नई दिल्ली. भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा यस बैंक पर पाबंदी लगाए जाने के बाद बैंक के परेशान जमाकर्ताओं को एटीएम से धन निकालने में मुश्किलों का सामना करना पड़ा. लंबी कतारों में खड़े जमाकर्ताओं को कहीं मशीनें बंद पड़ी मिलीं तो कहीं एटीएम में धन नहीं था.

इस बीच नकदी संकट से जूझ रहे Yes Bank में निवेश के लिए एसबीआई बोर्ड ने सैद्धांतिक स्वीकृति दे दी है. यस बैंक के ग्राहकों की मुसीबत और बढ़ गई जब उन्हें इंटरनेट बैंकिंग प्रणाली के माध्यम से धन स्थानांतरित करने में भी असुविधा झेलनी पड़ी.

बता दें कि वित्तीय संकट से जूझ रहे यस बैंक पर भारतीय रिजर्व बैंक ने पैसा निकालने की ऊपरी सीमा निर्धारित कर दी है. इसके तहत खाताधारक अब यस बैंक से 50 हजार रुपये से ज्यादा रकम नहीं निकाल सकेंगे. निकासी की यह सीमा तीन अप्रैल, 2020 तक लागू रहेगी. इसके अलावा केंद्रीय बैंक ने यस बैंक के निदेशक मंडल के अधिकारों पर रोक लगाते हुए एक महीने के लिए एसबीआई के पूर्व डीएमडी और सीएफओ प्रशांत कुमार की प्रशासक के रूप में नियुक्ति भी कर दी है.

आरबीआई ने कहा कि यस बैंक लगातार एनपीए की समस्या से जूझ रहा है, जिसके चलते यह फैसला लेना पड़ा है. आरबीआई द्वारा जारी दिशानिर्देशों के मुताबिक, यस बैंक में बचत, चालू या किसी अन्य जमा खाते से एक महीने के दौरान 50 हजार रुपये से ज्यादा धनराशि नहीं निकाली जा सकेगी. इसके अलावा यदि किसी के बैंक में एक से ज्यादा खाते हैं तो भी 50 हजार से ज्यादा धनराशि नहीं निकाली जा सकेगी. सरकार ने भारतीय स्टेट बैंक और अन्य वित्तीय संस्थानों को पूंजी के संकट से जूझ रहे यस बैंक को खरीदने की दिशा में आगे बढ़ने के लिए मंजूरी दे दी है. उच्च स्तरीय सूत्रों ने यह जानकारी देते हुए कहा कि इस संबंध में जल्द ही कोई घोषणा की जा सकती है.

देश के सबसे बड़े ऋणदाता संस्थान एसबीआई की बृहस्पतिवार को मुंबई में बैठक भी हुई, लेकिन यह पता नहीं चल सका कि क्या बैठक के एजेंडे में यस बैंक के अधिग्रहण का मुद्दा था या नहीं. इसके अलावा ऐसी भी खबरें हैं कि सरकार ने अपने स्वामित्व वाली बीमा कंपनी एलआईसी से एसबीआई के साथ मिलकर हिस्सेदारी खरीदने के लिए भी कहा है. एलआईसी के पास पहले से यस बैंक की 8 फीसदी हिस्सेदारी है.

कुछ हफ्ते पहले यस बैंक को उबारने से जुड़ी अटकलों पर एसबीआई चेयरमैन रजनीश कुमार ने कहा था, ‘उसे नाकाम नहीं होने दिया जाएगा.’ अगर यह सौदा होता है तो कई साल में ऐसा पहली बार होगा कि एक सरकारी कंपनी, निजी क्षेत्र के किसी यूनिवर्सल बैंक को उबारेगी.

वहीं यह आईडीबीआई के बाद दूसरा यूनिवर्सल बैंक होगा, जिसे संकट से उबारने में एलआईसी अहम भूमिका निभाएगा.एसबीआई द्वारा अधिग्रहण की चर्चाओं के बीच बीएसई पर यस बैंक का शेयर 27 फीसदी की मजबूती के साथ 36.85 के स्तर पर पहुंच गया.

28.05 रुपये का 52 हफ्ते का निचला स्तर छूने के बाद शेयर में अचानक तेजी देखने को मिली और सत्र के दौरान उसने 29.35 फीसदी मजबूती के साथ 37.90 रुपये का उच्चतम स्तर भी छूआ. शेयर में इस मजबूती के सहारे यह बैंक का बाजार पूंजीकरण 1,926.49 करोड़ रुपये बढ़कर 9,398.49 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गई.

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