नजरिया. महाराष्ट्र जैसे राजनीतिक हालातों से निपटने में बीजेपी नेतृत्व सक्षम है, लेकिन महाराष्ट्र में थोड़ी अलग तस्वीर है? एक तो सामने बीजेपी के समान विचारधारावाली पार्टी शिवसेना है और बीजेपी सियासी जोड़तोड़ इतनी बार कर चुकी है कि उसका सियासी सैद्धान्तिक आधार ही खिसकने लगा है!

यदि बीजेपी इस बार शिवसेना के साथ सियासी तोड़फोड़ करती है तो देश के दूसरे सहयोगी दलों को भी अच्छा संदेश नहीं जाएगा, लिहाजा इस बार बीजेपी बड़ी उलझन में है?

महाराष्ट्र में सरकार गठन को लेकर रस्साकशी जारी है. इस बीच खबर है कि बीजेपी नेताओं ने गुरुवार को राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी से मुलाकात की! यह बात अलग है कि इस मुलाकात के दौरान बीजेपी ने सरकार बनाने का दावा पेश नहीं किया? उन्हें यह जरूर बताया कि सरकार बनने में देरी क्यों हो रही है?

उधर, शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने भी गुरुवार को अपने पार्टी विधायकों के साथ बैठक की, जिसमें उन्होंने दोहराया कि.... जो पहले तय हुआ था, हमें वह चाहिए!

हां! कम होते समय और सियासी तोड़फोड़ की आशंका के मद्देनजर शिवसेना सतर्क जरूर हो गई है?

इस बीच शिवसेना नेता संजय राउत ने फिर कहा कि- हमारे पास अपना मुख्यमंत्री बनाने के लिए बहुमत है. हमें यह दिखाने की जरूरत नहीं है. विधानसभा में हम बहुमत साबित करेंगे. हमारे पास विकल्प हैं. विकल्पों के बिना हम नहीं बोलते.

राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी से बीजेपी नेताओं की मुलाकात के संदर्भ में शिवसेना नेता संजय राउत ने निशाना साधा कि- हमारा रुख नहीं बदला है. शिवसेना के हित में उद्धव ठाकरे फैसला लेंगे. सीएम तो शिवसेना का ही होगा. उन्होंने कहा कि राज्यपाल के सामने सरकार बनाने का दावा किए बगैर खाली हाथ क्यों लौट आए? बहुमत सिर्फ बीजेपी-शिवसेना के गठबंधन को नहीं मिला है, बल्कि गठबंधन की शर्तों को भी मिला है. गठबंधन ऐसे नहीं चलता है!

राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी से मुलाकात के बाद बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल का कहना था कि जनता ने बीजेपी-शिवसेना को बहुमत दिया है. हमने राज्यपाल को सरकार बनने की देरी के बारे में बताया. अब फैसला केंद्रीय नेतृत्व को लेना होगा.

शिवसेना विधायकों के साथ बैठक के बाद उद्धव ठाकरे का कहना था कि- हमने कुछ ज्यादा नहीं मांगा है. जो पहले तय हुआ था, हमें वह चाहिए. बीजेपी नेताओं से मेरी कोई भी सीधी बात नहीं हुई है. हमारे पास सभी विकल्प हैं, लेकिन हम नहीं चाहते हैं कि उन पर हम विचार करें!

बहरहाल, समय लगातार कम होता जा रहा है और सियासी उलझने बढ़ती जा रही है, इसलिए कोई नतीजा नहीं निकला तो महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लग सकता है!

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