुताबिक वित्त वर्ष 2016-17 में जब पीएम मोदी ने नोटबंदी का ऐलान किया था, उस साल रोजगार सूचकांकों ने 44,000 रोजगार कम होने की सूचना दी थी. इसी साल उद्योग-धंधों की संख्या भी 27,010 रह गई थी, जबकि इसके पिछले साल 2015-16 में इनकी संख्या 28,210 थी. उद्योग धंधों की संख्या में 2017-18 में और गिरावट आई और यह 26,393 पर पहुंच गई.

इसी तरह रोजगार में भी 2016-17 में गिरावट के बाद 2017-18 में थोड़ी वृद्धि हुई थी. सर्वे में बताया गया है कि 206-17 में कर्मचारियों की संख्या 19.70 लाख से गिरकर 10.26 लाख हो गई थी. ध्यान रहे कि नोटबंदी के बाद किए एक विश्लेषण में अजीम प्रेमजी विश्वविद्यालय के शोध में सामने आया था कि 2016 और 2018 के बीच कम से कम 50 लाख लोगों की नौकरियां नोटबंदी के कारण गई हैं.

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